कोरिया : खाडा बांध फूटने के बाद, यह है कार्रवाई की कहानी

अब तरतोरा जलाशय की खामियां इस तरह की बताई भरतपुर के प्रभारी एसडीओ ने

चंद्रकांत पारगीर, बैकुंठपुर। सरगुजा संभाग के कोरिया जिले के खाडा बांध के फूटने के बाद राज्य सरकार ने जिले के कार्यपालन यंत्री विनोद शंकर साहू और एसडीओ एमएल सोनी को निलंबित कर दिया। इधर 25 साल से फूटे बांध का काम देख रहे इंजीनियर आरके गुप्ता पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं किये जाने को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है| ग्रामीणों का कहना है कि बांध के रिसने की जानकारी हमने इंजीनियर को ही पहले दी थी।
बता दें कि कोरिया जिले में खाडा बांध के फूटने के बाद राजनीति तेज हो गयी थी| संसदीय सचिव अंबिका सिंहदेव ने अधिकारियों पर कार्यवाही को लेकर बांध के फूटने के बाद सुबह से ही मुख्यमंत्री, जल संसाधन मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, क्षेत्रिय सांसद से बात कर कार्रवाई की मांग की थी| फटाफट फसल के बर्बादी का आंकलन कर राजधानी में बैठे अफसरों को जानकारी दी गई। जिसके बाद विभागीय कार्रवाई न करवा कर सचिव स्तर पर कार्रवाई करने का फैसला हुआ।

क्या है कार्रवाई की कहानी
दरअसल, बीते कई महीनों से जल संसाधन विभाग में बड़े अफसर अपने किसी भी अधीनस्थ अधिकारियों पर कार्रवाई करने से टालमटोल करते आ रहे थे| कई बार संसदीय सचिव श्रीमती सिंहदेव स्वयं जाकर विभाग के ईएनसी समेत बडे अफसरों से मिली भी थी, परन्तु कोई बात नहीं बनी थी|

इधर चर्चा है कि यदि सरगुजा के सीई एसके रवि कोरिया कार्यपालन यंत्री पर कोई कार्रवाई करते तो उनके समय में बनी गुढरू जलाशय योजना के खिलाफ कार्रवाई यहां शुरू हो जाती| एक दूसरे से लिंकअप होने के कारण विभागीय अधिकारी एक दूसरे के खिलाफ कोई कार्रवाई करने से बचते रहते है।

यही कारण था कि संसदीय सचिव अंबिका सिंहदेव ने जल संसाधन मंत्री से सचिव स्तर पर कार्यवाही का दबाव बनाया और बताया कि इस बांध में सबसे बड़ी लापरवाही गेटों का खराब होना और विभागीय लापरवाही है। जिसके बाद उन्होने बांध के फूटने के दिन 23 सितंबर को कलेक्टर से लेकर मंत्री तक पत्र व्यवहार कर कार्यवाही की मांग कर डाली, और मात्र कुछ घंटे के बाद 24 सितंबर की रात को कार्यपालन यंत्री और एसडीओ के खिलाफ शासन ने कार्यवाही कर निलंबित कर दिया।

महाराजपुर की जांच की मांग
जलसंसाधन विभाग के मनेन्द्रगढ तहसील के दुबारा बनाई जा रही महाराजपुर जलाशय योजना में बांध के पास की लोकल कर खराब क्वालिटी की मिट्टी का नाला क्लोजर में उपयोग किया गया। वाटरिंग कम्पेक्शन बिलकुल नहीं किया गया। बांध के अंदर साईड में पीचिंग नहीं की गई। जिसके कारण बांध की मिट्टी बैठ गई । बांध मे कई जगह बड़ी-बड़ी दरातें आ गई। पूरे बरसात में कार्यपालन यंत्री और एसडीओ बांध को बचाने के लिए सीमेंट की खाली बोरी में मिट्टी भरभर कर बांध को फूटने से बचाने की कोशिश करते रहे। अब यह बांध किसी काम का नहीं रहा, बांध से अब पानी छोड़ा जा रहा है, यदि पानी रोका गया तो तय है कि बांध फूटने से नहीं बच सकता है।

बडकाघाघी व्यपवर्तन में भी गोलमाल
वन विभाग से नहर निर्माण कार्य कराने की अनुमति नहीं प्राप्त होने के बावजूद भी कार्यपालन अभियंता द्वारा वर्षो पूर्व करोडों के आरसीसी पाईप की खरीदी कर ली गई और उन्हें जंगल में रख लिया गया। जितने करोड़ के पाईप की खरीदे गए बीते तीन वर्षो में उसका शासन को कई लाख रू ब्याज प्राप्त होता। इस खरीदी में बड़े स्तर पर कमीशन खोरी की बात भी सामने आई, परन्तु किसी भी जनप्रतिनिधि या नेता ने मामले की जांच को लेकर मुख्यमंत्री से लेकर जल संसाधन मंत्री तक शिकायत तक नहीं की |

तरतोरा को लेकर जागे प्रभारी एसडीओ
खाडा बांध के फूटने के दो दिन बाद भरतपुर के प्रभारी एसडीओ उपयंत्री आरके भदोरिया सतर्क हुए | तरतोरा जलाशय की खामियां विभाग को बताई| दरअसल देश टीवी ने तरतोरा जलाशय के फूट जाने को लेकर आशंका व्यक्त की थी। https://deshtv.in/chhattisgarh/sarguja-divison/koria/korea-khada-reservoir-erupts-several-acres-of-crop-wasted-threat-to-silfotwa/प्रभारी एसडीओ ने अधिकारियों को जो 4 बिन्दू बताए है, उसमे पहला यह है कि बांध के दाई तरफ नहर (स्लूस) पाइप के उपर पानी आ रहा है, मिट्टी काट कर बांध का पानी स्लूस गेट के उपर से आ रहा है जो गंभीर विषय है। पाइप के अंदर से पानी जाना चाहिए परन्तु उसके उपर से मिट्टी का काट कर पानी का बाहर आना ये बता रहा है कि बांध कभी भी फूट सकता है।

दूसरा बिन्दू है कि बांध में जगह जगह अधिक गहरे रेनकट है, अर्थात बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी। मिट्टी के कटाव हो चुके है। तीसरा बिन्दू बांध अंडर सेक्शन है खराब मिट्टी का उपयोग करने एवं बाटरिंग और कॉम्पेक्शन नही होने के कारण बांध की मिट्टी पूरी तरह बैठ चुकी है। बांध से पानी ओवरफ्लो हो रहा है| चौथा बिन्दू यह कि स्पीज ड्रेन कार्य नहीं कर रही है। इससे बांध को खतरा है यह बांध कभी भी टूट सकता है। इस बांध का भी गेट काम नहीं कर रहा है। पांचवे बिन्दू में बताया गया है कि बेस्ट बीयर से पानी निकल रहा है।

गौरतलब है कि तत्कालीन कार्यपालन यंत्री यूएस राम और एसडीओ एसएल गुप्ता के कार्यकाल के समय उक्त स्लूस के पास की मिट्टी बह गई थी, उस समय दोनों अधिकारियों ने बिना काम्पेक्शन किए मिट्टी भरवा दी थी| बाद में इन दोनों के घरों पर एसीबी के छापे पड़े थे|

गर्मी में मरम्मत क्यों नहीं
भरतपुर के प्रभारी एसडीओ उपयंत्री आरके भदोरिया तरतोरा जलाशय को लेकर अप्रैल और मई में खराब पड़े गेट को दुरूस्त करवाने की कोई पहल नहीं की| गर्मी में जब पानी कम होता है तो गेटों की मरम्मत का काम आसान होता है|

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