संविलियन के लिए तैयार तो 1 मई को करे घोषणा करें सरकार-वीरेंद्र दुबे


रायपुर। अपनी प्रमुख मांग संविलियन और उनकी समस्याओं के निदान हेतु गठित हाईपावर कमेटी की 2 बार बढाई कार्यकाल भी अब समाप्ति की ओर होने से और मुख्य सचिव द्वारा 1 मई को शिक्षाकर्मी संगठनों को बुलाये जाने की सूचना पर प्रदेश के समस्त शिक्षाकर्मी टकटकी लगाए बैठे थे। चूंकि शिक्षाकर्मियों के लिए 1 मई की तिथि अब तक भाग्यशाली रही है, इसलिए कल होने बैठक में बड़ी सौगात की मिलने की उम्मीद शिक्षाकर्मी लगाए बैठे हैं। लिहाज़ा शिक्षाकर्मियों की मंशा है कि सरकार कल ही उनके संविलियन की घोषणा कर दे। इधर मुख्यमंत्री से हुए शिक्षाकर्मियों की मुलाक़ात पर तंज़ कस्ते हुए वीरेंद्र दुबे ने कहा है कि हम सब तब अचंभित हो गए जब अचानक एक नवगठित संघ जो ना तो अब तक किसी आंदोलन में भाग लिया और ना ही जिसका कोई पूर्व इतिहास है, उसने मुख्यमंत्री से मुलाकात की और बाहर आकर यह ऐलान किया कि 15 जून के आसपास वो सम्मेलन करेंगे जिसमे मुख्यमंत्री जी शिरकत कर संविलियन सहित अन्य मुद्दों पर घोषणा करेंगे और उसके 15, 20 दिन बाद उसका आदेश जारी करेंगे। जबकि शासन की ओर से ऐसा कोई अधिकृत बयान अब तक नही आया है। अचानक हुए इस घटनाक्रम से शिक्षाकर्मी हतप्रभ और आक्रोशित हैं साथ ही ठगा हुआ भी महसूस कर रहे है।
दुबे ने कहा कि प्रदेश के शिक्षाकर्मी उक्त संघ की कल मुलाकात को संदेह की नजर से देख रहे हैं, क्योंकि 1 मई की बैठक को लेकर शासन के ऊपर जबरदस्त दबाव शिक्षाकर्मियों ने बना रखा है, सोशल मीडिया से लेकर आमजन तक कल होने वाले बैठक की बड़ी चर्चा है ऐसे में उक्त संघ द्वारा जून माह की बात करना सरकार के इशारे पर काम करने जैसा है। शिक्षाकर्मियों के बीच इस विषय पर कड़ी प्रतिक्रिया दी जा रही है।

घोषणा को तैयार तो कल ही करें-दुबे
वीरेंद्र दुबे ने कहा कि यदि सरकार शिक्षाकर्मियों का हित चाहती है और संविलियन की घोषणा करने वाली है तो 1 मई को ही इसकी घोषणा करे।पूरे प्रदेश की निगाहें कल की बैठक पर है।क्योंकि संविलियन 180000 शिक्षाकर्मियों की सार्वभौमिक मांग ही नही बल्कि समस्त समस्याओं व मांगो का “समग्र व स्थाई समाधान”है। संविलियन के लिये उपयुक्त अवसर और परिस्थियां आ चुकी है अतः अब किसी भी कारण को संविलियन के मार्ग में नही आने देना चाहिए।”*

संविलियन प्राथमिकता-धर्मेश शर्मा
शालेय शिक्षाकर्मी संघ के प्रांतीय महासचिव और प्रान्तीय उप संचालक मोर्चा धर्मेश शर्मा ने कहा कि- वर्तमान में संविलियन और सम्मेलन को लेकर व्यापक चर्चा है, जबकि प्रदेश के प्रत्येक शिक्षाकर्मियों के लिए संविलियन ही सर्वाधिक महत्वपूर्ण तथा प्रासंगिक है। संविलियन होने पर ही किसी सम्मेलन की प्रासंगिकता होगी, वैसे भी पूर्व में हुए सम्मेलनों की उपादेयता पर आज भी प्रश्न चिन्ह है ,इसलिए कल की बैठक निर्णायक और अंतिम होना चाहिए।”*