छत्तीसगढ़ में हफ्ते भर में 5 हाथियों ने दम तोड़ा, धमतरी-रायगढ़ में नई मौतें

अब धमतरी में दलदल ने तो रायगढ़ में करंट ने ली हाथियों की जान

डा. निर्मल कुमार साहू,रायपुर। छत्तीसगढ़ में हाथी और मानव के बीच संघर्ष जारी है। मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। बीते हफ्ते 9 से 16 जून के बीच 5 हाथियों ने दम तोड़ा। हादसा, बीमारी, संक्रमण और करंट से शिकार इसके कारण बने हैं। इसी सप्ताह सरगुजा संभाग में 3 हाथियों की मौत देश भर में चर्चा का विषय बना रहा, मीडिया में सुर्खियों में रहा। प्रशासन की गाज 6 वन अफसरों पर गिरी। अब ताजा मामला धमतरी और रायगढ़ जिले का है जहां दो हाथियों की मौत हो गई।
दलदल में फंसे शावक की मौत
कल सोमवार को गरियाबंद जिले से भटक कर सिंगपुर, केरेगांव वन परिक्षेत्र से होते धमतरी वन परिक्षेत्र के गंगरेल डूबान पहुंचे 21 हाथियों के दल में से एक बच्चा हाथी की दलदल में फंसने से मौत हो गई।
वन विभाग के अनुसार चंदा हाथी का यह दल पिछले 7 दिनों से गंगरेल बांध के डुबान के जंगल में विचरण कर रहा था।
करीब पखवाड़े भर पहले हाथियों के इस झुंड को मगरलोड क्षेत्र के राजाडेरा जलाशय के पास देखा गया था। जिसमें हाथी के 4 से 5 बच्चे भी शामिल थे।
इस बीच ग्राम उरपुटी – मोंगरी के नाले के दलदल में फंसने से एक बच्चा हाथी की मौत हो गई । हाथियों का यह ग्राम कलारबहरा के सागौन प्लाट में है।
करंट से मौत
इधर आज सुबह रायगढ़ जिले से एक हाथी की मौत की खबर आई। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ के गेरसा गांव में एक हाथी करंट का शिकार हुआ। जानकारी मुताबिक गेरसा गांव के किनारे खेत में स्थित बोरपंप में प्रवाहित करंट की चपेट में आकर हाथी की मौत हुई है। पुलिस ने भादोराम राठिया और बाल सिंह नाम के दो लोगों को गिरफ्तार किया है।
बताया जाता है कि फसल बचाने के लिए ये ग्रामीण अपने खेतों में कई बरस से खुले तार में करंट बिछाकर रखे हुए थे। बारिश होने की वजह से खेत में पानी भरा था। जिसके कारण करंट हाथी के शरीर में तेजी से फैल गया और उसे वहां से भागने का मौका नहीं मिला।
वन विभाग भी बिजली के अवैध कनेक्शन के नंगे तार से हाथी की मौत होना मान रही है। घटना की सूचना के बाद वन अमला मौके पर पहुंचा।
वन विभाग के मुताबिक तार की उंचाई 5 से 6 फीट थी, इसलिए पीओआर भी दर्ज किया जा रहा है। खेत के मालिक ग्रामीणों पर वन अपराध कायम कर विवेचना शुरू कर दी है। घटना के सभी पहलुओं पर जांच जारी है। मृत हाथी के लाश का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
बता दें कि ग्रामीण वन्य जीवों से अपनी फसल को बचाने के लिए खेतों में करंट बिछा देते हैं। इसके अलावा शिकारी भी करंट से शिकार करते पाए जा चुके हैं। गर्मियों में अक्सर वन्यजीव पानी और भोजन की तलाश में बस्ती से लगे इलाकों में आते हैं, जहां उन्हें मौत नसीब होती है।
सरगुजा में 3 हथिनियों की मौत
बता दें कि इससे पहले सरगुजा संभाग के सूरजपुर जिले के प्रतापपुर में 9 और 10 जून को एक गर्भवती हथिनी समेत दो हथिनी की मौत हुई थी। गर्भवती हथिनी की मौत की वजह लिवर में इन्फेक्शन था।
वहीं बलरामपुर जिले के राजपुर वन परिक्षेत्र के अतौरी के जंगल में भी 11 जून को एक हथिनी का शव मिला था। उसकी मौत 3 से 4 दिन पहले हुई थी, लेकिन शव बाद में बरामद हुआ था।
इन तीनों घटनाओं से वन अमले की काफी किरकिरी हुई। प्रशासन सक्रिय हुआ और एक ही दिन में वन अमले के 6 अफसरों पर गाज गिरी।
बहरहाल छत्तीसगढ़ में एक के बाद एक हाथियों की  मौत से वन्य पशु-जीव प्रेमी हैरान हैं तो वन्यजीव संरक्षण विभाग के अफसर परेशान। सरगुजा संभाग में हुई हाथियों की मौत के बाद धमतरी और रायगढ़ में भी हाथियों की मौत ने वन अफसरों की चिंता बढ़ा दी है।

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