Meena Kumari : आख़िर क्यों कहा जाता था मीना कुमारी को ट्रेज़डी क्वीन

मीना कुमारी कही जाती थी इंडस्ट्री में दुखियारी महिला

नई दिल्ली। बॉलीवुड में ट्रेजडी क्वीन के नाम से मशहूर मीना कुमारी की 85वीं जयंती आज पूरी दुनिया मना रही है। 1 अगस्त 1932 को जन्मी मीना कुमारी को फ़िल्मी दुनिया में आने से पहले महज़बीन बेग़म के नाम से जाना जाता था। वैसे तो मीना का फिल्म सफ़र 30 सालो का रहा, मगर इन तीस सालों में मीना कुमारी ने 90 से ज़्यादा फिल्मों में अपने काम का जलवा बिखेरा। मीना को इंडस्ट्री में दुखियारी महिला भी कहने वाले कई थे। अक्सर वे दुखियारी महिला के किरदार में अपने दर्शकों तक पहुंची। जहाँ उनसे उनके दर्शन उनके किरदारों की वज़ह से भावनात्मक तरीके से जुड़ाव रहा। उनके करीबी बताते है कि उनकी असल जिंदगी में काफी संघर्ष रहा है। पैसों की कमी से लेकर उनकी पर्सनल लाईफ में भी काफी उतार चढ़ाव रहा है।


1962 में उनकी फिल्म ‘साहिब बीवी और गुलाम’ के ‘छोटी बहू’ का किरदार मीना की असल ज़िंदगी में भी उतरता चला गया। अपने गम और तकलीफ़ भुलाने के लिए मीना कुमारी ने भी शराब का सहारा लिया। शादी में दरार और पिता से बिगड़े रिश्ते ने मीना को श्रम में डुबो दिया था। आख़िर ये शराब ही उनकी मौत की वजह बनी और 31 मार्च 1972 को लीवर सिरोसिस के कारण मीना ने सभी को अलविदा कह दिया।

7 साल की उम्र में की पहली फ़िल्म
तक़रीबन 7 साल की उम्र में मीना कुमारी की पहली फिल्म ‘फरजंद-ए-वतन’ नाम से 1939 में आई थी। ये फ़िल्म उन्होंने शौकिया नहीं बल्कि अपने हालातों की वजह से की थी। समय बीतता गया और उनकी जवानी के दौर की पहली फिल्म ‘वीर घटोत्कच’ आई। इस फ़िल्म में उन्होंने मीना कुमारी के नाम का ही किदार निभाया था जो काफी चर्चित भी रहा इसी के बाद उनका नाम मीना कुमारी पुकारा जाने लगा।

बैजू बावरे से चमकी थी क़िस्मत
1952 में रिलीज हुई फिल्म ‘बैजू बावरा’ से मीना कुमारी को हिरोइन के रूप में पहचान मिली। इसके बाद 1953 में ‘परिणीता’, 1955 में ‘आजाद’, 1956 में ‘एक ही रास्ता’, 1957 में ‘मिस मैरी’, 1957 में ‘शारदा’, 1960 में ‘कोहिनूर’ और 1960 में ‘दिल अपना और प्रीत पराई’ से मीना के सितारे बुलंदियों की तरफ बढ़ते चले गए। 1962 में रिलीज हुई फिल्म ‘साहेब बीवी और गुलाम’ में छोटी बहू की भूमिका आज भी लोगो के ज़हन में है। मीना की अदाकारी का जादू कुछ यु चला कि फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस के अवॉर्ड के लिए मीणा की ही तीन फिल्म ‘आरती’, ‘मैं चुप रहूंगी’ और ‘साहेब बीवी और गुलाम’ नॉमिनेट हुए। आखिर कार मीना को उनके जीवंत कर देने वाले छोटी बहू के किरदार के लिए बेस्ट एक्ट्रेस चुना गया।

फ़्लॉप रही शादी शुदा जिंदगी
मीना कुमारी की शादी शुदा ज़िन्दगी फ़्लॉप रही। मीना प्यार करतीं थीं कमाल अमरोही से, तभी तो उन्होंने शादीशुदा अमरोही की दूसरी बीवी बनना भी कबूल कर लिया था। हर मुलाकात में फूलों की सौगात देने वाले कमाल अमरोही भी विवाह के पश्चात मीना को एक खुशहाल जीवन ना दे सके। विवाह से जुड़े मीना के सुनहरे सपने टूटने लगे। बॉलीवुड में मीना-धर्मेन्द्र के रोमांस की खबरें हवा में बम्बई से दिल्ली तक पहुंचने लगी थीं। जब दिल्ली में वे तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन से एक कार्यक्रम में मिलीं तो राष्ट्रपति ने पहला सवाल पूछ लिया कि तुम्हारा बॉयफ्रेंड धर्मेन्द्र कैसा है? इसी तरह फिल्मकार मेहबूब खान ने महाराष्ट्र के गर्वनर से कमाल अमरोही का परिचय यह कहकर दिया कि ये प्रसिद्ध स्टार मीना कुमारी के पति हैं।

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