नक्सल प्रभावित नारायणपुर में विकास का नया आयाम गढ़ रही महिलाएं

खेती-किसानी के बाद अब आचार बेचकर हो रहीं आत्मनिर्भर

नारायणपुर। बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले के छोटे से गांव सुलेंगा की जागृति महिला स्व सहायता समूह की दस आदिवासी महिलाएं आचार बनाकर आज आर्थिक रूप से मजबूत हो रही है। गांव की ये महिलाएं नींबू, मिर्च और गाजर का आचार बेचकर अच्छी आय प्राप्त कर रही है। सुलेंगा में जागृति स्व सहायता समूह का गठन 2015 में किया गया था। गठन के 3 महीने बाद समूह की महिलाओं ने 15 हजार रूपये बैंक से ऋण लेकर बचत और छोटे-छोटे लेनदेन कर अपनी जरूरतों को पूरा करना शुरू किया। महिलाओं ने जब कुछ व्यवसाय करने की मांग की, तब जिला पंचायत द्वारा इनको आजीविका मिशन अंतर्गत इन समूह की महिलाओं को आचार बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। अब इन महिलाओं ने आचार बनाना शुरू किया है।

समूह से जुड़ने के पहले ये महिलायें अपने घर के घरेलू काम-काज और खेती किसानी का काम करती थी। समूह ने बैंक से एक लाख रूपये का ऋण लेकर आचार बनाने का काम शुरू किया। जागृति समूह के आचार की मांग आज नारायणपुर तथा आस-पास के गांवों तक होने लगी है। अब ये सभी 10 महिलाएं आचार बनाने के काम मे लग गयी है। कभी घर के काम तक सीमित रहने वाली ये महिलाएं आज अपने इस हुनर से हर महीने आय अर्जित कर घर बैठे आमदनी प्राप्त कर रही है।

नारायणपुर जिला मुख्यालय से लगभग 5 किलोमीटर दूर सुलेंगा गाँव की ये महिलाएं आचार बेचकर घर की जरूरतों का सामान खरीद रही है। समूह द्वारा इसके पहले बनाये गए आचार को जिला पंचायत एवं जनपद पंचायत के अधिकारी-कर्मचारियों ने खरीदा। साथ ही आसपास के ग्रामीण भी इन महिलाओं द्वारा बनाये आचार को खरीदते हैं।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत प्रेम कुमार पटेल ने बताया कि इन महिलाओं के आचार को स्कूल, आश्रम, आंगनबाड़ी, स्थानीय व्यापारी तथा हाट-बाजारों में बेचने की व्यवस्था करवाई जा रही है। साथ ही जिले के सभी अधिकरियों एवं कर्मचारियों को भी अपने जरूरत के अनुसार इन महिलाओं से अचार खरीदने कहा गया है। जिला पंचायत ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए जिले की महिलाओं तथा समूह की महिलाओं का हर सम्भव मदद करती है।

जागृति महिला स्व सहायता समूह की ये महिलाएं उन तमाम महिलाओं के लिए एक मिसाल हैं जो ग्रामीण परिवेश में रहते हुए भी अपनी एक अलग पहचान बनाने की चाहत रखती हैं। इसी जुनून के चलते इन महिलाओं ने एनआरएलएम की बिहान योजना से जुड़ी। अपने हुनर और योजना का लाभ उठाकर न केवल ये महिलाएं स्वावलंबी बनी अपितु जिले की महिलाओं तथा अन्य समहू के लिए एक उदाहरण बनी है। महिलाएं अभी वर्तमान में सिर्फ आचार ही बना रही है लेकिन बाद में मांग एयर सीज़न के अनुसार परंपरागत ढंग से छत्तीसगढ़ी व्यंजन और आचार, महुआ लड्डू, बड़ी-बिजौरी तथा अन्य सामग्री भी तैयार करेंगी।