नारायणपुर में नक्सल धमाके से पहले की हकीकत

धर्मेन्द्र महापात्र ,जगदलपुर | मंगलवार को नारायणपुर जिले में हुई नक्सल धमाके की हकीकत सामने आई है| दरसअल अंदरूनी इलाके में रविवार से मंगलवार तक तीन दिन फोर्स ने वृहद रूप से इलाके में बड़ा आपरेशन चलाया| इस बीच नक्सली जवानों की बराबर रेकी कर रहे थे| आपरेशन खत्म होने के बाद वापसी के लिए तीन बसों से दोपहर 02 बजे जवानों का दल मुख्यालय के लिये निकला|

इस बीच 4.15 से 4.30 बजे के करीब नक्सलियों ने कडेनार के पास सबसे सामने चल रही बस को विस्फोट कर उड़ा दिया| बताया जा रहा है कि करीब 40 किलो बारूद का उपयोग विस्फोट के लिये किया गया था,लेकिन कच्ची सड़क होने से ब्लास्ट की तीव्रता घट गई.हर बार की तरह नक्सली विस्फोट के लिये पुल को चुना था क्योंकि यहां वाहन की गति कम हो जाती है|

सूत्रों के अनुसार इस हमले में माड़ डिवीजन की पीएलजीए की कम्पनी नम्बर 06 का सहारा लिया गया जिसमें हार्डकोर सदस्य शामिल थे| बताया जा रहा है कि नक्सलियों ने इसकी प्लानिंग काफी समय से कर ली थी नक्सलियों को पता था कि आपरेशन के बाद थके जवान गाड़ी से ही लौटेंगे| नक्सलियों ने जवानों पर यह हमला टीसीओसी के दौरान किया है|

नारायणपुर में माड़ का सबसे बड़ा साढ़े 4 हजार वर्ग किलोमीटर इलाका आता है|

टीसीओसी में अब तक के बड़े हमले

अप्रैल और मई महीने में नक्सली(TCOC)टेक्निकल काउंटर ऑफ ऑफेंसिव कैपेन चलाते है| इस दौरान छुप कर वार करना,जवानों को नुकसान पहुँचने के लिये विस्फोट करना,केम्पों में हमले जैसी वारदात को अंजाम  दिया जाता है|

वर्ष 2010 के पहले TCOC के तहत नक्सली गाँव गाँव मे संगठन को मजबूत करने,गाँव गाँव मे प्रचार करने तथा फोर्स पर हमले की योजनाओं पर काम करते थे.पर ताड़मेटला की घटना के बाद नक्सलियों ने अपनी ट्रेटेजी बदल दी और TCOC को गोरिल्ला युध्द बदल दिया अब नक्सली TCOC में ज्यादा से ज्यादा जवानों पर हमला करते है|

पहले यह 2 माह अप्रैल – मई चलाई जाती थी मगर अब इसे बढ़ा कर 8 माह कर दिया गया है|वर्ष 2010 से अब तक नक्सलियों ने TCOC के तहत कई बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया है जिसमे प्रमुख रूप से 6 अप्रैल 2010 में ताड़मेटला हमला जसमे सीआरपीएफ के 76 जवानों की शहादत हुई|

25 मई 2013 झीरम घाटी हमला 30 से अधिक कांग्रेसी व जवान शहीद, 11 मार्च 2014 को टहकवाड़ा हमला 15 जवान शहीद,12 अप्रैल 2015 दरभा में एम्बुलेंस पर विस्फोट 5 जवानों सहित ड्राइवर व एएमटी शहीद,मार्च 2017 में भेज्जी हमला 11 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए|
06 मई 2017 को सुकमा के कसालपाड़ में किया घात लगाकर हमला 14 जवान शहीद,25 अप्रैल 2017 सुकमा के बुरकापाल बेस केम्प के समीप हमला 32 सीआरपीएफ जवान शहीद,21 मार्च 2020 सुकमा के मिनपा हमला 17 जवानों की शहादत, 23 मार्च 2021 नारायणपुर के कडेनार हमला 5 जवान शहीद हुए|

नक्सलियों का गढ़ – अबूझमाड़

नक्सली पूरे बस्तर संभाग में अबूझमाड़ को अपना सेफ जोन मानते है| इसका सबसे बड़ा कारण आज तक यहाँ किसी भी प्रशासनिक या पुलिस का ना पहुँचना है,इलाके का आज भी राजस्व सर्वे तक नही हुआ है|
माड़ का इलाके साढ़े 5 हजार वर्ग किलोमीटर में फैला है जिसमे दंतेवाडा और बीजापुर जिले भी शामिल है। मगर माड़ का सबसे बड़ा साढ़े 4 हजार वर्ग किलोमीटर इलाका नारायणपुर में आता है| नक्सलियों के  बड़े बड़े ट्रेंनिग सेंटर यही है|

संघटन का हर बड़ा लीडर अक्सर यही आते है और वारदात को अंजाम देने की पूरी योजना इसी इलाके में होती है| हथियार बनाने की फैक्ट्री से लेकर तमाम सुविधाएं यही उपलब्ध है|

एक तरह से कहा जा सकता है कि नक्सलियों ने अपना मुख्यालय माड़ में ही बना रखा है| यही कारण  है कि नक्सली माड़ में किसी भी प्रकार के विकास का भारी विरोध करते है| संभाग के मध्य और घना जंगल होने के चलते बड़ी वारदात के बाद नक्सली माड़ में छिप जाते हैं,  जहाँ उनकी तलाश फोर्स के लिए भी नामुमकिन है|

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