सीएम बघेल के बाद पूर्व मुख्यमंत्री रमन ने वित्त मंत्री सीतारमण को लिखा पत्र

समस्या और समाधान से जुड़ी है दोनों की चिट्ठी

रायपुर | पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लिखा गया पत्र इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा भी एक पत्र वित्त मंत्री को लिखा गया है, जिसमे सेस की वजह से राज्यों को हो रहे राजस्व के नुकसान के बारे में जानकारी दी गई है। इसी का जवाब देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने पत्र में बताया है कि कोविड की वजह से पिछले 9 महीने में जीएसटी कलेक्शन में कमी आई थी, लेकिन अभी कोविड का असर कम हुआ है। अर्थव्यवस्था में बढ़ोतरी के साथ ही पिछले दिसंबर के बाद स्थिति बेहतर हुई है। आने वाले समय में संग्रहण बढ़ेगा तो हमारे राज्य की भी राशि बढ़ेगी।

पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह ने जानकारी देते हुए बताया की यह राज्य सरकार पर रहता है कि वह अपने रिसोर्स को तैयार करे और कैसे आर्थिक मजबूती की ओर जाए. उन्होंने बताया की केंद्र सरकार का बड़ा फार्मूला है, राज्य सरकार जितना भी राजस्व संग्रह कर केंद्र को जमा करता है। उसका बड़ा हिस्सा राज्य को वापस मिलता है। उन्होंने बताया कि पहले इसका 32-34 प्रतिशत राज्य को वापस आता था, लेकिन अब मोदी सरकार ने उसे 42 प्रतिशत कर दिया है। राजस्व संग्रह के आधार पर ही राज्य के शेयर में कमी-बढ़ोतरी होती है. अर्थव्यवस्था में बढ़ोतरी के साथ राज्य के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी।

पूर्व मंत्री राजेश मूणत ने भी भूपेश सरकार पर जमकर प्रहार किया है। मूणत ने कहा है कि सेस को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य के लिए अलग से कोई भार नहीं है। पूरे देश के राज्यों में कृषि सेस लगा है। हर बात पर केंद्र सरकार पर ठीकरा फोड़ना ये न्यायोचित नहीं है। उन्होंने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि दोहरी पॉलिसी अपनाकर छत्तीसगढ़ सरकार अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रही है।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लिखे पत्र में उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य को मिलने वाली एक्साइज ड्यूटी के रूप में मिलने वाली राशि पूर्ववत देने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री बघेल ने पत्र में लिखा है कि वर्ष 2020-21 कोविड महामारी के दुष्प्रभावों के कारण वित्तीय दृष्टि से अत्यंत कठिन वर्ष रहा है। उन्होंने केन्द्रीय वित्त मंत्री से अनुरोध किया है कि केन्द्र की तुलना में राज्यों के पास उपलब्ध सीमित संसाधनों को देखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य को मिलने वाली एक्साइज ड्यूटी के रूप में मिलने वाली राशि पूर्ववत् प्राप्त होने का निर्णय लेने का कष्ट करें, ताकि राज्य को किसी अतिरिक्त वित्तीय क्षति का सामना न करना पड़े।

सिंहदेव ने केंद्र सरकार पर लगाया आरोप
मुख्यमंत्री के पत्र पर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री टीएस. सिंहदेव का बयान भी सामने आया है, उन्होंने केंद्र सरकार पर चीटिंग करने का बड़ा आरोप लगाया है और कहा है की केंद्र सरकार खुद ही आय के साधन में बढ़ोतरी नहीं कर पा रही है। यही वजह है की राज्यों का हिस्सा इस तरह लिया जा रहा है। उन्होंने इसे पूरी तरह से अव्यावहारिक बताया है। उन्होंने प्रदेश के बजट को लेकर बताया है की आमदनी नहीं होगी तो खर्चा भी कम होगा और आमदनी के आधार पर ही बजट बनाई जाती है। इस अनुमान में केंद्र से मिलने वाली राशि सीएसटी राशि भी शामिल होती है। राज्य के बजट का सबसे बड़ा हिस्सा जीएसटी का होता है. इसमें अगर कमी होगी पूरे बजट पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ेगा। वही इस तरह के व्यवहार को उन्होंने सौतेलापन बताया है, और कहा है कि केंद्र सरकार केवल अपना ही सोच रही है, राज्य सरकार और संघीय ढांचे के बारे में नहीं। हमारे हिस्से के टैक्स का नाम बदलकर सेस कर दिया और इस प्रकार चीटिंग की जा रही है जो की अनुचित है।

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