स्मृतियों में “केयूर भूषण…”नम आँखों से दी गई विदाई

रायपुर। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और पूर्व रायपुर सांसद केयूर भूषण का आज राजधानी के महादेवघाट में अंतिम संस्कार किया गया। इसी के साथ ही महान गाधीवादी चिंतक केयूर भूषण पंचतत्व में विलीन हो गए। केयूर भूषण के पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेट कर उनके निवास से मुक्तिधाम लाया गया। उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। भूषण की अंतिम यात्रा में मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह, मंत्री राजेश मूणत, कांग्रेस विधायक सत्यनारायण शर्मा समेत प्रदेश के सभी पार्टियों के नेता मौजूद रहे। उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। कल उनका निधन लंबी बीमारी के बाद हो गया था। बता दें कि केयूर भूषण 90 साल के थे. उनका जन्म 1 मार्च 1928 को ग्राम जांता जिला बेमेतरा में हुआ था। उनके पिता मथुरा प्रसाद मिश्र सोशल ऐक्टिविस्ट थे। उनकी प्राथमिक शिक्षा ग्राम दाढ़ी के स्कूल में हुई, उन्होंने 5वीं कक्षा की पढ़ाई बेमेतरा में की और आगे की पढ़ाई के लिए रायपुर आए। यहां उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आव्हान पर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ 1942 के असहयोग आंदोलन में हिस्सा लिया और गिरफ्तार हुए। उस समय वे रायपुर केन्द्रीय जेल में सबसे कम उम्र के राजनीतिक बंदी थे। उन्होंने स्कूली शिक्षा को छोड़कर घर पर ही हिन्दी, अंग्रेजी और छत्तीसगढ़ी भाषाओं का अध्ययन किया। आजादी के बाद सन 80-82 के दशक में पंजाब में आतंकवाद के दौर में शांति स्थापना के लिए केयूर भूषण ने सर्वोदयी नेताओं के साथ वहां के गांवों की पैदल यात्रा की। उन्होंने पूरा जीवन गांधीवादी तरीके से बेहद सादगी से बिताया। वे दो बार रायपुर से सांसद भी रहे।

गांधी भवन नहीं केयूर भवन होगा नाम
मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने कहा कि केयूर भूषण की याद को सहेजने के लिए उनकी स्मृति में कुछ न कुछ जरूर बनाया जाएगा। उनके गांधीवादी विचारधारा को सहेजने की लिए उनके विचारों पर अमल किया जाएगा। इसके बाद सीएम ने ऐलान किया कि राजधानी के गांधी भवन को केयूर भूषण के नाम पर रखा जाएगा। इस क्षति की भरपाई कर पाना मुश्किल है। वे आदिवासियों के हित में लगातार काम करते रहे। उनकी प्रेरणा हमें भी सिख देती है।