भूपेश का ऐलान “बाबू छोटे लाल श्रीवास्तव” के नाम पर होगा मॉडम सिल्ली बांध

महात्मा गांधी और बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव की प्रतिमा का हुआ अनावरण

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गांधी ग्राम-कंडेल से “गांधी विचार पदयात्रा” का आगाज़ किया है। सीएम भूपेश ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और कंडेल नहर सत्याग्रह के नायक बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव की मूर्ति का अनावरण कर इस यात्रा की शुरुवात की। ये पदयात्रा 10 अक्टूबर को रायपुर के गांधी मैदान में सम्पन्न होगी। इस पदयात्रा में सीएम भूपेश ने कई महत्पूर्ण घोषणाएं की है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कंडेल को कई सौगात देते हुए ऐलान किया कि कंडेल में महात्मा गांधी के नाम पर महाविद्यालय खुलेगा। इसके साथ ही कंडेल में पुल बनाने का ऐलान भी उन्होंने किया है।

                 साथ ही सीएम ने कंडेल के नजदीक गांव गोपालपुरी में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हजारी लाल जैन के नाम पर उच्चतर माध्यमिक स्कूल का नाम किए जाने की बात कही है। साथ ही भूपेश ने इस साल गर्मी की फसल के लिए किसानों को नहर से पानी दिए जाने की बात कहीं है। मॉडम सिल्ली बांध का नाम अब स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबू छोटे लाल श्रीवास्तव के नाम पर होगा।


मुख्यमंत्री ने इसके पहले कंडेल में जनसहयोग से निर्मित गौठान का लोकार्पण किया और इसके बाद गौठान से नहर सत्याग्रह उद्यान तक पैदल पहुंचे। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि महात्मा गांधी के सत्याग्रह में पदयात्राओं की बड़ी भूमिका थी। बापू अपनी पदयात्राओं के माध्यम से लोगों के बीच जागरूकता के साथ सौहार्द्र का संचार करते थे। राज्य सरकार बापू के रास्ते में चलने के लिए संकल्पित है।

छोटेलाल के परिजनों से की मुलाकात
सीएम भूपेश बघेल ने यात्रा की शुरुवात करने से पहले धमतरी के गौरव ग्राम कंडेल में कंडेल नहर सत्याग्रह के प्रणेता बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव के घर जाकर उनके परिजनों से भेंट की। मुख्यमंत्री ने बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव के पैतृक घर पर उनके तथा महात्मा गांधी के तैल चित्र पर माल्यार्पण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री बघेल ने बाबू छोटे लाल के प्रपौत्र यतीश श्रीवास्तव से भेंटकर उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि के संबंध में चर्चा की।

इसलिए चुना गया ग्राम कंडेल
सन 1920 में धमतरी के छोटे से गांव कंडेल के किसानों ने अंग्रेजी हुक़ूमत के सिंचाई कर देने के फरमान के खिलाफ जल नहर सत्याग्रह शुरू हुआ था। जिसमें खुद महात्मा गांधी भी प्रभावित होकर यहाँ के किसानों के साथ आ खड़े हुए। महत्मा गांधी 21 दिसम्बर 1920 को इस आंदोलन में शिरकत करने के लिए धमतरी पहुंचे थे। इस पदयात्रा का प्रभाव इतना तगड़ा था के आख़िरकार अंग्रेजो को झुकना पड़ा, और गांव के सभी गाय और कृषि संसाधनों को अंग्रेजों ने अपने कब्ज़े से मुक्त कर उन्हें लौटाया था।