पर्चा फेंक नक्सलियों ने मांगी माफी और दी चेतावनी…

निर्दोष ग्रामीणों की जान लेने पर मांगी माफ़ी

जगदलपुर। विस्फोट कर 3 निर्दोष ग्रामीणों की जान लेने वाले नक्सलियो ने माफी मांगी है। साथ ही स्थानीय मजदूरों और ठेकेदारों को रावघाट परियोजना में काम नहीं करने की भी चेतावनी दी है। उत्तर बस्तर डिविजनल कमेटी द्वारा जारी पर्चे में मोदी सरकार का विरोध करने की अपील की है। बता दें कि कांकेर जिले के अंतागढ़ ताड़ोकी के रावघाट परियोजना में 24 सितंबर को निर्माण कार्य में लगी डीजल टैंकर को नक्सलियों ने विस्फोट से उड़ा दिया था। जिसमें ड्राइवर, हेल्पर सहित ग्रामीण की मौत हो गई थी। जारी पर्चे में मोदी सरकार का विरोध करते कहा है कि बस्तर का अधिकांश इलाका खनिज सपंदा से भरा हुआ है। जिसे मोदी सरकार बेचकर स्थानीय लोगों को बेदखल करने की साजि़श रच रही है।

नक्सलियों ने अपने पर्चे में माफी मांगते हुए लिखा है

“प्यारे भाइयों बहनों तुमपाल में नुकसान हुए मजदूरों के परिवारों के प्रति खेद प्रकट करते है। आप सभी को क्रांतिकारी अभिनंदन करते है। हमारे पीएलजी द्वारा तुमपाल के पास की गई माइन विस्फोट में रावघाट रेल लाइन बिछाने में काम कर रही टैंकर के पीछे बैठे तीन मजदूरों की मृत्यु हुई है। स्थानीय आदिवासी जनता को रावघाट लौह अयस्क खदान खोदकर, उन्हें गांव जमीन से बेदखल करने, कॉरपोरेट कंपनी को सौंपने की केंद्र व राज्य सरकारों के जनविरोधी खदान नीति एवं रावघाट रेल परियोजना का विरोध कर रहे है। हमारे भूलवश साधारण नागरिकों का नुकसान हुआ है। इस पर खेद व्यक्त करते हुए इस घटना में मृत्यु हुए मजदूरों के परिवार से माफी मांग रहे है।”

वहीं इसी पर्चे में ही नक्सलियों ने एक और संदेश भी दिया है। जिसमें नक्सलियों ने लिखा है कि

“केंद्र के मोदी सरकार राज्य के कांग्रेस सरकार देश विदेशी के कॉरपोरेट घरानों के हितों में बस्तर में मौजूद अनमोल खनिज संपदा को सौंपने के लिए सड़क संचार रेल परियोजनाएं चला रहे है। यह सड़क संचार योजनाएं बस्तर कांकेर के मूल निवासियों के हितों के लिए नहीं है, बल्कि विकास के नाम से उनको जल जंगल जमीन को छीनकर उन्हें बेदखल करने की बड़ी साजिश है। टाटा, अंबानी, अडानी के हितों के लिए बनाई जा रहे रावघाट रेल परियोजना में कोई भी स्थानीय जनता मजदूरी का काम ना करें। स्थानीय व्यापारी ठेके का काम ना लेवे, क्योंकि डेढ़ लाख पुलिस अर्धसैनिक बलों की तैनाती कर जनता पर फासीवादी दमन समाधान योजना के तहत जगह-जगह अर्धसैनिक बलों को तैनात कर प्रतिदिन गांव पर हमले कर बेगुनाह ग्रामीणों को मुठभेड़ के नाम से हत्या करते हुए बस्तर में सड़क संचार रेल लाइन का काम कर रहे है। हम जल जंगल जमीन पर जनता के अधिकार के लिए पर्यावरण को बचाने के लिए इस रावघाट रेल लाइन का विरोध कर रहे है। इस योजना को बाधित करने के लिए सैनिक कार्रवाई को अंजाम देते है, इसलिए आम जनता से अपील करते है कि इस जनविरोधी रेल योजना सड़क निर्माण का काम में भागीदारी ना लेवे।”

यह दोनों ही पर्चे नक्सलियों के उत्तर बस्तर डिविजनल कमेटी ने जारी किए है।