आसपास – Desh TV https://deshtv.in हिंदी न्यूज़ Mon, 21 Oct 2019 12:49:55 +0000 en-US hourly 1 अजीत जोगी के खिलाफ दर्ज़ FIR पर अब 8 नवंबर को सुनवाई… https://deshtv.in/around-the-city/hearing-on-fir-filed-against-ajit-jogi-on-november-8/ Mon, 21 Oct 2019 12:49:55 +0000 https://deshtv.in/?p=11363

बिलासपुर। हाईकोर्ट में लंबित अजीत जोगी के जाति की सुनवाई की तारीख एक बार फिर आगे बढ़ गई है। अजीत जोगी के जाति विवाद में दर्ज हुई FIR के खिलाफ उनके द्वारा एक याचिका दाखिल की गई थी जिसमें अब सुनवाई की अलगी तारीख 8 नवंबर को मुकर्रर कर दी गई है। जोगी के जाति […]

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बिलासपुर। हाईकोर्ट में लंबित अजीत जोगी के जाति की सुनवाई की तारीख एक बार फिर आगे बढ़ गई है। अजीत जोगी के जाति विवाद में दर्ज हुई FIR के खिलाफ उनके द्वारा एक याचिका दाखिल की गई थी जिसमें अब सुनवाई की अलगी तारीख 8 नवंबर को मुकर्रर कर दी गई है। जोगी के जाति प्रमाण पत्र को हाईपॉवर कमेटी के द्वारा खारिज किए जाने के बाद अजीत जोगी के खिलाफ अपराध दर्ज़ किया गया था। इस मामले में जोगी पर गिरफ़्तारी भी लगभग तय मानी जा रही थी, उससे पहले जोगी ने बिलासपुर हाईकोर्ट में अपने बचाव में याचिका दायर कर दी थी।


जाति ख़ारिज होने के बाद बिलासपुर में 29 अगस्त 2019 को जनता कांग्रेस सुप्रीमों अजीत जोगी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज़ हुई थी। ये प्राथमिकी जोगी पर छानबीन समिति की अनुशंसा पर की गई थी। जिसके बाद इस रिपोर्ट को चुनौती देते हुए जोगी ने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था। कोर्ट में जोगी की तरफ से समिति की रिपोर्ट को गलत बताते हुए उन्हें चुनौती दी है।

कलेक्टर ने दर्ज़ कराई है एफआरआई
बिलासपुर सिविल लाईंस थाने में अपराध क्रमांक 559/19 दर्ज करते हुए अजीत जोगी के विरुद्ध धारा दस (1) सामाजिक प्रास्थिती प्रमाणीकरण अधिनियम के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया गया था। अजीत जोगी के विरुद्ध यह FIR कलेक्टर की ओर से तहसीलदार ने दर्ज कराई थी।

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ajit jogi, ajit jogi par fir, jaati ka vivaad, jogi ajit, jogi ki jaati, jogi par FIR 2019-10-21 18:19:55 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2018/10/Ajit-Jogi.jpg
इंदौर के होटल में भयंकर आग, घंटों से मशक्क़त जारी https://deshtv.in/around-the-city/fierce-fire-in-the-hotel-of-indore-persecution-for-hours/ Mon, 21 Oct 2019 07:59:08 +0000 https://deshtv.in/?p=11344

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर के विजय नगर इलाके के गोल्डन होटल में भीषण आग लग गई थी। जिसकी सुचना पर दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंच गई और आग बुझाने के लगातार घाटों तक प्रयास किए। जिसके बाद जा कर रहीं आग पर अब काबू पाया जा रहा है। आग लगने के दौरान कई […]

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इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर के विजय नगर इलाके के गोल्डन होटल में भीषण आग लग गई थी। जिसकी सुचना पर दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंच गई और आग बुझाने के लगातार घाटों तक प्रयास किए। जिसके बाद जा कर रहीं आग पर अब काबू पाया जा रहा है। आग लगने के दौरान कई लोग होटल के अंदर थे जिन्हे आपातकालीन कर्मियों ने बाहर निकाला है। फ़िलहाल आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चला है। अभी तक किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।

समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा साझा की गई तस्वीरों में, होटल के पूरे फ्रंट पोर्च पर आग लगी हुई है, जिसमें चारों ओर आग की लपटें और धुएं के गुबार लगातार बाहर निकल रही थी। आग से होटल के सामने के दरवाजा जलकर रख हो चूका है वहीं एक भयंकर विस्फोट से इंटीरियर और दीगर चीज़ों में टूट फुट होने की आशंका है। इसके साथ ही, महाराष्ट्र के भिवंडी में एक गोदाम में भी आग लग गई है।

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Fierce fire in the hotel of Indore, fire in the hotel, fire in the hotel of Indore, Golden hotel, hotel golden, hotel golden indaur 2019-10-21 13:29:08 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/Golden-hotel-me-aag.jpg
CM योगी से मिला कमलेश का परिवार, और होटल में बरामद हुए कुर्ते https://deshtv.in/nation/kamleshs-family-met-cm-yogi-and-kurta-recovered-in-hotel/ Sun, 20 Oct 2019 10:21:39 +0000 https://deshtv.in/?p=11314

लखनऊ। यूपी के राजनेता रहे कमलेश तिवारी के परिवार ने आज दोपहर करीब 30 मिनट तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। बैठक के बाद समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए, पीड़ित की पत्नी किरण तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया है कि न्याय किया जाएगा। “हमने हत्यारों के लिए मृत्युदंड […]

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लखनऊ। यूपी के राजनेता रहे कमलेश तिवारी के परिवार ने आज दोपहर करीब 30 मिनट तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। बैठक के बाद समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए, पीड़ित की पत्नी किरण तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया है कि न्याय किया जाएगा। “हमने हत्यारों के लिए मृत्युदंड की मांग की। उन्होंने हमें आश्वासन दिया कि उन्हें दंडित किया जाएगा”।

कमलेश तिवारी की मां और बेटे ने उनकी मौत की जांच के खिलाफ बात की थी। कमलेश की मां ने आरोप लगाया कि उनके बेटे को एक स्थानीय राजनेता ने जमीन विवाद में उसकी हत्या कर दी। वहीं कमलेश के बेटे सत्यम तिवारी ने कहा कि परिवार ने राज्य प्रशासन पर भरोसा नहीं किया और मामले को एनआईए को सौंपने की गुज़ारिश की है। “हम चाहते हैं कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी मामले की जांच करे। हमें किसी पर भरोसा नहीं है। मेरे पिता को मार दिया गया था, हालांकि उनके पास सुरक्षा गार्ड थे। हम प्रशासन पर कैसे भरोसा कर सकते हैं? ” 45 वर्षीय कमलेश तिवारी को सशस्त्र सुरक्षा – दो गनर और एक गार्ड – एक स्थानीय पुलिस स्टेशन द्वारा प्रदान किया गया था। उनकी हत्या के दिन, बंदूकधारी अनुपस्थित थे। पुलिस ने कहा कि गार्ड ने संदिग्धों को गेट पर रोक दिया और जांच के बाद ही उन्हें अंदर जाने दिया था।

पुलिस को मिले खून से सने कुर्ते
उत्तरप्रदेश पुलिस ने इस पूरे मामले में अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार भी किया है। यूपी पुलिस की SIT ने जांच को आगे बढ़ाते हुए लखनऊ के एक होटल के कमरे में रविवार को तलाशी ली है। तलाशी के दौरान होटल के कमरे से एक लवारिस बैग और खून से सना भगवा रंग का कुर्ता भी मिला है। यूपी पुलिस ने इस कमरे से मिले सामान को कब्जे में लेकर उसकी जांच शुरू कर दी है, और फ़िलहाल कमरे सील कर दिया है।

अखिलेश ने साधा निशाना
समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपराध के अनुकूल माहौल बनाने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार की आलोचना की है। हालाँकि इस मुलाकात पर उन्होंने बहुत ज़्यादा न बोलते हुए मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि उत्तर प्रदेश में ऐसी कई घटनाएं हुई है, अन्य परिवारों में भी दुख है ऐसे में उन्हें उनसे भी मिलना चाहिए। अखिलेश ने कहा “यह राज्य की राजधानी में पीड़ितों के शोक संतप्त परिवार से मिलने के लिए एक उचित कदम है। आशा है कि मुख्यमंत्री इलाहाबाद, कन्नौज, झांसी और मेरठ भी जाएंगे, जहां राज्य के बिगड़ती कानून व्यवस्था के अन्य पीड़ितों के परिवार भी मौजूद हैं।”

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Family of #KamleshTiwari, inputs about 2 suspects, kamlesh tiwari, Lucknow police, Sheikh Ashfaq Hussain&Pathan Moinuddin Ahmed, up kamlesh tiwari 2019-10-20 15:51:39 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/kamlesh-tiwari-lakhnau.jpg
रायपुर आ रही बस का एक्सीडेंट, आठ घायल, तीन गंभीर https://deshtv.in/around-the-city/accident-of-bus-coming-to-raipur-eight-injured-three-serious/ Fri, 18 Oct 2019 08:28:54 +0000 https://deshtv.in/?p=11238

दुर्ग। दुर्ग से रायपुर जा रही एक यात्री बस भीषण सड़क हादसे का शिकार हो गई। इस हादसे में बस सवार अधिकतर यात्रियों को चोटें आई है, जिसमें आठ से ज्यादा यात्री के घायल होने की खबर है। इन आठ में से तीन यात्रियों को बेहद गंभीर चोटें आई है, जिन्हे 108 और पुलिस गाढ़ी […]

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दुर्ग। दुर्ग से रायपुर जा रही एक यात्री बस भीषण सड़क हादसे का शिकार हो गई। इस हादसे में बस सवार अधिकतर यात्रियों को चोटें आई है, जिसमें आठ से ज्यादा यात्री के घायल होने की खबर है। इन आठ में से तीन यात्रियों को बेहद गंभीर चोटें आई है, जिन्हे 108 और पुलिस गाढ़ी की मदद से इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक़ भिलाई के सुपेला क्षेत्र के कोसानाला के पास ये घटना हुई है।

                    दुर्ग से रायपुर की तरफ आ रही गरीब नवाज ट्रैवल्स बस में ये गंभीर हादसा हुआ। तकरीबन 20-25 यात्रियों को लेकर ये बस रायपुर की तरफ जा रही थी, तभी भिलाई के नज़दीक सुपेला नाला के पास एक तेज़ रफ़्तार कार को बचाने के चक्कर में बस बेक़ाबू होकर डिवाइडर में जा घुसी। इस टक्कर के बाद बस में बैठे यात्रियों में से कुल आठ चोटिल हुए जिनमे तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों का लाल बहादुर शासकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं गंभीर रूप से घायलों को सुपेला अस्पताल से दुर्ग के लिए रिफर किया गया है।

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Bus Accident, Bus Accident in bhilai, Bus Accident in supela, latest Bus Accident in bhilai 2019-10-18 13:58:54 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/BUS-accident-durghatna-0.jpg
हाईकोर्ट ने महिला आयोग सदस्यों को हटाने का आदेश किया निरस्त https://deshtv.in/around-the-city/high-court-orders-the-removal-of-women-commission-members-canceled/ Thu, 17 Oct 2019 13:09:18 +0000 https://deshtv.in/?p=11229

बिलासपुर। हाईकोर्ट ने महिला आयोग के सदस्यों को हटाने के राज्य शासन के आदेश को निरस्त कर दिया है। उन्हें हटाने का आदेश एकल पीठ ने पहले ही निरस्त कर दिया था, जिसे डबल बेंच में चुनौती दी गई थी। ज्ञात हो कि महिला आयोग की सदस्य ममता साहू, पद्मा चंद्राकर और तुलेश्वरी सिन्हा की […]

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बिलासपुर। हाईकोर्ट ने महिला आयोग के सदस्यों को हटाने के राज्य शासन के आदेश को निरस्त कर दिया है। उन्हें हटाने का आदेश एकल पीठ ने पहले ही निरस्त कर दिया था, जिसे डबल बेंच में चुनौती दी गई थी।
ज्ञात हो कि महिला आयोग की सदस्य ममता साहू, पद्मा चंद्राकर और तुलेश्वरी सिन्हा की नियुक्ति सन् 2017 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने की थी।

विधानसभा चुनाव के बाद सन् 2018 में दोनों को नई सरकार बनने के बाद पद से हटा दिया गया था। इसके विरुद्ध इन तीनों सदस्यों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने कहा था कि उनका पद संवैधानिक है और नियमानुसार उनकी नियुक्ति की गई है। राज्य सरकार को उन्हें हटाने का अधिकार नहीं है। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला दिया था, जिसके विरुद्ध राज्य सरकार ने डबल बेंच में अपील की थी। डबल बेंच ने भी उसी आदेश की पुष्टि करते हुए राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया है।

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cg mahila aayog sadsya, mahila aayog, mamta sahu, padma chandrakar, tuleshvari sinha 2019-10-17 18:39:18 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2018/12/HIGH-COURT-OF-CHHATTISGARH-DeshTv.jpg
पर्चा फेंक नक्सलियों ने मांगी माफी और दी चेतावनी… https://deshtv.in/around-the-city/naxalites-throw-pardon-apologize-and-warn/ Thu, 17 Oct 2019 12:34:34 +0000 https://deshtv.in/?p=11224

जगदलपुर। विस्फोट कर 3 निर्दोष ग्रामीणों की जान लेने वाले नक्सलियो ने माफी मांगी है। साथ ही स्थानीय मजदूरों और ठेकेदारों को रावघाट परियोजना में काम नहीं करने की भी चेतावनी दी है। उत्तर बस्तर डिविजनल कमेटी द्वारा जारी पर्चे में मोदी सरकार का विरोध करने की अपील की है। बता दें कि कांकेर जिले […]

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जगदलपुर। विस्फोट कर 3 निर्दोष ग्रामीणों की जान लेने वाले नक्सलियो ने माफी मांगी है। साथ ही स्थानीय मजदूरों और ठेकेदारों को रावघाट परियोजना में काम नहीं करने की भी चेतावनी दी है। उत्तर बस्तर डिविजनल कमेटी द्वारा जारी पर्चे में मोदी सरकार का विरोध करने की अपील की है। बता दें कि कांकेर जिले के अंतागढ़ ताड़ोकी के रावघाट परियोजना में 24 सितंबर को निर्माण कार्य में लगी डीजल टैंकर को नक्सलियों ने विस्फोट से उड़ा दिया था। जिसमें ड्राइवर, हेल्पर सहित ग्रामीण की मौत हो गई थी। जारी पर्चे में मोदी सरकार का विरोध करते कहा है कि बस्तर का अधिकांश इलाका खनिज सपंदा से भरा हुआ है। जिसे मोदी सरकार बेचकर स्थानीय लोगों को बेदखल करने की साजि़श रच रही है।

नक्सलियों ने अपने पर्चे में माफी मांगते हुए लिखा है

“प्यारे भाइयों बहनों तुमपाल में नुकसान हुए मजदूरों के परिवारों के प्रति खेद प्रकट करते है। आप सभी को क्रांतिकारी अभिनंदन करते है। हमारे पीएलजी द्वारा तुमपाल के पास की गई माइन विस्फोट में रावघाट रेल लाइन बिछाने में काम कर रही टैंकर के पीछे बैठे तीन मजदूरों की मृत्यु हुई है। स्थानीय आदिवासी जनता को रावघाट लौह अयस्क खदान खोदकर, उन्हें गांव जमीन से बेदखल करने, कॉरपोरेट कंपनी को सौंपने की केंद्र व राज्य सरकारों के जनविरोधी खदान नीति एवं रावघाट रेल परियोजना का विरोध कर रहे है। हमारे भूलवश साधारण नागरिकों का नुकसान हुआ है। इस पर खेद व्यक्त करते हुए इस घटना में मृत्यु हुए मजदूरों के परिवार से माफी मांग रहे है।”

वहीं इसी पर्चे में ही नक्सलियों ने एक और संदेश भी दिया है। जिसमें नक्सलियों ने लिखा है कि

“केंद्र के मोदी सरकार राज्य के कांग्रेस सरकार देश विदेशी के कॉरपोरेट घरानों के हितों में बस्तर में मौजूद अनमोल खनिज संपदा को सौंपने के लिए सड़क संचार रेल परियोजनाएं चला रहे है। यह सड़क संचार योजनाएं बस्तर कांकेर के मूल निवासियों के हितों के लिए नहीं है, बल्कि विकास के नाम से उनको जल जंगल जमीन को छीनकर उन्हें बेदखल करने की बड़ी साजिश है। टाटा, अंबानी, अडानी के हितों के लिए बनाई जा रहे रावघाट रेल परियोजना में कोई भी स्थानीय जनता मजदूरी का काम ना करें। स्थानीय व्यापारी ठेके का काम ना लेवे, क्योंकि डेढ़ लाख पुलिस अर्धसैनिक बलों की तैनाती कर जनता पर फासीवादी दमन समाधान योजना के तहत जगह-जगह अर्धसैनिक बलों को तैनात कर प्रतिदिन गांव पर हमले कर बेगुनाह ग्रामीणों को मुठभेड़ के नाम से हत्या करते हुए बस्तर में सड़क संचार रेल लाइन का काम कर रहे है। हम जल जंगल जमीन पर जनता के अधिकार के लिए पर्यावरण को बचाने के लिए इस रावघाट रेल लाइन का विरोध कर रहे है। इस योजना को बाधित करने के लिए सैनिक कार्रवाई को अंजाम देते है, इसलिए आम जनता से अपील करते है कि इस जनविरोधी रेल योजना सड़क निर्माण का काम में भागीदारी ना लेवे।”

यह दोनों ही पर्चे नक्सलियों के उत्तर बस्तर डिविजनल कमेटी ने जारी किए है।

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अवैध रेत खननः लामबंद ग्रामीणों के कब्जे में हाइवा-कार https://deshtv.in/around-the-city/illegal-sand-mining-hiva-car-in-the-possession-of-mobilized-villagers/ Thu, 17 Oct 2019 11:59:58 +0000 https://deshtv.in/?p=11219

बैकुंठपुर। कोरिया जिले के भरतपुर तहसील के मवई में खनिज विभाग द्वारा रेत तस्करी शिकायत न मिलने का दावा और पुलिस प्रशासन का रवैया तब सामने आ गया जब बीती रात अवैध रेत खनन के लिए निकले हाइवा ट्रकों को लामबंद ग्रामीणों ने रोक लिया। कुछ हाइवा भाग निकले पर रेत तस्कर की कार समेत […]

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बैकुंठपुर। कोरिया जिले के भरतपुर तहसील के मवई में खनिज विभाग द्वारा रेत तस्करी शिकायत न मिलने का दावा और पुलिस प्रशासन का रवैया तब सामने आ गया जब बीती रात अवैध रेत खनन के लिए निकले हाइवा ट्रकों को लामबंद ग्रामीणों ने रोक लिया। कुछ हाइवा भाग निकले पर रेत तस्कर की कार समेत एक हाइवा को ग्रामीणों ने अपने कब्जे में ले लिया। ग्रामीणों की माने तो रेत तस्कर के बुलावे पर पहुंची पुलिस ने न केवल उन्हें धमकाया एक की पिटाई भी कर दी। कुछ मिनटो में जब सोशल मीडिया पर यह सब तैरने लगा तो पुलिस रेत तस्कर समेत भाग निकली। आज सुबह फिर अफसरों को इत्तला कर ग्रामीण कार्रवाई का इंतजार कर रहे थे। इस संबंध में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज शुक्ला का कहना था कि उन्हें इस तरह की कोई सूचना नहीं मिली है।


जानकारी के अनुसार कोरिया जिले का भरतपुर तहसील अवैध रेत के मामले में बीते 7 महीने से सुर्खियों में है, यहां की नदियों में प्रतिबंधित समय होने के बाद भी अवैध रेत उत्खनन जारी रहा, वही आज सुबह घुघरी स्थित मवई नदी से रेत निकालने पहुंचे रेत तस्करों को देर शाम से ही घेरने ग्रामीण इकठ्ठा होने लगे, दर्जनों की संख्या में उपस्थित ग्रामीणों ने रात 9.30 पर हाइवा को रेत ले जाने से मना किया, जिसके बाद बवाल मच गया, कुछ हाइवा धीरे धीरे खिसकने लगे, जबकि एक हाइवा को ग्रामीणों ने अपने कब्जे में ले लिया। वही ग्रामीणों के अनुसार एक कार जिसका नंबर सीजी04 एचडी 6987 है वो रेत के ठेकेदार की बताई जा रही है उसे भी रोक रखा है। ग्रामीण भरतपुर से अधिकारियों का इंतज़ार कर रहे है ताकि उन वाहनों को सुपुर्द कर कार्यवाही करवाई का सके। वही पूरे दिन ग्रामीणों ने अधिकारियों को मौके पर बुलाने का प्रयास किया परंतु कोई भी अधिकारी मौके पर नही पहुंचा। ग्रामीणों की जागरूकता के लेरण फिलहाल रेत के अवैध कारोबार पर एक बार फिर ब्रेक लग गया है।

पहुंची पुलिस ने ग्रामीणों को धमकाया
ग्रामीणों की मानें तो रेत तस्कर के बुलावे पर पहुंची पुलिस ने ग्रामीणों को धमकाना शुरू कर दिया, एक व्यक्ति की जमकर पिटाई भी कर दी, वही पुलिस के आते ही ठेकेदार ग्रामीणों पर गुर्राने लगा, ग्रामीणों को तंज कसते हुए कहा कि कहां है उनका लाठी डंडा, वो रेत निकलेगा, चाहे जिसको जहां शिकायत कर दो, पुलिस ने ग्रामीणों को मीडिया को कुछ भी नही बताने को कहा और बताने पर कड़ी कार्यवाही करने की धमकी दी। कुछ देर बाद सोशल मीडिया पर ग्रामीणों पर पुलिसिया कार्यवाही तैरने लगी, तो पुलिस ठेकेदार भाग निकले।

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Illegal mining, Illegal mining in baikunthpur, Illegal sand mining, अवैध रेत खननः 2019-10-17 17:29:58 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/rait-khanan-2.jpg
बिलासपुर रेलवे जोन से बम पार्सल…पर… https://deshtv.in/around-the-city/parcel-of-bomb-from-bilaspur-railway-zone-at/ Thu, 17 Oct 2019 09:52:00 +0000 https://deshtv.in/?p=11207

बिलासपुर। ट्रेन में संदिग्ध पार्सल की सूचना मिलते ही बिलासपुर रेलवे जोन में हड़कंप मच गया। दरअसल मेरठ मेरठ रेलवे स्टेशन पर दो पार्सलों को कोई लेने ही नहीं आया। पार्सल के प्रभारी को शक हुआ तो जीआरपी और आरपीएफ को खबर दी। पार्सल खोलने पर उसमें कंबल से लिपटा हुआ गांजा निकला। आधा क्विटल […]

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बिलासपुर। ट्रेन में संदिग्ध पार्सल की सूचना मिलते ही बिलासपुर रेलवे जोन में हड़कंप मच गया। दरअसल मेरठ मेरठ रेलवे स्टेशन पर दो पार्सलों को कोई लेने ही नहीं आया। पार्सल के प्रभारी को शक हुआ तो जीआरपी और आरपीएफ को खबर दी। पार्सल खोलने पर उसमें कंबल से लिपटा हुआ गांजा निकला। आधा क्विटल से ज्यादा 61 किलो गांजे को कंबल से इस तरह ढंककर रखा गया था कि बाहर दुर्गंध न फैले। बिलासपुर से पार्सल होने के कारण यहां हड़कंप मचा। बिलायपुर रेलवे ने जांच शुरू की तो पाया कि यह बात सामने आई है कि दोनों पार्सल ओडिशा के किसी जगह से आए थे। इसके बाद यहां से मेरठ के लिए रवाना किया गया। आरपीएफ के निशाने पर पार्सल एजेंट हैं। उनसे आए सामानों की जांच की जा रही है।


उल्लेखनीय है कि ओडिशा के बलांगीर जिले के पाटनागढ़ में 2 साल पहले एक शिक्षक ने रंजिश भुनाने अपने प्राचार्य के पुत्र की शादी में गिफ्ट में पार्सल बम भेजा था। जिसे खोलते ही नवविवाहित युगल समेत उसकी नानी और एक अन्य सद्स्य चेपट में आ गए। तीन की जानें गईं और नवविवाहिता बुरी तरह से जख्मी हो गई थी। यह पार्सल छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक कोरियर से भेजा गया था। अबकी बार यह पार्सल न्यायधानी बिलासपुर से गुजरते भेजा गया।

जानकारी के मुताबिक बिलासपुर से चंद्रशेखर नाम के एक व्यक्ति ने मेरठ में सुनील के नाम पर दो पार्सल बुक कराए थे। पुरी-हरिद्वार एक्सप्रेस से 8 अक्टूबर को दोनों पार्सल मेरठ रेलवे स्टेशन पर उतारे गए। जब कोई लेने नहीं आया, तब पार्सल प्रभारी को संदेह हुआ। चूंकि त्योहार के कारण हाई अलर्ट है, इसलिए सुरक्षा प्रभारी को खबर दी। इस तरह पूरा मामला सामने आया। बिलासपुर से बुकिंग होने के कारण इसकी खबर यहां दी गई।

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यह इश्क है गालिब…20 रुपये के स्टाम्प पर लिख दिया https://deshtv.in/around-the-city/this-ishq-hai-ghalib-written-on-stamp-of-20-rupees/ Thu, 17 Oct 2019 08:47:26 +0000 https://deshtv.in/?p=11203

जशपुर। इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश ‘ग़ालिब’. कि लगाए न लगे और बुझाए न बने। इश्क जो न कराए सो थोड़ा है। माशूका को रिझाने तमाम तरह के वादे किए जाते हैं। फिर शादी तक पहंचने तमाम तरह के उपाय । बात जशपुर जिले की है और माशूक का अंदाज भी अलहदा। […]

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जशपुर। इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश ‘ग़ालिब’. कि लगाए न लगे और बुझाए न बने। इश्क जो न कराए सो थोड़ा है। माशूका को रिझाने तमाम तरह के वादे किए जाते हैं। फिर शादी तक पहंचने तमाम तरह के उपाय । बात जशपुर जिले की है और माशूक का अंदाज भी अलहदा। शादीशुदा 44 साल के पेशे से शिक्षाकर्मी ने अपने से 22 साल छोटी अपनी पूर्व शिष्या से प्रेम संबंध स्वीकारते 20 रुपये के स्टांप पर लिख दिया कि इसे दूसरी पत्नी का दर्जा देता हूं। वैसे इस गुरूजी ने पहली पत्नी को तलाक नहीं दिया है।

जशपुर जिले में शिक्षकों के कारनामे सदैव चर्चा में रहते आ रहे हैं, चाहे पीकर स्कूल आने का हो, या फिर बच्चो को नये अंदाज में पढ़ाने का। ताजा मामला कुनकुरी थाना क्षेत्र का है, जहां एक हाई स्कूल में पदस्थ 44 वर्षीय शिक्षाकर्मी को चार माह पहले गांव की 22 वर्षीय युवती से प्यार हो गया,यह कभी उसकी शिष्या थी।

                 कहते हैं इश्क और मुश्क छिपाए नहीं छिपता है। यही हाल गुरूजी के साथ हुआ और गत 13, 14 अक्टूबर को परवान चढ़ रहा इश्क उजागर हो गया। गांव में बवाल मचा, लेकिन इश्क के सामने किसी की जोर नहीं चली। परिजनों ने नाराजगी दिखाई और गुरूजी की खातिरदारी भी की गई। युवती के परिजनों का दबाव इस कदर बना कि अगले दिन कुनकुरी जाकर गुरूजी ने शपथ पत्र बकायदा नोटरी करवाकर दे दिया, जिसमें यह कहा गया ​है कि वह लड़की को दूसरी पत्नी के रूप में हक देगा।

बताया जाता है कि जब मामला उजागर हुआ तो गांव में करमा का त्यौहार चल रहा था, जिसमें ये प्रे​मी जोडे का मिलन हो रहा था। जानकारी मिलते ग्रामीण भड़क गए और गांव में खूब तनाव हुआ, जिसके बाद पंचायती भी खूब हुई है। ग्रामीणों के मुताबिक लड़की की जिंदगी का सवाल था, इसलिए थाने में एफआईआर दर्ज नहीं कराया गया।

इधर कानून के जानकारों के मुताबिक इस प्रकार से शपथ पत्र का निष्पादन किया ही नहीं जा सकता है और शपथ पत्र देकर दूसरी पत्नी के रूप में दर्जा देने का प्रावधान ही नहीं है। शिक्षक कम से कम इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि पहली पत्नी के रहते किसी को दूसरी पत्नी का दर्जा वैधानिक नहीं है और इसके लिए सजा का भी प्रावधान है। उसकी नौकरी भी जा सकती है। बहरहाल उक्त गुरूजी की इस प्रेम कहानी खूब चर्चा में है और शपथ पत्र भी खूब सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।

शपथ पत्र में शिक्षाकर्मी ने लिखा है कि शिक्षाकर्मी का का उक्त लडकी के साथ लगभग चार माह से प्रेम संबंध था और पति, पत्नी के रूप में रह रहे थे। यह कि शपथकर्ता शादीशुदा है एंव शिक्षाकर्मी के पद पर जशपुर जिले के उक्त गांव में पदस्थ है। यह कि शपथकर्ता याने शिक्षाकर्मी उक्त लडकी को दूसरे पत्नी के रूप में सलूक करेगा और शिक्षाकर्मी के चल एवं अचल संपत्नी पर उसका अधिकार होगा। होने वाले संतान को भी शपथकर्ता के द्वारा उत्तराधिकारी के रूप में हक दिया गया है।

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jashpur, love with student, pyaar, shikshakarmi, shikshakarmi samviliyan 2019-10-17 14:17:26 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/Love-coupal-in-jashpur.jpg
कांकेर का सीताफल है खास, दूर-दूर तक पहुंच रही मिठास https://deshtv.in/around-the-city/kankers-sitaphal-is-special-far-reaching-sweetness/ Wed, 16 Oct 2019 08:34:48 +0000 https://deshtv.in/?p=11170

कांकेर। सीताफल का स्वाद आखिर कौन नही लेना चाहता। इसकी मिठास और स्वाद इतना बढ़िया है कि सीजन में इस फल को हर कोई स्वाद चखना चाहता है। यह फल जितना मीठा है, उतना ही स्वादिष्ट और पौष्टिक भी है। कांकेर जिले में इस फल की न सिर्फ प्राकृतिक रूप से खूब पैदावार हो रही […]

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कांकेर। सीताफल का स्वाद आखिर कौन नही लेना चाहता। इसकी मिठास और स्वाद इतना बढ़िया है कि सीजन में इस फल को हर कोई स्वाद चखना चाहता है। यह फल जितना मीठा है, उतना ही स्वादिष्ट और पौष्टिक भी है। कांकेर जिले में इस फल की न सिर्फ प्राकृतिक रूप से खूब पैदावार हो रही है, हर साल उत्पादन एवं विपणन भी बढ़ रहा है। कांकेर के सीताफल की अपनी अलग विशेषता होने की वजह से ही अन्य स्थानों से भी इस फल की डिमांड आ रही है। स्थानीय प्रशासन द्वारा सीताफल को न सिर्फ विशेष रूप से ब्रांडिंग, पैकेजिंग एवं मार्केटिंग में सहयोग कर इससे जुड़ी महिला स्व सहायता समूह को लाभ पहुंचाने का काम किया जा रहा है। उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी दिया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि इस वर्ष सीताफल का ग्रेडिंग और संग्रहण करने वाली स्व सहायता की महिलाओं एवं इससे जुड़े पुरुषों को लगभग 25 लाख रुपये तक की आमदनी होने की उम्मीद है। प्रशासन द्वारा कांकेर वैली फ्रेश सीताफल के रूप में अलग-अलग ग्रेडिंग कर 200 टन विपणन का लक्ष्य रखा गया हैं।

                      वैसे तो सीताफल का उत्पादन अन्य जिलों में भी होता है लेकिन कांकेर जिला का यह सीताफल राज्य में प्रसिद्ध है। यहाँ प्राकृतिक रूप से उत्पादित सीताफल के 3 लाख 19 हजार पौधे हैं, जिससे प्रतिवर्ष अक्टूबर से नवम्बर माह तक 6 हजार टन सीताफल का उत्पादन होता है। यहां के सीताफल के पौधौ में किसी भी प्रकार के रासायनिक खाद या कीटनाशक का प्रयोग नहीं किया जाता है। यह पूरी तरह जैविक होता है। इसलिए यह स्वादिष्ट होने के साथ पौष्टिक भी होता हैं। यहां से प्राकृतिक रूप से उत्पादित सीताफल को आसपास की ग्रामीण महिलाएं एवं पुरूष संग्रह कर बेचते आ रहे हैं। इससे थोड़ी बहुत आमदनी उनको हो जाती थी। लेकिन उन्हें पहले कोई ऐसा मार्गदर्शक नही मिला जो मेहनत का सही दाम दिला सके। कुछ कोचिए और बिचौलियों द्वारा औने-पौने दाम में वनवासी ग्रामीण संग्राहकों से सीताफल खरीदकर अधिक दाम में बेचा जाता था। इसे देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा संग्राहकों को आर्थिक लाभ के साथ आत्मनिर्भर बनने की राह बताई गई। स्वसहायता समूह के माध्यम से सीताफल को बाजार तक पहुचाने के उपाय बताए गए। इसके लिए महिलाओं को प्रशिक्षण और साधन उपलब्ध कराकर स्थानीय लोगों को वास्तविक फायदा पहुंचाने की पहल की गई।


अब स्थानीय संग्राहक गांव में ही सीधे स्वसहायता समूह की महिलाओं को सीताफल विक्रय कर उचित दाम प्राप्त करते है। समूह से जुड़ी महिलाएं रायपुर, धमतरी सहित दुर्ग भिलाई के मरीन ड्राइव, मंडी एवं अन्य शहरों में सीताफल बेचकर लाभ कमा रही है। शासन की पहल पर वन विभाग द्वारा स्वसहायता समूह की महिलाओं को पैकेजिंग और वाहन की सुविधा प्रदान की गई है। एक अलग मिठास लिए इस सीताफल का स्वाद अन्य राज्यों के लोगों तक भी पहुंच चुकी है। यही वजह है कि कुछ बड़े व्यवसायी इसे कोलकाता तक विक्रय के लिए ले जाना चाहते है। इस संबंध में शासन की ओर से कलकत्ता और वारंगल में सीताफल विक्रेताओं की बात हो रही है, वहां लगभग 5 से 10 टन सीताफल की मांग की गई है।

राज्य सरकार द्वारा स्वसहायता समूह की महिलाओं को सीताफल के पैकेजिंग, विपणन और सीताफल पल्पिंग के प्रशिक्षण के लिए कार्यशालाओं का आयोजन भी किया गया। सीताफल संग्रहण के लिए 28 सीताफल कलेक्शन सेंटरो में विशेष ट्रैनिंग दिया गया है। वर्तमान में काँकेर, चारामा और नरहरपुर विकासखंड के 77 ग्रामों में कलेक्शन पॉइन्ट बनाकर महिला समूहों के माध्यम से सीताफल संग्रह का कार्य शुरू कर दिया गया है तथा सड़क के किनारे बैठने वाले सीताफल विक्रेताओं को भी स्वसहायता समूह के माध्यम से सीताफल बेचने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष सीताफल का दुगुना व्यवसाय महिला स्वसहायता समूह के माध्यम से किया जाएगा।

काँकेर वेली फ्रेश सीताफल के ब्रांड नाम से सीताफल की ग्रेडिंग कर मार्केटिंग के लिए प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया जा रहा है। काँकेर वेली फ्रेश का सीताफल 20 किलोग्राम के कैरेट और एक किलोग्राम के बॉक्स में बिक्री के लिए उपलब्ध है। प्रशासन द्वारा सीताफल की खरीदी महिला स्वसहायता समूह के माध्यम से हो सके इसके लिए विशेष व्यवस्था की गई हैं। संग्राहकों के साथ ग्रेडिंग करने वाली महिलाओं को लाभ पहुंचाने और सीताफल आसानी से सभी लोगों तक पहुंच सके इस दिशा में भी कदम उठाया गया हैं। यहाँ संग्रहण एवम ग्रेडिंग से जुड़े लोगों के अलावा कांकेर के लोगों को भी खुशी है कि प्रशासन के इस पहल से स्थानीय लोगों को लाभ मिलने के साथ उनके जिले के सीताफल की पहचान लगातार बढ़ती जा रही है।

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kanker, kanker me sitafal, kanker travels, sitafal at kanker 2019-10-16 14:04:48 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/Sitafal-kanker.jpg
SECL में एस.एम. चौधरी ने संभाला निदेशक (वित्त) का जिम्मा https://deshtv.in/around-the-city/sm-in-secl-chaudhary-took-charge-of-director-finance/ Tue, 15 Oct 2019 11:07:31 +0000 https://deshtv.in/?p=11142

बिलासपुर। एसईसीएल के नए निदेशक (वित्त) का पदभार ग्रहण किया। लगभग तीन दशकों से अधिक समय से कोयला उद्योग में विभिन्न पदों पर चौधरी ने अपनी सेवाएं दी हैं। इससे पहले वे डब्ल्यूसीएल, नागपुर में इसी पद पर कार्यरत थे। इसी दौरान उन्होंने 28 दिसंबर 2018 से 04 अप्रैल 2019 तक एसईसीएल के निदेशक (वित्त) […]

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बिलासपुर। एसईसीएल के नए निदेशक (वित्त) का पदभार ग्रहण किया। लगभग तीन दशकों से अधिक समय से कोयला उद्योग में विभिन्न पदों पर चौधरी ने अपनी सेवाएं दी हैं। इससे पहले वे डब्ल्यूसीएल, नागपुर में इसी पद पर कार्यरत थे। इसी दौरान उन्होंने 28 दिसंबर 2018 से 04 अप्रैल 2019 तक एसईसीएल के निदेशक (वित्त) का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। पूर्व में वे कोलइण्डिया लिमिटेड, कोलकाता में महाप्रबंधक (वित्त) रहे हैं। चौधरी एक क्वालिफाईड चार्टर्ड अकाउंटेंट, कॉस्ट एण्ड मैनेजमेंट अकाउंटेंट एवं कंपनी सेक्रेटरी हैं। उन्होंने भारत के चार्टर्ड एकाउंटेंट्स संस्थान से आईएफआरएस और अप्रत्यक्ष कर पर प्रमाणित पाठ्यक्रम भी पूरा किया है। सेन्ट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड से खनन उद्योग में उन्होंने अपने कैरियर की शुरूआत की।


चौधरी को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए विभिन्न अवार्ड से सम्मानित किया गया है। इनमें माईन्स क्लोजर प्लान से संबंधित अनूठी वित्तीय योजना की औपचारिकताओं के लिए कोल इण्डिया द्वारा दिया गया विशेष उपलब्धि पुरस्कार, 19 जनवरी 2018 को मुम्बई में इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया द्वारा पीएसयू श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ सीएफओ पुरस्कार आदि प्रमुख हैं। चौधरी को वर्ष 2019-20 के लिए भारत चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्थान, नई दिल्ली के उद्यमिता और सार्वजनिक सेवा (सीएमईपीएस) के लिए केन्द्रीय समिति में सदस्य के रूप में भी नामित किया गया है। ज्ञात हो कि एसईसीएल के सीएमडी पर ए.पी. पण्डा के चयन के बाद चयनोपरांत एसईसीएल के निदेशक (वित्त) का पद रिक्त हो गया था। चौधरी के एसईसीएल में निदेशक (वित्त) के पूर्णकालिक पदभार ग्रहण करने पर एसईसीएल के कार्यों में गति आएगी।

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Director (Finance) SM Chaudhary, SECL 2019, SECL job, SECL Recruitment 2019 2019-10-15 16:37:31 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/SECL-S-M-Chaudhary.jpg
पूर्व कलेक्टर ओपी चौधरी को हाईकोर्ट से मिली राहत, जांच पर रोक… https://deshtv.in/around-the-city/former-collector-op-chaudhary-gets-relief-from-high-court-investigation-halted/ Tue, 15 Oct 2019 10:45:05 +0000 https://deshtv.in/?p=11138

बिलासपुर। कलेक्टरी की छोड़ राजनीति शुरू करने वाले पूर्व आईएएस अधिकारी और वर्तमान भाजपा नेता ओपी चौधरी को हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। चौधरी के खिलाफ राज्य सरकार ने एक जांच प्रदेश के सीनियर आईएएस सीके खेतान की अध्यक्षता वाली कमेटी को सौंपी थी। इस जांच में हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी […]

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बिलासपुर। कलेक्टरी की छोड़ राजनीति शुरू करने वाले पूर्व आईएएस अधिकारी और वर्तमान भाजपा नेता ओपी चौधरी को हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। चौधरी के खिलाफ राज्य सरकार ने एक जांच प्रदेश के सीनियर आईएएस सीके खेतान की अध्यक्षता वाली कमेटी को सौंपी थी। इस जांच में हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। इस जांच को लेकर चौधरी ने हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आज इस जांच को रोकने का आदेश जारी किया है। इसके साथ ही सर्कार से इस मामलें में जवाब भी तलब किया है।
गौरतलब है कि वर्तमान की भूपेश सरकार ने यह आरोप लगाया है कि पूर्व आईएएस ओपी चौधरी जब दंतेवाड़ा में कलेक्टर थे, उस वक्त जमीन की अदला बदली में को लेकर नियमों को दरकिनार करने का आरोप उन पर लगा था। जिसमें हाईकोर्ट ने इस मामले में 15 सितंबर 2016 को एक रिट याचिका पर सुनवाई कर राज्य सरकार को जांच करने का आदेश दिया था। तब तत्कालीन सरकार ने जस्टिस टीपी शर्मा को इस मामले की जांच सौंपी थी, जो वर्तमान में जारी बताई जा रही है।

इधर सुबे में कांग्रेस की सरकार आते ही 29 मई को पुरानी जांच के चलते हुए भी एक नई जांच समिति सीके खेतान की अध्यक्षता में बना दी गई थी। जिसके बाद इस कमेटी को ओपी चौधरी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस पी सैमकोशी ने राज्य सरकार की उस समिति की जांच को रोका है, जिसमें सीके खेतान अध्यक्षता कर रहे है।

सरकार से माँगा है जवाब
हाई कोर्ट ने सरकार से इस मामले में जवाब भी तलब किया है। अब भूपेश सरकार इस मामले में अपना जवाब हाईकोर्ट के समक्ष रखेगी। इस मामले की अगली सुनवाई के लिए बिलासपुर उच्च न्यायालय ने 6 नवंबर की तारीख मुकर्रर की है।

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bjp O P Choudhary, dantewada dm O P Choudhary, ias O P Choudhary, kharsiya O P Choudhary, o p, O P Choudhary, OPChoudhary, raipur dm O P Choudhary, umesh patel vs O P Choudhary 2019-10-15 16:15:05 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/O-P-Choudhary-BJP-0.jpg
देश विशेष : बांट तो दिया कर्ज पर बीस बरस में भी वसूली नहीं हो सकी https://deshtv.in/around-the-city/desh-vishesh-even-after-twenty-years-on-the-loan-given-it-could-not-be-recovered/ Tue, 15 Oct 2019 09:42:56 +0000 https://deshtv.in/?p=11134

बैकुंठपुर। कोरिया में जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास विभाग द्वरा बीते लगभग दो दशकों में बांटे गए ऋण में काफी गड़बड़झाला सामने आ रहा है। इतने वर्षों में जारी किए गए 11 करोड रू के लोन में सिर्फ 4 करोड़ की ही वसूली हो सकी है, जबकि 7 करोड़ रू बकाया है। वसूली के लिए जाने […]

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बैकुंठपुर। कोरिया में जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास विभाग द्वरा बीते लगभग दो दशकों में बांटे गए ऋण में काफी गड़बड़झाला सामने आ रहा है। इतने वर्षों में जारी किए गए 11 करोड रू के लोन में सिर्फ 4 करोड़ की ही वसूली हो सकी है, जबकि 7 करोड़ रू बकाया है। वसूली के लिए जाने पर हितग्राही नहीं मिल रहे तो कई हितग्राहियों के नाम से ऋण लेकर उसका फायदा तो उठा रहे है परन्तु लोन भरने में आना कानी कर रहे है।
इस संबंध में जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति कोरिया के प्रभारी अधिकारी कमलेश देवांगन का कहना है कि विभाग ने योजना शुरु होने से अब तक 11 करोड़ रुपये से अधिक राशि ऋण के रूप में हितग्राही को दिया गया है जहां अब भी सात करोड़ से ऊपर की राशि अभी वसूली करने को शेष हैं, कई हितग्राही स्थल पर नहीं मिल रहे, वहीं कुछ वाहन दूसरे के द्वारा लेने का हवाला देकर ऋण राशि जमा नहीं कर रहे जिन्हें नोटिस जारी कर राशि जमा करने कहा गया है। जमा नहीं करने पर कोर्ट के माध्यम से राशि वसूली के लिये आगे कार्यवाही की जाएगी।

जानकारी के अनुसार अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग ,पिछड़ा वर्ग ,सफाई कामगार व अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों को व्यवसाय के लिए अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति द्वारा वर्ष 2000 से लेकर वर्ष 2019 तक 11 करोड़ रुपए से अधिक के लोन बांटे गए, कई अधिकारी आए और लौट गए, परन्तु ऋण वसूली के लिए किसी ने सार्थक पहल नही की। वहीं अब हालात यह है कि कई हितग्राही अपने दिए पते पर नही मिल रहे, तो कई हितग्राही ऐसे हैं जो वाहन तो लिये हैं किंतु उनके पास वाहन नहीं है उनके नाम से लिये गए वाहन किसी और के द्वारा उपयोग किया जा रहा, हद तो तब हो रही है कि कि विभाग के नोटिस देने के पश्चात भी हितग्राही कार्यालय नहीं पहुंच रहे, जिससे इस ऋण राशि को वसूलने में दिक्कत हो रही। बीते 19 साल में विभाग को करीब 7 करोड 46 लाख 82 हजार 552 रुपए की वसूली करनी है। सालों से पैसा बांटने के बाद विभाग वसूली नहीं कर पा रहा है। अब रकम की वसूली के लिए राज्य सरकार ने जिला अंत्यावसायी विभाग को पत्र भेजा है। यही कारण है कि लोन की वसूली नहीं हो पाने के कारण ही नए आवेदकों को लोन देने सरकार से फंड नहीं आ रहा है।

नहीं कर पा रहे पूरा लक्ष्य
योजना के हिसाब से बांटे गए रकम की वसूली के लिए हर साल लक्ष्य तैयार किया जाता है। प्लान के अनुसार हर साल टीम को वसूली का लक्ष्य पूरा करना होता है मगर विभाग दिया गया लक्ष्य पूरा नहीं कर पा रहा है। वर्ष 2019 में विभाग बमुश्किल से अब तक दिए गए ऋण राशि मे केवल 2 करोड़ 63 लाख 14 हजार 413 रुपए ही वसूल कर पाया है, जबकि विभाग को करीब 7 करोड़ से ऊपर रुपए का लोन वसूल करना है। इसमें करीब 1 करोड़ की राशि तो पिछले वित्तीय वर्ष 2017 से 2019 तक की ही बताई जा रही है।

अपात्रों को बांटा लोन
विभागीय सूत्रों की माने तो योजना के शुरूआत में विभाग में पदस्थ अधिकारियो ने टारगेट पूरा करने अपात्र को भी पात्र बना कर ऋण तो दे दिया किन्तु अब वे ऋण पटाने में अपने को दिवालिया घोषित कर रहे, ऐसे में यदि अधिकारी इन शासकीय राशि को सही तरीके से पात्र हितग्राही को बांटे होते तो अब अधिकारियों को इस राशि के वसूलने में एड़ी चोटी को जोर नहीं लगाना पड़ता।

लोन किसी और के नाम उपयोग कोई और कर रहा
विभागीय सूत्रों की मानें तो हितग्राही के नाम से किसी दूसरे व्यक्ति ने उसके दस्तावेज से ट्रेक्टर ,बुलेरो, पिकअप, जीप, ऑटो व अन्य वाहन निकाल लिए है, जहां हितग्राहियों के पास वर्तमान में वाहन ही नहीं है जिससे अधिकारियों को इस स्थित में राशि को वसूलने में समस्या हो रही। वहीं जिन अधिकारियों ने यह ऋण दिया वे अब जिले में भी मौजूद नहीं है जिससे अब विभाग किससे राशि वसूले इसे लेकर भी असमंजस की स्थिति है।

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baikunthpur, desh vishesh, jila koriya, koriya, koriya jila 2019-10-15 15:12:56 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/Collecter-office-koriya-0.jpg
Big News : सुकमा में पुलिस नक्सली मुठभेड़, एक नक्सली ढेर, शव बरामद https://deshtv.in/around-the-city/big-news-police-naxalite-encounter-in-sukma-a-naxalite-pile-up-body-recovered/ Tue, 15 Oct 2019 08:53:04 +0000 https://deshtv.in/?p=11130

सुकमा। सुकमा में तैनात सुरक्षा बल और नक्सलियों के बीच आज मुठभेड़ हुई है। इस मुठभेड़ में एक नक्सली के मारे जाने का दावा स्थानीय पुलिस ने किया है। वहीं मुठभेड़ में कई नक्सलियों को गोली लगने की आशंका भी जताई जा रही है। मिली जानकारी के मुताबिक़ सुकमा के तुलसी डोंगरी के नज़दीक डीआरजी […]

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सुकमा। सुकमा में तैनात सुरक्षा बल और नक्सलियों के बीच आज मुठभेड़ हुई है। इस मुठभेड़ में एक नक्सली के मारे जाने का दावा स्थानीय पुलिस ने किया है। वहीं मुठभेड़ में कई नक्सलियों को गोली लगने की आशंका भी जताई जा रही है। मिली जानकारी के मुताबिक़ सुकमा के तुलसी डोंगरी के नज़दीक डीआरजी के जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई है। ये पार्टी नक्सलियों के जमावड़े के इनपुट पर सर्चिंग के लिए निकली थी। दो दिन पहले पुसपाल थाना क्षेत्र से ये टीम जंगलों में सर्चिंग कर रही थी।

 

आज सुबह इस सर्चिंग टीम और नक्सलियों का आमना सामना हुआ जिसके बाद दोनों तरफ से गोलीबारी की गई। डीआरजी के जवानों की जवाबी कार्रवाई में एक नक्सली के मारे जाने की की खबर मिली है। पुलिस और डीआरजी की टीम ने इस माओवादी का शव मौके से नक्सल सामग्री के साथ बरामद किया है। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक़ जंगली और पहाड़ी इलाका होने के कारण डीआरजी की सर्चिंग टीम अभी भी जंगल में ही है। सुकमा एसपी शलभ सिन्हा ने मुठभेड़ की पुष्टि की है।

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naxal muthbhed, sukma me naxal muthbhed 2019-10-15 14:23:04 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/naxal-hamla.jpg
कोल खनन परियोजना के विरोध में ग्रामीणों ने शुरू किया प्रदर्शन https://deshtv.in/around-the-city/villagers-start-protest-against-coal-mining-project/ Mon, 14 Oct 2019 11:30:07 +0000 https://deshtv.in/?p=11105

सूरजपुर। हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले कोल खनन परियोजना के विरोध में ग्रामीणों ने आज से सूरजपुर जिले के ग्राम तारा में अनिश्चित कालीन धरना प्रदर्शन शुरू किया। अडानी की परसा कोल खनन परियोजना के लिए नियमविरुद्ध ग्रामसभा की सहमति के बिना ही भूमि अधिग्रहण किया गया हैं। और वन स्वीकृति भी […]

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सूरजपुर। हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले कोल खनन परियोजना के विरोध में ग्रामीणों ने आज से सूरजपुर जिले के ग्राम तारा में अनिश्चित कालीन धरना प्रदर्शन शुरू किया। अडानी की परसा कोल खनन परियोजना के लिए नियमविरुद्ध ग्रामसभा की सहमति के बिना ही भूमि अधिग्रहण किया गया हैं। और वन स्वीकृति भी फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव बनाकर हासिल की गई। इस प्रदर्शन के ज़रिए ग्रामीणोंने कुछ प्रमुख मांगे रखी है, जिसमें पेसा कानून 1996 एवं भूमि अधिग्रहण कानून 2013 की धारा (41) के तहत

ग्रामसभा सहमती लिए बिना परसा कोल ब्लॉक हेतु किये गए जमीन अधिग्रहण को निरस्त करने की मांग प्रमुख रूप से ग्रामीण कर रहे है। इसके अलावा वनाधिकार मान्यता कानून 2006 के तहत ग्रामसभा की सहमती पूर्व एवं वनाधिकारों की मान्यता की प्रक्रिया ख़त्म किया बिना दी गई वन स्वीकृति को भी निरस्त करने की मांग ग्रामीणों ने सरकार से की है। साथ ही इस प्रदर्शन से हसदेव अरण्य क्षेत्र में परसा, पतुरिया गिदमुड़ी, मदनपुर साऊथ कोल खनन परियोजनाओ को निरस्त किये जाए एवं परसा ईस्ट केते बासन के विस्तार पर रोक लगाए जाने की बात भी कही जा रही है।

नए कोल आबंटन की प्रक्रिया पर लगे रोक
धरना प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि हसदेव अरण्य के जंगल से जुडी आदिवासी एवं अन्य ग्रामीण समुदाय की आजीविका व संस्कृति वन क्षेत्र में उपलब्ध जैव विविधता, हसदेव नदी एवं बांगो बांध के केचमेंट, हाथियों का रहवास क्षेत्र एवं छत्तीसगढ़ व दुनिया के पर्यावरण महत्वता के कारण इस सम्पूर्ण क्षेत्र को खनन से मुक्त रखते हुए किसी भी नए कोल ब्लाकों का आवंटन नही किया जाए l वनाधिकार मान्यता कानून के तहत व्यक्तिगत और सामुदायिक वन संसाधन के अधिकारों को मान्यता देकर वनों का प्रवंधन ग्रामसभाओं को सोंपा जाए l

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coal mining, Hasdev Aranya Bachao Sangharsh Samiti, protest against coal mining, protest against mining, suraj pur, surajpur jila, Villagers start protest 2019-10-14 17:00:07 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/Hasdev-Aranya-Bachao-Sangharsh-Samiti.jpg
गोली से ज़ख़्मी हुई थी महिला नक्सली, ईलाज़ कराने पहुंची और गिरफ़्तार… https://deshtv.in/around-the-city/the-woman-naxalite-was-injured-by-the-bullet-reached-for-treatment-and-was-arrested/ Mon, 14 Oct 2019 07:53:48 +0000 https://deshtv.in/?p=11096

राजनांदगांव। राजनांदगांव पुलिस ने एक महिला नक्सली को गिरफ़्तार किया है। पुलिस की गोली से ज़ख़्मी हुई महिला नक्सली मानपुर अस्पताल में अपना इलाज कराने पहुंची थी। उसी वक़्त मुखबिर की सुचना पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक़ महिला नक्सली का नाम कमला बताया गया है, जो राजनांदगांव के आलावा बस्तर […]

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राजनांदगांव। राजनांदगांव पुलिस ने एक महिला नक्सली को गिरफ़्तार किया है। पुलिस की गोली से ज़ख़्मी हुई महिला नक्सली मानपुर अस्पताल में अपना इलाज कराने पहुंची थी। उसी वक़्त मुखबिर की सुचना पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक़ महिला नक्सली का नाम कमला बताया गया है, जो राजनांदगांव के आलावा बस्तर संभाग में हुई कई वारदातों में शामिल थी। मिली जानकारी के मुताबिक़ 12 अक्टूबर को मानपुर के बुकमरका में जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई थी।

               जिसमें कई नक्सलियों के घायल होने की संभावनाएं डीआरजी और स्थानीय पुलिस ने जताई थी। इसे आशंका से पुलिस ने अस्पतालों और मेडिकल के नज़दीक अपना सुचना तंत्र फैला रखा था। इसी से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने ये गिरफ्तारी की है। सूत्रों ने बताया कि मुठभेड़ में महिला नक्सली कमला के कमर में गोली लगी थी, जिसका इलाज कराने मानपुर अस्पताल पहुंची थी। हालाँकि इस महिला नक्सली की हालात डाक्टरों ने गंभीर बताई है।

धमाके की कर रहे थे प्लानिंग
गौरतलब है कि बीते शनिवार को ही बुकमरका जंगल में पुलिस नक्सल मुठभेड़ हुई थी। जिसमे नक्सली घायल होने के बाद जंगल की तरफ भागने में सफल हो गए थे, हालाँकि फ़ोर्स को मौके से सोलर प्लेट, आठ नग पिटठू, कुकर आईईडी, बैटरी इलेक्ट्रिक तार, बारूद सहित कई अन्य दैनिक उपयोग के सामान मिले थे। जिससे किसी ब्लास्ट की तैयारी का अंदेशा पुलिस ने जताया है।

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giraftari, mahila naxli giraftar, naxal arrest 2019-10-14 13:23:48 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2018/04/Naxal.jpg
नहीं दिया फसल बीमा का मुवावज़ा, अब बैंक भरेगा एक लाख का हर्ज़ाना https://deshtv.in/around-the-city/crop-insurance-not-given-now-bank-will-pay-one-lakh-damages/ Sun, 13 Oct 2019 12:05:29 +0000 https://deshtv.in/?p=11076

बेमेतरा। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ नहीं मिलने की वज़ह से एक फरियादी ने कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। जिसके बाद कोर्ट ने बैक प्रबंधन की लापरवाही पर न सिर्फ बैंक को जमकर फटकारा है, बल्कि इस गंभीर लापरवाही के लिए बैंक प्रबंधन को 1,06,000 रुपए का हर्जाना भरने का आदेश दिया। ये पूरा वाक़या […]

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बेमेतरा। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ नहीं मिलने की वज़ह से एक फरियादी ने कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। जिसके बाद कोर्ट ने बैक प्रबंधन की लापरवाही पर न सिर्फ बैंक को जमकर फटकारा है, बल्कि इस गंभीर लापरवाही के लिए बैंक प्रबंधन को 1,06,000 रुपए का हर्जाना भरने का आदेश दिया।
ये पूरा वाक़या बेमेतरा जिला के ग्राम गोड़मर्रा का है। जहाँ के किसान ब्रम्हानंद ठाकुर ने बैंक ऑफ बड़ौदा से खेती के लिए क़र्ज़ लिया था। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ फसल 2016-17 के लिए बीमा करवाया था। इस बीमा के लिए प्रीमियम बैंक ऑफ बड़ौदा की साजा ब्रांच द्वारा किसान के बीमा की प्रीमियम की राशि 5390 काटा भी गया। लेकिन फसल खराब होने के बाद जब किसान ब्रम्हानंद ने बैंक में मुवावज़ा के लिए आवेदन किया तो मामला हही कुछ अलग निकला।

                        ग्राम पंचायत गोड़मर्रा की जगह गाड़ाडीह के नाम से बैंक ने बीमा कंपनी को चेक दे दिया। जिसके कारण किसान ब्रम्हानंद ठाकुर को बीमा दावा प्राप्त नहीं हो पाया था। कई दफे आवेदन निवेदन के बाद जब राशि नहीं मिली तब जाकर पडित किसान ने उपभोक्ता फोरम का दरवाज़ा खटखटाया और पूरा मामला फोरम में रखा। जिसके बाद दोनों पक्षों को सुनने के बाद बेमेतरा जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये एवं लता चंद्राकर ने बीमा दावा की राशि 95,011 रुपए, मानसिक क्षतिपूर्ति के एवज में 10,000 रुपए तथा वाद व्यय खर्च के 1 हजार रुपए किसान ब्रम्हानंद ठाकुर को अदा करने का आदेश दिया।

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bemetara, fasal bima, fasal bima yojana, muvavza, pradhanmantri fasal bima yojana, upbhokta foram bemetra 2019-10-13 17:35:29 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/upbhokta-foram-kanun-court-law.jpg
चित्रकोट विधानसभा उप चुनाव में आयोग ने की मतगणना तैयारी पूरी https://deshtv.in/around-the-city/commission-completes-counting-of-votes-in-chitrakot-assembly-by-election/ Sat, 12 Oct 2019 12:28:17 +0000 https://deshtv.in/?p=11056

जगदलपुर| चित्रकोट विधानसभा उप निर्वाचन के तहत 24 अक्टूबर को मतगणना होगी। सबसे पहले सुबह 8 बजे से डाक मतपत्रों की गिनती होगी।उसके बाद EVM से मतगणना प्रारंभ होगी। मतगणना के लिए महिला कर्मियों को नियुक्त किया गया है। इन कर्मियों को आज जगदलपुर कलेक्टोरेट के प्रेरणा कक्ष में पहले चरण का प्रशिक्षण दिया गया। […]

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जगदलपुर| चित्रकोट विधानसभा उप निर्वाचन के तहत 24 अक्टूबर को मतगणना होगी। सबसे पहले सुबह 8 बजे से डाक मतपत्रों की गिनती होगी।उसके बाद EVM से मतगणना प्रारंभ होगी। मतगणना के लिए महिला कर्मियों को नियुक्त किया गया है। इन कर्मियों को आज जगदलपुर कलेक्टोरेट के प्रेरणा कक्ष में पहले चरण का प्रशिक्षण दिया गया। दूसरे चरण में 23 अक्टूबर को मतगणना स्थल पर रिहर्सल कराया जाएगा। चित्रकोट उप चुनाव के लिए 21 अक्टूबर को मतदान किया जायेगा। इसकी भी तैयारी चुनाव आयोग ने पूरी कर ली है।


मतगणना का सम्पूर्ण कार्य महिला कर्मचारियों द्वारा किया जाएगा। आज सम्पन्न प्रशिक्षण में मतगणना कर्मियों को मतगणना की सम्पूर्ण प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी दी गई। मतगणना जगदलपुर के महिला पाॅलीटेक्निक काॅलेज में होगी। मतगणना स्थल पर अधिकृत व्यक्ति के अलावा अन्य कोई भी व्यक्ति प्रवेश नहीं कर सकेगा। मोबाईल फोन भी पूरी तरह प्रतिबंधित होगा।
                                       प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर्स श्री जीवन लाल शर्मा ने मतगणना के सभी वैधानिक पहलुओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मतगणना के लिए 14 टेबल लगाएं जाएंगे। प्रत्येक टेबल में अभ्यर्थियों के अभिकर्ता उपस्थित रह सकते हैं। उन्होंने कन्ट्रोल यूनिट मशीन का डेमो दिखाकर मतगणना की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रत्येक मशीन में यह देखना जरूरी है कि उसमें क्लोज बटन दबा हो। यदि किसी कन्ट्रोल यूनिट मशीन में पीठासीन अधिकारी द्वारा क्लोज बटन नहीं दबाया गया है, तो इसकी सूचना तत्काल रिटर्निंग अधिकारी अथवा सहायक रिटर्निंग अधिकारी को दी जाए। प्रशिक्षण में मतगणना कर्मियों कीे विभिन्न शंकाओं का भी समाधान किया गया।

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Chitrakot Assembly by-election, chitrakote by election, CM Bhupesh, dr raman singh, elcetion commission of india 2019-10-12 17:58:17 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/chitrakot-by-elction-tranning.jpg
बैकुंठपुर में शुरू हुई गांधी विचार पदयात्रा, विधायक अंबिका सिंहदेव ने की अगवानी https://deshtv.in/around-the-city/gandhi-vichar-padyatra-started-in-baikunthpur-mla-ambika-singhdev-received/ Fri, 11 Oct 2019 12:10:06 +0000 https://deshtv.in/?p=11038

कोरिया। कोरिया जिले के बैकुंठपुर जनपद में गांधी विचार यात्रा की शुरुआत बैकुंठपुर विधायक अंबिका सिंहदेव ने की। इस अवसर कलेक्टर डोमन सिंह, समेत सैकड़ों की संख्या में कांग्रेस के पदाधिकारी कार्यकर्ता शामिल हुए। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए विधायक अंबिका सिंहदेव ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश महात्मा गांधी जी की 150वी जयंती के […]

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कोरिया। कोरिया जिले के बैकुंठपुर जनपद में गांधी विचार यात्रा की शुरुआत बैकुंठपुर विधायक अंबिका सिंहदेव ने की। इस अवसर कलेक्टर डोमन सिंह, समेत सैकड़ों की संख्या में कांग्रेस के पदाधिकारी कार्यकर्ता शामिल हुए। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए विधायक अंबिका सिंहदेव ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश महात्मा गांधी जी की 150वी जयंती के अवसर पर गांधी विचार यात्रा जारी है, उनके विचारों को घर घर तक पहुंचाया जा रहा है, इस यात्रा के लिए सबसे पहला नाम आमापारा का ही आया। उन्होंने कहा कि हर माता अपने बच्चों को यह सिखाती झूठ मत बोला सिखाया जाता है।

                     बच्चो को हम मारपीट नही करना कहते है यही अहिंसा है। हम सब उनकी विचारधारा पर चल रहे है। हम सबको बच्चो के सामने गुस्सा नही करना है, इससे बच्चे सीखते है और हिंसा फैलती है, हर काम की शुरुआत हमे घर से ही शुरू करनी है। अंबिका सिंहदेव ने कहा कि यदि समाज मे कुपोषण रहेगा, समाज कैसे आगे बढ़ेगा। इस संबंध में कलेक्टर डोमन सिंह ने कहा कि सरकार के निर्देश पर कार्यक्रम चलाया जा रहा है, कुपोषण से लड़ाई के लिए यह कदम है। राशन कार्ड का वितरण शुरू हो गया है छूटे लोगो का भी बन गया है, इस से हर किसी को लाभ मिलेगा। उन्होंने प्लास्टिक के उपयोग न करने को कहा गया।

महिलाओं को मिलेगा भोजन
विधायक अंबिका सिंहदेव ने 150 महिलाओं को गर्म भोजन करा कर शुरुआत की, अब चिह्नकित हितग्राहियों को आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्म भोजन मिलेगा, इसके अलावा चलित चिकिसालय इकाई और मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक योजना का शुभारंभ किया, नवीन राशन कार्ड का वितरण हितग्राहियों को भी किया। इसके अलावा प्लास्टिक के उपयोग न करने को लेकर प्लास्टिक के रावण बनाकर मुख्य अतिथि अम्बिका सिंहदेव के हाथों उसका दहन किया गया।

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baikunthpur gandhi vicharyatra, gandhi vichar padyatra, Gandhi Vichar Padyatra reached Raipur 2019-10-11 17:40:06 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/gandhi-vichar-padyatra-ambikapur-0.jpg
भूपेश सरकार के खिलाफ़ 14 अक्टूबर को किसानों की “तगादा रैली” https://deshtv.in/local-news/strong-rally-of-farmers-against-bhupesh-government-on-october-14/ Fri, 11 Oct 2019 11:11:13 +0000 https://deshtv.in/?p=11029

राजनांदगांव। भूपेश सरकार से किसान अपनी मांगों को लेकर एक तगादा रैली का आयोजन करने जा रहे है। इस रैली में किसान तीन सूत्रीय मांगों को लेकर 14 अक्टूबर को प्रदर्शन करेंगे। रैली में किसान संपूर्ण कर्ज माफी, फसल का मुआवजा और दो सालों के बोनस देने की बात को याद दिलाएंगे। राजनांदगांव जिला किसान […]

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राजनांदगांव। भूपेश सरकार से किसान अपनी मांगों को लेकर एक तगादा रैली का आयोजन करने जा रहे है। इस रैली में किसान तीन सूत्रीय मांगों को लेकर 14 अक्टूबर को प्रदर्शन करेंगे। रैली में किसान संपूर्ण कर्ज माफी, फसल का मुआवजा और दो सालों के बोनस देने की बात को याद दिलाएंगे। राजनांदगांव जिला किसान संघ के प्रमुख सुदेश टीकम ने इस संबंध में जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि किसानों की कर्ज माफी, 2500 रुपए समर्थन मूल्य, दो साल का पुराना बोनस एवं अन्य वादा कर कांग्रेस ने भारी बहुमत से सरकार बनाई थी। सत्ता में आते ही कर्जमाफी की घोषणा की एवं लिंकिंग में वसूला ऋण वापस किया। किसान खुश हुए वाहवाही भी मिली, लेकिन किसान जब पुन: खाद – बीज व ऋण के लिए सोसायटी पहुंचे तो 2017 का ऋण ब्याज सहित वसूल किया गया, तभी खाद-बीज व ऋण दिया गया, जो ऐसा नहीं कर पाए वे आज भी ऋण सुविधा से वंचित हैं। इसे किसानों ने सरकार की धोखेबाजी क़रार दिया है। किसानों का कहना है कि जब राशि वसूलनी ही थी तो पहले पैसा वापस कर वाहवाही नहीं लूटनी थी।

 

नहीं हुआ निजी बैंकों का क़र्ज़ माफ
किसान संघ के प्रमुख सुदेश टीकम ने सरकार पर आरोप मढ़ते हुए कहा कि क़र्ज़ माफ़ी के मामलें में इस सरकार ने राष्ट्रीयकृत बैंकों के किसानों को भी सरकार द्वारा तय पूरी राशि नहीं दी गई है। जिससे प्रतिमाह ब्याज का बोझ बढ़ रहा है। निजी बैंकों के किसानों का एक रुपए भी कर्ज माफ नहीं हुआ है। जिससे किसान ठगा महसूस कर रहे हैं।

नहीं मिला है मुवावज़ा
किसान संघ के जिला प्रमुख ने कहा कि वर्तमान सरकार ने एक तरफ आधी-अधूरी कर्ज माफी कर दी, और दूसरी तरफ़ देर से और अनियमित बारिश से खराब हुई फसल के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। उन्होंने कहा की जिला किसान संघ मुलाकात, ज्ञापन, किसान-मार्च इत्यादि द्वारा लगातार सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है, पर सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही है।

मांगेंगे 2 साल का बोनस
भूपेश सरकार से किसान अपना पिछले दो साल का बोनस भी मांगेगी। सुदेश ने कहा कि दो सालों का पुराना बोनस देने के वादे पर सरकार कुछ भी नहीं कर रही है। इन परिस्थितियों में जिला किसान संघ ने विवश होकर सडक़ पर तगादा करने का फैसला लिया है। तीन सूत्रीय मांगों के लिए तगादा रैली की तैयारी गांव-गांव में बैठक, संपर्क एवं पर्ची वितरण कर किया जा रहा है।

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aanolan kisan, kisan aandolan, kisan karj maafi, kisan karj mafi, rajnandganv, rajnandganv me pdrshan 2019-10-11 16:41:49 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/Kisaan-aandolan-1.jpg
झीरम कांड : शैलेश के आठ बिंदुओं पर हो सकती है जाँच… https://deshtv.in/around-the-city/jheeram-scandal-shailesh-may-be-investigated-at-eight-points/ Fri, 11 Oct 2019 10:13:22 +0000 https://deshtv.in/?p=11024

बिलासपुर। झीरम कांड की जांच कर रहे विशेष न्यायिक आयोग के अध्यक्ष जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा कल हुए बयानों पर जांच का मन बना रहे है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़ न्यायिक आयोग ने इन बिंदुओं के तहत पूछताछ करने संबंधित लोगो की लिस्टिंग करने को कहा है। हालाँकि इस बात की अब तक […]

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बिलासपुर। झीरम कांड की जांच कर रहे विशेष न्यायिक आयोग के अध्यक्ष जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा कल हुए बयानों पर जांच का मन बना रहे है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़ न्यायिक आयोग ने इन बिंदुओं के तहत पूछताछ करने संबंधित लोगो की लिस्टिंग करने को कहा है। हालाँकि इस बात की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।

                    दरअसल झीरम के इस न्यायिक जाँच आयोग के समक्ष कल कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता शैलेश नितिन त्रिवेदी और भिलाई के महापौर व विधायक देवेन्द्र यादव का प्रतिपरीक्षण किया गया। इन दोनों के साथ घटना के चश्मदीद डॉ शिवनारायण द्विवेदी ने इस पुरी घटना को ही सुपारी किलिंग बताया है। इसके आलावा शैलेश त्रिवेदी ने मामलें में आयोग के समक्ष आठ बिंदुओं पर जांच की मांग भी रखी है। जिस पर आयोग ने विचार करने की बात कल कहीं थी।

ये है झीरम घटना की जांच में 8 नये बिन्दु

1 नवंबर 2012 में स्व. महेन्द्र कर्मा पर हुये हमले के पश्चात् क्या उनकी सुरक्षा की समीक्षा प्रोटेक्शन रिव्यू ग्रुप के द्वारा की गई थी ?

2 स्व. महेन्द्र कर्मा को नवंबर 2012 में उन पर हुये हमले के पश्चात्, उनके द्वारा मांगी गई अतिरिक्त सुरक्षा की मांग पर किस स्तर पर विचार निर्णय किया गया था और उस पर क्या कार्यवाही की गई थी ?

3 गरियाबंद जिले में जुलाई 2011 में स्व. नंद कुमार पटेल के काफिले पर हुये हमले के पश्चात् क्या स्व. पटेल एवं उनके काफिले की सुरक्षा हेतु अतिरिक्त सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी और क्या उन अतिरिक्त सुरक्षा मानकों का पालन जीरम घाटी घटना के दौरान किया गया ?

4 क्या राज्य में नक्सलियों के द्वारा पूर्व में किये गये बड़े हमलों को ध्यान में रखते हुये नक्सली इलाकों में यात्रा आदि हेतु किसी निर्धारित संख्या में या उससे भी अधिक बल प्रदाय करने के कोई दिशा-निर्देश थे ? यदि हां तो उनका पालन किया गया ? यदि नहीं तो क्या पूर्व के बड़े हमलों की समीक्षा कर कोई कदम उठाये गये ?

5 नक्सल विरोधी आपरेशन में और विशेषकर टी.सी ओ.सी. की अवधि के दौरान यूनिफाईड कमाण्ड किस तरह अपनी भूमिका निभाती थी ? यूनिफाईड कमांड के अध्यक्ष के कर्तव्य क्या थे और यूनिफाईड कमाण्ड के तत्कालीन अध्यक्ष ने अपने उन कर्तव्यों का उपर्युक्त निर्वहन किया ?

6 25 मई 2013 को बस्तर जिले में कुल कितना पुलिस बल मौजूद था ? परिवर्तन यात्रा कार्यक्रम की अवधि में बस्तर जिले से पुलिस बल दूसरे जिलों में भेजा गया ? यदि हां तो किस कारण से और किसके आदेश से ? क्या इसके लिये सक्षम स्वीकृत प्राप्त की गई थी ?

7 क्या नक्सली किसी बड़े आदमी को बंधक बनाने के पश्चात् उन्हें रिहा करने के बदले अपनी मांग मनवाने का प्रयास करते रहे है ? स्व. नंद कुमार पटेल एवं उनके पुत्र के बंधक होने के समय ऐसा नहीं करने का कारण क्या था ?

8 सुकमा के तत्कालीन कलेक्टर, अलेक्स पाल मेनन के अपहरण एवं रिहाई में किस तरह के समझौते नक्सलियों के साथ किये गये थे ? क्या उनका कोई संबंध स्व. महेन्द्र कर्मा की सुरक्षा से था ?

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darbha ghati jagdlpur, jhiram darbha ghati kand, jhiram kand, shailesh nitin trivedi, zhiram kand 2019-10-11 15:43:22 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/Jhiram-Byaan-0.jpg
कोरिया के खड़गवां ब्लॉक में दो दर्जन हाथी, फ़ैली दहशत… https://deshtv.in/around-the-city/two-dozen-elephants-in-the-khargawan-block-of-korea-fear-panic/ Thu, 10 Oct 2019 13:08:51 +0000 https://deshtv.in/?p=11013

बैकुंठपुर। छत्‍तीसगढ़ के कोरिया जिले के खड़गवां विकासखण्ड में करीब दो दर्जन हाथियों का एक झुण्ड रिहायशी इलाके में आ पहुंचा है। जिससे ग्रामीणों में भारी दहशत देखी जा रही है। हालाँकि वन अमला इस झुण्ड को जंगल की तरफ खदेड़ने का काम लगातार कर रही है। दो अलग अलग झुंडों में बटने के कारण […]

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बैकुंठपुर। छत्‍तीसगढ़ के कोरिया जिले के खड़गवां विकासखण्ड में करीब दो दर्जन हाथियों का एक झुण्ड रिहायशी इलाके में आ पहुंचा है। जिससे ग्रामीणों में भारी दहशत देखी जा रही है। हालाँकि वन अमला इस झुण्ड को जंगल की तरफ खदेड़ने का काम लगातार कर रही है। दो अलग अलग झुंडों में बटने के कारण वन विभाग की मुश्किलें बढ़ गई है। इधर रिहायशी इलाकों में हाथियों के पहुंचने की खबर मिलने पर पुलिस अधिकारी भी मौके पर मोर्चा सम्हाले हुए है।


मिली जानकारी के मुताबिक़ बुधवार की रात 22 हाथियों का दल खडगवां परिक्षेत्र पहुंचा, बाद दल दो भागों में बंट गया, एक दल बेलबहरा जंगल दूसरा गोड़ीमुड़ा जंगल मे चला गया। ग्रामीणों ने हाथियों के चिंघाड़ने की आवाज सुनी, और कुछ ग्रामीण हिम्मत करके अपने घरों से बाहर निकले तो देखा कि एक-दो नहीं बल्कि दो दर्जन से अधिक हाथी जंगल की और से रिहायशी इलाके की तरफ पहुंच चुके है। तत्काल उन्होंने इसकी जानकारी वन अमले के साथ पुलिस को दी। हाथियों का यह दल खड़गवां के रास्ते रतनपुर, कोटेया, जिल्दा, भरदा, तामडांड, कोडांगी सहित आसपास के टोले-मजरे में भ्रमण कर रहा है। इतनी बड़ी संख्‍या में हाथियों के पहुंचने से ग्रामीण दहशत में है। वे अपनी फसलों व मकानों को हाथि‍यों से बचाने के लिए रतजगा करने को मजबूर है।

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aavaara hathi, hai, hathi, hathi ka dal, hathi ka jhund, jangali hathi, koriya me hathi 2019-10-10 18:38:51 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/hathi-01.jpg
राजधानी दशहरा में पुलिस ने नहीं किया हर्ष फायर, पर कोरिया रैली में फ़ायरिंग https://deshtv.in/around-the-city/police-did-not-fire-harsha-in-dussehra-but-guns-went-off-in-bike-rally/ Wed, 09 Oct 2019 10:27:46 +0000 https://deshtv.in/?p=10949

बैकुंठपुर। दशहरा पर शस्त्र पूजन के बाद भले ही रायपुर पुलिस ने हर्ष फायर केवल सुरक्षा के लिहाज़ से नहीं किया, मगर सैकड़ों लोगो के साथ निकली बाईक रैली में अपना जलवा दिखने के लिए खुले आम बंदूके चलाई गई। हैरानी कि बात ये है इस मामलें में पुलिस ने अब तक कोई भी कार्यवाही […]

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बैकुंठपुर। दशहरा पर शस्त्र पूजन के बाद भले ही रायपुर पुलिस ने हर्ष फायर केवल सुरक्षा के लिहाज़ से नहीं किया, मगर सैकड़ों लोगो के साथ निकली बाईक रैली में अपना जलवा दिखने के लिए खुले आम बंदूके चलाई गई। हैरानी कि बात ये है इस मामलें में पुलिस ने अब तक कोई भी कार्यवाही नहीं की है। बैकुंठपुर में विभिन्न हिन्दू संगठनों ने विशाल बाईक रैली का आयोजन किया था। जिसमें सैकड़ों लोग शामिल रहे। इस रैली में शौर्य प्रदर्शन के साथ खुद का रुआब बताने न सिर्फ तलवारे और बंदूके हवा में लहराई गई बल्कि एयर फायर भी किया गया।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दशहरा के दिन बैकुंठपुर के प्रेमाबाग मंदिर में सुबह से ही लोगों का जुटना शुरू था। दोपहर में मंदिर परिसर से पूजा अर्चना कर दशहरा की विशाल रैली की निकाली गई। जिसमें भारी संख्या में युवा शामिल हुए। मंदिर परिसर से शुरू दशहर रैली मुख्य मार्ग से होकर चरचा कॉलरी पहुंची। जहाँ राम मंदिर में पूजा अर्चना की गयी इसके बाद रैली यही आकर समाप्त हो गयी। लेकिन इस बीच ही रैली में बंदूक लहरा रहे जोशीले युवकों ने एयर फायर कर दिया। इतना ही नहीं बल्कि डीजे की धुन पर ये युवा बंदूक लहराते नज़र आए। उल्लेखनीय है कि इस रैली में विधायक अंबिका सिंहदेव भी शामिल हुई थी। यह उनकी पहली दशहरा रैली थी।

देखा, डांटा और जाने दिया
बैकुंठपुर के प्रेमाबाग मंदिर परिसर से शुरू हुई दशहरा रैली के दौरान एक व्यक्ति जब अपनी ही पिस्टल से तीन चार हवाई फायर किया, तो उन्हें ड्यूटी में तैनात उप पुलिस अधीक्षक ने रोका और जमकर लताड़ा। फटकारते हुए डीएसपी ने उन्हें कार्यवाही की धमकी भी दी, लेकिन उसे जाने दे दिया। अब जब ये बात एसपी तक पहुंची तो साहब ने सीसीटीवी फुटेज खंगालने के आदेश जारी कर दिया है। आदेश के बाद पुलिस की एक टीम उक्त फायरिंग के फुटेज खंगालने में लगी हुई है।

सुरक्षा के लिहाज़ से बंद किया हर्ष फायर
इधर राजधानी पुलिस ने तक़रीबन पांच साल पहले ही शस्त्र पूजा के बाद किए जाने वाले हर्ष फायर पर रोक लगा दी थी। आला अधिकारियों का मानना है कि इस हर्ष फायर से अनजाने में कोई घटना घटित हो सकती है लिहाज़ा इसकी आशंका को देखते हुए पुलिस शस्त्र पूजन के बाद स्टाफ द्वारा किए जाने वाले हर्ष फायर पर भी रोक लगा दी थी।

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Dussehra, Harsh fire by police, Harsh fire by raipur police in Dussehra, Harsh fire in Dussehra, raipur police shastra puja, shastra puja 2019 raipur 2019-10-09 16:17:25 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/Air-fire-in-raipur-01.jpg
दंतेवाड़ा मुठभेड़ : शहीद हुआ था कैलाश नेताम, कंधे में फसीं थी गोली https://deshtv.in/around-the-city/kailash-netam-was-martyred-shot-in-the-shoulder/ Wed, 09 Oct 2019 07:54:43 +0000 https://deshtv.in/?p=10937

दंतेवाड़ा। मंगलवार को कटेकल्याण थाना क्षेत्र में हुए माओवादियों के साथ मुठभेड़ के दौरान डीआरजी के जवान कैलाश नेताम की मौत हार्ट अटैक से नहीं बल्कि नक्सलियों की गोली लगने से हुई थी। इस बात का खुलासा आज पोस्टमार्टम के दौरान हुआ है। दरअसल जवान ने मुठभेड़ के दौरान अपने साथियों से सीने में तेज़ […]

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दंतेवाड़ा। मंगलवार को कटेकल्याण थाना क्षेत्र में हुए माओवादियों के साथ मुठभेड़ के दौरान डीआरजी के जवान कैलाश नेताम की मौत हार्ट अटैक से नहीं बल्कि नक्सलियों की गोली लगने से हुई थी। इस बात का खुलासा आज पोस्टमार्टम के दौरान हुआ है। दरअसल जवान ने मुठभेड़ के दौरान अपने साथियों से सीने में तेज़ दर्द की बात कहीं थी और फिर मौके पर ही अपने प्राण त्याग दिया था। मुठभेड़ खत्म होने के बाद उसके शव को साथियों ने उठाकर कैंप लाया, और पीएम के लिए पंचनामा तैयार कर रवाना कर दिया।

                  जब जवान कैलाश नेताम नेताम का पीएम से पहले एक्स-रे किया गया तब उसके सीने में गोली नज़र आई जिसके बाद पुरे मामलें का खुलासा हुआ। चिकित्सकों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दंतेवाड़ा एसपी अभिषेक पल्लव ने कहा गोली जाँघ की हड्डी से टकराई और फिर उसकी दिशा घूम गई थी। दिशा बदलने से गोली अंदर ही अंदर किडनी, लीवर और हार्ट को भेदते हुए कंधे पर फँस गई। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने जब अंदुरनी चोट देखने एक्सरे किया तब ये बात सामने आई है। दंतेवाड़ा एसपी ने ये भी कहा कि गोली जिस जगह पर लगी वहाँ से ख़ून का रिसाव नही हुआ, और जवान कैलाश नेताम सीने पर हाथ रख कर दर्द की बात बताते हुए अचेत हुआ था। जिसकी कटे कल्याण में मृत्यु की पुष्टि हुई तब शुरुवाती खबर यही आई थी के उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई है।

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bastar, Dantewada, dantewada me naxal muthbhed, DRG kailash netam, kailash netam, naxal muthbhed, naxal muthbhed dantewada 2019-10-09 13:24:43 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/Kailash-netam.jpg
रियासत और जनजातीय परंपरा का अनुठा संगम बना “जशपुर का दशहरा” https://deshtv.in/around-the-city/dussehra-of-jashpur-becomes-a-unique-confluence-of-princely-and-tribal-traditions/ Wed, 09 Oct 2019 06:26:20 +0000 https://deshtv.in/?p=10929

जशपुरनगर। जशपुर दशहरे को दुनिया में विशिष्ट पहचान मिल रही है और ऐसा दशहरा कहीं भी देखने को नहीं मिलता है। कालांतर यहां के दशहरा को दुनिया के सांस्कृतिक मंच पर पहचान दिलाने कोई ठोस पहल नहीं की गई, लेकिन जिसने भी देखा उसका यही कहना होता है कि ऐसा दशहरा दुनिया में कहीं नहीं […]

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जशपुरनगर। जशपुर दशहरे को दुनिया में विशिष्ट पहचान मिल रही है और ऐसा दशहरा कहीं भी देखने को नहीं मिलता है। कालांतर यहां के दशहरा को दुनिया के सांस्कृतिक मंच पर पहचान दिलाने कोई ठोस पहल नहीं की गई, लेकिन जिसने भी देखा उसका यही कहना होता है कि ऐसा दशहरा दुनिया में कहीं नहीं देखा। दशहरा उत्सव जशपुर रियासत के साथ जनजातीय पंरपरा का अनूठा संगम है। अपने समृद्व परंपरा और विशेष पूजा पद्वती से यहां के दशहरा महोत्सव को अब राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिल रही है। जिले वासियों के लिए जशपुर दशहरा एक महा उत्सव है, जिसे राज परिवार के पिछले 27 पीढ़ी से उसी उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह जिले का ऐसा उत्सव है जिसमें साल में एक बार एक स्थान पर हजारों की संख्या में लोग एकत्रित होकर इस त्योहार को पूरे उत्साह के साथ मनाते हैं। दशहरा महोत्सव का शुभारंभ यहां के सबसे पवित्र स्थल माने जाने वाले पक्की डेयोढ़ी से प्रारंभ होता है जहां मान्यता अनुसार जिले की सत्ता को संचालित करने वाले देव स्थल बालाजी मंदिर और काली मंदिर से अस्त्र-शस्त्रों को लाकर पूजा की जाती है।

एक झांकी के रूप में राजपरिवार के सदस्य और जिले के पुरोहित यहां विशेष पूजा अर्चना करते हैं। राजपुरोहित आचार्य विनोद मिश्रा के अनुसार शक्ति की उपासना इस पूजा में होती है, जहां मां काली को काले रंग के बकरे की बलि चढ़ाई जाती है। पक्की डाड़ी से पवित्र जल बाजे गाजे के साथ देवी मंदिर मे लाया जाता है, जहां कलश स्थापना कर अखंड दीप प्रज्वलित किया जाता है। इसी के साथ नियमित रूप से 21 आचार्यों के मार्ग दर्शन में राज परिवार के सदस्य सहित नगर व ग्रामों से आए श्रद्धालु मां दुर्गा की उपासना वैदिक, राजसी और तांत्रिक विधि से करते हैं, जिसमें पूरे नवरात्र तक हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। नवरात्र की पूजा यहां के आठ सौ साल पहले स्थापित काली मंदिर में होती है, जहां 21 आचार्य हर दिन विश्व कल्याण को लिए अनुष्ठान करते हैं। इस मंदिर की स्थापना राज परिवार ने की थी, जिसमें मां काली की प्रतिमा का प्राण प्रतिष्ठा आचार्य खगेश्वर मिश्रा के द्वारा 8 सौ साल पहले की गई थी। यहां हर एक त्योहार में नगरवासियों और जनजातियों में पूजा पद्धति में कुछ विभिन्नतांए हैं, लेकिन दशहरा महोत्सव में बैगा, पुजारी, आचार्य सभी एक पंरपरा का निर्वहन करते हैं। किसी की भी अनुपस्थिति होती है तो पूरा उत्सव अधूरा होता है। दशहरा महोत्सव के माध्यम से जिलेवासी अपनी अमूल्य सांस्कृतिक परंपरा को पीढ़ी दर पीढ़ी स्थांतरित कर रहे हैं।

वनदुर्गा को दिया जाता है आमंत्रण
एक ओर जहां नियमित रूप से हवन, पूजन में श्रद्धालु लीन होते हैं, वहीं षष्ठी के दिन वनदुर्गा को दशहरा के अवसर पर इस विशेष अनुष्ठान में शामिल करने के लिए विशेष आमंत्रण दिया जाता है। आमंत्रण के लिए षष्ठी के दिन शाम में विशेष झांकी निकलती है जो देवी मंदिर से लगभग दो किलोमीटर पर स्थिति ग्राम जुरगुम जाती है। वनदुर्गा को मां काली की सेना के रूप में भी समझा जाता है, जिसमें उन प्रेत आत्माओं को भी आमंत्रण दिया जाता है, जिन्हें सतकर्मांे के लिए मां काली ने अपने नियंत्रण में लिया था। षष्ठी के दिन आमंत्रण देने के बाद वन दुर्गा को सप्तमी के दिन लाने भी आचार्य झांकी के साथ जाते हैं। यहां से सप्तमी के दिन वनदुर्गा के प्रतीक के रूप में बेल के फल को लाया जाता है और उसे देवी मंदिर में स्थापित कर पूजा की जाती है। अष्टमी और नवमी के संधी समय में रात के बारह बजे इस दिन मेष(भेड़) के बली की पंरपरा रही है। बलि मृरधाओं के द्वारा दी जाती रही है। रियासत के समय से ही यह परंपरा विकसित हुई थी। पूर्व राजा के द्वारा बलि चढ़ाने के लिए एक परिवार को नियत किया गया था, जिसे मृरधा कहा जाता है। दो दशक पूर्व से यहां भैंस की बलि चढ़ाने की परंपरा बंद हो गई। आचार्य बताते हैं कि पहले यहां दशहरा महोत्सव में सात भैंसो की बलि चढ़ाने की पंरपरा थी।

भगवान बालाजी के साथ निकलती है शोभा यात्रा
दशहरा महोत्सव तब अपने उत्कर्ष पर होता है जब विजय दशमी के दिन यहां विशाल शोभा यात्रा निकाली जाती है। दशहरा के दिन हजारों की संख्या में श्रद्वालू जिले भर से यहां के बालाजी मंदिर में एकत्रित होते हैं और भगवान बालाजी की विशेष पूजा अर्चना के बाद उन्हें लकड़ी से बने विशेष रथ में स्थापित किया जाता है। एक रथ में जहां भगवान होते हैें, वहीं दूसरे रथ में पुरोहित व राज परिवार के सदस्य होते हैं। शोभा यात्रा यहां के रणजीता स्टेडियम में पहुंचती है। इस स्थान को पहले रैनी डांड कहा जाता था। रणजीता मैदान में नगर के विभिन्न स्थलों से निकली मां दुर्गा की शोभा यात्रा भी पहुंचती है। यहां कृत्रिम लंका का निर्माण किया जाता है, जिसमें भव्य रावण सहित कुंभकर्ण, मेघनाद व अहिरावण के पुतले होते हैं। पहले हनुमान के द्वारा कृत्रिम लंका में आग लगाया जाता है, फिर रामायण के क्रम में रावण का भी अंत होता है। अब यहां आतिशबाजी की परंपरा भी प्रारंभ हो गई है जिसका नजारा आकाश में घंटो देखने को मिलता है। रावण दहन के दिन यहां अपराजिता पूजा का भी विशेष महत्व है, जिसे आचार्य व राजपरिवार के सदस्य करते हैं। आम लोगों की भी इसमें भागीदारी होती है। अपराजिता पूजा के पीछे मान्यता है कि रावण वध के पूर्व भगवान श्री राम ने अपराजिता पूजा की थी। दशहरा के दिन अंतिम कार्यक्रम के रूप में रणजीता मैदान में भगवान के रथ से नीलकंठ पक्षी के उड़ाने की पंरपरा है। यह विशेष बैगा के द्वारा यहां के बालाजी मंदिर में लाया जाता है। आचार्य विनोद मिश्रा ने बताया कि दशहरा में नीलकठ पक्षी को देखना शुभ माना जाता है। इसके पीछे मान्यता है कि रावण वध के समय रावण ने हनुमान को उनके वास्तवित रूप में पहचान लिया था और हनुमान ने शिव के नीलकंठ रूप में दर्शन दिए थे। इसके बाद ही रावण को मुक्ति मिली थी। माना जाता है कि यदि नीलकंठ पूर्व और उत्तर की ओर उड़ता है तो पूरे जिले के लिए यह वर्ष शुभ होता है, वहीं नीलकंठ यदि अन्य दिशाओं की ओर उड़ता है तो प्राकृतिक आपदाओं सहित अन्य परेशानियों का संकेत होता है। नीलकंठ को राजपरिवार के सदस्यों द्वारा उड़ाया जाता है।

हर चीज परंपरा से जुड़ी
यहां के दशहरा में एक खास बात देखने को मिलती है, जिसमें हर कार्य उसी परिवार के द्वारा किया जाता है जो पिछले 27 पीढ़ी से इस कार्य को कर रहे हैं। दशहरा में वहीं वादक ढोल, नगाढ़े और शहनाई के साथ शामिल होते हैं जो परंपरागत रूप से इस उत्सव में वादन करते आ रहे हैं। जो बैगा नीलकंठ पकड़ कर लाता है, वह भी 27 पीढ़ियों से इस कार्य में जुड़ा है। बताया जाता है कि नीलकंठ पकड़ने के लिए वह जाल नहीं बिछाता है बल्कि आराधना करता है और स्वयं ही नीलकंठ पक्षी उसके पास आ जाते हैं। इसी प्रकार शस्त्र पकड़ने वाले सैनिक, बलि करने वाले मृरधा सभी पीढ़ी दर पीढ़ी अपने दायित्व निभा रहे हैं।

नील कंठ की दिशा से देखते हैं भविष्य
दशहरा पर नीलकंठ उठाने की परंपरा है, जिसे दशहरा मैदान यानी रैनी डांड में रावण दहन के बाद उडाया जाता है। मान्यता है कि जिस दिशा में नील कंठ उड़ता है, उसपर ही यह बताया जाता है कि आने वाला वर्ष जशपुर और देश के लिए कैसा होगा। आचार्य बताते हैं कि यदि नीलकंठ पूर्व और उत्तर दिशा की ओर उड़ता है तो नगर में खुशहाली होती है और धन धान्य से भरा होता है।

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देश विशेष : इस आस्था और इतिहास का समुचित संरक्षण होना चाहिये https://deshtv.in/around-the-city/country-specific-there-should-be-proper-protection-of-this-faith-and-history/ Tue, 08 Oct 2019 10:46:15 +0000 https://deshtv.in/?p=10914

देश टीवी विशेष। बस्तर (छतीसगढ़) में पले–बढ़े,वर्तमान में एक सरकारी उपक्रम एन.एच.पी.सी मे प्रबंधक राजीव रंजन प्रसाद ने बस्तर की गहरी संवेदनाओ के साथ पड़ताल की है। कला, संस्कृति, साहित्य, राजनीति से लेकर तमाम सामयिक मुद्दों पर वे लिखते रहते हैं। वे बस्तर के उन पक्षों, तथ्यों, और विशेषताओं को सामने रखते हैं जो अब […]

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देश टीवी विशेष। बस्तर (छतीसगढ़) में पले–बढ़े,वर्तमान में एक सरकारी उपक्रम एन.एच.पी.सी मे प्रबंधक राजीव रंजन प्रसाद ने बस्तर की गहरी संवेदनाओ के साथ पड़ताल की है। कला, संस्कृति, साहित्य, राजनीति से लेकर तमाम सामयिक मुद्दों पर वे लिखते रहते हैं। वे बस्तर के उन पक्षों, तथ्यों, और विशेषताओं को सामने रखते हैं जो अब तक बहुत कम देखने-सुनने-पढ़ने को मिलती है। चर्चित किताब ‘आमचो बस्तर’ के लेखक राजीव रंजन प्रसाद को उनकी किताब ‘बस्तरनामा’ के लिए भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने अपने प्रतिष्ठित ‘राहुल सांकृत्यायन पर्यटन पुरस्कार’ से सम्मानित किया है। देश टीवी पोर्टल पर नवरात्रि के नौ दिनों तक उनके आलेखों की श्रृंखला की यह अंतिम कड़ी – संपादक

बस्तर के इतिहास को ले कर बहुत गहरी धुंध है जिसके शीघ्र छटने की संभावना भी नहीं दिखती। इतिहास का लेशमात्र भी संरक्षण करने की वृत्ति बस्तर के पुरातात्विक महत्व की प्रतिमाओं और स्थानों को ले कर अब भी नहीं है। इतना अवश्य है कि बात नल शासकों की हो, नागों की हो अथवा काकतीय/चालुक्यों की, इस अंचल में शाक्त अथवा देवियों की प्रति अगाध आस्था सर्वदा विद्यमान रही है। मणिकेश्वरी देवी को नागों की कुलदेवी माना जाता है जिनकी अनेक प्रतिमायें व मंदिर बस्तर के लगभग हर कोने में विद्यमान हैं। मणिकेश्वरी ही नहीं अपितु कुरुषपाल से प्राप्त नाग शासक सोमेश्वर देव के अभिलेख (11वीं सदी) में विन्ध्यवासिनी देवी पर उनकी अगाध आस्था का उल्लेख मिलता है। दंतेश्वरी देवी बस्तर में काकतीय/चालुक्य शासन के संस्थापक अन्नमदेव के साथ ही प्रधानता से पूजित होती रही हैं।

                                        शाक्त आस्था का कितना प्रभाव बस्तर इतिहास के पुराने पन्नों में रहा होगा इसकी कुछ झलख तो वर्तमान में भी महसूस की जा सकती है तथापि अतीत के साक्ष्य हमने बहुत सुरक्षित नहीं रखे हैं। बस्तर में छोटे डोंगर, बारसूर, दंतेवाड़ा, बडे डोंगर, भैरमगढ, समलूर, बारसूर, केशकाल, सुरडोंगर, भोपालपट्टनम, कोण्डागाँव, नारायणपुर आदि स्थानों पर महिषासुरमर्दिनी, दंतेश्वरी, मणिकेश्वरी, चतुर्भुजी पार्वती, लक्ष्मी, सरस्वती, चामुण्डा, शिवा, इंद्राणी आदि की प्रतिमायें प्राप्त हुई हैं। बस्तर में स्थान स्थान पर सप्तमातृकाओं के प्रतिमा पट्ट प्राप्त हुए हैं जिनमें नौ देवियों के अतिरिक्त गणेश भी उकेरे गये हैं। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार सप्तमातृकाओं से जुडा प्रसंग शिव अंधकासुर युद्ध के समय का है। युद्ध के समय अंधकासुर के शरीर से जितनी रक्त की बूंदे निकलती थीं उससे पुन: नये और उतने ही अंधकासुर उत्पन्न हो जाते थे। इस राक्षस के वध के लिये शिव, ब्रम्हा, विष्णु, इन्द्र, कुमार, वाराह तथा यम इन सात देवताओं ने अपनी शक्तियों से क्रमश: माहेश्वरी, ब्राम्ही, वैष्णवी, इन्द्राणी, कौमारी, वाराही तथा चामुण्डा देवियाँ उत्पन्न कीं। इन सात देवी शक्तियों ने रक्त को भूमि पर गिरने से रोक दिया और राक्षस का वध हो सका। ये सप्तमातृकायें चूंकि बहुतायत मात्रा में बस्तर में प्रतिमाबद्ध की गयी हैं अंत: इनपर भी समुचित शोध होना आवश्यक है। ऐसा ही सर्वाधिक प्राचीन (नल कालीन) सप्तमातृका पट्ट नारायणपुर के पास भोंगापाल के निकट गुप्तकालीन ईंटों के बने मंदिर में भी प्राप्त हुआ है।

                      बस्तर में ऐतिहासिक महत्व की प्रतिमाओं का हश्र यह है कि कोई पेड़ के नीचे प्राप्त होती है तो कोई अब भी आधी जमीन में गडी हुई प्रतीक्षारत है कि किसी संग्रहालय में उन्हें भी स्थान मिल सके। ऐसी ही एक भव्य भैरवी की प्रतिमा को मैने दक्षिण बस्तर के आखिरी छोर कोण्टा से लगे गाँव इंजरम में पाया था। क्रोध में बाल बिखरे हुए साथ ही त्रिशूल और डमरू धारित यह प्रतिमा इतनी सुन्दर थी कि मुझे आश्चर्य हुआ कि इसे अब तक क्यों संरक्षित नहीं किया गया है।

                       संग्रहालयों में प्रतिमाओं को ले कर बहुत उत्साहवर्धक स्थिति नहीं है। ऐतिहासिक रूप से इतने समृद्ध बस्तर के जगदलपुर संग्रहालय में कुल पचपन प्रतिमायें ही संकलित हैं जबकि बारसूर का संग्रहालय अब भी अपूर्ण है और स्टोर में रखी प्रतिमाओं को प्रतीक्षा है उनके प्रदर्शित किये जाने का। बस्तर की देवी प्रतिमाओं पर केन्दित यह श्रंखला प्रस्तुत करने का मेरा उद्देश्य केवल धार्मिक नहीं था अपितु इसके परोक्ष में मैं परिचित कराना चाहता था कि बस्तर के इतिहास की जड़े बहुत गहरी हैं। आप आस्तिक हैं तो अपनी आस्था के लिये और आप नास्तिक हैं तो अतीत के साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिये ही योगदान करें, इस आस्था और इतिहास का समुचित संरक्षण होना चाहिये।
                                                                                         – राजीव रंजन प्रसाद

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bastar, Bastar Dusshera festival, bastar ki danteshvari, chitrakote by election, danteshvari, rajiv ranjan prasad, राजीव रंजन प्रसाद 2019-10-08 16:16:15 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/09/bastar-ka-itihas_03.jpg
दंतेवाड़ा में नक्सली मुठभेड़, नक्सली ढेर, जवान की हार्टअटैक से मौत https://deshtv.in/around-the-city/naxalite-encounter-in-dantewada-naxalite-killed-jawan-dies-of-heart-attack/ Tue, 08 Oct 2019 08:03:34 +0000 https://deshtv.in/?p=10905

दंतेवाड़ा। बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा जिले से नक्सली मुठभेड़ की खबर आई है। दंतेवाड़ा पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक़ कटेकल्याण थाना क्षेत्र के तुमकपाल इलाके में डीआरजी और स्थानीय पुलिस बल के जवानों के साथ नक्सलियों की मुठभेड़ हुई है। जिसमें एक नक्सली के ढेर होने और दर्जन भर से ज्यादा नक्सलियों के घायल […]

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दंतेवाड़ा। बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा जिले से नक्सली मुठभेड़ की खबर आई है। दंतेवाड़ा पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक़ कटेकल्याण थाना क्षेत्र के तुमकपाल इलाके में डीआरजी और स्थानीय पुलिस बल के जवानों के साथ नक्सलियों की मुठभेड़ हुई है। जिसमें एक नक्सली के ढेर होने और दर्जन भर से ज्यादा नक्सलियों के घायल होने की खबर मिली है।

                   इस मुठभेड़ में जवान नक्सलियों पर भारी पड़ने लगे जिसे देख चकमा देकर नक्सली वहां से भाग खड़े हुए। जिसके बाद डीआरजी के टीम स्थानीय पुलिस बल उक्त इलाके में सर्चिंग अभियान चला रही है। फिलहाल मौके से एक नक्सली के शव को बरामद कर लिया गया है, जिसेकी शिनाख्ती के लिए कैंप लाया जा रहा है।हालांकि इस मुठभेड़ में एक बुरी खबर यह भी रही कि मुठभेड़ के दौरान डीआरजी के एक सहायक कॉन्स्टेबल कैलाश नेताम की हार्ट अटैक से मौत हो गई। जिसे मौके से कैंप की तरफ लाया गया है।

              इधर मुठभेड़ की सूचना पर दंतेवाड़ा जिला पुलिस ने अतिरिक्त पुलिस बल और फ़ोर्स के जवानों को भी रवाना कर दिया था। मिली जानकारी के मुताबिक़ यह पूरा ऑपरेशन एडिशनल एसपी सूरजसिंह परिहार के नेतृत्व में चलाया गया था। सर्चिंग टीम अभी भी कटेकल्याण थाना क्षेत्र के तुमकपाल इलाके में नक्सलियों के होने की उम्मीद है। लिहाज़ा डीआरजी के जवान और स्थानीय पुलिस बल की सर्चिंग अब भी जारी है।

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Bhima Mandavi, devti karma mla dantewada, muthbhed, Naxal Hamla, naxal hamla dantewada, naxal muthbhed, ojasvi mandavi 2019-10-08 13:33:34 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/Naxal-hamla-katekalyan-2019-0.jpg
देश विशेष : यहाँ नाग हैं देवी दंतेश्वरी की विरासत के पहरेदार https://deshtv.in/around-the-city/country-special-nag-is-the-guard-of-the-legacy-of-goddess-danteshwari-here/ Mon, 07 Oct 2019 13:18:46 +0000 https://deshtv.in/?p=10885

देश टीवी विशेष। बस्तर (छतीसगढ़) में पले–बढ़े,वर्तमान में एक सरकारी उपक्रम एन.एच.पी.सी मे प्रबंधक राजीव रंजन प्रसाद ने बस्तर की गहरी संवेदनाओ के साथ पड़ताल की है। कला, संस्कृति, साहित्य, राजनीति से लेकर तमाम सामयिक मुद्दों पर वे लिखते रहते हैं। वे बस्तर के उन पक्षों, तथ्यों, और विशेषताओं को सामने रखते हैं जो अब […]

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देश टीवी विशेष। बस्तर (छतीसगढ़) में पले–बढ़े,वर्तमान में एक सरकारी उपक्रम एन.एच.पी.सी मे प्रबंधक राजीव रंजन प्रसाद ने बस्तर की गहरी संवेदनाओ के साथ पड़ताल की है। कला, संस्कृति, साहित्य, राजनीति से लेकर तमाम सामयिक मुद्दों पर वे लिखते रहते हैं। वे बस्तर के उन पक्षों, तथ्यों, और विशेषताओं को सामने रखते हैं जो अब तक बहुत कम देखने-सुनने-पढ़ने को मिलती है। चर्चित किताब ‘आमचो बस्तर’ के लेखक राजीव रंजन प्रसाद को उनकी किताब ‘बस्तरनामा’ के लिए भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने अपने प्रतिष्ठित ‘राहुल सांकृत्यायन पर्यटन पुरस्कार’ से सम्मानित किया है। देश टीवी पोर्टल पर नवरात्रि के नौ दिनों तक उनके आलेखों की श्रृंखला की यह आठवीं कड़ी – संपादक

बात सितरम गाँव की है जिसके निकट एक पहाड़ी टीले पर बस्तर की एक चर्चित प्राचीन परलकोट जमींदारी का किला अवस्थित था। यह स्थान वीर गेन्दसिंह की शहादत स्थली के रूप में भी जाना जाता है चूंकि यहीं एक इमली के पेड़ पर लटका कर आंग्ल-मराठा शासन (1819 से 1842 ई.) के दौरान आदिवासी विद्रोह का दमन करते हुए कैप्टन पेव ने उन्हें 20 जनवरी 1825 को फाँसी पर चढ़ा दिया था। हमारा अपनी विरासतों के प्रति नजरिया बहुत ही निन्दनीय है चूंकि अगर ऐसा न होता तो कदाचित परलकोट किले के भग्नावशेषों को संरक्षित रखने के प्रयास किये गये होते। कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस इमली के पेड़ पर गेंद सिंह को फाँसी दी गयी थी वह सदियों जीता रहा लेकिन हाल ही में जंगल की आग की भेंट चढ़ गया। सौभाग्य से परलकोट में गेंदसिंह के समय की एक इमारत आज भी शेष है। मुझे गेन्दसिंह के ही वंशजों ने बताया कि लगभग ध्वस्त होने की स्थिति में खड़ा प्राचीन मंदिर माँ दंतेश्वरी का है। मंदिर के ठीक सामने गेंदसिंह के स्मृति स्मारक अवस्थित हैं किंतु किसी के भी ध्यान-संज्ञान में भी नहीं आया कि उनके समय के इस मंदिर को बचाने की कोई कोशिश कर ली जाये।

                 मैं सितरम के इस प्राचीन दंतेश्वरी मंदिर को देखने के लिये उत्सुक हो उठा था और जैसे ही मुख्यद्वार तक पहुँचा, चौंक उठा। मंदिर का मुख्यद्वार बहुत छोटा था जिसमे से झुक कर ही भीतर जाया जा सकता था। दरवाजे के निकट की दीवारों में दरारें ही दरारें थी और मुझे एकाएक बड़ा सा नाग दिखाई पड़ा जो बहुत इत्मीनान से दरार छिद्र में बाहर की ओर अपना मुँह निकाले विश्राम की मुद्रा में था। हमारे गाईड बने शहीद गेंदसिंह के परिजनों ने बताया कि मंदिर में बहुत साँप हैं। कई बार तो छ: से सात साँप तक मंदिर के अंदर, कभी दीवार पर चढ़ते तो कभी दरवाजे पर लटके दिखाई पड़ते हैं। मेरे भीतर भय प्रवेश कर गया था और अब मंदिर के भीतर घुसने में हिचकिचाहट हो रही थी। हमें बताया गया कि ये साँप किसी को काटते नहीं हैं बल्कि बहुत आराम से और बहुत लम्बे समय से यहीं रह रहे हैं। कई बार शिवरात्री में स्थानीयों ने निकटस्थ मंदिरों में भी इन साँपो को देखा है तथा उनकी पूजा अर्चना की है। मैने एक बार पुन: दीवार की दरार से झांकते उस साँप की ओर देखा और ऐसा प्रतीत हुआ जैसे उसे मेरी उपस्थिति से कोई मतलब नहीं। वह निश्चित रूप से मेरी ओर देख रहा था लेकिन संभवत: मैं उसके लिये कोई अस्वाभाविक अथवा खतरा तत्व नहीं था। इस बात से मुझमें साहस बढ़ा और मैं दरवाजे से भीतर आ गया। भीतर अंधेरा था और इस बात को सत्यापित किया जा सकता था कि भीतर अनेक नागों ने अपना घर बना लिया है। मंदिर दो हिस्सों में विभक्त है जिसमे सामने का कक्ष अपेक्षाकृत छोटा है।

                                भीतर कुछ दुर्लभ व अनूठी प्रतिमाओं की तस्वीरों को फ्लैश के माध्यम से कैमरे में कैद करने का अवसर प्राप्त हुआ। एक काले पत्थर पर निर्मित प्राचीन देवी प्रतिमा थी जबकि दो सफेद ग्रेनाईट पर गढ़ी गयी प्रतिमायें थीं। चूंकि स्थानीय मान्यतायें इन प्रतिमाओं को माँ दंतेश्वरी का निरूपित करती थी अत: इनका समुचित अन्वेषण होने तक ग्रामीण मान्यताओं के ही साथ चलना उचित होगा। मंदिर के बाहर एक पुरुष प्रतिमा है जिसे शीतला माता के रूप में मान्यता मिली हुई है। यह कहना अधिक प्रासंगिक होगा कि ग्रामीण परम्पराओं ने अपने ही तरीके से इतिहास के कुछ हिस्सों को सुरक्षित तो रखा ही हुआ है।

                          यह प्राचीन मंदिर बहुत लम्बे समय तक सुरक्षित नहीं रहेगा और जाहिर है किसी बरसात ढ़ह कर अपना अस्तित्व खो देगा। क्या इस बात से हमको कोई फर्क पड़ने वाला है? लगभग नष्ट हो चुके इस मंदिर को देख-महसूस कर एक प्राचीन किंवदंति से सहमत हो गया हूँ कि जहाँ खजाना होता है वहाँ उसकी रक्षा के लिये नाग अवश्य होते हैं। हम आज यह समझ सकें अथवा नहीं कि हमारी विरासतें हमारी सम्पदा है लेकिन शायद ये नाग इस बात को जानते समझते हैं इसीलिये वे न तो आगंतुक को डराते डसते हैं न ही इस स्थल को छोड़ कर सदियों से किसी अन्य स्थान पर जा रहे हैं। हाँ, ये नाग सितरम की विरासत के पहरुए हैं।

– राजीव रंजन प्रसाद

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bastar, bastar dashhra, Bastar Dusshera festival, bastar ki maa danteshvari, dashhra bastar, desh vishesh, NAVRATRI VISHESH 2019-10-07 18:48:46 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/Nag-is-the-guard-of-the-legacy-of-Goddess-Danteshwari-here-1.jpg
रायपुर से जगदलपुर निकले परिवार का एक्सीडेंट, एक की मौत, पांच गंभीर https://deshtv.in/around-the-city/accident-of-family-out-of-raipur-jagdalpur-one-dead-five-serious/ Mon, 07 Oct 2019 12:16:00 +0000 https://deshtv.in/?p=10876

जगदलपुर। रायपुर से जगदलपुर के लिए निकला एक परिवार गंभीर हादसे का शिकार हो गया। जगदलपुर के भानपुरी इलाकें में अल सुबह ड्राइवर ने झपकी मारी और गाडी कड़ी ट्रक में जा टकराई। इस हादसे में ड्राइवर ने मौके पर ही डीएम तोड़ दिया था। वहीं कार सवार रायपुर का वाणी परिवार गंभीर रूप से […]

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जगदलपुर। रायपुर से जगदलपुर के लिए निकला एक परिवार गंभीर हादसे का शिकार हो गया। जगदलपुर के भानपुरी इलाकें में अल सुबह ड्राइवर ने झपकी मारी और गाडी कड़ी ट्रक में जा टकराई। इस हादसे में ड्राइवर ने मौके पर ही डीएम तोड़ दिया था। वहीं कार सवार रायपुर का वाणी परिवार गंभीर रूप से घायल हो गया। मौके पर जुटे लोगो ने सभी पांच गंभीर घायलों को 112 की मदद से जगदलपुर के महारानी मेडिकल कॉलेज पहुंचाया।


पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक़ रायपुर से जगदलपुर जा रहे वाणी परिवार की गाडी भानपुरी में दुर्घटनाग्रस्त हुई है। कार क्रमांक CG 04 F 2244 इंडिका में वीरेंद्र सिंह वाणी, सेसमा सिंह वाणी, विनीता जेनेट, आर्यन सिंह वाणी, बेला वाणी और बबली वाणी सवार थे। गाडी खुद वीरेंद्र सिंह वाणी ही चला रहे थे, जिन्हे भानपुरी-बालेंगा के पास झपकी आई और गाडी सीधे कड़ी ट्रक CG 20 H 0951 से जा भिड़ी। तेज़ रफ़्तार गाडी की टक्कर इतनी भयानक थी कि कार चला रहे वीरेंद्र सिंह वाणी की मौके पर ही मौत हो गई, इसके आलावा उनके साथ गाडी में सवार पांच लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका इलाज मेकाज में कराया जा रहा है।

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cg Bhanpuri Road accident, Road accident, Road accident in Bhanpuri, Road accident in Bhanpuri cg 2019-10-07 17:46:00 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/Road-accident-in-Bhanpuri-0.jpg
देश विशेष : बारसूर का भुला दिया गया वैभव है-पेदाम्मागुड़ी https://deshtv.in/around-the-city/desh-vishesh-barsura-is-forgotten-glory-pedammagudi/ Sun, 06 Oct 2019 07:17:52 +0000 https://deshtv.in/?p=10826

देशटीवी विशेष। बस्तर (छतीसगढ़) में पले–बढ़े,वर्तमान में एक सरकारी उपक्रम एन.एच.पी.सी मे प्रबंधक राजीव रंजन प्रसाद ने बस्तर की गहरी संवेदनाओ के साथ पड़ताल की है। कला, संस्कृति, साहित्य, राजनीति से लेकर तमाम सामयिक मुद्दों पर वे लिखते रहते हैं। वे बस्तर के उन पक्षों, तथ्यों, और विशेषताओं को सामने रखते हैं जो अब तक […]

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देशटीवी विशेष। बस्तर (छतीसगढ़) में पले–बढ़े,वर्तमान में एक सरकारी उपक्रम एन.एच.पी.सी मे प्रबंधक राजीव रंजन प्रसाद ने बस्तर की गहरी संवेदनाओ के साथ पड़ताल की है। कला, संस्कृति, साहित्य, राजनीति से लेकर तमाम सामयिक मुद्दों पर वे लिखते रहते हैं। वे बस्तर के उन पक्षों, तथ्यों, और विशेषताओं को सामने रखते हैं जो अब तक बहुत कम देखने-सुनने-पढ़ने को मिलती है। चर्चित किताब ‘आमचो बस्तर’ के लेखक राजीव रंजन प्रसाद को उनकी किताब ‘बस्तरनामा’ के लिए भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने अपने प्रतिष्ठित ‘राहुल सांकृत्यायन पर्यटन पुरस्कार’ से सम्मानित किया है। देश टीवी पोर्टल पर नवरात्रि के नौ दिनों तक उनके आलेखों की श्रृंखला की यह सातवीं कड़ी – संपादक

दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा जिला) के बारसूर को बिखरी हुई विरासतों का नगर कहना ही उचित होगा। एक दौर में एक सौ सैंतालिस तालाब और इतने ही मंदिरों वाला नगर बारसूर आज बस्तर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। कोई इस नगरी को दैत्य वाणासुर की नगरी कहता है तो कोई अतीत का बालसूर्य नगर। यदि इस नगर के निकटस्थ केवल देवी प्रतिमाओं की ही बात की जाये तो बारसूर के देवरली मंदिर में अष्टभुजी दुर्गा, लक्ष्मी, भैरवी, वाराही आदि; दंतेवाड़ा में महिषासुरमर्दिनी की अनेक प्रतिमायें; भैरमगढ में चतुर्भुजी पार्वती की प्रतिमा, समलूर में गौरी की प्रतिमा तथा स्थान स्थान पर सप्तमातृकाओं की प्रतिमा आदि प्राप्त हुई हैं जो यह बताती हैं कि बस्तर भी नागों के शासन समय में देवीपूजा का महत्वपूर्ण स्थल रहा है।

नलों-नागों के पश्चात बहुत कम प्रतिमायें अथवा मंदिर काकतीय/चालुक्य शासकों द्वारा निर्मित किये गये अंत: देवीस्थान के रूप में माँ दंतेश्वरी के अतिरिक्त मावली माता के अनेक मंदिर तो महत्व के हैं ही उनके कालखण्ड की अनेक अन्य भूली बिसरी पुरातात्विक सम्पदायें भी हैं, इनमें से एक है पेदाम्मागुडी। बारसूर पहुँच कर युगल गणेश प्रतिमा, सोलह खम्भा बंदिर, चन्द्रादित्य मंदिर आदि तक आसानी से पहुँचा जा सकता है चूंकि ये मंदिर तथा प्रतिमायें पर्यटकों के मुख्य आकर्षण का केन्द्र बन गयी हैं। मुझे पेदम्मागुडी को खोजने में कठिनाईयाँ हुई क्योंकि यह मंदिर अल्पज्ञात है तथा बारसूर के पर्यटन नक्शे पर प्रमुखता से नहीं दर्शाया गया है। सडकों से अलग हट कर तथा बहुत सी झाडियों के लडते झगडते हुए ही इस प्राचीन देवी स्थान तक पहुँचा का सकता है।

                            अन्नमदेव ने नाग शासकों का वर्ष 1324 में जब निर्णायक रूप से पतन कर दिया तब बारसूर नगरी का वैभव भी धीरे धीरे अतीत की धूल में समा गया। अन्नमदेव के दौर की निशानी माना जाता है यहाँ अवस्थित पेदम्मागुड़ी मंदिर को। इस मंदिर को ले कर दो मान्यतायें हैं पहली यह कि इस मंदिर का अंशत: निर्माण बस्तर में चालुक्य वंश के संस्थापक अन्नमदेव ने करवाया जहाँ उन्होंने अपनी कुलदेवी की प्रथमत: स्थापना की और बाद में उन्हें दंतेवाड़ा ले गये। इससे इतर लाला जगदलपुरी अपनी पुस्तक “बस्तर – लोक कला संस्कृति प्रसंग” में पेदम्मागुड़ी के विषय में लिखते हैं “बारसूर की प्राचीन दंतेश्वरी गुड़ी को नागों के समय में पेदाम्मागुड़ी कहते थे। तेलुगु में बड़ी माँ को पेदाम्मा कहा जाता है। तेलुगु भाषा नागवंशी नरेशों की मातृ भाषा थी। वे दक्षिण भारतीय थे। बारसूर की पेदाम्मागुड़ी से अन्नमदेव ने पेदाम्माजी को दंतेवाड़ा ले जा कर मंदिर में स्थापित कर दिया। तारलागुड़ा में जब देवी दंतावला अपने मंदिर में स्थापित हो गयी, तब तारलागुड़ा का नाम बदल कर दंतावाड़ा हो गया। लोग उसे दंतेवाड़ा कहने लगे।” वस्तुत: बस्तर के इतिहास को ले कर खोज इतनी आधी अधूरी है कि किसी भी निर्णय पर पहुँचना जल्दीबाजी होगी।

प्रमुख बात यह है कि यह प्राचीन मंदिर अपने अलगे हिस्से में तो पूरी तरह ध्वस्त हो गया है किंतु पेदाम्मागुड़ी का पिछला हिस्सा आज भी सुरक्षित है तथा उसकी भव्य बनावट देखने वाले को मंत्रमुग्ध कर देती है। आंचलिकता तो धरोहरों का सम्मान करती ही है और अपने तरीके से उसे संरक्षण भी प्रदान करती है, यही कारण है कि आज भी पेद्दाम्मागुडी में वार्षिक जात्रा के अवसर पर बलि दी जाती है। जन-मान्यता के अनुसार पेद्दाम्मागुडी मंदिर में नि:संतान दम्पत्ति भी अपनी मन्नत माँगने आते हैं। लाला जगदलपुरी सहित अन्य इतिहासकार जिस तरह दंतेश्वरी मंदिर और पेदाम्मागुडी का सम्बन्ध स्थापित करते हैं इससे संरक्षण की दृष्टि से भी आवश्यक हो गया है कि पुरातत्व विभाग इसे बचाने की पहल में आगे आये। यहाँ योजनाबद्ध रूप से इतिहास को खोजने और उसे सहेजने की आवश्यकता है। पहल तो इस बात पर होनी चाहिये कि जो भग्न मंदिर अथवा इमारतें हैं उन्हें सही तरह से सहेज लिया जाये। जिस तेजी से बारसूर में आबादी फैलती जा रही है, आने वाले समय में चाह कर भी पुरातत्व विभाग यहाँ उत्खनन सम्बन्धी कार्य नहीं कर सकेगा। – राजीव रंजन प्रसाद

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barsur, barsur ka ganesh mandir, bastar ki khani, Dantewada, ganesh mandir, ganesh mandir barsur 2019-10-06 12:47:52 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/09/bastar-ka-itihas_04.jpg
Big News : डेढ़ करोड़ से ज़्यादा कैश वैन सहित ले उड़े लुटेरे https://deshtv.in/around-the-city/big-news-more-than-1-5-crore-cash-vans-looted/ Sat, 05 Oct 2019 08:27:31 +0000 https://deshtv.in/?p=10803

रायपुर। बेमेतरा में कैश वैन से डेढ़ करोड़ रुपए की लूट की घटना सामनी आई है। लुटेरों ने कैश वैन को निशाना बना कर तक़रीबन डेढ़ करोड़ की रकम ले उड़े। घटना की सूचना मिली ही पुलिस ने तत्काल पुरे जिले की नाकेबंदी कर दी पर अब तक लुटेरों का कोई भी सुराग़ नहीं मिल […]

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रायपुर। बेमेतरा में कैश वैन से डेढ़ करोड़ रुपए की लूट की घटना सामनी आई है। लुटेरों ने कैश वैन को निशाना बना कर तक़रीबन डेढ़ करोड़ की रकम ले उड़े। घटना की सूचना मिली ही पुलिस ने तत्काल पुरे जिले की नाकेबंदी कर दी पर अब तक लुटेरों का कोई भी सुराग़ नहीं मिल पाया है। घटना स्थल पर बेमेतरा एसपी, एडिशनल एसपी सहित पुलिस के आला अफसर भी पहुंच कर मामलें की छानबीन में जुट गए है। वहीं इस घटना के बाद सूबे के दीगर जिलों में बैंक के कैश वैन और सीमाओं पर चाक चौबंद व्यवस्था की गई। साथ ही अलर्ट भी जारी किया है।


पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक जिला बेमेतरा के झालगांव में ये घटना घटी। हर रोज की तरह बैंकों से नकदी लेकर एटीएम में डालने के लिये कैश वैन निकली थी। जैसे ही वैन झालगांव के पास पहुंची वैसे ही वहां चार अज्ञात आरोपीयों ने कैशवैन को रोका। ये चारो लुटेरे हथियारों से लैस थे। बन्दुक की नोक पर गाडी रुकवाने के बाद लुटेरों ने ड्रायवर और गार्ड से हाथापाई की और उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी जिसके बाद कैशवैन उनसे छीनकर लुटेरे फरार हो गए। जैसे तैसे ड्राइवर और गार्ड ने पुलिस को इसकी खबर दी और पुलिए ने मौके पर पहुंच कर ड्रायवर और गार्ड से पूछताछ कर रही लुटेरों की पतासाजी में जुटे गई है।

भिलाई, दुर्ग, राजनांदगांव, रायपुर में अलर्ट
इधर इस घटना के बाद सूबे के पुलिस मुखिया ने जहाँ पुए प्रदेश में अलर्ट जारी किया है वहीं बेमेतरा जिले से नज़दीक वाले सभी जिलों में तत्काल नाकेबंदी का आदेश दिया है। पुलिस घटना स्थल के नज़दीक और आस पास की सड़कों के भी सीसीटीवी खंगाल रही है।

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bemetara, bemetara me loot, bhilai, cash van me loot, loot 2019-10-05 14:16:18 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/cash-van-loot-1.jpg
देश विशेष : क्या भैंसादोंद डोंगरी में हुआ था महिषासुर वध ? https://deshtv.in/around-the-city/country-specific-did-mahishasura-slaughter-in-bhainsadond-dongri/ Sat, 05 Oct 2019 07:44:50 +0000 https://deshtv.in/?p=10798

देश टीवी विशेष। बस्तर (छतीसगढ़) में पले–बढ़े,वर्तमान में एक सरकारी उपक्रम एन.एच.पी.सी मे प्रबंधक राजीव रंजन प्रसाद ने बस्तर की गहरी संवेदनाओ के साथ पड़ताल की है। कला, संस्कृति, साहित्य, राजनीति से लेकर तमाम सामयिक मुद्दों पर वे लिखते रहते हैं। वे बस्तर के उन पक्षों, तथ्यों, और विशेषताओं को सामने रखते हैं जो अब […]

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देश टीवी विशेष। बस्तर (छतीसगढ़) में पले–बढ़े,वर्तमान में एक सरकारी उपक्रम एन.एच.पी.सी मे प्रबंधक राजीव रंजन प्रसाद ने बस्तर की गहरी संवेदनाओ के साथ पड़ताल की है। कला, संस्कृति, साहित्य, राजनीति से लेकर तमाम सामयिक मुद्दों पर वे लिखते रहते हैं। वे बस्तर के उन पक्षों, तथ्यों, और विशेषताओं को सामने रखते हैं जो अब तक बहुत कम देखने-सुनने-पढ़ने को मिलती है। चर्चित किताब ‘आमचो बस्तर’ के लेखक राजीव रंजन प्रसाद को उनकी किताब ‘बस्तरनामा’ के लिए भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने अपने प्रतिष्ठित ‘राहुल सांकृत्यायन पर्यटन पुरस्कार’ से सम्मानित किया है। देश टीवी पोर्टल पर नवरात्रि के नौ दिनों तक उनके आलेखों की श्रृंखला की यह छठवीं कड़ी – संपादक

                                        महिषासुर के वध स्थल होने का दावा देश के अनेक स्थानों से किया जाता है, बस्तर का बडे डोंगर क्षेत्र भी उनमें से एक है। बस्तर की मान्यता पर विवेचना से पहले इसी कथन से जुडे कुछ प्रचलित स्थलों को जान लेते हैं। दक्षिण भारत का भव्य एतिहासिक शहर है मैसूर। मैसूर शब्द पर ध्यान दीजिये क्योंकि प्रचलित मान्यता है कि एक समय में मैसूर ही महिषासुर की राजधानी ‘महिसुर’ हुआ करती थी; तर्कपूर्ण लगता है कि महिसुर बदल कर मैसूर हो गया हो। मैसूर के निकट की चामुण्डा पर्वत की अवस्थिति है जहाँ यह माना जाता है कि महिषासुर का वध भी यहीं हुआ था। इसी तरह पूर्वी भारत अर्थात हिमांचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में नैना देवी शक्तिपीठ अवस्थित है। पुराणों के अनुसार देवी सती के नैन गिरने के कारण यह शक्तिपीठ स्थापित हुआ किंतु महिषासुर की कथा भी इसी स्थल से जुडी हुई मानी जाती है तथा उसका वध-स्थल भी यहीं पर माना जाता है। कहानियाँ और भी हैं; झारखण्ड के चतरा जिले का भी यह दावा है कि महिषासुर का वध वहीं हुआ। इसके तर्क में तमासीन जलप्रपात के निकट क्षेत्रों में प्रचलित कथा है कि नवरात्र के समय आज भी यहाँ तलवारों की खनक सुनाई देती है तथा यत्र-तत्र सिंदूर बिखरा हुआ देखा जा सकता है।

                             इन सभी कहानियों से अधिक प्रामाणिक मुझे वह संदर्भ लगता है जो बस्तर की मान्यताओं में अवस्थित है। बस्तर के जिस क्षेत्र का संदर्भ मैं प्रस्तुत करने जा रहा हूँ वह हमेशा से ही जंगली भैंसो के लिये विख्यात रहा है; पुनश्च भैंस अर्थात महिष। अपने विशाल स्वरूप और बलिष्ठ काठी के कारण बस्तर के महिष को कभी दैत्याकार लिखा गया तो कभी उसका विवरण भयावहतम शब्दों में प्राचीन पुस्तकों में प्रस्तुत किया गया है। बस्तर के इन महिषों/जंगली भैंसों पर गल्सफर्ड की डायरी (1860) से लिया गया यह एक विवरण देखें – “इसकी एक सींग साढे अठहत्तर इंच लम्बी होती है। यदि हम मस्तक की खोपड़ी एक फुट चौड़ी माने तो यह सिर से पैर तक चौदह फुट ऊँचा होता है”। यदि इस कहानी का बस्तर से उद्गम माना जाये तो यहाँ के महिष पालतू नहीं थे तथा उनका शिकार किया जाता रहा है। वस्तुत: महिषासुर के वध से जुडी कहानी बस्तर के बड़े डोंगर क्षेत्र से मानी जाती है।

                                       बडे डोंगर में मेरी अभिरुचि पुरातात्विक महत्व के अनेक कारणों से तो थी ही किंतु मैं उस महिषाद्वन्द्व पहाड़ को विशेष रूप से देखना चाहता था जिसे स्थानीय भैंसादोंद डोंगरी के नाम से जानते हैं। कच्चा-पक्का रास्ता और फिर सीढियों से उपर चढने के पश्चात फिर एक छोटी सी पहाडी और दिखाई पडती है जिसके शीर्ष तक पहुँचने की सुविधा के लिये स्थानीय प्रशासन ने लोहे की सीढियाँ लगा दी हैं। जैसे जैसे आप इस पहाडी पर चढने लगते हैं पत्थरों में स्थान स्थान पर शेर के पंजो जैसे निशान और महिष के खुर जैसे निशान क्रमिकता में दिखाई पडते हैं जैसे उनका आपस में यहाँ संघर्ष हुआ हो। इन एक जैसे निशानों का क्रम उँचाई के साथ लगातार बढता जाता है और शीर्ष पर यह ऐसा लगता है जैसे शेर और भैंसे के मध्य भयावह संघर्ष हुआ हो और उनके पैरों के निशान गुत्थमगुत्था दिखाई पडते हैं। शीर्ष पर ही वह स्थान चिन्हित किया गया है जहाँ मान्यता है कि महिषासुर यहाँ मारा गया था। इसी स्थान के बाईँ और जो चरणचिन्ह प्रतिलक्षित होते हैं उन्हें माँ दुर्गा का बताया जाता है। अपनी पुस्तक “देवलोक बडे डोंगर” में जानकारी देते हुए श्री जयराम पात्र लिखते हैं कि “पुरातन बस्तर में पूर्व में बसे सभी जाति के लोग हर शुभ कार्य का आरम्भ यहीं आदि शक्ति माँ की पूजा के पश्चात ही करते हैं। नवरात्रि पर्व के समय यहाँ पूरे अट्ठारह गढ बस्तर के देवी देवताओं के नाम से सेवा-पूजा की जाती है। यहाँ क्वाँर (आश्विन) नवरात्रि के समय सैंकडों वर्ष पूर्व से जोगी बिठाने की परम्परा रही है। यहाँ के नवरात्रि की निशाजात्रा का प्रशाद बस्तर दशहरा के बाहर रैनी के रथ में चढाया जाता है। यहाँ का प्रसाद चढाये बिना रथ कुम्हडाकोट से जगदलपुर नहीं लाया जाता (पृष्ठ -8)”।

महिषासुर को ले कर अपनी अपनी आस्थायें और विवाद हैं। बस्तर अंचल का बडे डोंगर क्षेत्र इतिहास, पुरातत्व और जनमान्यताओं के बीच आस्था और पर्यटन की दृष्टि से अपनी ठोस उपस्थिति दर्ज कराता है। – राजीव रंजन प्रसाद

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Bhainsadond, Bhainsadond Dongri, Did Mahishasura Slaughter, mahishasur 2019-10-05 13:15:21 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/Bhainsadond-Dongri.jpg
मोहब्बत में “ना” बनी जानलेवा, प्रेमिका को चाकू से गोदा फिर लगाई फांसी https://deshtv.in/around-the-city/no-found-love-in-love-lover-was-hanged-again-with-knives/ Fri, 04 Oct 2019 11:08:53 +0000 https://deshtv.in/?p=10777

बैकुंठपुर। एक स्कूली छात्रा से एकतरफा मोहब्बत करने वाले सिरफिरे आशिक ने आज अपनी ही मोहब्बत को चाकू से गोद डाला। जिसे कभी दिलों जान से बढ़कर पागलों की तरह चाहने और पाने की तमन्ना उस आशिक में थी, पर उसकी एक “ना” ने पूरा मामला ही उलट कर रख दिया। अपनी आशिक़ी की बेक़द्री […]

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बैकुंठपुर। एक स्कूली छात्रा से एकतरफा मोहब्बत करने वाले सिरफिरे आशिक ने आज अपनी ही मोहब्बत को चाकू से गोद डाला। जिसे कभी दिलों जान से बढ़कर पागलों की तरह चाहने और पाने की तमन्ना उस आशिक में थी, पर उसकी एक “ना” ने पूरा मामला ही उलट कर रख दिया। अपनी आशिक़ी की बेक़द्री से खफ़ा आशिक ने इस “ना” का बदला लेने की ठानी और उसे मौत के घाट उतारने की नियत से ताबड़तोड़ चाक़ू से वार करता गया। वार करने के बाद जब आरोपी वहां से फ़रार हुआ तो उसने अपने कामगार स्थान को ही अपना ठिकाना बनाया। खुद को एक कमरे में कैद कर भी उसे शायद पुलिसिया खौफ और अपने प्रियसी का खून से लथपथ देह ही नज़र आया होगा जिसके बाद उसने खुद को भी फांसी के फंदे पर झूला लिया।


बैकुंठपुर के सोनहत थाना प्रभारी ओम साहू ने बताया कि सलगवा निवासी एक स्कूली छात्रा को सूरज उर्फ़ दगडू नाम का युवक मन ही मन में चाहने लगा था। कुछ दिन पहले ही उसने इज़हार-ए-मोहब्बत भी उस छात्रा से किया था, पर छात्रा ने सूरज को इसका जवाब सीधे “ना” में दे दिया और खुद से दूर रहने की नसीहत भी दे दी। इस मनाही से टूटे दिल के साथ सूरज ने इसका बदला लेने की ठानी, और आज मौका पाकर परीक्षा देने पहुंची अपनी मेहबूबा का इंतज़ार करने लगा। जैसे ही छठा अपना परचा लिखकर घर जाने के लिए निकली वैसे ही सूरज ने उसे घेर कर उस पर चाकू से वार करना शुरू कर दिया। चाकू के हमले से घायल छात्रा बदहवास होकर सड़क पर गिर पड़ी। जिसके बाद भी आरोपी सूरज ने लगातार उस पर चाकू से हमला जारी रखा।

                  पुलिस ने बताया कि स्कूली छात्रा पर तकरीबन 15 से 16 दफे इस सिरफिरे आशिक ने चाकू से वार किया है। जब लोगों ने बीच बचाव के लिए पहुंचे तब भाग खड़े हुआ। जिसके बाद छात्रा को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में शुरुवाती इलाज के बाद जिला अस्पताल भेजा गया है। फिलहाल जिला अस्पताल के आईसीयू में भर्ती पीड़िता का इलाज़ जारी है। अब तक पूरी तरीके से उसे होश में नहीं आया है लेकिन वो सिर्फ चाकू से हमला करने वाले का नाम बोल रही है।

इधर चाकू मारकर फरार हुआ सूरज ने कैलाशनगर उसी गैरेज में जा पंहुचा जहाँ वो काम किया करता था। सूरज ने वहां पहुंच कर खुद को एक कमरे में बंद कर लिया था। जिसके बाद उसने वहां होने की सुचना स्थानीय लोगो ने पुलिस को दी। जब तक पुलिस वहां पहुँचती उसके पहले ही सूरज ने खुद को भी मौत के हवाले कर दिया था पुलिस ने जब दरवाज़ा खोला तो सूरज की लाश फांसी के फंदे पर लटकती हुई मिली थी। दिलहल उसका शव उतारकर पुलिस ने पोस्टर्मार्टम के लिए भेज दिया है।

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baikunthpur, chakubaji, fansi aashik ki maut, hatya, Love, love dhokha, love sex or dhokha, one sided love crime, premika ki maut, pyaar me dokha 2019-10-04 17:39:57 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/lover-chakubaaji.jpg
भूपेश का ऐलान “बाबू छोटे लाल श्रीवास्तव” के नाम पर होगा मॉडम सिल्ली बांध https://deshtv.in/around-the-city/gandhi-vichar-padayatra-bhupesh-said-that-the-big-role-of-padayatra/ Fri, 04 Oct 2019 10:30:05 +0000 https://deshtv.in/?p=10771

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गांधी ग्राम-कंडेल से “गांधी विचार पदयात्रा” का आगाज़ किया है। सीएम भूपेश ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और कंडेल नहर सत्याग्रह के नायक बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव की मूर्ति का अनावरण कर इस यात्रा की शुरुवात की। ये पदयात्रा 10 अक्टूबर को रायपुर के गांधी मैदान में सम्पन्न होगी। इस पदयात्रा में […]

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गांधी ग्राम-कंडेल से “गांधी विचार पदयात्रा” का आगाज़ किया है। सीएम भूपेश ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और कंडेल नहर सत्याग्रह के नायक बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव की मूर्ति का अनावरण कर इस यात्रा की शुरुवात की। ये पदयात्रा 10 अक्टूबर को रायपुर के गांधी मैदान में सम्पन्न होगी। इस पदयात्रा में सीएम भूपेश ने कई महत्पूर्ण घोषणाएं की है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कंडेल को कई सौगात देते हुए ऐलान किया कि कंडेल में महात्मा गांधी के नाम पर महाविद्यालय खुलेगा। इसके साथ ही कंडेल में पुल बनाने का ऐलान भी उन्होंने किया है।

                 साथ ही सीएम ने कंडेल के नजदीक गांव गोपालपुरी में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हजारी लाल जैन के नाम पर उच्चतर माध्यमिक स्कूल का नाम किए जाने की बात कही है। साथ ही भूपेश ने इस साल गर्मी की फसल के लिए किसानों को नहर से पानी दिए जाने की बात कहीं है। मॉडम सिल्ली बांध का नाम अब स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबू छोटे लाल श्रीवास्तव के नाम पर होगा।


मुख्यमंत्री ने इसके पहले कंडेल में जनसहयोग से निर्मित गौठान का लोकार्पण किया और इसके बाद गौठान से नहर सत्याग्रह उद्यान तक पैदल पहुंचे। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि महात्मा गांधी के सत्याग्रह में पदयात्राओं की बड़ी भूमिका थी। बापू अपनी पदयात्राओं के माध्यम से लोगों के बीच जागरूकता के साथ सौहार्द्र का संचार करते थे। राज्य सरकार बापू के रास्ते में चलने के लिए संकल्पित है।

छोटेलाल के परिजनों से की मुलाकात
सीएम भूपेश बघेल ने यात्रा की शुरुवात करने से पहले धमतरी के गौरव ग्राम कंडेल में कंडेल नहर सत्याग्रह के प्रणेता बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव के घर जाकर उनके परिजनों से भेंट की। मुख्यमंत्री ने बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव के पैतृक घर पर उनके तथा महात्मा गांधी के तैल चित्र पर माल्यार्पण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री बघेल ने बाबू छोटे लाल के प्रपौत्र यतीश श्रीवास्तव से भेंटकर उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि के संबंध में चर्चा की।

इसलिए चुना गया ग्राम कंडेल
सन 1920 में धमतरी के छोटे से गांव कंडेल के किसानों ने अंग्रेजी हुक़ूमत के सिंचाई कर देने के फरमान के खिलाफ जल नहर सत्याग्रह शुरू हुआ था। जिसमें खुद महात्मा गांधी भी प्रभावित होकर यहाँ के किसानों के साथ आ खड़े हुए। महत्मा गांधी 21 दिसम्बर 1920 को इस आंदोलन में शिरकत करने के लिए धमतरी पहुंचे थे। इस पदयात्रा का प्रभाव इतना तगड़ा था के आख़िरकार अंग्रेजो को झुकना पड़ा, और गांव के सभी गाय और कृषि संसाधनों को अंग्रेजों ने अपने कब्ज़े से मुक्त कर उन्हें लौटाया था।

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CM Bhupesh, Dhamtari, madam silli bandh 2019-10-04 16:00:27 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/Gandhi-vichar-yatra-04.jpg
Big News : आरक्षण पर भूपेश सरकार को कोर्ट से झटका, लगा स्टे.. https://deshtv.in/around-the-city/big-news-bhupesh-sarkar-gets-shock-from-court-on-reservation-stay/ Fri, 04 Oct 2019 07:17:48 +0000 https://deshtv.in/?p=10758

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ सरकार को बिलासपुर हाईकोर्ट से एक तगड़ा झटका लगा है। नगरी निकाय चुनाव के ठीक पहले छत्तीसगढ़ सरकार को हाईकोर्ट ने आरक्षण के मामले पर बड़ा झटका दे दिया है। छत्तीसगढ़ के पिछड़ा वर्ग आरक्षण का दायरा 27% किए जाने के मामले में दायर याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई कर इस आरक्षण पर […]

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ सरकार को बिलासपुर हाईकोर्ट से एक तगड़ा झटका लगा है। नगरी निकाय चुनाव के ठीक पहले छत्तीसगढ़ सरकार को हाईकोर्ट ने आरक्षण के मामले पर बड़ा झटका दे दिया है। छत्तीसगढ़ के पिछड़ा वर्ग आरक्षण का दायरा 27% किए जाने के मामले में दायर याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई कर इस आरक्षण पर फिलहाल रोक लगा दी है। लिहाजा अब सरकार के हाल फिलहाल में होने वाली भर्ती और चयन प्रक्रियाओं में ओबीसी को 27 फ़ीसदी आरक्षण का लाभ फिलहाल नहीं मिल पाएगा।


बिलासपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पी आर रामचंद्रन और जस्टिस पीपी साहू की जॉइंट बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई। जिसमें सामाजिक कार्यकर्ता कुणाल शुक्ला और उनके सहयोगियों द्वारा दायर की गई याचिका में यह तर्क देते हुए कहा गया है कि “इंदिरा साहनी” मामलें में यह व्यवस्था दी गई है कि किसी भी सूरत में आरक्षण 50% से अधिक नहीं हो सकता है। ऐसे में छत्तीसगढ़ में आरक्षण का दायरा बढ़ा कर 82% किया गया है। लिहाजा इस बिंदु को उचित मानते हुए माननीय न्यायालय ने इस मामले पर फिलहाल स्टे दे दिया है, और राज्य सरकार को इस मामले पर अपना जवाब देने भी कहा है।

90 फीसदी तक पहुंचा आरक्षण
अन्य पिछड़ा वर्ग को मिलने वाले आरक्षण को 27 प्रतिशत कर दिया गया था। अनुसूचित जनजाति को 32 प्रतिशत, अनुसूचित जाति को 13 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। साथ ही सवर्णो को भी 10 फीसदी आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है। इसके अलावा महिला, दिव्यांग व अन्य वर्ग के लिए प्रावधान जोड़ने पर सूबे में आरक्षण का आकड़ा 90 प्रतिशत तक पहुंच रहा है।

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Bhupesh Sarkar gets shock from court, bilaspur chhattisgarh, CG High Court, chhattisgarh high court, reservation 2019-10-04 12:47:48 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2018/12/HIGH-COURT-OF-CHHATTISGARH-DeshTv.jpg
कुछ देर में शुरू होगी “गांधी विचार यात्रा” इस रूट पर ये नेता होंगे शामिल… https://deshtv.in/around-the-city/the-gandhi-vichar-yatra-will-begin-shortly-these-leaders-will-be-included-on-this-route/ Fri, 04 Oct 2019 06:46:21 +0000 https://deshtv.in/?p=10754

धमतरी। धमतरी के कंडेल गाँव से कुछ ही देर में “गांधी विचार यात्रा” का आगाज़ किया जाएगा। इस यात्रा की शुरुवात करने सूबे के मुखिया भूपेश बघेल भी धमतरी पहुंच चुके है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम भी मौजूद है।             […]

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धमतरी। धमतरी के कंडेल गाँव से कुछ ही देर में “गांधी विचार यात्रा” का आगाज़ किया जाएगा। इस यात्रा की शुरुवात करने सूबे के मुखिया भूपेश बघेल भी धमतरी पहुंच चुके है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम भी मौजूद है।

                      इसके साथ ही भूपेश कैबिनेट के मंत्री टीएस सिंहदेव, ताम्रध्वज साहू, कवासी लखमा, शिव कुमार डहरिया, उमेश पटेल, डॉक्टर प्रेमसाय सिंह, मोहम्मद अकबर, अनिला भेड़िया, रवींद्र चौबे, जयसिंह अग्रवाल, अमरजीत भगत, गुरु रूद्र कुमार भी उपस्तिथ है। इस यात्रा की शुरुवात धमतरी के कंडेल गाँव में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के अनावरण और आम सभा के साथ होगी। जिसके बाद ये पदयात्रा आज ग्राम छाती तक चलेगी।

कब कौन सम्हालेगा मोर्चा
5 अक्टूबर यानी कल को मंत्री उमेश पटेल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम अंबिका सिंह देव खेल शाय सिंह पारसनाथ राजवाड़े बृहस्पति सिंह चिंतामणि महाराज प्रीतम राम विक्रम शाह मंडावी चंदन कश्यप रामपुकार सिंह चक्रधर प्रसाद सिद्धार्थ जलेश्वर साहू छन्नी साहू और प्रकाश नायक भाग लेंगे।

6 अक्टूबर को मंत्री डॉक्टर प्रेमसाय सिंह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम धनेंद्र साहू छाया वर्मा ममता चंद्राकर आशीष चावड़ा गुरुदयाल सिंह बंजारे इंदर शाह मंडावी अनूप नाथ शिशुपाल चोरी कुंवर सिंह निषाद लक्ष्मी ध्रुव पुरुषोत्तम कुमार मोहित केरकेट्टा लेंगे

7 अक्टूबर को मंत्री मोहम्मद अकबर मंत्री डॉ शिव कुमार डेहरिया मंत्री मोहन मरकाम किस्मत लाल नंद देवेंद्र बहादुर सिंह रामकुमार यादव शैलेश पांडे रश्मि सिंह लालजीत सिंह राठिया चंद्रदेव प्रसाद राय भुनेश्वर सिंह बघेल लखेश्वर बघेल रेखचंद जैन भाग लेंगे

8 अक्टूबर को मंत्री मोहम्मद अकबर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम विनय भगत यूपी में संगीता सिन्हा गुलाब सिंह कमरों विनय जायसवाल उत्तरी जांगड़े सलाम रिजवी भाग लेंगे

9 अक्टूबर को अनिला भेड़िया मोहन मरकाम छाया वर्मा सतनारायण शर्मा विकास उपाध्याय कुलदीप जुनेजा अनीता शर्मा अमितेश शुक्ला मनोज मंडावी देवती कर्मा संतराम नेताम अरुण वोरा देवेंद्र यादव द्वारिकाधीश यादव विनोद चंद्राकर शकुंतला साहू भाग लेंगे

10 अक्टूबर को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत मंत्री टीएससी देव मंत्री ताम्रध्वज साहू मंत्री कवासी लखमा मंत्री डॉ शिव कुमार डहरिया मंत्री उमेश पटेल मंत्री डॉक्टर प्रेमसाय सिंह मंत्री मोहम्मद अकबर मंत्री अनिला भेड़िया मंत्री रवि चौबे मंत्री जयसिंह अग्रवाल मंत्री अमरजीत भगत मंत्री गुरु रूद्र कुमार वरिष्ठ नेता धनेंद्र साहू सत्यनारायण शर्मा विकास उपाध्याय कुलदीप जुनेजा भाग लेंगे

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CM Bhupesh Baghel, congress gandhi padyatra, gandhi vichar padyatra, padyatra shuru, pcc mohan markam padyatra, sm bhupesh padyatra 2019-10-04 12:16:21 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/Gandhi-vichar-padyatra-0-1.jpg
देश विशेष : इन्द्रावती और गोदावरी नदियों का संगम और देवी भद्रकाली https://deshtv.in/around-the-city/country-specific-confluence-of-indravati-and-godavari-rivers-and-goddess-bhadrakali/ Fri, 04 Oct 2019 05:38:46 +0000 https://deshtv.in/?p=10746

देशटीवी विशेष। बस्तर (छतीसगढ़) में पले–बढ़े,वर्तमान में एक सरकारी उपक्रम एन.एच.पी.सी मे प्रबंधक राजीव रंजन प्रसाद ने बस्तर की गहरी संवेदनाओ के साथ पड़ताल की है। कला, संस्कृति, साहित्य, राजनीति से लेकर तमाम सामयिक मुद्दों पर वे लिखते रहते हैं। वे बस्तर के उन पक्षों, तथ्यों, और विशेषताओं को सामने रखते हैं जो अब तक […]

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देशटीवी विशेष। बस्तर (छतीसगढ़) में पले–बढ़े,वर्तमान में एक सरकारी उपक्रम एन.एच.पी.सी मे प्रबंधक राजीव रंजन प्रसाद ने बस्तर की गहरी संवेदनाओ के साथ पड़ताल की है। कला, संस्कृति, साहित्य, राजनीति से लेकर तमाम सामयिक मुद्दों पर वे लिखते रहते हैं। वे बस्तर के उन पक्षों, तथ्यों, और विशेषताओं को सामने रखते हैं जो अब तक बहुत कम देखने-सुनने-पढ़ने को मिलती है। चर्चित किताब ‘आमचो बस्तर’ के लेखक राजीव रंजन प्रसाद को उनकी किताब ‘बस्तरनामा’ के लिए भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने अपने प्रतिष्ठित ‘राहुल सांकृत्यायन पर्यटन पुरस्कार’ से सम्मानित किया है। देश टीवी पोर्टल पर नवरात्रि के नौ दिनों तक उनके आलेखों की श्रृंखला की यह पांचवी कड़ी – संपादक

बस्तर को बूझने की पहली कड़ी है उसकी प्राणदायिनी सरिता इन्द्रावती। यह असाधारण नदी है जिसके पाटों में इतिहास और समाजशास्त्र मिलकर अपनी बस्तियाँ बसाये बैठे हैं। ओडिशा के कालाहाण्डी जिले में रामपुर युआमल के निकट डोंगरमला पहाड़ी से निकल कर इन्द्रावती नदी लगभग तीन सौ छियासी किलोमीटर की अपनी यात्रा में पूर्व से पश्चिम की ओर प्रवाहित होती है। बस्तर पठार की पश्चिमी सीमा में नदी दक्षिण की ओर मुड़ कर भद्रकाली (भोपालपट्टनम) के पास गोदावरी नदी में समाहित हो जाती है।

भोपालपट्टन से भद्रकाली की ओर आगे बढ़ने पर कुछ ही देर में मुख्यसड़क का साथ छूट गया और पथरीली उबड़-खाबड़ सड़क ने हमारा स्वागत किया। एकाएक ऊँचाई से हमें तीव्र ढ़ाल दिखाई पड़ी जो कि चिंतावागु नदी तक पहुँचती थी। रास्ता पूरी तरह रेतीला था। उसपार जाने के लिये गाड़ी को इस नदी से हो कर ही निकलना था। यह भी किसी दक्ष वाहनचालक के बूते की ही बात थी क्योंकि एक निश्चित गति से चलाते हुए गाड़ी को नदी पार न करायी गयी तो पहियों के फँस जाने का अंदेशा था। रास्ता पूरी तरह उजाड़ और पथरीला था। भद्रकाली तक पहुँचना केवल उनके ही बूते की बात है तो यह कमर कस कर निकले हों कि अब चाहे जो हो वहाँ पहुँचना ही है। यह सड़क मार्ग भोपालपट्टनम को आन्ध्र से भी जोड़ता है। यहाँ से गुज़रने वाले इक्कादुक्का वाहन ग्रामीणों से खचाखच भरे हुए थे। इसमे कोई संदेह नहीं कि माओवादियों की सहमति और जानकारी के बिना यहाँ वाहन नहीं चल सकते थे। रास्ते में अनेक स्थानों पर सड़कों को काटे जाने तथा जानबूझ कर बाधित किये जाने के चिन्ह स्पष्ट देखे जा सकते हैं।

              समय समय पर माओवादियों द्वारा अपने किसी मिशन अथवा गतिविधि को अंजाम देने के लिये इन टूटी-फूटी सड़कों को भी काट दिया जाता है और इस तरह आवागमन पूरी तरह बाधित कर दिया जाता है। ये काटी गयी सड़कें फिर किसी माससून में पानी के साथ बह आती मिट्टी से खुद ही भर जायें तो ही आवागमन के लिये पुन: खुल पाती हैं। मैं बहुत खामोशी से महसूस कर रहा था कि ये मध्ययुगीन दृश्य इक्कीसवीं सदी के भारत का हिस्सा हैं। पूरे रास्ते हमे इक्का दुक्का लोग ही मिले। सड़क के किनारे खड़ी कुछ युवतियों के जूड़े में लगे फूलों के गजरे से यह बात स्पष्ट होने लगी थी कि इस क्षेत्र में बस्तर की संस्कृति पर आन्ध्र-महाराष्ट्र का संगम भी देखने को मिलने लगता है। कुछ आगे बढ़ने पर मुझे बताया गया कि बस्तर में पचास के दशक में कलेक्टर रहे आर.एस.वी.पी नरोन्हा के नाम पर यहाँ एक गाँव और तालाब भी अवस्थित है।

हमारी आगे बढ़ने की गति दस किलोमीटर प्रतिघंटा के आसपास रही होगी। यह लग गया था कि भद्रकाली पहुँचने-लौटने में ही आज पूरा दिन लग जायेगा। भद्रकाली गाँव के करीब पहुँचने पर हमे एक पुलिस कैम्प दिखाई पड़ा जिसके निकट से आगे बढ़ते ही अब ग्रामीण बसाहट दिखने लगी थी। यहाँ एक पहाड़ी टेकरी पर भद्रकाली का मंदिर अवस्थित है जिसके नाम से ही गाँव को पहचान मिली है। मुझे स्थानीय पुजारी ने बताया कि प्रतिमा यहाँ पर बाद में स्थापित की गयी है और मंदिर किसी तहसीलदार द्वारा बनवाया गया है। पहले पहाड़ी टीले को ही देवी भद्रकाली का सांकेतक मान पर प्रार्थना-जात्रा संपन्न की जाती रही है। लाला जगदलपुरी ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि “मंदिर के तत्वाधान में प्रतिवर्ष त्रिदिवसीय मेला लगता है।

              वसंत पंचमी के एक दिन पहले मेला भरता है और दूसरे दिन मेले का समापन बोनालू होता है। बोनालू के अंतर्गत हल्दी-कुमकुम से सजे हुए तीन घड़े रखे जाते हैं। एक के उपर एक। नीचे के घट में खीर रखी होती है। बीच के घड़े में खिचड़ी रखते हैं और उपर वाले घड़े में रहती है सब्जी। उपर वाले घट पर एक दीपक जलता रहता है। कई महिलायें तीनों घड़ों को सिर पर रख कर मंदिर की परिक्रमा करती हैं। प्रदक्षिणा पूरी हो जाने के बाद हंडियों में रखी खीर, खिचड़ी और सब्जी का प्रसाद दर्शनार्थियों में बांटा जाता है। इसके अतिरिक्त तीन तीन साल में यहाँ अग्निप्रज्वलन समारोह भी श्रद्धालु शैव भक्तों द्वारा आयोजित होता रहता है। अग्निकुण्डों में अग्नि समयानुसार प्रज्ज्वलित रखी जाती है। मनौतियाँ मानने वाले लोग उपवास रखते हैं और आस्थापूर्वक अग्निकुण्डों में प्रवेश करते हैं और अंगारों पर चल निकलते हैं।”

                     भद्रकाली मंदिर में दर्शन करने के पश्चात यहाँ पहुँचने वाला पर्यटन उस स्थान की और अवश्य जाता है जो दो महान सरिताओं की आलिंगन स्थली है। जहाँ गोदावरी नदी में बस्तर की प्राणदायिनी नदी इन्द्रावती समा कर अपना अस्तित्व विसर्जित कर देती है, देवी भद्रकाली के नाम पर ही इस महान संगम का नामकरण हुआ है। यह स्थल न केवल पर्यटन की दृष्टि से बस्तर को उपलब्ध एक अद्वितीय जगह है अपितु धार्मिक दृष्टिकोण से भी इसकी महत्ता है। यह दु:खद है कि तीन राज्यों की सीमा होने का लाभ होने के स्थान पर हानि ही बस्तर का यह अंतिम छोर भुगतने के लिये बाध्य है। बहुत आसान है कि नावों से गोदावरी के रास्ते कोई भी बस्तर के अनछुवे सघन जंगलों और महानतम संस्कृति तक अपनी पैठ बना सकता है या कि तैर कर ही गढ़चिरौली से भद्रकाली तक पहुँच सकता है किंतु क्यों व्यापार इस रास्ते नहीं आता? प्रगति और समृद्धि को ये रास्ते दिखाई नहीं पड़ते लेकिन बारूद बेखौफ इन्द्रावती के तटों तक पहुँच रहा है।

                                                                                        – राजीव रंजन प्रसाद

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bastar, bastar ki bhadrkali, bhadrkali mandir, godavri nadi, inravati nadi, shki ka kendra bstr 2019-10-04 11:08:46 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/Bhadrakali-Mandir-Bastar.jpg
देश विशेष : अनूठे अतीत का साक्षी है सुकमा का “चिटमटिन माता मंदिर” https://deshtv.in/around-the-city/country-specific-sukmas-chitmin-mata-temple-witnesses-unique-past/ Thu, 03 Oct 2019 07:53:15 +0000 https://deshtv.in/?p=10699

देश टीवी विशेष। बस्तर (छतीसगढ़) में पले–बढ़े,वर्तमान में एक सरकारी उपक्रम एन.एच.पी.सी मे प्रबंधक राजीव रंजन प्रसाद ने बस्तर की गहरी संवेदनाओ के साथ पड़ताल की है। कला, संस्कृति, साहित्य, राजनीति से लेकर तमाम सामयिक मुद्दों पर वे लिखते रहते हैं। वे बस्तर के उन पक्षों, तथ्यों, और विशेषताओं को सामने रखते हैं जो अब […]

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देश टीवी विशेष। बस्तर (छतीसगढ़) में पले–बढ़े,वर्तमान में एक सरकारी उपक्रम एन.एच.पी.सी मे प्रबंधक राजीव रंजन प्रसाद ने बस्तर की गहरी संवेदनाओ के साथ पड़ताल की है। कला, संस्कृति, साहित्य, राजनीति से लेकर तमाम सामयिक मुद्दों पर वे लिखते रहते हैं। वे बस्तर के उन पक्षों, तथ्यों, और विशेषताओं को सामने रखते हैं जो अब तक बहुत कम देखने-सुनने-पढ़ने को मिलती है। चर्चित किताब ‘आमचो बस्तर’ के लेखक राजीव रंजन प्रसाद को उनकी किताब ‘बस्तरनामा’ के लिए भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने अपने प्रतिष्ठित ‘राहुल सांकृत्यायन पर्यटन पुरस्कार’ से सम्मानित किया है। देश टीवी पोर्टल पर नवरात्रि के नौ दिनों तक उनके आलेखों की श्रृंखला की यह चौथी कड़ी – संपादक

सुकमा का इतिहास कई मायनों में रोचक है। उस क्षेत्र की प्रधान आराध्य देवी रामारामिन अथवा चिटमटिन की चर्चा से पूर्व संक्षेप में यहाँ का अतीत जानना आवश्यक है। सुकमा को जिले का दर्जा आज मिला है किंतु राजतंत्र के दौर में यह एक महत्वपूर्ण जमींदारी हुआ करती थी। इस जमींदारी के अंतर्गत लगभग 650 वर्गमील का क्षेत्र आता था जिसमें 128 गाँव सम्मिलित थे। यह गौर करने वाला तथ्य है कि बस्तर रियासत के अंतर्गत केवल सुकमा जमींदारी ही ऐसी थी जिसके जमींदार क्षत्रिय थे जबकि शेष जमींदारियों पर गोंड़ शासक थे। यहाँ के जमीदारों के सम्बन्ध में बड़ा ही अविश्वसनीय वृतांत मिलता है जिसके अनुसार पाँच सौ वर्ष पहले जब रंगाराज यहाँ शासक थे उनके चार पुत्र – रामराज, मोतीराज, सुब्बाराज तथा रामराज, राज्य को ले कर विवाद कर बैठे। विवश हो कर सुकमा जमीन्दारी के चार हिस्से किये गये जो थे सुकमा, भीजी, राकापल्ली तथा चिन्तलनार। कहते हैं राजा ने इसके बाद अपने पुत्रों को शाप दिया कि अब सुकमा की गद्दी के लिये एक ही पुत्र बचेगा साथ ही आनेवाली पीढ़ियों के केवल दो ही नाम रखे जायेंगे रामराज और रंगाराज। यदि तथ्यों को परखा जाये तो राजतंत्र की समाप्ति तक सुकमा के जमीनदारों की लगभग 11 पीढ़ी के नाम क्रमिकता में रामराज और रंगाराज ही रखे गये। दूसरी महत्वपूर्ण बात कि बस्तर पर चालुक्य राजाओं के अधिकार के पश्चात सुकमा के जमींदारों ने वहाँ के राजाओं से हमेशा वैवाहिक सम्बन्ध बना कर रखे इस कारण इस जमींदारी का न केवल महत्व बढ़ा अपितु यह शक्तिशाली भी हुआ। छत्तीसगढ़ राज्य के दक्षिण में स्थित सुकमा जिले की सीमा उड़ीसा और तेलंगाना के साथ लगती है। सुकमा क्षेत्र में मुरिया तथा परजा को मुख्य निवासी कहा जाता है साथ ही यह क्षेत्र दोरला आदिवासियों का प्रमुख गढ़ है।

                               अब बात सुकमा की प्रधान देवी रामारामिन की कर लेते हैं। मध्य बस्तर और उत्तर बस्तर से पुरातात्विक महत्व के अनेक मंदिर व प्रतिमायें चर्चित हुई हैं एवं पर्यटन की दृष्टि से यहाँ पहुँचने में लोगों की बहुत रुचि भी है। दक्षिण बस्तर पर कम ही चर्चायें हुईं हैं। बारसूर एवं दंतेवाड़ा से आगे कम पर्यटक बढ़ते हैं। इसका पहला कारण तो वह सड़क व्यवस्था है जो दंतेवाड़ा से आगे सुकमा-कोण्टा को जोड़ती है। यही स्थिति दंतेवाड़ा से भोपालपट्टनम को जोड़ने वाली सड़क की भी है। नक्सलियों से प्रभावित क्षेत्र होने के कारण आये दिन सड़क खोद दी जाती है और आवागमन बाधित हो जाता है। दूसरा कारण है कि इन क्षेत्रों पर बहुत कम शोधकर्ताओं ने कलम चलाई है। रियासतकाल में सुकमा जैसी बड़ी और महत्वपूर्ण जमींदारी वृहद बस्तर जिले की छाया में निश्चित ही उपेक्षित महसूस कर रही थी। जिला बन जाने के पश्चात से सुकमा की रौनक कुछ हद तक लौटी है।सुकमा में रियासतकालीन जमींदार भवन दर्शनीय है। आसपास बिखरी हुई बहुत सी पुरातात्विक महत्व की प्रतिमायें हैं जो पेड़ के नीचे, किसी झुरमुट में, नदी के किनारे या सड्क़ के किनारे धूल, मिट्टी, पानी को झेलती हुई भी सदियों से अवस्थित हैं। सुकमा नगर के बाहरी छोर पर स्थित रामारामिन माता का मंदिर जिसे चिटमटिन अम्मा मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, बहुत अच्छी तरह से संरक्षित है तथा पूरे नगर की आस्था के केन्द्र में है। मंदिर के सामने की ओर अनेक चबूतरे निर्मित किये गये हैं जो फरवरी माह में यहाँ लगने वाले मेले के दौरान उपयोग में लाये जाते हैं। ऐतिहासिक समय से ही राजकीय संरक्षण प्राप्त होने के कारण इस मंदिर में दक्षिण भारतीय शैली में दर्शनीय निर्माण करवाया गया है।

                                मंदिर से लग कर ही एक पहाड़ी है जिसपर चढ़ने के पश्चात आसपास का नज़ारा बहुत ही रमणीक दिखाई पड़ता है। पहाड़ी के उपर प्राचीन मंदिर के कुछ अवशेष हैं। उसी से जोड़ कर अनेक किंवदंतियाँ भी इस अंचल में प्रसारित हैं। एक स्थानीय ने बताया कि कभी माता चिटमटीन का मंदिर उपर पहाड़ी पर हुआ करता था। कहते हैं कि पुजारी की देरी से नाराज देवी ने पूजा का लोटा और थाल फेंक दिया। एक प्रस्तर पर उकेरी गयी थाल जैसी आकृति को फेंकी गयी थाली का प्रतीक कहा जाता है जबकि जहाँ लोटा गिरा उस स्थल पर वर्तमान में अवस्थित मंदिर का निर्माण किया गया, बताया जाता है।

                 पहाड़ी पर चढ़ने के पश्चात यह महसूस होता है कि इस स्थल का उपयोग निश्चित तौर पर प्राचीन शिल्पकार अथवा कारीगर किया करते होंगे। पत्थरों में स्थान स्थान पर गोलाकार छिद्र हैं। पहाड़ी के बिलकुल शीर्ष पर एक कुण्ड नुमा पानी का सोता भी है। चूंकि गर्मियों में भी इस कुण्ड का जल नहीं सूखता अत: पवित्र माना जाता है, इससे स्थान की धार्मिक महत्ता बढ़ गयी है। वस्तुत: रहस्य और इतिहास की कई परतों के पीछे छिपा है सुकमा का चिटमटिन माता मंदिर।
                                                                                     – राजीव रंजन प्रसाद

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bastar me Chitmin Mata mandir, Chitmin Mata Temple, garba video 2019 latest, history of Chitmin Mata Temple in sukma, Navratri 2019, navratri 2019 latest news, sukma Chitmin Mata Temple 2019-10-03 13:23:15 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/Chitmin-Mata-Temple-2-1.jpg
कोंडागांव : वन्यप्राणी संरक्षण जागरूकता के लिए निकले “गांधी…” https://deshtv.in/around-the-city/kondagaon-gandhi-set-out-for-wildlife-conservation-awareness/ Wed, 02 Oct 2019 11:19:18 +0000 https://deshtv.in/?p=10678

कोंडागांव। वनो एवं वन्यप्राणियों के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति आम नागरिको को जागरुक करने के उद्देश्य से जिला मुख्यालय में 2 अक्टूबर को बंधा तालाब से जय स्तम्भ चौक तक छात्रों, वनकर्मचारियों, अधिकारियों एवं नागरिको की रैली निकाली गई। रैली को जिला कलेक्टर नीलकंठ टीकाम एवं अध्यक्ष जिला पंचायत देवचंद मातलाम द्वारा रवाना किया […]

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कोंडागांव। वनो एवं वन्यप्राणियों के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति आम नागरिको को जागरुक करने के उद्देश्य से जिला मुख्यालय में 2 अक्टूबर को बंधा तालाब से जय स्तम्भ चौक तक छात्रों, वनकर्मचारियों, अधिकारियों एवं नागरिको की रैली निकाली गई। रैली को जिला कलेक्टर नीलकंठ टीकाम एवं अध्यक्ष जिला पंचायत देवचंद मातलाम द्वारा रवाना किया गया। महात्मा गांधी की 150वीं जयंती को संपूर्ण राष्ट्र में बड़े धूमधाम से मनाया जा रहा है,लिहाज़ा कोंडागांव के छात्रों ने महात्मा गांधी की वेशभूषा को धारण कर रैली की अगुवाई की, और उनके राष्ट्र के प्रति योगदान तथा पर्यावरण के प्रति उनके विशेष लगाव का स्मरण किया।


इस मौके पर उपस्थित वक्ताओं ने वन्य प्राणी संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पूरा बस्तर वनो की अदभूत विरासत के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है अतः इस प्राकृतिक पूंजी को हर हाल में सुरक्षित रखना है ताकि आने वाले समय में बस्तर की यह पहचान बनी रहे। रैली में छात्रों ने वन्य प्राणी के संरक्षण संबंधित जागृति लाने वाले तख्तियों एवं नारो के साथ लोगो का ध्यान आकर्षित किया। वन्य प्राणी सप्ताह के दौरान वन विभाग के तत्वाधान में स्कूली बच्चों के लिए निबंध, चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जायेंगी। इस दौरान वन मण्डलाधिकारी बी.एस.ठाकुर, एसडीएम पवन कुमार प्रेमी, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास जी.एस.सोरी, एसडीओ वन के.आर.गजभिये सहित अन्य अधिकारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राऐं उपस्थित थे।

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2 october to 8 october, vanya prani sanrakshn saptaah, Wildlife conservation, wildlife conservation awareness 2019-10-02 16:49:18 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/vanya-prani-sanrakshan-saptah.jpg
देश विशेष : बस्तर में शाक्त आस्था का केंद्र हैं “माँ दंतेश्वरी” https://deshtv.in/around-the-city/country-special-maa-danteshwari-is-the-center-of-shakta-faith-in-bastar/ Wed, 02 Oct 2019 09:58:44 +0000 https://deshtv.in/?p=10664

देश टीवी विशेष। बस्तर (छतीसगढ़) में पले–बढ़े,वर्तमान में एक सरकारी उपक्रम एन.एच.पी.सी मे प्रबंधक राजीव रंजन प्रसाद ने बस्तर की गहरी संवेदनाओ के साथ पड़ताल की है। कला, संस्कृति, साहित्य, राजनीति से लेकर तमाम सामयिक मुद्दों पर वे लिखते रहते हैं। वे बस्तर के उन पक्षों, तथ्यों, और विशेषताओं को सामने रखते हैं जो अब […]

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देश टीवी विशेष। बस्तर (छतीसगढ़) में पले–बढ़े,वर्तमान में एक सरकारी उपक्रम एन.एच.पी.सी मे प्रबंधक राजीव रंजन प्रसाद ने बस्तर की गहरी संवेदनाओ के साथ पड़ताल की है। कला, संस्कृति, साहित्य, राजनीति से लेकर तमाम सामयिक मुद्दों पर वे लिखते रहते हैं। वे बस्तर के उन पक्षों, तथ्यों, और विशेषताओं को सामने रखते हैं जो अब तक बहुत कम देखने-सुनने-पढ़ने को मिलती है। चर्चित किताब ‘आमचो बस्तर’ के लेखक राजीव रंजन प्रसाद को उनकी किताब ‘बस्तरनामा’ के लिए भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने अपने प्रतिष्ठित ‘राहुल सांकृत्यायन पर्यटन पुरस्कार’ से सम्मानित किया है। देश टीवी पोर्टल पर नवरात्रि के नौ दिनों तक उनके आलेखों की श्रृंखला की यह तीसरी कड़ी – संपादक

आज के समय में दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय हो गया है। यहाँ दंतेश्वरी मंदिर की अवस्थिति के कारण इसे एक धार्मिक पर्यटन नगर होने का गौरव प्राप्त है। राजा की कुल अधिष्टात्री देवी का क्षेत्र यहाँ होने के होने के कारण दंतेवाड़ा को रियासत काल में भी विशेष दर्जा प्राप्त था तथा यह एक माफी जागीर हुआ करती थी। बस्तर में काकतीय/चालुक्य वंश के संस्थापक अन्नमदेव से तो दंतेश्वरी देवी की अनेक कथायें जुड़ी ही हुई हैं साथ ही अंतिम शासक महाराजा प्रवीर चन्द्र भंजदेव को भी देवी का अनन्य पुजारी माना जाता था। राजाओं के प्राश्रय के कारण दंतेवाड़ा लम्बे समय तक माफी जागीर रहा है। माफी जागीर अथवा मुकासा एक तरह से दान भूमि होती थी जो मंदिरों को या ब्राम्हणों को राजा से मिलती है। मुकासे सभी प्रकार के टैक्स से मुक्त हुआ करते थे। बड़ी माफी जागीर थी दंतेवाड़ा जिसके अंतर्गत कभी गुदेली, कुपेर, अलनार, गीदम, दूमम, चितालूर, भैरमबंद, कावलनार, दुगेली, तोयलंका, पूरन तरई, मुसलनार, चेरपाल, पाहुरनार, कुंदेली, चीता लंका, दंतेवाड़ा, भोगम, चोलनार, करली, हरम, भांसी, तुमनार, गामावाडा, कोपानार, कलेपाल, कटेकल्यान, कोदरी, तोंगपाल, बनियाँगाँव, सिमोडा, झारागाँव, सोनारपाल, डिलमिली, कुरुसपाल, मावलीगुडा, करंजी, दहीकोंगा और टोंड़रपाल गाँव आते थे।

दंतेश्वरी मंदिर को कतिपय विद्वान शक्तिपीठ मानते हैं। देवी पुराण में शक्ति पीठों की संख्या 51 बताई गई है जबकि तन्त्रचूडामणि में 52 शक्तिपीठ बताए गए हैं। कुछ अन्य ग्रंथों में यह संख्या 108 तक बताई गई है। दन्तेवाड़ा को हालांकि देवी पुराण के 51 शक्ति पीठों में शामिल नहीं किया गया है लेकिन इसे देवी का 52 वां शक्ति पीठ माना जाता है। मां दंतेश्वरी की महिमा अत्यंत प्राचीन धार्मिक कथा “शिव और सती” से जोड़ कर भी देखी जाती है। अपने पिता के द्वारा पति का अपमान किये जाने पर सती ने पिता के यज्ञ कुण्ड में कूद कर अपने प्राण दे दिये थे। कुपित भगवान शिव अपनी पत्नी सती का शव ले कर तांडव करने लगे। धरती पर देवी सती के अंग जहाँ जहाँ पर गिरे वहाँ देवी का शक्तिपीठ स्थापित है। यह प्रबल मान्यता है कि इसी स्थल पर देवी सती का दंत-खण्ड गिरा था।


माना जाता है कि अन्नमदेव, अपनी मनोभावना लिख कर दंतेश्वरी माँ को समर्पित करते थे। एक रात देवी प्रसन्न हो कर, प्रकट हो गयीं। वरदान माँगने के लिये कहा, अन्नमदेव, राजा बनना चाहते थे। यही माँग लिया।तय हुआ कि वे आगे आगे चलेंगे और देवी दंतेश्वरी पीछे आयेंगी। अन्नमदेव जहाँ तक पीछे मुड़ कर नहीं देखेंगे वहाँ तक उनका राज्य होगा।अन्नमदेव बढ़ते गये। उनके कानों में देवी के पायल की आवाज पड़ रही थी। रास्ते में नदी आयी। नदी के मुहाने की रेत पर चलते हुए अन्नमदेव के पैर धँस रहे थे। एकाएक वो रुक गये। देवी के पायल की आवाज अब वे नहीं सुन पा रहे थे। वे कुछ कदम और आगे बढ़े, कान पीछे लगे हुए थे। पायल की आवाज नहीं आ रही थी। अन्नमदेव ने पीछे मुड़ कर देख लिया। राजिम के पास देवी स्थित हो गयी और उनके राज्य की सीमा वहाँ तक हो गयी। नदी का नाम भी पैरी पड़ गया है। पैरी का मतलब पायल होता है। यही पैरी नदी कांकेर और बस्तर रियासत के बीच की सीमा है। ऐसी ही एक कथा को शंखिनी डंकिनी नदी के संगम के साथ जोड़ कर भी बताया जाता है जिसके किनारे ही माँ दंतेश्वरी का मंदिर अवस्थित है।

कुछ इतिहासकार मानते हैं कि ग्यारहवी शताब्दी में जब नागवंशी राजाओं ने गंगवंशी राजाओं पर अधिकार कर बारसूर को अपनी राजधानी बनाया; उन्हें पास के ही गाँव तारलापाल में स्थित देवी गुड़ी में अधिष्ठापित देवी की प्रसिद्धि ने आकर्षित किया। नागवंशी राजा जगदेश भूषण धारावर्ष स्वयं देवी के दर्शन करने के लिये तारलापाल उपस्थित हुए तथा बाद में इसी स्थल पर उन्होंने अपनी कुल देवी मणिकेश्वरी की प्रतिमा को स्थापित कर मंदिर बनवाया और अपनी राजधानी को भी बारसूर से तारलापाल ले आये। चौदहवी शताब्दी में काकतीय राजा अन्नमदेव ने जब नाग राजाओं को पराजित किया उन्होंने भी इस मंदिर में ही अपनी कुल देवी माँ दंतेश्वरी की मूर्ति स्थापित कर दी। कालांतर में तारलापाल का ही नाम बदल कर दंतेवाड़ा हो गया।


 सिंह द्वार से भीतर प्रविष्ठ होते ही मंदिर के समक्ष एक खुला अहाता मौजूद है। माता के मंदिर के सामने ही एक भव्य गरुड़ स्तंभ स्थापित है जिसके बारे में कहा जाता है कि इसे बारसूर से ला कर यहाँ स्थापित कर दिया गया है। मंदिर सादगीपूर्ण है तथा बहुतायत हिस्सा आज भी काष्ठ निर्मित ही है। मंदिर में माई जी की मूर्ति से अलग अधिकांश मूर्तियाँ नाग राजाओं के समय की हैं। द्वार से घुसते ही जो पहला कमरा है यहाँ दाहिने ओर एक चबूतरा बना है। रियासत काल में राजधानी जगदलपुर से राजा जब भी यहाँ आते तो वहीं बैठ कर पुजारी और प्रजा से बातचीत किया करते थे। मंदिर का दूसरा कक्ष यद्यपि दीवारों की सादगी तथा किसी कलात्मक आकार के लिये नहीं पहचाना जाता किंतु यहाँ प्रवेश करते ही ठीक सामने भैरव बाबा, दोनो ओर द्वारपाल और यत्र-तत्र गणेश, शिव आदि देवों की अनेक पाषाण मूर्तियाँ स्थापित हैं। मंदिर के समक्ष तीसरे कक्ष में अनेक स्तम्भ निर्मित हैं, कुछ शिलालेख रखे हुए हैं, स्थान स्थान पर अनेक भव्य प्रतिमायें हैं साथ ही एक यंत्र भी स्थापित किया गया है।
इस स्थान से आगे किसी को भी पतलून पहन कर जाने की अनुमति नहीं है चूंकि आगे ही गर्भ-गुड़ी निर्मित है, जहाँ माता दंतेश्वरी विराजित हैं। दंतेवाड़ा में स्थापित माँ दंतेश्वरी की षट्भुजी प्रतिमा काले ग्रेनाइट की निर्मित है। दंतेश्वरी माता की इस प्रतिमा की छह भुजाओं में से दाहिनी ओर के हाथों में शंख, खड्ग, त्रिशुल और बाईं ओर के हाँथों में में घंटी, पद्म और राक्षस के बाल हैं। यह प्रतिमा नक्काशीयुक्त है तथा इसके ऊपरी भाग में नरसिंह अवतार का स्वरुप बना हुआ है। प्रतिमा को सर्वदा श्रंगारित कर रखा जाता है तथा दंतेश्वरी माता के सिर पर एक चांदी का छत्र भी स्थापित किया गया है। गर्भगृह से बाहर की ओर द्वार पर दो द्वारपाल दाएं-बाएं खड़े हैं जो चतुर्भुजी हैं। द्वारपालों के बायें हाथ में सर्प और दायें हाथ में गदा धारित है।

                       मंदिर की गर्भगुड़ी से पहले, उसकी बाई ओर विशाल गणेश प्रतिमा स्थापित है जिसके निकट ही एक द्वार बना हुआ है। इस ओर से आगे बढ़ने पर सामने मणिकेश्वरी देवी का मंदिर है। यहाँ अवस्थित प्राचीन प्रतिमा अष्ठभुजी है तथा अलंकृत है। मंदिर के गर्भगृह में नव ग्रहों की प्रतिमायेंस्थापित है। साथ ही दीवारों पर नरसिंह, माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमायें हैं। मंदिर के पीछे की ओर चल कर माई जी की बगिया से आगे बढ़ते हुए शंखिनी-डंकिनी नदियों के संगम की ओर जाया जा सकता है।
– राजीव रंजन प्रसाद

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bastr ki devi danteshvari, danteshvari mandir, danteshvari mandir dantewada, kamalchand bhanjdev, maa danteshvari, pravirchand bhanjdev, sakin dakin nadi 2019-10-02 15:28:44 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/10/Danteshvari-mandir-dantewada.jpg
चित्रकोट उपचुनाव : स्कूटनी आज, 3 अक्टूबर तक नाम वापसी https://deshtv.in/around-the-city/chitrakote-by-election-scooting-of-nomination-today-withdrawal-of-nomination-till-3-october/ Tue, 01 Oct 2019 06:46:21 +0000 https://deshtv.in/?p=10590

जगदलपुर। चित्रकोट उप चुनाव के लिए नामांकन पत्र जमा करने के कल आखरी दिन कुल 9 नामांकन फार्म जमा हुए थे। जिसकी स्कूटनी का काम आज किया जा रहा है। रिटर्निंग ऑफिसर इन्द्रजीत चन्द्रवाल ने कल चित्रकूट विधानसभा के उपचुनाव के नामांकन स्वीकारे थे। जिनकी आज विधिवत स्कूटनी करने के बाद चुनावी मैदान में मौजूद […]

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जगदलपुर। चित्रकोट उप चुनाव के लिए नामांकन पत्र जमा करने के कल आखरी दिन कुल 9 नामांकन फार्म जमा हुए थे। जिसकी स्कूटनी का काम आज किया जा रहा है। रिटर्निंग ऑफिसर इन्द्रजीत चन्द्रवाल ने कल चित्रकूट विधानसभा के उपचुनाव के नामांकन स्वीकारे थे। जिनकी आज विधिवत स्कूटनी करने के बाद चुनावी मैदान में मौजूद प्रत्याशियों के नाम का ऐलान भी हो जाएगा।

इस उपचुनाव के लिए सबसे पहले जनता कांग्रेस के बोमड़ा मण्डावी ने 27 सितम्बर को अपना नामांकन पत्र का पहला सेट जमा किया था। वहीं नामांकन दाखिले के आखरी दिन लखेश्वर कवासी, अम्बेडकराईट पार्टी ऑफ इंडिया, बोमड़ा मण्डावी, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे), अभय कुमार कच्छ, निर्दलीय, रितिका कर्मा, निर्दलीय, हिड़मो राम मण्डावी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, लच्छूराम कश्यप, भारतीय जनता पार्टी, राजमन बेंजाम इंडियन नेशनल कांग्रेस, धरमूराम कश्यप, निर्दलीय और खिलेश तेता निर्दलीय प्रत्याशी के रूप मेँ नामांकन पत्र दाखिल किया है।

3 अक्टूबर तक नाम वापसी
आज स्कूटनी के बाद अभ्यर्थी यदि चाहे तो 3 अक्टूबर दोपहर 3 बजे तक अपना नाम वापस ले सकते है। जिसके बाद चित्रकोट विधानसभा उप चुनाव 2019 के लिए प्रत्याशियों की अंतिम सूची का प्रकाशन निर्वाचन अधिकारी द्वारा किया जाएगा।

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Assembly by-election, Assembly by-election 2019 chhattisgarh, bjp lachchuram kashyap, chitrakote by election, congress rajman benzam 2019-10-01 12:16:21 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/09/Chitrakot-Upchunav-2019-Chitrakot-By-Election-2019-0.jpg
Exclusive : बस्तर के इतिहास-बोध में देवी प्रतिमाएं https://deshtv.in/around-the-city/exclusive-devi-statues-in-bastars-history/ Mon, 30 Sep 2019 12:57:14 +0000 https://deshtv.in/?p=10568

देश टीवी विशेष|बस्तर (छतीसगढ़) में पले–बढ़े,वर्तमान में एक सरकारी उपक्रम एन.एच.पी.सी मे प्रबंधक राजीव रंजन प्रसाद ने बस्तर की गहरी संवेदनाओ के साथ पड़ताल की है। कला, संस्कृति, साहित्य, राजनीति से लेकर तमाम सामयिक मुद्दों पर वे लिखते रहते हैं। वे बस्तर के उन पक्षों, तथ्यों, और विशेषताओं को सामने रखते हैं जो अब तक […]

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देश टीवी विशेष|बस्तर (छतीसगढ़) में पले–बढ़े,वर्तमान में एक सरकारी उपक्रम एन.एच.पी.सी मे प्रबंधक राजीव रंजन प्रसाद ने बस्तर की गहरी संवेदनाओ के साथ पड़ताल की है। कला, संस्कृति, साहित्य, राजनीति से लेकर तमाम सामयिक मुद्दों पर वे लिखते रहते हैं। वे बस्तर के उन पक्षों, तथ्यों, और विशेषताओं को सामने रखते हैं जो अब तक बहुत कम देखने-सुनने-पढ़ने को मिलती है। चर्चित किताब ‘आमचो बस्तर’ के लेखक राजीव रंजन प्रसाद को उनकी किताब ‘बस्तरनामा’ के लिए भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने अपने प्रतिष्ठित ‘राहुल सांकृत्यायन पर्यटन पुरस्कार’ से सम्मानित किया है। देश टीवी पोर्टल पर नवरात्रि के नौ दिनों तक उनके आलेखों की श्रृंखला की यह पहली कड़ी – संपादक

बस्तर की देवी-प्रतिमायें हमारे इतिहासबोध को दिशा प्रदान करती हैं। ये प्रतिमायें हमें इस अंचल में किसी समय शाक्त सम्प्रदाय की बहुलता का संकेत देती हैं। धार्मिक कारणों से देवी प्रतिमाओं का अपना महत्व है, तथापि इन्हें समझने की कोशिश किसी अध्येता को अंचल के समाजशास्त्र के नजदीक लाने में सक्षम है। नवरात्र के अवसर पर इस भूमिका आलेख का उद्देश्य बस्तर अंचल में शाक्त प्रभाव पर एक विहंगम दृष्टि प्रदान करना है। नौ आलेखों के श्रखला की कड़ियों में बस्तर संभाग के प्रमुख देवी-मंदिर तथा प्रतिमाओं पर विमर्श प्रस्तुत किया जाना है। अत: उपसंहार में इतना ही कि आस्थाओं और मान्यताओं को किसी भी पूर्वाग्रह से परे रख कर देखने की आवश्यकता है।
                                                                                        – राजीव रंजन प्रसाद

स्त्रीविमर्श के इतिहास को टटोलने की कोशिश में आस्थाओं को परे हटा कर नहीं देखा जा सकता। धरती के कोने-कोने में फैली प्रत्येक धार्मिक मान्यता में देवी अथवा स्त्री की किसी न किसी रूप में भूमिका रही है। हड़प्पा की खुदाई से प्राप्त मृण्मुहरों में देवी प्रतिमायें प्राप्त हुई हैं। वह महाकाव्यों का युग हो, जनपदों का युग हो अथवा साम्राज्यों के बनने-बिगड़ने की समयावधि, भारत में देवी शक्ति-स्वरूपा मानी गयी हैं तथा उनके उपासना की महत्ता सर्वदा रही है। पूर्व वैदिक काल में उषा और निशा जैसे प्रहरों को देवी के रूप में कल्पित किया गया है, धरती को देवी की मान्यता प्राप्त है। उत्तर वैदिक काल में देवी-मान्यतायें अधिक सशक्तता से सामने आयी हैं, अनेक ग्रंथों में उनकी महिमा व शक्ति-सामर्थ्य का स-विस्तार वर्णन किया गया है।

                           उत्तर वैदिक कालखण्ड के ग्रंथों में अम्बिका, उमा, दुर्गा, काली आदि देवियों का उल्लेख प्राप्त होता है। महाभारत के दुर्गा स्त्रोत में देवी महात्म्य का स-विस्तार वर्णन है। मार्कण्डेय पुराण में महिषासुरमर्दिनी की उत्पत्ति, स्वरूप तथा उनके द्वारा किये गये महिषासुर सहित अनेक राक्षसों के संहार का विवरण दिया गया है। इसी तरह मान्यता है कि देवताओं द्वारा शुभ्म और निशुम्भ राक्षसों से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना देवी पार्वती से की गयी, फलस्वरूप अम्बिका उत्पन्न हुई। अम्बिका को उनके काले रंग के कारण देवी काली के रूप में भी जाना गया है। चण्ड और मुण्ड राक्षसों का विनाश करने के पश्चात देवी अम्बिका को चामुण्डा नाम से पहचान मिली। मुण्डकोपनिषद में अग्नि की सात जिव्हा बतलायी गयी है – काली, कराली, मनोजवा, सुलेहिता, सुधूम्रवर्णा, स्फुर्तिगनी और विश्व रुचि। यही संकल्पना कालांतर में सप्तमातृकाओं से जुड़ जाती है। देव शक्तियाँ वास्तव में सप्तमातृकायें हैं अर्थात ब्रम्हा की शक्ति – ब्राम्ही, विष्णु की वैष्णवी, शिव की माहेश्वरी, कुमार की कौमारी, वराह की वाराही, इन्द्र की इंद्राणी तथा यम की चामुण्डा। वाराह मिहिर की वृहतसंहिता के अनुसार सभी मातृकायें अपने देवता के वाहन, आयुध और चिन्हों से जानी जाती हैं

                                    बस्तर अर्थात प्राचीन दण्डकारण्य का क्षेत्र अपने विशिष्ठ इतिहास के लिये प्रसिद्ध है। इस वनांचल में नल वंशीय राजाओं ने ईसा पूर्व 600 से 760 ई. तक शासन किया। इस समयावधि की सबसे भव्य निर्मिति राजिम के पास स्थित राजिवलोचन मंदिर है। इस मंदिर के महामण्डप की दक्षिणवर्ती पार्श्व भित्ति स्तम्भ पर देवी दुर्गा की अष्टभुजी मूर्ति उकेरी गयी है। इसी तरह छिंदक नाग वंशीय शासकों ने 760 ई. से 1324 ई. तक बस्तर में अपनी सत्ता कायम रखी। अभिलेखों से साक्ष्य मिलते हैं कि नागवंशीय शासकों की कुलदेवी मणिकेश्वरी थी। इसके साथ ही साथ कुरुषपाल से प्राप्त नाग राजा सेमेश्वरदेव के अभिलेख (11वीं सदी) में विंध्यवासिनी देवी का उल्लेख मिलता है। यह दौर तंत्र साधना के लिये भी जाना जाता है, राजपुर ताम्रपत्र (1065 ई.) में उल्लेख मिलता है कि राजा मधुरांतकदेव ने नरबलि के लिये एक ग्राम दान किया था। इस अंचल में राजतंत्र की आखिरी कड़ी था – चालुक्य शासन (1324 ई. से 1947 ई.)। देवी दंतेश्वरी को चालुक्य शासकों की कुलदेवी के रूप में जाना जाता है। बस्तर आरण्यक से ज्ञात होता है कि राजा अन्नमदेव ने 14 वी सदी में दंतेवाड़ा में देवी मंदिर का निर्माण करवाया। दंतेवाड़ा में स्थित मंदिर में काले प्रस्तर से निर्मित देवी दंतेश्वरी की प्राचीन प्रतिमा वस्तुत: महिषासुरमर्दिनी का ही स्वरूप है।

                       बस्तर के विभिन्न कालखण्ड को यहाँ प्राप्त देवी प्रतिमाओं पर उकेरी गयी नक्काशियों, वस्त्राभूषणों आदि से पहचाना जा सकता है। इस अंचल में पाई गयी असंख्य देवी प्रतिमायें तथा मंदिर एक समय में शाक्त सम्प्रदाय के प्रभावी होने की ओर इशारा करते हैं। एक दृष्टि इस अंचल में प्रमुख देवी प्रतिमाओं पर डालनी आवश्यक है। महिषासुरमर्दिनी की प्रतिमायें बारसूर, दंतेवाड़ा, छोटे डोंगर, कोण्डागाँव, फंदीवाया, भण्डारसिवनी आदि स्थानों पर प्रमुखता से पायी गयी हैं। अन्य उल्लेखनीय प्रतिमायें भोपालपट्टनम (भद्रकाली), भैरमगढ (चतुर्भुजी पार्वती), समलूर (गौरी), बारसूर (अष्टभुजी दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, भैरवी, वाराही, चामुण्डा आदि), बस्तर ग्राम (चामुण्डा), सुरडोंगर (दुर्गा), छिंडगाँव (चामुण्डा), जगदलपुर (पार्वती, कात्यायनी, अम्बिका, इंद्राणी) आदि स्थानों पर प्राप्त हुई हैं।

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bastar dashera, bastar ki devi, Bastar's History, danteshari mandir dantewada, rajiv ranjan prasad 2019-09-30 18:30:49 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/09/bastar-ka-itihas_06.jpg
बस्तर दशहरा : कांटों के झूले पर बैठ दी इजाजत https://deshtv.in/around-the-city/bastar-dussehra-allowed-to-sit-on-the-swing-of-thorns/ Mon, 30 Sep 2019 08:27:39 +0000 https://deshtv.in/?p=10527

जगदलपुर| विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा की रस्मों की शुरुआत हुई, जब काछनदेवी ने पर्व मनाने की अनुमति दी। लगातार चौथी बार भी बड़ेमारेंगा की रहने वाली 9 साल की अनुराधा काछनदेवी बनी। बस्तर राज परिवार के सदस्य कमलचंद भजंदेव अपने लाव लश्कर के साथ राजमहल से बाजे-गाजे और आतिशबाजी के साथ निकलकर काछनगुड़ी पहुंचे। […]

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जगदलपुर| विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा की रस्मों की शुरुआत हुई, जब काछनदेवी ने पर्व मनाने की अनुमति दी। लगातार चौथी बार भी बड़ेमारेंगा की रहने वाली 9 साल की अनुराधा काछनदेवी बनी। बस्तर राज परिवार के सदस्य कमलचंद भजंदेव अपने लाव लश्कर के साथ राजमहल से बाजे-गाजे और आतिशबाजी के साथ निकलकर काछनगुड़ी पहुंचे।

                जहां पर परम्परानुसार काछनदेवी से विधिवत दशहरा मनाने की अनुमति ली। काछनगादी रस्म के तहत 9 साल की कन्या अनुराधा पर शाम को कथित तौर पर रण की देवी का आवेश आया। उस दौरान छोटी सी बालिका को देवी रूप में बेल कांटों के झूले में झुलाया गया।

                 इसी दौरान बस्तर राजपरिवार के कमलचंद भंजदेव काछन देवी की पूजा-अर्चना कर बस्तर दशहरा पर्व शुभारंभ करने के साथ ही निर्वाध रूप से संपन्न कराने की अनुमति ली। काछनगादी रस्म के साथ ही विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा अपनी भव्यता के साथ शुरू हुई।

जानकार बताते हैं कि करीब छह सौ साल पहले यह परंपरा 17वीं शताब्दी में शुरू हुई। इसके बाद से अब तक काछनगादी परंपरा चलती आ रही है। इसके पहले शनिवार को काछनदेवी काछनगुड़ी पहुंची। उनके साथ गुरूमाई, सिरहाइन और सहायक पुजारी भी पहुंचे। पुजारी सुकलु दास ने बताया कि करीब 1 महीने तक अनुराधा का पूरा परिवार यहीं रहकर पूजा-अर्चना करता है। दशहरा पर्व खत्म होने के बाद उनकी विदाई होती है।

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bastar, Bastar Dusshera festival, CG Tourism in Bastar, Kaachan devi, Kaachan Gadhi ritual, Kakatiya dynasty of Bastar 2019-09-30 13:57:39 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/09/Bastar-Dusshera-Kaachan-Gadhi-ritual.jpg
रियासतकालीन जशपुर दशहरा का हुआ आग़ाज, राजपरिवार ने की पूजा https://deshtv.in/around-the-city/the-princely-state-of-jashpur-dussehra-was-visited-the-royal-family-worshiped/ Mon, 30 Sep 2019 06:37:44 +0000 https://deshtv.in/?p=10514

Princely Jashpur Dussehra started

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जशपुर। रविवार सुबह नवरात्र की शुरूआत जिला मुख्यालय में धूमधाम से ढोल नगाड़ों के साथ की गई। सबसे पहले रियासत कालीन परंपराओं के अनुरूप यहां के छोटे तालाब से लगे वृक्ष गंगा के पास आचार्य व राजपरिवार के सदस्य काली मंदिर से अस्त्र, शस्त्र लेकर पहुंचे। जहां विशेष पूजा अर्चना के साथ कलश स्थापना के लिए जल लिया गया। इसी के साथ जशपुर दशहरा महोत्सव का भी शुभारंभ हुआ। दिन भर देवालयों में श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की।

शारदीय नवरात्र जिले में आस्था और विश्वास के साथ धूमधाम से मनाया जाता है। परंपरागत रूप से रविवार को नवरात्र के पहले दिन की पूजा अर्चना प्रारंभ हुई। सांसद रणविजय प्रताप सिंह जूदेव सहित 21 आचार्य काली मंदिर पहुंचे जहां से शस्त्र लेकर शोभा यात्रा निकाली गई। शोभायात्रा के रूप में आचार्य व श्रद्धालु वृक्ष गंगा पक्की डाड़ी से देवी मंदिर पहुंचे, जहां कलश स्थापना कर अनुष्ठान का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर पूरे अनुष्ठान में राजा रणविजय सिंह की अगुवाई में 21 आचार्यों ने विशेष पूजा अर्चना की और सैकड़ों की संख्या में पूरे दिन श्रद्धालुओं का मंदिर में ताता लगा रहा। रविवार सुबह पांच बजे ही जिला मुख्यालय के प्रमुख मंदिर देवी मंदिर एंव श्री बालाजी मंदिर के पट खुल गए और श्रद्धालुओं का दर्शन के लिए ताता लगा रहा। सुबह रियासतकाली परंपरा के अनुरूप सभी वर्ग के लोग मंदिर पहुंचे और अपनी भूमिका अदा करते हुए अनुष्ठान का शुभारंभ किया।

                                 नवरात्र के पहले दिन प्रतिपदा के अवसर पर सबसे पहले श्री बालाजी मंदिर से शस्त्र देवी मंदिर ले जाया गया। देवी मंदिर से अस्त्र, शस्त्रों को लेकर आचार्य पक्की डाड़ी पहुंचे, जहां वृक्ष गंगा के नीचे विशेष खंडा पूजा की गई। इन अस्त्र, शस्त्रों को देवी की शक्ति के रूप में पूजा जाता है और मान्यता है कि इन्ही के माध्यम से देवी मां और भगवान बालाजी जशपुर नगरी की रक्षा करते हैं। शोभा यात्रा के रूप में यहां सभी पहुंचे, और पक्की डाड़ी से जल लेकर वापस देवी मंदिर पहुंचे। यहां कलश स्थापना कर रणविजय प्रताप सिंह देव ने ब्राह्मणों का वरण किया। देवी मंदिर में पूजा अर्चना के बाद सभी आचार्य व राजपरिवार के सदस्य श्री बाला जी मंदिर पहुंचे, जहां कलश स्थापना व दीप प्रज्वलन के साथ ही पूजा अर्चना की गई। नवरात्र पर बने कार्यक्रम के अनुसार बाला जी मंदिर में सुबह व देवी मंदिर में शाम को हवन किया गया। वहीं देवी मंदिर में दुर्गा सप्तशती पाठ एंव बाला जी मंदिर में पुरूष सुक्त, श्री सुक्त, विष्णु सहस्रनांम व वेद पाठ किया जा रहा है। नवरात्र केे पहले दिन जहां दर्शन और अनुष्ठान में शामिल होने सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा वहीं श्री बाला जी मंदिर में विशेष हवन और पाठ में शामिल होने सहित प्रसाद लेने के लिए श्रद्धालुओं की कतार देखने को मिली। यहां भंडारे का भी आयोजन किया गया।

उल्लेखनीय है कि नगर में नवरात्र पूजन का कार्यक्रम सामूहिक रूप से देवी मंदिर में आयोजित किया गया है, जिसे काली मंदिर के नाम से भी लोग जानते हैं। उक्त दोनों ही मंदिरों में चल रहे नवरात्र उत्सव के अवसर पर आयोजित विशेष अनुष्ठान में यहां के पंडित, आचार्यों को दायित्व सौंपा गया है और राज परिवार सहित आम जनता की ओर से हवन, पूजन की जिम्मेदारी अलग-अलग आचार्यों को सौंपी गई है। यहां आयोजित सभी अनुष्ठानों को सपुल बनाने के लिए आचार्यों, पंडितों सहित विभिन्न् वर्गों के लोग जुटे हैं। यहां की रियासतकालीन परंपरा के अनुसार हवन पूजन में ब्राह्मणों सहित बैगा, कोटवारों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। श्रीबालाजी ट्रस्ट के प्रबंधक पं परमानन्द मिश्र ने बताया कि यहां अनुष्ठान में शामिल प्रमुख आचार्यों में पंडित विनोद कुमार मिश्र, पं रजत मिश्र, पं मनोज रमाकांत मिश्र, पं नरेश कुमार मिश्रा, पं रामपरीक्षण पंडित, पं रामजी मिश्रा, पं गौरी शंकर मिश्रा, पं हरिशंकर मिश्रा, पं रविशंकर मिश्रा, पं अनुज कुमार मिश्रा, पं दीपक मिश्रा सहित अन्य आचार्य शामिल हैं। नवरात्र के अनुष्ठान के संबंध में बताते हुए पं विनोद मिश्र ने बताया कि नियमित रूप से 21 आचार्यों के मार्गदर्शन में राज परिवार के सदस्य सहित नगर व ग्रामों से आए हजारों श्रद्वालु मां दुर्गा की उपासना वैदिक, राजसी और तांत्रिक विधि से करते हैं।

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बीजापुर : चाबी ने खोल दिया लाश का राज… https://deshtv.in/around-the-city/bijapur-the-key-has-opened-the-secret-of-the-corpse/ Mon, 30 Sep 2019 06:12:52 +0000 https://deshtv.in/?p=10509

बीजापुर। आखिरकार बैदरगुड़ा हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली। इसं अंधे कत्ल में लाश के पास केवल एक चाबी मिली थी जिसने पूरे राज खुलवा दिए। पुलिस ने सीसीटीवी की भी मदद ली और फिर कभी नक्सली रहा प्रेमी गिरफ्तार कर लया गया। बैदरगुड़ा में दस दिन पहले मिली युवती सुनीता पोयाम के अंधे […]

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बीजापुर। आखिरकार बैदरगुड़ा हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली। इसं अंधे कत्ल में लाश के पास केवल एक चाबी मिली थी जिसने पूरे राज खुलवा दिए। पुलिस ने सीसीटीवी की भी मदद ली और फिर कभी नक्सली रहा प्रेमी गिरफ्तार कर लया गया।
बैदरगुड़ा में दस दिन पहले मिली युवती सुनीता पोयाम के अंधे कत्ल का हत्यारा उसका प्रेमी ही होगा इसका अंदाजा किसी को नहीं था। एसपी दिव्यांग पटेल ने मीडिया को बताया कि ये बड़ा ही पेचिदा मामला था और इसका ओर-छोर ही नहीं मिल रहा था। युवती की हत्या 16 सितंबर को हुई थी। पुलिस को 18 सितंबर की रात अज्ञात युवती की लाश बैदरगुड़ा में मिलने की खबर मिली। दूसरे दिन सुबह जब पुलिस वहां पहुंची तो उसकी शिनाख्त करना मुश्किल हो गया।

                        कोई सुराग नहीं जिससे युवती के बारे में पता लगाया जा सके। लाश के पास सिर्फ एक चाबी ही मिली और इसी से पुलिस ने राज खोलना शुरू किया। पुलिस ने उसी दिन ही बैदरगुड़ा के आसपास बंद घरों को उसी चाबी से खोलना शुरू किया। एक मकान का ताला उस चाबी से खुल गया। अंदर युवती का आधार कार्ड और दीगर कागजात मिले। फिर पुलिस हरकत में आई। उसके मोबाइल डिटेल को खंगाला और उनसे पूछताछ की गई। इसके बाद शहर में लगाए गए तीन दर्जन सीसीटीवी को खंगाला गया। इसके बाद हत्या की परतें खुलने लगीं।
कुटरू निवासी 24 साल की सुनीता पोयाम 16 सितंबर की शाम मस्जिद के पास इमाम के पास गई थी। इमाम ने बताया कि वह धार्मिक काम के बाद निकल गई। पुलिस ने फिर मस्जिद से उसे ट्रेस करना शुरू किया। वह जिस ओर गई और जिससे मिली, उनसे पूछताछ की गई। आखिर में वह महादेव प्रेमी बुधरू के साथ जाती दिखाई दी।

शादी का बनाया दबाव तो की हत्या
पुलिस जब बुधरू के घर नयापारा गई तो पता चला कि वह अपने गांव चेरकंटी गया था। उसे पकड़ने खबर भिजवाई गई कि उसकी नौकरी लग गई है। वह जब बीजापुर पहुंचा तब उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसने कबूल किया कि उसने ही गला दबाकर हत्या की है। उसके सुनीता से प्रेम संबंध थे। वह शादीशुदा है, उसके एक अन्य युवती से लिव इन पर है। इसके बाद भी उसने सुनीता से प्रेम संबंध बनाए। बताया कि जब बैदरगुड़ा गए तब सुनीता ने अपनाने का दबाव बनाया। इसके बाद क्षणिक आवेश में उसने हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी द्वारा फेंके गए सुनीता का मोबाइल बैदरगुड़ा तालाब से बरामद किया।

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bijapur me hatya, hatya khulasa, naxli hatya, premi ne ki hatya, sex ke lie murder, shadi ke lie hatya 2019-09-30 11:42:52 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/09/bijapur-hatya-khulasa-0.jpg
बस्तर में अब शिक्षक भी नक्सल निशाने पर , दहशत का माहौल https://deshtv.in/around-the-city/now-teachers-in-naxal-target-in-bastar-panic-atmosphere/ Sat, 28 Sep 2019 12:02:43 +0000 https://deshtv.in/?p=10457

जगदलपुर। बीजापुर जिले में हफ्ते भर पहले एक छात्र की नक्सल हत्या के बाद आज शनिवार सुबह एक शिक्षक की गला रेतकर हत्या कर दी गई।नक्सलियों ने घर से उसे उठा लिया था। इसके घंटे भर बाद उसकी लाश मिली। सुकमा एसपी शलभ सिन्हा के मुताबिक इलाके में नक्सली दहशत से कई स्कूल बंद पड़े […]

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जगदलपुर। बीजापुर जिले में हफ्ते भर पहले एक छात्र की नक्सल हत्या के बाद आज शनिवार सुबह एक शिक्षक की गला रेतकर हत्या कर दी गई।नक्सलियों ने घर से उसे उठा लिया था। इसके घंटे भर बाद उसकी लाश मिली।
सुकमा एसपी शलभ सिन्हा के मुताबिक इलाके में नक्सली दहशत से कई स्कूल बंद पड़े हैं। इन बंद पड़े स्कूलों को खुलवाने के लिए प्रशासन द्वारा मुचाकी लिंगा को शिक्षा दूत नियुक्त किया गया था। उन्होंने बताया कि हत्या की सूचना उन्हें अवश्य मिली है, किंतु लिंगा के परिजनों ने अब तक थाने में शिकायत दर्ज नहीं करवाई है।

                                      सूत्रों के अनुसार सुकमा के बेनपल्ली गांव में आज सुबह 8-10 वर्दीधारी सशस्त्र नक्सलियों ने धावा बोला। नक्सली गांव के युवक मुचाकी लिंगा को घर से अगवा कर जंगल की ओर ले गए। एक घंटे बाद उसका शव मुख्य मार्ग पर पड़ा मिला। लिंगा की धारदार हथियार से गला रेतकर हत्या की गई है। हत्या से पूर्व उसे लाठी डंडों से बुरी तरह पीटा गया है।

उल्लेखनीय है कि एक हफ्ते पहले बीजापुर में नक्सलियों ने स्कूली छात्र को मार डाला। छात्र के माता पिता की कुछ साल पहले मौत हो जाने की वजह से वह अपने चाचा के घर पर रहकर पढ़ाई कर रहा था। बासागुड़ा थाना क्षेत्र के तिम्मापुरम गांव में नक्सलियों ने दसवीं में पढ़ने वाले रमेश कुंजाम की हत्या भी अपहरण के बाद कर दी थी। इसके बाद जनअदालत लगाकर बच्चे को दोषी करार देकर, उसकी हत्या की। गांव वालों ने नक्सलियों के डर से पुलिस को सूचित नहीं किया।

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bijapur crime, naxal murder, Naxal target in Bastar, Naxalites murdered teacher, teacher muder 2019-09-28 17:32:43 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/09/teacher-muder_02.jpg
उपचुनाव जीत से कांग्रेस की सीट में इजाफा,मिला हाथ को साथ https://deshtv.in/around-the-city/dantewada-by-election-victory-increased-in-congress-seat-devti-karma-winner/ Sat, 28 Sep 2019 10:07:45 +0000 https://deshtv.in/?p=10445

दंतेवाड़ा|दंतेवाड़ा उपचुनाव में शहादत विरूद्ध शहादत की चुनावी जंग रहा।एक तरफ शहीद महेंद्र की पत्नी तो दूसरी तरफ शहीद भीमा मंडावी की पत्नी चुनावी दंगल मे थी।आखिरकार देवती कर्मा दुबारा विधायक बनने में सफल हुई। दंतेवाड़ा की सीट कांग्रेस के द्वारा जीत हासिल करने पर अब कांग्रेस विधानसभा में एक और सीट का इजाफा करते […]

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दंतेवाड़ा|दंतेवाड़ा उपचुनाव में शहादत विरूद्ध शहादत की चुनावी जंग रहा।एक तरफ शहीद महेंद्र की पत्नी तो दूसरी तरफ शहीद भीमा मंडावी की पत्नी चुनावी दंगल मे थी।आखिरकार देवती कर्मा दुबारा विधायक बनने में सफल हुई। दंतेवाड़ा की सीट कांग्रेस के द्वारा जीत हासिल करने पर अब कांग्रेस विधानसभा में एक और सीट का इजाफा करते हुए 69 सीट पर पहंच गई है। दंतेवाड़ा के उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी देवती कर्मा अपने प्रतिद्वंदी भाजपा प्रत्याशी ओजस्वी मंडावी से 11 हजार 192 मतो से जीत हासिल किया है। वहीं पिछले चुनाव में भाजपा और कांग्रेस में जीत का आकड़ा काफी कम था। भाजपा के प्रत्याशी भीमा मंडावी को 2071 मतो से ही जीत मिली थी।

                                           दंतेवाड़ा उपचुनाव निवर्तमान विधायक भीमा मंडावी के नक्सलियों द्वारा हत्या किए जाने के बाद हुआ। ये सीट पहले भाजपा के पास थी, जो अब कांग्रेस के खाते मे जुड़ गई है। दंतेवाड़ा के उपचुनाव में कांग्रेंस ने शहीद कर्मा की पत्नी देवती कर्मा को मैदान मे उतारा था। तो वहीं भाजपा ने भी अपने शहीद विधायक भीमा मंडावी की पत्नी ओजस्वी मंडावी को टिकट दिया था। सबसे बड़ी बात ये है कि लोकसभा चुनाव के दौरान ही श्यामगिरी गांव के पास नक्सलियों ने भाजपा विधायक भीमा मंडावी की बारूदी विस्फोट में हत्या की थी, लेकिन उपचुनाव के नतीजे मे दिखा कि भाजपा की प्रत्याशी ओजस्वी मंडावी को इस क्षेत्र से सहानुभूति मत भी नहीं मिले,यानी क्षेत्रवासियों ने देवती कर्मा को ही इस क्षेत्र से भी विजयी बनाया।

चुनावी मैदान मे थे 9 उम्मीदवार,नोटा रहा हावी
दंतेवाड़ा के उप निर्वाचन में कुल नौ प्रत्याशियों ने अपने भाग्य को आजमाया था। हालाकि मुख्य मुकाबला तो केवल कांग्रेस और भाजपा मे ही थी। जिसे राजनीतिक गलियारों से लेकर आममतदाताओं को भी इसकी जानकारी थी। मतगणना में भी पहले ही चरण से कांग्रेस ने भाजपा से बढ़त बनाकर रखी थी। जो 20 वे राउंड तक बरकरार रही। यही वजह से कांग्रेस की प्रत्याशी देवती कर्मा को कुल 50,028 वोट पड़े। वहीं भाजपा के प्रत्याशी ओजस्वी मंडावी को 38,836 मत ही मिले थे। कांग्रेस और भाजपा की सीधी लड़ाई में देवती कर्मा ने 11,192 मतो से अपनी जीत हासिल कर ली। इसके साथ ही अन्य प्रत्याशियों में सीपीआई प्रत्याशी भीमसेन मंडावी को 7,664 मत, एनसीपी प्रत्याशी अजय नाग को 3,457 वोट,निर्दलिय प्रत्याशी सुदरू राम कुंजाम को 2,545,गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रत्याशी योगेश मरकाम को 2,119 वोट मिले। वहीं आम आदमी पार्टी से प्रत्याशी बल्लूराम भवानी को 1,533 वेाट,सुजीत कर्मा जो जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रत्याशी थे उन्हे 1,393 मत पड़े। इसके साथ ही बहुजन समाज पार्टी के हेमंत पोयाम को महज 1,252 वोट से ही संतुष्ट होना पड़ा। ऐसे में इस बार प्रदेश मे तीसरी पार्टी के रूप में उभरी जोगी कांग्रेस के दल को करारी कार का सामना करना पड़ा। डाक मत पत्र में 253 और मतगणना में सबसे बड़ी बात नोटा में पड़े वोट ने भी वोटों के समीकरण को बिगाड़ा है। नोटा में 5,779 मत पड़े है। इस तरह नोटा का मतगणना में चौथा स्थान रहा।

नक्सलवाद से दूर था उपचुनाव
दंतेवाड़ा को लालगढ़ कहना कोई अतिश्योक्ति नही होगी। ये क्षेत्र पुरी तरह से नक्सलगढ़ माना जाता है। जिसके लिए चुनाव आयोग ने उपचुनाव की घोषणा के साथ ही चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा के पुख्ता इंतेजाम किए थे, जो कारगर साबित भी हुए। यदि माना जाए तो कई सालों बाद इस बार हुए चुनाव में लाल आतंक काफुर था। हालाकि नक्सलवाद से जुड़े कई पर्चे मिले जरूर, लेकिन मतदताओं ने इसे धता बताते हुए अपने मतो का प्रयोग किया और जनतंत्र की जीत हुई।

कांग्रेस मे जीत की खुशी
शहादत विरूद्ध शहादत को लेकर एक बार कांग्रेस असमंजस मे जरूर थी,साथ ही इस चुनाव में सरकार की प्रतिष्ठा भी दांव पर थी। लेकिन चुनावी रणनीति पुख्ता होने और राज्य सरकार के आठ महिनों के काम काज को दंतेवाड़ा की जनता ने हाथों हाथ लेने की बात कांग्रेस के कार्यकर्ता जीत के बाद कहते नजर आ रहे है। कांग्रेस इस जीत से काफी खुश है। दंतेवाड़ा क्षेत्र के कार्यकर्ता के साथ-साथ जीत का रंग रायपुर के कार्यकर्ताओं मे भी दिखी। जीत के रंग मे डूबे कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर और जमकर आतिशबाजी कर जश्न मनाया।

भाजपा ने सरकार पर फोड़ा ठीकरा
दंतेवाड़ा के दंगल मे भाजपा के परास्त होने के बाद विपक्ष ने अपनी भूमिका निभाते हुए हार का सारा गुस्सा राज्य सरकार पर ही उतार दिया। पूर्व मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह ने तो सिधे तौर पर इसके लिए प्रशासन पर ही सरकारी तंत्र बनने का आरोप लगाया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेंडी ने उपचुनाव के दौरान भाजपा को निर्वाचन आयोग द्वारा सभा की अनुमति नही दिए जाने को सरकारी करण कह डाला। तो वहीं नेताप्रतिपक्ष धरम लाल कौशिक ने हार को स्वीकारते हुए कहा कि कांग्रेस, सरकार मे रह कर धन-बल का भरपूर प्रयोग कीया। साथ ही पुरे प्रशासन को राज्य शासन की मुट्ठी मे होना बताया।

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CM bhpesh baghe, dantewada assembly, Dantewada by-election, devti karma vs ojasvi mandavi, devti karma winner, ojaswi mandavi 2019-09-28 16:14:18 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/09/dantewada-jeet_01.jpg
दंतेवाड़ा उपचुनाव में कांगेस 6932 मतों से आगे,भाजपा पीछे https://deshtv.in/around-the-city/congress-leading-by-6932-votes-in-dantewada-by-election-bjp-behind/ Fri, 27 Sep 2019 06:13:13 +0000 https://deshtv.in/?p=10414

दंतेवाड़ा। दंतेवाड़ा उपचुनाव का नतीजा आज आएगा। जिसके लिए मतगणना की शुरुआत हो चुकी है। जिला निर्वाचन अधिकारी के अनुसार उपचुनाव की मतगणना 20 राउंड में की जाएगी। मतगणना दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय के डाइट परिसर में सुबह आठ बजे से चल रही है। रुझान में कांग्रेस पहले राउंड से ही आगे चल रही है। पहले […]

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दंतेवाड़ा। दंतेवाड़ा उपचुनाव का नतीजा आज आएगा। जिसके लिए मतगणना की शुरुआत हो चुकी है। जिला निर्वाचन अधिकारी के अनुसार उपचुनाव की मतगणना 20 राउंड में की जाएगी। मतगणना दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय के डाइट परिसर में सुबह आठ बजे से चल रही है। रुझान में कांग्रेस पहले राउंड से ही आगे चल रही है। पहले चरण में डाक मतपत्रों की गिनती की गई है, जिसमें कांग्रेस प्रत्याशी देवती कर्मा ने भाजपा प्रत्याशी ओजस्वी मण्डावी को पीछे छोड़ दिया है। प्रथम चरण की मतगणना में बीजेपी को 1511 मत प्राप्त हुए वही कांग्रेस को 3267 मत प्राप्त हुआ है।

छठवे चरण की मतगणना शुरू
उपचुनाव के नतीजों में अब तक पांच चरणों के मतों की गणना हो चुकी है। जिसमे कांग्रेस के प्रत्याशी देवती कर्मा दंतेवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के लगभग सभी बूथों पर बढ़त बनाई हुई है। चौथे चरण की मतगणना के बाद कांग्रेस इस क्षेत्र में 6700 मतों से आगे है। उल्लेखनीय है की पिछले विधानसभा चुनाव 2018 में दिवंगत भीमा मांडवी भाजपा से जीत हासिल की थी। भीमा ने कांग्रेस के प्रत्याशी देवती कर्मा को महज 2071 मतों से पराजित किया था। लेकिन इस बार के उपचुनाव में पांचवे चरण की शुरुआत होते तक कांग्रेस की प्रत्याशी भाजपा के प्रत्याशी आगे हैं। अब पांचवे चरण की समाप्ति पर कांग्रेस 6932 मतों से आगे चल रही है।

कांग्रेस में ख़ुशी
दंतेवाड़ा उप चुनाव में लगातार पांचवे चरण तक कांग्रेस की बनी बढ़त को देखते हुए कांग्रेस में काफी ख़ुशी देखी जा रही है।स्थानीय कांग्रेस नेताओं के अलावा प्रदेश स्तर के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी भी धीरे धीरे बढ़ने लगी है।पीसीसी अध्यक्ष मोहन मरकाम भी मतगणना अपने नेताओं के साथ मौजूद है। कार्यकर्ताओं के चेहरे पर जीत की ख़ुशी साफ़ झलक रही है। मतगणना में कांग्रेस के बढ़त को कांग्रेस का बेहतर चुनावी प्रदर्शन मन जा रहा है।

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dantewada assembly, Dantewada by-election, devti karma, devti karma vs ojasvi mandavi, ojasvi mandavi, vote counting 2019-09-27 11:43:13 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/09/dantewada-upchunav_01-1.jpg
Big News : नक्सली नेता आजाद की पत्नी सुजाता गिरफ्तार https://deshtv.in/around-the-city/big-news-sujata-wife-of-naxalite-leader-azad-arrested/ Thu, 26 Sep 2019 09:58:16 +0000 https://deshtv.in/?p=10400

बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर में पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। नक्सल नेता आजाद की पत्नी सुजाता को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरफ्तारी की पुष्टि बीजापुर एसपी दिव्यांग पटेल ने भी की है। मिली जानकारी के मुताबिक आजाद देश के बड़े नक्सल नेताओं में शुमार है, और उसकी पत्नी की सक्रियता […]

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बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर में पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। नक्सल नेता आजाद की पत्नी सुजाता को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरफ्तारी की पुष्टि बीजापुर एसपी दिव्यांग पटेल ने भी की है। मिली जानकारी के मुताबिक आजाद देश के बड़े नक्सल नेताओं में शुमार है, और उसकी पत्नी की सक्रियता भी माओवादी संगठन में लगातार कई सालों से देखी जा रही थी। जिनकी गिरफ्तारी के लिए देश के तमाम नक्सल प्रभावित राज्यों की पुलिस काफी लंबे समय से प्रयास कर रही थी।


गिरफ्तार महिला नक्सली सुजाता उर्फ नागाराम रूपा को नक्सली संगठन के तेलंगाना स्टेट कमेटी का सचिव बताया जाता है। सुजाता देश के कई बड़े नक्सल हमलों में शामिल होने के साथ ही माओवादियों घटनाओं की मास्टरमाइंड भी रही है। छत्तीसगढ़ पुलिस ने यह दावा किया है कि सुजाता छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और उड़ीसा में भी सक्रिय है। बीजपुर एसपी दिव्यांग पटेल ने इस गिरफ्तारी की पुष्टिकर जानकारी देते हुए बताया कि तेलंगाना पुलिस ने वारंगल में सुजाता को गिरफ्तार किया है। जिसके बाद प्रोडक्शन वारंट में छत्तीसगढ़ पुलिस ने बीजापुर लाया है।

खंगाल रहे अंदुरुनी जानकारी
तेलंगाना में हुई इस अहम महिला नक्सली सुजाता की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उससे पूछताछ की रणनीति बना रही है। पुलिस सुजाता से छत्तीसगढ़ में घटित हुए कई बड़ी घटनाओं में अहम खुलासे होने की उम्मीद कर रही है। वही प्रदेश के धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नक्सलियों के ट्रेनिंग कैंप, हाइड आउट्स एरिया और सर्वाइवल कैंप के इनपुट्स लेने में जुटी है।

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chathve charan ka matdan, mahila naxali aujata, mahila naxali giraftar, Naxal Giraftar, Naxal Hamla, naxali aazaad 2019-09-26 15:28:16 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/09/Mahila-Naxal-sujata-2019.jpg
मजदूर संगठनों की हड़ताल से कोयला उत्पादन प्रभावित, ढुलाई भी ठप https://deshtv.in/local-news/coal-production-affected-due-to-strike-by-trade-unions-transportation-also-stalled/ Wed, 25 Sep 2019 10:51:41 +0000 https://deshtv.in/?p=10365

कोरबा। कोयला उद्योग में शत प्रतिशत एफडीआई लागू करने के विरोध में लामबंद मज़दूर संगठन की हड़ताल का कोयला उत्पादन पर काफी असर पड़ा है। बीएमएस व एसईकेएमसी ने सोमवार से पांच दिवसीय हड़ताल की शुरूआत की है। 27 सितंबर तक घोषित इस हड़ताल से जिले में संचालित एसईसीएल के भूमिगत व ओपन खदानों में […]

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कोरबा। कोयला उद्योग में शत प्रतिशत एफडीआई लागू करने के विरोध में लामबंद मज़दूर संगठन की हड़ताल का कोयला उत्पादन पर काफी असर पड़ा है। बीएमएस व एसईकेएमसी ने सोमवार से पांच दिवसीय हड़ताल की शुरूआत की है। 27 सितंबर तक घोषित इस हड़ताल से जिले में संचालित एसईसीएल के भूमिगत व ओपन खदानों में कोयला उत्पादन पर काफी असर पड़ा है। मजदूर नेताओं ने सडक़ व रेल मार्ग से होने वाले कोल परिवहन को भी ठप कर दिया। संयुक्त श्रमिक संगठन ने कोयला उद्योग में एफडीआई की मंजूरी को वापस लेने की मांग की है।


मजदूर नेता खदानों के बाहर सुबह से ही डटे रहे और कर्मचारियों को काम पर नहीं जाने की समझाईश दी। हड़ताल में एटक, इंटक, सीटू, एचएमएस ने सहभागिता निभाई। इंटक जिलाध्यक्ष विकास सिंह व एटक के राष्ट्रीय सचिव दीपेश मिश्रा के नेतृत्व में सीटू मानिकपुर सचिव मोहन सिंह प्रधान, सुनील शर्मा, डी शेखर, महेंदर सिंह, रंजन, पार्षद सीताराम चौहान, आदि ने मानिकपुर व सेंट्रल वर्कशाप में काम बंद कराया। कोरबा एरिया के कई अन्य खदानों में भी पहुंचे।

कोरबा के साथ इन इलाकों में भी हड़ताल
कोरबा के अलावा कुसमुंडा, दीपका, गेवरा एरिया में भी हड़ताल का व्यापक असर दिखा। संगठन के नेताओं ने कहा कि कोयला उद्योग में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश अफसर और सरकार के हित में नहीं है। पहले व्यवसायिक खनन के बाद इसे अनुमति देकर कोल इंडिया के अस्तितव को खतरे में डाल दिया है। इस फैसले से कंपनी बंद होने की स्थिति में आ जाएगी।

तो विदेशी कम्पनी भी निकालेगी कोयला
एफडीआई की मंंजूरी से विदेशी कंपनियां भारत में कोल ब्लॉक ले सकेंगी। कोयला खोदकर बाजार में बिक्री भी करेंगी। चूंकि कोल इंडिया कर्मचारियों के वेतन भत्ते पर निजी कंपनियों की तुलना में अधिक पैसे खर्च करती है। निजी कंपनियों का कोयला बाजार में सस्ता बिकेगा, इससे कोल इंडिया का कोयला खरीदने ग्राहक नहीं मिलेंगे। प्रतिस्पर्धा होने से कोयला उद्योग के समक्ष चुनौती खड़ी हो जाएगी। इससे कंपनी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

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Coal production affected due to strike, Coal production in korba, due to strike, transportation also stalled 2019-09-25 16:21:41 https://deshtv.in/wp-content/uploads/2019/09/Koyla-khdaan-hadtal-01.jpg