रियासतकालीन जशपुर दशहरा का हुआ आग़ाज, राजपरिवार ने की पूजा

जशपुर में शुरू हुआ शारदीय नवरात्र का अनुष्ठान

जशपुर। रविवार सुबह नवरात्र की शुरूआत जिला मुख्यालय में धूमधाम से ढोल नगाड़ों के साथ की गई। सबसे पहले रियासत कालीन परंपराओं के अनुरूप यहां के छोटे तालाब से लगे वृक्ष गंगा के पास आचार्य व राजपरिवार के सदस्य काली मंदिर से अस्त्र, शस्त्र लेकर पहुंचे। जहां विशेष पूजा अर्चना के साथ कलश स्थापना के लिए जल लिया गया। इसी के साथ जशपुर दशहरा महोत्सव का भी शुभारंभ हुआ। दिन भर देवालयों में श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की।

शारदीय नवरात्र जिले में आस्था और विश्वास के साथ धूमधाम से मनाया जाता है। परंपरागत रूप से रविवार को नवरात्र के पहले दिन की पूजा अर्चना प्रारंभ हुई। सांसद रणविजय प्रताप सिंह जूदेव सहित 21 आचार्य काली मंदिर पहुंचे जहां से शस्त्र लेकर शोभा यात्रा निकाली गई। शोभायात्रा के रूप में आचार्य व श्रद्धालु वृक्ष गंगा पक्की डाड़ी से देवी मंदिर पहुंचे, जहां कलश स्थापना कर अनुष्ठान का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर पूरे अनुष्ठान में राजा रणविजय सिंह की अगुवाई में 21 आचार्यों ने विशेष पूजा अर्चना की और सैकड़ों की संख्या में पूरे दिन श्रद्धालुओं का मंदिर में ताता लगा रहा। रविवार सुबह पांच बजे ही जिला मुख्यालय के प्रमुख मंदिर देवी मंदिर एंव श्री बालाजी मंदिर के पट खुल गए और श्रद्धालुओं का दर्शन के लिए ताता लगा रहा। सुबह रियासतकाली परंपरा के अनुरूप सभी वर्ग के लोग मंदिर पहुंचे और अपनी भूमिका अदा करते हुए अनुष्ठान का शुभारंभ किया।

                                 नवरात्र के पहले दिन प्रतिपदा के अवसर पर सबसे पहले श्री बालाजी मंदिर से शस्त्र देवी मंदिर ले जाया गया। देवी मंदिर से अस्त्र, शस्त्रों को लेकर आचार्य पक्की डाड़ी पहुंचे, जहां वृक्ष गंगा के नीचे विशेष खंडा पूजा की गई। इन अस्त्र, शस्त्रों को देवी की शक्ति के रूप में पूजा जाता है और मान्यता है कि इन्ही के माध्यम से देवी मां और भगवान बालाजी जशपुर नगरी की रक्षा करते हैं। शोभा यात्रा के रूप में यहां सभी पहुंचे, और पक्की डाड़ी से जल लेकर वापस देवी मंदिर पहुंचे। यहां कलश स्थापना कर रणविजय प्रताप सिंह देव ने ब्राह्मणों का वरण किया। देवी मंदिर में पूजा अर्चना के बाद सभी आचार्य व राजपरिवार के सदस्य श्री बाला जी मंदिर पहुंचे, जहां कलश स्थापना व दीप प्रज्वलन के साथ ही पूजा अर्चना की गई। नवरात्र पर बने कार्यक्रम के अनुसार बाला जी मंदिर में सुबह व देवी मंदिर में शाम को हवन किया गया। वहीं देवी मंदिर में दुर्गा सप्तशती पाठ एंव बाला जी मंदिर में पुरूष सुक्त, श्री सुक्त, विष्णु सहस्रनांम व वेद पाठ किया जा रहा है। नवरात्र केे पहले दिन जहां दर्शन और अनुष्ठान में शामिल होने सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा वहीं श्री बाला जी मंदिर में विशेष हवन और पाठ में शामिल होने सहित प्रसाद लेने के लिए श्रद्धालुओं की कतार देखने को मिली। यहां भंडारे का भी आयोजन किया गया।

उल्लेखनीय है कि नगर में नवरात्र पूजन का कार्यक्रम सामूहिक रूप से देवी मंदिर में आयोजित किया गया है, जिसे काली मंदिर के नाम से भी लोग जानते हैं। उक्त दोनों ही मंदिरों में चल रहे नवरात्र उत्सव के अवसर पर आयोजित विशेष अनुष्ठान में यहां के पंडित, आचार्यों को दायित्व सौंपा गया है और राज परिवार सहित आम जनता की ओर से हवन, पूजन की जिम्मेदारी अलग-अलग आचार्यों को सौंपी गई है। यहां आयोजित सभी अनुष्ठानों को सपुल बनाने के लिए आचार्यों, पंडितों सहित विभिन्न् वर्गों के लोग जुटे हैं। यहां की रियासतकालीन परंपरा के अनुसार हवन पूजन में ब्राह्मणों सहित बैगा, कोटवारों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। श्रीबालाजी ट्रस्ट के प्रबंधक पं परमानन्द मिश्र ने बताया कि यहां अनुष्ठान में शामिल प्रमुख आचार्यों में पंडित विनोद कुमार मिश्र, पं रजत मिश्र, पं मनोज रमाकांत मिश्र, पं नरेश कुमार मिश्रा, पं रामपरीक्षण पंडित, पं रामजी मिश्रा, पं गौरी शंकर मिश्रा, पं हरिशंकर मिश्रा, पं रविशंकर मिश्रा, पं अनुज कुमार मिश्रा, पं दीपक मिश्रा सहित अन्य आचार्य शामिल हैं। नवरात्र के अनुष्ठान के संबंध में बताते हुए पं विनोद मिश्र ने बताया कि नियमित रूप से 21 आचार्यों के मार्गदर्शन में राज परिवार के सदस्य सहित नगर व ग्रामों से आए हजारों श्रद्वालु मां दुर्गा की उपासना वैदिक, राजसी और तांत्रिक विधि से करते हैं।