यहाँ तस्वीरों से सिखाई जा रही है संस्कृत लिखनें पढ़ने और बोलने की कला…


रायपुर। संस्कृत के संरक्षण व संवर्धन के लिए संस्कृत भारती की ओर से 19 से 30 मई तक महामाया मंदिर सभागार में निशुल्क आवासीय प्रशिक्षण शिविर लगाया गया है । शिविर के माध्यम से संस्कृत में वंदना- गीत, संस्कृत में अभिनय, संस्कृत में कहानी चुटकुले एवं दैनिक उपयोगी वस्तुओं के नाम एवं उसका संस्कृत में उपयोग के साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम भी संस्कृत के माध्यम से कराया जा रहा है ।आज संस्कृत में अंताक्षरी प्रतियोगिता आयोजित की गई एवं विज्ञान प्रदर्शनी लगाई गई है। संस्कृत विषय पर रिसर्च कर चुके और गोल्ड मैडलिस्ट के साथ संस्कृत के विद्वानों के द्वारा प्रदेश भर से पहुंचे लगभग 300 प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण देकर संस्कृत की जानकारी दी जा रही है । संस्कृत शिविर के बारे में जानकारी देते हुए संस्कृतभारती के प्रांत सहमंत्री डॉ. दादूभाई त्रिपाठी एवं वरिष्ठ कार्यकर्ता राजेश भगत ने बताया कि 24 घंटे की दैनिक दिनचर्या में हम जो बोलते है खाते पिते है और जो कार्य करते है उसे संस्कृत में बोलने के बारे में सिखाया जा रहा है ताकि संस्कृत लुप्तप्राय न हो जाये। प्रांतमंत्री राकेश वर्मा और वर्गप्रमुख डॉ. राजकुमार तिवारी ने बताया कि शिविर में १८ वर्ष से ऊपर के छात्र छात्राओं के साथ अन्य परिजन शामिल हुए है जो सुबह 5.00 बजे से रात्रि 10.00 बजे तक अनवरत संस्कृत सिखने के लिए भारी मेहनत कर रहे है । शिक्षण प्रमुख डॉ. लक्ष्मीकांत पण्डा एवं मीडिया प्रभारी पंडित चंद्रभूषण शुक्ला ने बताया कि आज शिविर में संस्कृत विज्ञान प्रदर्शनी लगाई गई है जिसमें संस्कृत के माध्यम से विज्ञान में हुवे अविष्कारों को जानने पहचानने में बहुत ही मदद मिल रही है। वे सारे अविष्कार जो आज हम देखते या पढ़ते हैं जैसे टीवी, टेलीफोन, विमान, नौकायन, फिजिक्स, मानव शास्त्र, रसायन शास्त्र, कृषि, गणित, पाइथागोरस प्रमेय, वेल्यू ऑफ पाई, चुम्बकीय तत्व, शरीर शास्त्र ईलाज आदि के वे सभी अविष्कार जो हम जानते हैं, इसके सूत्र संस्कृत की देन है जो हमारे वेद एवं शास्त्रों में अविष्कार के बहुत पहले ही वर्णित है। जिसे हमारे ऋषि महात्मा पाणिनि, पतंजलि, सुश्रुत, आर्यभट्ट आदि ऋषियों ने खोज कर अपने ग्रंथ में वर्णित किये जिसे बाद के वैज्ञानिकों ने शोध कर अविष्कार को सामने लाया।

लगाई गई है फोटो प्रदर्शनी
सभागार स्थित इस प्रदर्शनी को मंदिर ट्रस्ट समिति के वरिष्ठ सदस्य चंद्रशेखर दुबे, उपेन्द्र शुक्ला, कार्यकर्ता देवेंद्र शर्मा, पुजारी पंडित मनोज शुक्ला के साथ अन्य लोग भी देखकर अचंभित हो रहे हैं और विज्ञान के आविष्कार में संस्कृत के योगदान को समझने का प्रयास कर रहें है। प्रान्त प्रचार प्रमुख गोपेश तिवारी ने जानकरी देते हुए बताया की शिक्षा के साथ ईमानदारी से मेहनत करने वाला व्यक्ति ही सबसे श्रेष्ठ इंसान होता है। संस्कृत भाषा को पढ़ने का मात्र एक विषय न समझकर आवश्यकता है संस्कृत भाषा पर अमल करने की। इन्होंने ये भी कहा की भले ही आज संस्कृत को महत्व नहीं मिल रहा है पर संस्कृत में पढाई करने वाले आज कई अच्छे स्थानों पर नौकरी कर रहे है। कैरियर की दृष्टि से संस्कृत एक बहुत ही अच्छा विषय है, आज हमारे कई कार्यकर्ता अच्छे बड़े स्कूलों में शिक्षक हैं, अनेक शिक्षा स्थानों पर अच्छा वेतन प्राप्त कर रहें हैं।