उपचुनाव जीत से कांग्रेस की सीट में इजाफा,मिला हाथ को साथ

दंतेवाड़ा के चुनावी दंगल में देवती कर्मा ने मारी बाजी

दंतेवाड़ा|दंतेवाड़ा उपचुनाव में शहादत विरूद्ध शहादत की चुनावी जंग रहा।एक तरफ शहीद महेंद्र की पत्नी तो दूसरी तरफ शहीद भीमा मंडावी की पत्नी चुनावी दंगल मे थी।आखिरकार देवती कर्मा दुबारा विधायक बनने में सफल हुई। दंतेवाड़ा की सीट कांग्रेस के द्वारा जीत हासिल करने पर अब कांग्रेस विधानसभा में एक और सीट का इजाफा करते हुए 69 सीट पर पहंच गई है। दंतेवाड़ा के उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी देवती कर्मा अपने प्रतिद्वंदी भाजपा प्रत्याशी ओजस्वी मंडावी से 11 हजार 192 मतो से जीत हासिल किया है। वहीं पिछले चुनाव में भाजपा और कांग्रेस में जीत का आकड़ा काफी कम था। भाजपा के प्रत्याशी भीमा मंडावी को 2071 मतो से ही जीत मिली थी।

                                           दंतेवाड़ा उपचुनाव निवर्तमान विधायक भीमा मंडावी के नक्सलियों द्वारा हत्या किए जाने के बाद हुआ। ये सीट पहले भाजपा के पास थी, जो अब कांग्रेस के खाते मे जुड़ गई है। दंतेवाड़ा के उपचुनाव में कांग्रेंस ने शहीद कर्मा की पत्नी देवती कर्मा को मैदान मे उतारा था। तो वहीं भाजपा ने भी अपने शहीद विधायक भीमा मंडावी की पत्नी ओजस्वी मंडावी को टिकट दिया था। सबसे बड़ी बात ये है कि लोकसभा चुनाव के दौरान ही श्यामगिरी गांव के पास नक्सलियों ने भाजपा विधायक भीमा मंडावी की बारूदी विस्फोट में हत्या की थी, लेकिन उपचुनाव के नतीजे मे दिखा कि भाजपा की प्रत्याशी ओजस्वी मंडावी को इस क्षेत्र से सहानुभूति मत भी नहीं मिले,यानी क्षेत्रवासियों ने देवती कर्मा को ही इस क्षेत्र से भी विजयी बनाया।

चुनावी मैदान मे थे 9 उम्मीदवार,नोटा रहा हावी
दंतेवाड़ा के उप निर्वाचन में कुल नौ प्रत्याशियों ने अपने भाग्य को आजमाया था। हालाकि मुख्य मुकाबला तो केवल कांग्रेस और भाजपा मे ही थी। जिसे राजनीतिक गलियारों से लेकर आममतदाताओं को भी इसकी जानकारी थी। मतगणना में भी पहले ही चरण से कांग्रेस ने भाजपा से बढ़त बनाकर रखी थी। जो 20 वे राउंड तक बरकरार रही। यही वजह से कांग्रेस की प्रत्याशी देवती कर्मा को कुल 50,028 वोट पड़े। वहीं भाजपा के प्रत्याशी ओजस्वी मंडावी को 38,836 मत ही मिले थे। कांग्रेस और भाजपा की सीधी लड़ाई में देवती कर्मा ने 11,192 मतो से अपनी जीत हासिल कर ली। इसके साथ ही अन्य प्रत्याशियों में सीपीआई प्रत्याशी भीमसेन मंडावी को 7,664 मत, एनसीपी प्रत्याशी अजय नाग को 3,457 वोट,निर्दलिय प्रत्याशी सुदरू राम कुंजाम को 2,545,गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रत्याशी योगेश मरकाम को 2,119 वोट मिले। वहीं आम आदमी पार्टी से प्रत्याशी बल्लूराम भवानी को 1,533 वेाट,सुजीत कर्मा जो जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रत्याशी थे उन्हे 1,393 मत पड़े। इसके साथ ही बहुजन समाज पार्टी के हेमंत पोयाम को महज 1,252 वोट से ही संतुष्ट होना पड़ा। ऐसे में इस बार प्रदेश मे तीसरी पार्टी के रूप में उभरी जोगी कांग्रेस के दल को करारी कार का सामना करना पड़ा। डाक मत पत्र में 253 और मतगणना में सबसे बड़ी बात नोटा में पड़े वोट ने भी वोटों के समीकरण को बिगाड़ा है। नोटा में 5,779 मत पड़े है। इस तरह नोटा का मतगणना में चौथा स्थान रहा।

नक्सलवाद से दूर था उपचुनाव
दंतेवाड़ा को लालगढ़ कहना कोई अतिश्योक्ति नही होगी। ये क्षेत्र पुरी तरह से नक्सलगढ़ माना जाता है। जिसके लिए चुनाव आयोग ने उपचुनाव की घोषणा के साथ ही चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा के पुख्ता इंतेजाम किए थे, जो कारगर साबित भी हुए। यदि माना जाए तो कई सालों बाद इस बार हुए चुनाव में लाल आतंक काफुर था। हालाकि नक्सलवाद से जुड़े कई पर्चे मिले जरूर, लेकिन मतदताओं ने इसे धता बताते हुए अपने मतो का प्रयोग किया और जनतंत्र की जीत हुई।

कांग्रेस मे जीत की खुशी
शहादत विरूद्ध शहादत को लेकर एक बार कांग्रेस असमंजस मे जरूर थी,साथ ही इस चुनाव में सरकार की प्रतिष्ठा भी दांव पर थी। लेकिन चुनावी रणनीति पुख्ता होने और राज्य सरकार के आठ महिनों के काम काज को दंतेवाड़ा की जनता ने हाथों हाथ लेने की बात कांग्रेस के कार्यकर्ता जीत के बाद कहते नजर आ रहे है। कांग्रेस इस जीत से काफी खुश है। दंतेवाड़ा क्षेत्र के कार्यकर्ता के साथ-साथ जीत का रंग रायपुर के कार्यकर्ताओं मे भी दिखी। जीत के रंग मे डूबे कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर और जमकर आतिशबाजी कर जश्न मनाया।

भाजपा ने सरकार पर फोड़ा ठीकरा
दंतेवाड़ा के दंगल मे भाजपा के परास्त होने के बाद विपक्ष ने अपनी भूमिका निभाते हुए हार का सारा गुस्सा राज्य सरकार पर ही उतार दिया। पूर्व मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह ने तो सिधे तौर पर इसके लिए प्रशासन पर ही सरकारी तंत्र बनने का आरोप लगाया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेंडी ने उपचुनाव के दौरान भाजपा को निर्वाचन आयोग द्वारा सभा की अनुमति नही दिए जाने को सरकारी करण कह डाला। तो वहीं नेताप्रतिपक्ष धरम लाल कौशिक ने हार को स्वीकारते हुए कहा कि कांग्रेस, सरकार मे रह कर धन-बल का भरपूर प्रयोग कीया। साथ ही पुरे प्रशासन को राज्य शासन की मुट्ठी मे होना बताया।