बस्तर में नक्सल कम, सड़क दुर्घटना बन रही बड़ी चुनौती – आईजी सुंदरराज

नक्सल गतिविधियों में दर्ज़ की गई है कमी

जगदलपुर। बस्तर रेंज आईजी पी सुंदरराज ने गुरुवार को बीते साल में सुरक्षाबलों के द्वारा नक्सलियों के खिलाफ की गई कार्रवाई और संभाग में हुए सामान्य अपराधों की जानकारी प्रेसवार्ता में दी। जिसमें बस्तर रेंज आईजी ने नक्सलियों के बाद संभाग में बढ़ते हुए सड़क दुर्घटनाओं को सबसे बड़ी चुनौती बताया है।
मीडिया को जानकारी देते हुए बस्तर रेंज आईजी ने बताया कि बीते वर्ष में संभाग के बस्तर संभाग में सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं घटित हुई। संभाग के अन्य जिलों के मुकाबले बस्तर में बीते साल लगभग 192 सड़क दुर्घटनाओं में जनहानि भी हुई। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस प्रदेश स्तर पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए पुलिस अपने स्तर पर प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि साल 2019 बस्तर क्षेत्र में तैनात सुरक्षा बलों के लिए काफी सकारात्मक रहा। शासन की विश्वास-विकास-सुरक्षा त्रिवेणी कार्य योजना के अनुरूप बस्तर क्षेत्र में तैनात छत्तीसगढ़ पुलिस, केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल, एवं सशस्त्र सुरक्षा बल द्वारा बेहतरीन कार्य करते हुये नक्सल गतिविधियों के ऊपर प्रभावी कार्यवाही किया गया इसके परिणाम स्वरूप नक्सल वारदातों में 40 फीसदी कमी आई है। विभिन्न घटनाओं में सुरक्षा बलों
के नुकसान में लगभग 55 प्रतिशत कमी आई है। इसी प्रकार नक्सली हिंसा में आम नागरिकों की मृत्यु में भी 45 फीसदी कमी हुई है।

बनाए 7 कैंप, 65 के शव हुए बरामद
नक्सल विरोधी अभियान हेतु जिला दन्तेवाड़ा में छिन्दनार, चिकपाल एवं पोटाली, जिला नारायणपुर में खोड़गांव, जिला बीजापुर में पुसनार एवं बोदली तथा जिला कांकेर में सुरेली इस प्रकार कुल 07 सुरक्षा कैम्प स्थापित की गई है। इन कैम्पों के माध्यम से नक्सल विरोधी अभियान के साथ-साथ जनसुविधा के लिए आवागमन हेतु सड़क, पुल-पुलिया निर्माण कार्य को भी सुरक्षा प्रदान की जा रही है। वर्ष 2019 में बस्तर संभाग अंतर्गत संचालित विभिन्न नक्सल विरोधी अभियान में 18 महिला माओवादी सहित कुल 65 माओवादियों का शव बरामद किया गया है। इनमें से 13 माओवादी एरिया कमेटी सदस्य स्तर की टाॅप कैडर्स के थे, और 12 माओवादी पीएलजीए फर्मेशन कैडर्स से थे।