सेहरा सजना था, पहुंची मातम की खबर

शहीद पूर्णानंद की अगले महीने होने वाली थी शादी

धर्मेंद्र महापात्र, जगदलपुर। सोमवार को बीजापुर जिले के पामेड़ इलाके में हुई नक्सली घटना में शहीद हुए पूर्णानंद साहू के सर पर सेहरा सजने वाला था.लेकिन उससे पहले घर में मातम की खबर आ गई।शहीद जवान के घर में परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है।

कठिन परिस्थितियों के बीच पूर्णानंद साहू के पिता अपने बेटे को फ़ोर्स में भर्ती करने सफल हुए थे,लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। नक्सली हमले में पूर्णानंद साहू शहीद हो गये। वे छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के रहने वाले हैं। जंगलपुर गांव में उनका छोटा सा कच्चा मकान है। वर्ष 2013 में पूर्णानंद साहू की भर्ती सीआरपीएफ हुई। लंबे समय वे बीजापुर इलाके में तैनात थे। सीआरपीएफ में भर्ती होने के बाद पूर्णानंद की ट्रेनिंग नीमच मध्य प्रदेश में हुई और बस्तर जिले के करणपुर में पोस्टिंग थी। इससे पहले शहीद जवान जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में तैनात थे।

गरीब किसान परिवार में जन्मे पूर्णानंद की शादी अगले महीने 29 मार्च को होने वाली थी। परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार 6 मार्च को सगाई की रस्म अता की जाने वाली थी,जबकि शादी की रस्में 27,28 और 29 मार्च को तय थी।मगर उससे पहले पूर्णानंद साहू परिजनों को छोड़कर चले गए।

शहीद के गांव जंगलपुर में शादी की तैयारियां भी की जा रही थी। घर की पुताई का काम चल रहा है। कुछ दिन पहले ही पूर्णानंद साहू ने शादी के लिए लंबी छुट्टी लेने की जानकारी परिजनों को दी थी।पर वो दिन परिजनों के लिये नहीं आया खुशियों का घर मातम में तब्दील हो गई। गांव का होनहार जवान शहीद हो गया।

पूर्णानंद साहू बहुत ही गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनकी 3 बहने और एक छोटा भाई है। एक बहन की शादी हो चुकी है जबकि दो बहनें और भाई की पढ़ाई का जिम्मा साहू पर ही था। परिजनों ने बताया की कमजोर आर्थिक स्थिति को शहीद पूर्णानंद साहू ने नौकरी लगाने के बाद ही सहारा दिया था।

छोटी भाई बहनों की पढ़ाई का पूरा खर्च वे ही वहन करते थे। लेकिन नक्सलियों की कायराना घटना ने इस परिवार के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। आज शहीद जवान के गांव में पुरे सम्मान के अंतिम बिदाई दी जायेगी।