असफल डार्ट फायरिंग से आक्रमक हो रहे बारनवापारा के हाथी


रायपुर। छत्तीसगढ़ के बारनवापारा अभ्यारण में हाथियों को बेहोश कर रेडियो कालर लगाने में लगी टीम द्वारा अन्धाधुन डार्ट दागे जाने से बारनवापारा के वन हाथी आक्रमक हो रहे है। इस संबंध में रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने आज दुबारा पत्र लिखकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) को अगाह किया कि वन हाथियों को बेहोश करने के असफल प्रयासों के चलते अगर बारनवापारा के वन हाथी आक्रमक होकर कोई जन-धन हानि करते है, तो सिर्फ और सिर्फ वन विभाग जवाबदार होगा ना कि वन हाथियों का वह परिवार जो कि शांतिपूर्वक बारनवापारा में कई वर्षों से निवास कर रहा है। यह हाथी परिवार महानदी पार करके दो-तीन बार रायपुर तरफ आ चुका है तब भी वह हाथी परिवार शांतिपूर्वक रहा और कोई जन हानि नहीं की।

पत्र में लिखा है कि जानकारी के अनुसार अभी तक लगभग 42 डार्ट हाथियों पर दागे गए हैं जिनमें से 7 – 8 हाथियों के शरीर में डार्ट लगे हुए हैं जबकि वे हाथी बेहोश भी नहीं हुए. डार्ट लगने से दर्द के कारण और बेहोशी की दवा के आफ्टर इफेक्ट के कारण हाथी बहुत बेचैन हो जाते हैं. मानव द्वारा डार्ट दाग कर लगातार शांति भंग करने और उनके जीवन में हस्तक्षेप से उनका आक्रमक होना स्वाभाविक है. वन हाथी मानव से हरदम सम्मानजनक दूरी बनाए रखना चाहता है.

सिंघवी ने बताया कि मिली जानकारी के अनुसार आज सुबह लगभग 9.30 बजे सिरपुर के पास के ग्राम सुकुलबाय की एक ग्रामीण महिला को हाथी द्वारा पटक दिया गया चोट लगने उपरांत उसे अस्पताल पहुंचाया गया। जनपद के एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि ने सिंघवी को बताया कि वन विभाग के अधिकारी ने उस जनप्रतिनिधि को बताया है कि जिस वन हाथी ने महिला को पकड़कर गिराया, उस हाथी पर Dart चलाया गया था और वह आक्रमक हो गया था।

ग्रामीणों के अनुसार हाथी आक्रमक हो रहे हैं, वन विभाग ना तो ग्रामीणों को विश्वास में ले रहा है, ना ही उनसे सहयोग, वन विभाग ग्रामीणों को हाथियों के मूवमेंट की जानकारी भी नहीं देता।

सिंघवी ने मांग की है कि रेडियो कलर लगाने के लिए असफल बेहोशी करने के प्रयत्नों की जिम्मेदारी लेते हुए वन विभाग तत्काल ही रेडियों कालरिंग लगाने हेतु वन हाथियों को बेहोश करने के प्रयत्न तब तक बन्द करे, जबतक सफलतापूर्वक वन हाथियों को बेहोश कर रेडियो कालर लगाना सुनिश्चित नहीं हो जाता अन्यथा वन हाथियों का परिवार और आक्रमक हो जावेगा, तब अगर कोई जन-धन हानि होती है ग्रामीणों में रोष बढ़ता है तो सिर्फ और सिर्फ वन विभाग जिम्मेदार होगा ना कि उक्त वन हाथियों का परिवार।

सिंघवी ने 4 दिन पूर्व 29 मई को भी पत्र लिखकर वन विभाग के प्रमुख को अगाह किया था कि वन हाथियों के परिवार का लगातार पीछा करने, बन्दूकों द्वारा Dart दागने से शरीर में Dart लगने से होने वाली तकलीफ से एवं अन्य प्रकार से वन हाथी परिवार के परेशान करने से, शांतिपूर्वक रह रहे वन हाथियों के परिवार में बैचेनी बढ़ रही है, वे बदहवास भाग रहे हैं, जिससे उनमें अशांति फैलने की तथा उस अशांतिवश अप्रिय घटना के होने की पूर्ण संभावना बनी रहेगी। वन हाथियों को बेहोश करने की प्रक्रिया के तहत अगर वन हाथियों का परिवार आक्रमक हो जाता है तथा कोई जन हानि या अन्य हानि करता है तो वन विभाग जिम्मेदार होगा।