देश विशेष : बांट तो दिया कर्ज पर बीस बरस में भी वसूली नहीं हो सकी

अब गड़बड़झाला भी सामने आने लगा, अफसर ने कहा अब कोर्ट के जरिये वसूल करेंगे

बैकुंठपुर। कोरिया में जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास विभाग द्वरा बीते लगभग दो दशकों में बांटे गए ऋण में काफी गड़बड़झाला सामने आ रहा है। इतने वर्षों में जारी किए गए 11 करोड रू के लोन में सिर्फ 4 करोड़ की ही वसूली हो सकी है, जबकि 7 करोड़ रू बकाया है। वसूली के लिए जाने पर हितग्राही नहीं मिल रहे तो कई हितग्राहियों के नाम से ऋण लेकर उसका फायदा तो उठा रहे है परन्तु लोन भरने में आना कानी कर रहे है।
इस संबंध में जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति कोरिया के प्रभारी अधिकारी कमलेश देवांगन का कहना है कि विभाग ने योजना शुरु होने से अब तक 11 करोड़ रुपये से अधिक राशि ऋण के रूप में हितग्राही को दिया गया है जहां अब भी सात करोड़ से ऊपर की राशि अभी वसूली करने को शेष हैं, कई हितग्राही स्थल पर नहीं मिल रहे, वहीं कुछ वाहन दूसरे के द्वारा लेने का हवाला देकर ऋण राशि जमा नहीं कर रहे जिन्हें नोटिस जारी कर राशि जमा करने कहा गया है। जमा नहीं करने पर कोर्ट के माध्यम से राशि वसूली के लिये आगे कार्यवाही की जाएगी।

जानकारी के अनुसार अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग ,पिछड़ा वर्ग ,सफाई कामगार व अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों को व्यवसाय के लिए अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति द्वारा वर्ष 2000 से लेकर वर्ष 2019 तक 11 करोड़ रुपए से अधिक के लोन बांटे गए, कई अधिकारी आए और लौट गए, परन्तु ऋण वसूली के लिए किसी ने सार्थक पहल नही की। वहीं अब हालात यह है कि कई हितग्राही अपने दिए पते पर नही मिल रहे, तो कई हितग्राही ऐसे हैं जो वाहन तो लिये हैं किंतु उनके पास वाहन नहीं है उनके नाम से लिये गए वाहन किसी और के द्वारा उपयोग किया जा रहा, हद तो तब हो रही है कि कि विभाग के नोटिस देने के पश्चात भी हितग्राही कार्यालय नहीं पहुंच रहे, जिससे इस ऋण राशि को वसूलने में दिक्कत हो रही। बीते 19 साल में विभाग को करीब 7 करोड 46 लाख 82 हजार 552 रुपए की वसूली करनी है। सालों से पैसा बांटने के बाद विभाग वसूली नहीं कर पा रहा है। अब रकम की वसूली के लिए राज्य सरकार ने जिला अंत्यावसायी विभाग को पत्र भेजा है। यही कारण है कि लोन की वसूली नहीं हो पाने के कारण ही नए आवेदकों को लोन देने सरकार से फंड नहीं आ रहा है।

नहीं कर पा रहे पूरा लक्ष्य
योजना के हिसाब से बांटे गए रकम की वसूली के लिए हर साल लक्ष्य तैयार किया जाता है। प्लान के अनुसार हर साल टीम को वसूली का लक्ष्य पूरा करना होता है मगर विभाग दिया गया लक्ष्य पूरा नहीं कर पा रहा है। वर्ष 2019 में विभाग बमुश्किल से अब तक दिए गए ऋण राशि मे केवल 2 करोड़ 63 लाख 14 हजार 413 रुपए ही वसूल कर पाया है, जबकि विभाग को करीब 7 करोड़ से ऊपर रुपए का लोन वसूल करना है। इसमें करीब 1 करोड़ की राशि तो पिछले वित्तीय वर्ष 2017 से 2019 तक की ही बताई जा रही है।

अपात्रों को बांटा लोन
विभागीय सूत्रों की माने तो योजना के शुरूआत में विभाग में पदस्थ अधिकारियो ने टारगेट पूरा करने अपात्र को भी पात्र बना कर ऋण तो दे दिया किन्तु अब वे ऋण पटाने में अपने को दिवालिया घोषित कर रहे, ऐसे में यदि अधिकारी इन शासकीय राशि को सही तरीके से पात्र हितग्राही को बांटे होते तो अब अधिकारियों को इस राशि के वसूलने में एड़ी चोटी को जोर नहीं लगाना पड़ता।

लोन किसी और के नाम उपयोग कोई और कर रहा
विभागीय सूत्रों की मानें तो हितग्राही के नाम से किसी दूसरे व्यक्ति ने उसके दस्तावेज से ट्रेक्टर ,बुलेरो, पिकअप, जीप, ऑटो व अन्य वाहन निकाल लिए है, जहां हितग्राहियों के पास वर्तमान में वाहन ही नहीं है जिससे अधिकारियों को इस स्थित में राशि को वसूलने में समस्या हो रही। वहीं जिन अधिकारियों ने यह ऋण दिया वे अब जिले में भी मौजूद नहीं है जिससे अब विभाग किससे राशि वसूले इसे लेकर भी असमंजस की स्थिति है।