कोरिया के नए भाजपा जिला अध्यक्ष मनोनयन के बाद अब कांग्रेस में हलचल

नगरी निकायऔर पंचायत चुनाव को लेकर कयासों का दौर

बैकुंठपुर। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिला भाजपा के नए अध्यक्ष के रुप में कृष्ण बिहारी जायसवाल के मनोनयन के बाद अब जिला कांग्रेस में भी नए अध्यक्ष को लेकर सुगबुगाहट देखी जा रही है। इधर लोगों ने आगामी नगरीय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर कई तरह के कयास लगाने शुरू कर दिए हैं।
दरअसल, कोरिया जिले में भाजपा के अध्यक्ष पद के नाम पर मुहर श्री जायसवाल के संगठन में लगातार उनके किए कार्यो के आधार पर सौपा गया,।कॉलरी की नौकरी के बाद भी उनका भाजपा संगठन के प्रति समर्पण कभी कम नहीं देखा गया। जबकि सूत्र बताते है कि कई दावेदारों के लिए पैरवी करने वाले बडे नेताओं को संगठन के शीर्ष नेतृत्व का साथ नहीं मिला, ऐसे में माना जा रहा है कि राज्य संगठन में कुछ बडे नेताओं का कद कम हुआ है तो कुछ का बढा भी है। ऐसे में अब नए अध्यक्ष के साथ भाजपा में काफी कुछ बदली बदली फिजा दिखनी लगी है।

 

बात जिला अध्यक्ष के नाम की घोषणा पर की जाए तो विपक्ष में रहते हुए भाजपा के कार्यकर्ताओं में भारी जोश देखा गया, कार्यकर्ताओं से खचाखच भरे जिला भाजपा कार्यालय में नाम की घोषणा होते ही कुछ लोग तेजी से बाहर आते देखे गए तो ज्यादा संख्या में लोग नए अध्यक्ष को बधाई और शुभकामनाएं देने में लगे रहे। भाजपा संगठन में सर्व सम्मति से आए फैसलें को सभी को मानना होता है, ऐसे में आने वाले दोनों चुनाव नवपदस्थ जिला अध्यक्ष के लिए पहली परीक्षा के रूप चुनौतिपूर्ण होंगे। जहां उन्हें कांग्रेस सरकार के 1 साल के कार्यकाल की नाकामी जनता के सामने लाकर जीत दिलानी होगी, साथ ही उन्हे बड़ा दिल रखकर कार्यकर्ताओं की सुध लेकर अपनी अलग पहचान बनानी होगी।

कांग्रेस संगठन मे छाई है मायूसी
दूसरी ओर कांग्रेस सत्ता में होकर भी उसके स्थानीय संगठन की गाड़ी पटरी से उतर चुकी है। एनएसयूआई से लेकर महिला कांग्रेस के साथ कई विंगों में भारी उत्साह की कमी देखी जा रही है। सत्ता पाने के बाद कार्यकर्ताओं की पूछ परख नहीं होने के कारण उनमें मायूसी है। कई कार्यकर्ता तो खुलकर कहते देखे जाते हैं कि इससे अच्छा तो विपक्ष में वो ठीक थे, कम से कम उनका काम तो होता था। यही कारण है कि कांग्रेस में भी जल्द ही नए अध्यक्ष के नाम को लेकर हर कही चर्चा आम हो गयी है।

मज़बूत दिख रही भाजपा
विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार का कारण जनता में 15 साल की सरकार के प्रति नाराजगी थी और भाजपा सरकार के प्रति जनता का गुस्सा कांग्रेस की सत्ता में वापसी का कारण बनी। वहीं ठीक 4 महिने बाद लोकसभा चुनाव में भाजपा को फिर कोरिया की जनता ने भारी जीत दिलाई, इससे साफ है कांग्रेस संगठन में बेहद कसावट की दरकार है। वहीं भाजपा में कार्यकर्ताओं से लेकर पार्टी पदाधिकारियों में जिस तरह से अनुशासन दिखाई देता है वैसा कांग्रेस में कहीं नजर नहीं आता है। दूसरी ओर आगामी नगरीय और त्रिस्तरीय चुनाव कांग्रेस की अग्नि परीक्षा से कम नहीं है, साथ ही सत्ता मे बैठे जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली और विकास के कार्यो को जनता ने कितना पसंद किया है, इसके परिणाम आने पर सबकुछ सामने आ जाएगा।

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