मकर संक्रांति से शुरू होता है सुकमा में ये खास मेला…

दीगर राज्यों से भी लोग इस मेले में होते है शामिल

धर्मेंद्र महापात्र, जगदलपुर। पूरे देश में मकर संक्रांति का पर्व धूम-धाम से मनाया गया। लोगों ने एक दूसरे को तिल के लड्डू और मिठाइयां खिलाई, दान दिया। छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्र बस्तर में इसे अनोखे अंदाज में मनाया जाता है। इस पर्व के साथ मेले का दौर शुरू हो जाता है, और मेलों में मुर्गे लड़ाए जाते हैं। इस के लिए लोगों को पूरा साल भर इंतजार रहता है। लोग दांव लगाते हैं।

दरअसल मकर संक्रांति के पर्व पर सुकमा में मेले का आयोजन किया जाता है। ऐसा नहीं है कि यह मेला एक दो साल से यहां कराया जा रहा है, इस मेले का आयोजन सुकमा में दो दशकों से होते आया है। मेले का अपना अलग महत्व है। मेले में शामिल होने के लिए इलाके के ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी लोग यहां आते हैं। मेले में जहां तरह-तरह की चीजें लोगों के आकर्षण का केंद्र रहता है। वहीं इस दौरान होने वाले मुर्गा लड़ाई लोग साल भर इंतजार करते हैं। मुर्गा लड़ाई में शामिल होने सैकड़ों लोग मकर संक्रांति पर सुकमा पहुंचते हैं साथ ही हजारों लोग सिर्फ मुर्गा लड़ाई देखने यहां आते हैं।

पड़ोसी प्रदेश से भी पहुंचते हैं लोग
इस मेले का क्रेज इतना है कि पड़ोसी प्रदेश तेलंगाना, आंद्रपरदेश और ओडिशा के भी लोग पहुंचते है। तीन दिनों में सबसे ज्यादा भीड़ दूसरे दिन रहती है। आयोजकों का कहना है कि इस मेले में संस्कृति और परम्परा दोनों है। आदिवासी बाहुल्य इलाका होने के कारण यहां पर मेले के प्रति लोगों की रूचि ज्यादा रहती है।

जात-पात का भेदभाव भूलकर उमड़ती है भीड़
सबसे अहम बात यह है कि इस मेले में लोग जात-पात और उंच-नीच के भेदभाव को भुलाकर यहां पहुंचते हैं। साथ ही सिर्फ हिन्दू या आदिवासी समुदाय ही नहीं बल्कि हर धर्म और जाति के लोग मुर्गा लड़ाई में शामिल होते हैं।

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