तो इसलिए ऑक्सी रिडिंग ज़ोन में नहीं होगी बिजली गुल…


रायपुर। जिला प्रसाशन की निगरानी में बन रहे ऑक्सी राइडिंग ज़ोन बिजली गुल नहीं होगी। आउटडोर रीडिंग परिसर में छात्र 24 घण्टे पढ़ाई और ई-लाइब्रेरी में कम्प्यूटर और वाई-फाई चलाने का इंतज़ाम किया है। यहां पढ़ाई के लिए चैाबीस घंटे सुविधा मुहैय्या कराने के उद्देश्य से स्काडा ऑनलाईन सिस्टम से सप्लाई होगी। अपनी तरह की यूनिक सप्लाई सिस्टम से यहाँ चौबीस घंटे में कभी भी लाईट चले जाने का कोई तनाव नहीं रहेगा। स्काडा सिस्टम के चल रहे कामकाजों का कलेक्टर ओपी चौधरी ने भी निरक्षण किया और कामकाज का जायज़ा लिया। कलेक्टर चौधरी ने बताया कि नालंदा परिसर का कार्य अंतिम चरणों में है, जिसे अगले 15-20 दिनों में पूरा कर लिया जाएगा।
गौरतलब है कि ’नालंदा परिसर: ऑक्सी रीडिंग जोन’ का निर्माण छह एकड़ में 15 करोड़ की लागत से किया जा रहा है। कैम्पस में युवाओं के इंडोर अध्ययन के लिए जी प्लस टू टॉवर बनाया गया है, जिसे ’यूथ टॉवर’ नाम दिया गया है। इस टॉवर के भूतल में लाइब्रेरी रहेगी, जिसके लिए डेढ़ करोड़ रूपए की लागत से 50 हजार पुस्तकों की खरीदी की गई है। पूरी तरह से वातानुकुलित इस टॉवर के भूतल, प्रथम व द्वतीय तल के साथ ही इसके छत में अध्ययन के लिए आकर्षक फर्नीचर और एलईडी लाइट की व्यवस्था की गई है। इस टॉवर की छत और कांच की दीवाल पूरी तरह से उष्मारोधी है। यहां ई-लाईब्रेरी में 125 हाइटेक कम्प्यूटर लगाए गए है, जिसमें इंटरनेट के लिए 100 एमबीपीएस स्पीड की लीजलाईन बिछायी गई है।

ये है स्काडा सिस्टम
स्काडा यानी सुपरवाईजरी कंट्रोल एण्ड डाटा एक्यूजिशन सिस्टम (SCADA) के तहत नालंदा परिसर में विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था की गई है। इसके तहत परिसर में दो यूनिट जिसमें रिंग मेन यूनिट और फिडर रिमोर्ट टर्मिनल यूनिट लगायी गई है। रिंग मेन यूनिट में विद्युत क्लोज सर्किट में रहती है। इसमें कहीं से भी विद्युत बंद होने पर वह स्टैण्ड बाय दूसरे सर्किट से आटोमेटिक चालू हो जाती है। दूसरा फिडर रिमोर्ट टमर्निल यूनिट जिसका सीधा ऑनलाईन कंट्रोल रायपुर के गुढ़ियारी में बने स्काडा के लैब से होगा। यहां से विद्युत विभाग के उच्च अधिकारी सीधे नालंदा परिसर की विद्युत आपूर्ति की मॉनिटरिंग और रिमोर्ट के जरिए ऑनलाईन नियंत्रण कर सकेंगे। नालंदा परिसर में युवा 24 घण्टे अध्ययन कर सकें इसके लिए आपात स्थिति के लिए 125 केवी का डीजल जनरेटर सेट भी लगाया गया है। इस तरह परिसर का अपना एक छोटा सा सब स्टेशन बनाया गया है ताकि यहां निर्बाध तरीके से विद्युत की आपूर्ति हो सके।