नक्सल हमला : कवर्धा में पहली दफ़ा आमने सामने हुए नक्सली

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कवर्धा। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का गृह जिला कवर्धा भी अब नक्सली आतंक के निशाने पर है। जिले को नक्सल प्रभावित घोषित किया जा चुका है। यहां के जंगल में नक्सलियों के होने की पुष्टि तो कई बार हुई, लेकिन वे कभी सामने नहीं आए। गुरुवार को पहली बार पुलिस की यहां नक्सलियों से मुठभेड़ हुई है। दोपहर में हुई मुठभेड़ में एक नक्सली को पुलिस ने मारा भी है। मुठभेड़ धूमाछापर गांव से करीब 20 किमी दूर जंगल में हुई है। पुलिस को सूचना मिली थी कि नक्सली के विस्तार प्लाटून धूमाछापर गांव में ग्रामीणों के साथ बैठक करने वाले हैं।
इसको लेकर सुबह 10 बजे डीआरजी, एसटीसफ और सीएएफ की चार टीम सर्चिंग के लिए निकली। हर टीम में 36 से 40 जवानों को शामिल किया गया। टीम करीब तीन घंटे बाद तरेगांव से पश्चिम दिशा में 20 किमी पहुंची। वहां पुलिस और नक्सलियों के बीच गोलीबारी हुई। इसमें सर्चिंग टीम ने एक नक्सली को मार गिराया। माना जा रहा है कि मारा गया नक्सली विस्तार प्लाटून-2 और 3 का सदस्य और इनामी नक्सली हो सकता है। गौरतलैब है कि गृह मंत्रालय ने अप्रैल 2018 में ही कवर्धा को नक्सल प्रभावित इलाका घोषित किया है। इस सूची से पहले छत्तीसगढ़ के 16 जिले नक्सल प्रभावित थे। अप्रैल में जारी सूची में जशपुर, सूरजपुर और कोरिया को नक्सल प्रभावित सूची से हटाया गया है। फिलहाल प्रदेश के 14 जिले नक्सल प्रभावित हैं।

सालों से सक्रीय है नक्सली
कबीरधाम जिले में पिछले तीन साल से नक्सल गतिविधियां जारी हैं। इस दौरान ऐसी कई घटनाएं सामने आई, जिसमें नक्सलियों की घुसपैठ की पुष्टि हुई। 12 सिंतबर 2015 को रेंगाखार क्षेत्र के सोनवाही और समनापुर के जंगल में सर्चिंग के दौरान 10 किलो बारूद, डेटोनेटर, बैट्री और लोहे के छर्रे, सल्फर पाउडर समेत कई सामग्रियां बरामद की गई थीं। 15 अगस्त 2017 को समनापुर जंगल में ही बंजारी मंदिर के पास जमीन में दबी दो देसी बंदूक, 200 ग्राम विस्फोटक और डेटोनेटर मिला था। 6 मई 2018 को बोड़ला थाना क्षेत्र के बैजलपुर व कामाडबरी में नक्सलियों के फेंके पर्चे मिले थे। इनमें कार्ल मार्क्स की जयंति मनाने की बात लिखी गई थी।

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