किशोर एंड्रीक, भाई-साथियों को मौत के खन्दक से निकाल शहीद हो गया

उसे अपने छोटे भाई हेमंत एंड्रीक की याद आई, जो इस मुठभेड़ में दूसरी टीम के साथ शामिल था

धर्मेन्द्र महापात्र, बीजापुर। किशोर एंड्रीक अपने छोटे भाई हेमंत एंड्रीक और साथियों  को मौत के खन्दक से निकाल शहीद हो गया |जवान किशोर एंड्रीक जिला मुख्यालय से 14 किमी दूर गंगालूर मार्ग पर स्थित ग्राम पंचायत चेरपाल का निवासी था| बीजापुर के तर्रेम थाना क्षेत्र के जोनागुड़ा में तीन अप्रैल को सात घंटे तक चले मुठभेड़ में 22 जवानों ने अपनी शहादत दी है।

किशोर एंड्रीक इनमें से एक था| जवान किशोर एंड्रीक जिला मुख्यालय से 14 किमी दूर गंगालूर मार्ग पर स्थित ग्राम पंचायत चेरपाल का निवासी था, जिसे जोनागुड़ा में नक्सलियों से हुए मुठभेड़ के दौरान बहादुरी से  सामना करते हुए शहादत मिली।

घटना के प्रत्यक्षदर्शी जवानों की मानें तो शहीद होने से पहले किशोर एंड्रीक ने अपने घायल तीन साथियों को फायरिंग के बीच से निकालकर सकुशल दूर ले आया था|  उन्हें पानी पिलाकर आराम करने को कहकर खुद सुरक्षित स्थान पर मोर्चा लिए हुए था।

किशोर को तभी उसे अपने छोटे भाई हेमंत एंड्रीक की याद आई, जो इस मुठभेड़ में दूसरी टीम के साथ शामिल था।

हेमंत और किशोर दोनों सगे भाई है और इस आपरेशन के लिए हेमंत आठ नंबर और किशोर चार नंबर की टोली में शामिल थे।

किशोर को हेमंत जब कही नजर नहीं आया तो वह गोलियों की बौछार के बीच कवर फायर करते हुए भाई को सकुशल निकाल लाने नक्सलियों के बीच पहुंच गया और इसी दौरान नक्सलियों की गोली से वह शहीद हो गया।

गृहग्राम चेरपाल में छोटे भाई हेमंत ने ही किशोर को मुखाग्नि दी।

सन् 2002 में किशोर का विवाह गांव में ही रिंकी से किया गया था। बताया जा रहा है कि पिछले 19 सालों बाद शहीद किशोर की पत्नी इस समय चार माह की गर्भवती है पर विडंबना तो यह है कि इतने वर्षों तक संतान सुख की लालसा रखने वाले किशोर ने पिता बनने के सुख से पहले ही नक्सलियों से लोहा लेते हुए अपनी शहादत दे दी।