अब ई-रिक्शा खरीदी में मिलेगा 50 हज़ार का अनुदान-डॉ. रमन


रायपुर। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य में ई-रिक्शा खरीदने वालों को श्रम विभाग के माध्यम से 50 हजार रूपए का अनुदान देने की घोषणा की है। उन्होंने आज सवेरे आकाशवाणी के रायपुर केन्द्र से प्रसारित अपनी मासिक रेडियोवार्ता ’रमन के गोठ’ में श्रोताओं से कहा-मैं आपको एक और खुशखबरी देना चाहता हूं कि पहले सभी जिलों में ई-रिक्शे के लिए सब्सिडी (अनुदान) का प्रावधान नहीं था। कुछ जिलों में डीएमएफ (जिला खनिज संस्थान) से सब्सिडी देने की व्यवस्था की गई है, लेकिन अब हमने श्रम विभाग के माध्यम से कुल लागत की एक तिहाई अर्थात 50 हजार रूपए की राशि सब्सिडी के रूप में देने की व्यवस्था कर दी है, जिसका लाभ आगे मिलेगा।
डॉ. रमन सिंह ने अपने रेडियोवार्ता में राज्य में महिला सशक्तिकरण के लिए चल रही बिहान परियोजना की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा-पहले गांवों में आजीविका और स्वावलंबन के लिए स्वर्ण जयंती रोजगार योजना चलायी जाती थी, जिसमें महिलाओं और पुरूषों की समान भागीदारी होती थी। हमने इस योजना को छत्तीसगढ़ी परिवेश के रूप ’बिहान’ नाम दिया, जिसका अर्थ होता सुबह। इस योजना को पूरी तरह महिलाओं के लिए समर्पित किया गया है। इसके अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूहों का गठन किया जा रहा है। उन्होंने कहा-महिलाओं ने सारे मिथकों को तोड़ दिया है, जो उन्हें सकारात्मक काम करने से रोकते थे या अनावश्यक जंजीरों में जकड़ते थे।
डॉ. सिंह ने रेडियो श्रोताओं को बताया-अब तक प्रदेश में एक लाख 24 हजार से ज्यादा महिला स्व-सहायता समूहों का गठन राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत किया जा चुका है। छत्तीसगढ़ सरकार ने महिला स्व-सहायता समूहों को आसान और सस्ता ऋण देने का निर्णय लिया है। इसके फलस्वरूप विगत पांच वर्ष में 90 हजार स्व-सहायता समूहों को एक हजार 151 करोड़ रूपए का ऋण दिया जा चुका है। महिलाओं ने एक-दूसरे से जुड़कर अपनी एकता का परचम लहराया है और उसे स्वावलंबन, आर्थिक विकास और समाज सुधार का माध्यम भी बनाया है। अचार, बड़ी, पापड़, अगरबत्ती, बेलमेटल, बांस शिल्प आदि अनेक वस्तुएं बनाने की प्रथा हमारे प्रदेश में पहले से है। बहुत से महिला समूहों ने इन वस्तुओं को लेकर ही इतना शानदार काम किया है कि उनसे लाखों रूपए की आमदनी हो रही है। बीजापुर जिले के दौरे पर आए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जिस ई-रिक्शे में बैठे थे, वह हमारी एक बहन की उद्यमिता की मिसाल है।
इसी कड़ी में मुख्यमंत्री ने ई-रिक्शे की खरीदी के लिए श्रम विभाग के माध्यम से 50 हजार रूपए की सब्सिडी देने की भी घोषणा की और कहा कि इसका लाभ आगे मिलेगा। डॉ. सिंह ने महिला स्व-सहायता समूहों की रोजगारमूलक और आमदनीमूलक गतिविधियों की तारीफ करते हुए कहा-जैविक खेती के माध्यम से ऐसा चावल पैदा हो रहा, जिसकी मांग महानगरों में है। जो समूह पहले मोमबत्ती बनाते थे, वे अब एलईडी बल्ब बना रहे हैं। गांवों में गोबर के कंडे बनाकर आजीविका चलाने वाली महिलाओं ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर आईसक्रीम बनाना सीख लिया है। पहले जो मिट्टी के घड़े बनाते थे, वे अब कोल्ड स्टोरेज स्थापित कर स्थानीय फलों और सब्जियों को रखने की व्यवस्था कर रहे हैं। उन्होंने कहा- अम्बिकापुर में ठोस कचरा प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) में महिला समूहों की भूमिका को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है और अब वही प्रणाली पूरे प्रदेश के नगरीय निकायों में लागू की जा रही है, जो कचरा उठाते हैं, उसका प्रसंस्करण करते है और खाद बेचकर आमदनी भी हासिल करते हैं। राज्य के बीस जिलों के 44 विकासखण्डों की बहनें तो ’बैंक सखी’ बन गयी है। यह एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत स्व-सहायता समूह की सदस्य बहनों द्वारा घर-घर में बैंक की सुविधा मुहैया करायी जा रही है। डॉ. सिंह ने कहा-हमारा प्रदेश आदि शक्ति की देवियों के शक्ति केन्द्रों के लिए प्रसिद्ध रहा है, लेकिन आज उनकी प्रेरणा से गांव-गांव में महिला समूह शक्ति केन्द्र के रूप में स्थापित हो गए हैं।