उन्नत और मुनाफ़े वाली कृषि के लिए जुटे देशभर के अर्थशास्त्री

कृषि विश्व विद्यालय में 79 वां कृषि अर्थशास्त्री सम्मेलन

रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय और इंडियन सोसायटी ऑफ एग्रीकलचर इकोनॉमी मुंबई द्वारा भारतीय कृषि अर्थशास्त्री सोसायटी का 79 वें कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस तीन दिवसीय कार्यशाला में देशभर से कृषि अर्थशास्त्री पहुंचे हुए हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुइया उईके और कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने किया। इस कार्यक्रम में भारतीय कृषि अर्थशास्त्र सोसायटी के अध्यक्ष पद्मभूषण प्रोफेसर अभिजीत सेन, प्रोफेसर आर राधाकृष्णन, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एसके पाटिल विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

                        इस सम्मेलन में देश में कृषि के आर्थिक परिदृश्य और किसानों की आर्थिक स्थिति पर मंथन किया जा रहा है। उसके साथ ही तकनीकी सत्रों का आयोजन भी हुआ। 21 नवंबर से 23 नवंबर तक कृषि में बढ़ते जोखिम, पोषण एवं रोजगार उपलब्ध कराने के संबंध में व्यापक विचार विमर्श किया जा रहा है। इस मौके पर राज्यपाल अनुसुइया उइके ने कहा कि इस कार्यशाला से प्रदेश में कृषि के क्षेत्र में काफी फायदा होगा।

                उन्होने कहा कि पिछले वर्षों के मुकाबले इस कार्यशाला के माध्यम से प्रदेश के कृषि क्षेत्र में काफी परिवर्तन आने की संभावना राज्यपाल ने जताई। देशभर से आए हुए अर्थशास्त्रियों द्वारा विचार विमर्श के माध्यम से जो निष्कर्ष निकलेगा उसका सीधा लाभ छत्तीसगढ़ के कृषि उत्पादन में वृद्धि के साथ ही किसानों को लाभ मिलेगा।

बदलाव के लिए होगा महत्वपूर्ण-पाटिल
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एसके पाटिल ने कहा कि प्रदेश में कृषि क्षेत्र में बंदलाव और किसानों को जो परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन सभी विषयों पर अर्थशास्त्री और शिक्षाविद द्वारा चर्चा की जाएगी। जिससे कृषि में बढ़ते जोखिम और जलवायु परिवर्तन के मुकाबले के लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकी विकसित करने, किसानों की आय दोगुनी करने और कृषि से पोषण एवं रोजगार उपलब्ध कराने के लिए नए सुझाव मिल सके।