एनआरसी, एनपीआर और सीएए के विरोध में निकली गई जंगी रैली

बताया आदिवासी क्षेत्र के लिये काला कानून

जगदलपुर | नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ देश के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। नक्सल प्रभावित आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र बस्तर में भी इसका भारी विरोध शुरू हो गया है। शनिवार को बस्तर संभागीय मुख्यलय जगदलपुर में एनआरसी, एनपीआर और सीएए के खिलाफ आदिवासी,मुश्लिम समाज और सयुक्त मोर्चा द्वारा जंगी रैली निकाली गई। रैली के माध्यम से ये बताने की कोशिश की गई की नागरिकता संशोधन कानून का बस्तर में सदियों से निवासरत आदिम जनजाति के लोगों पर सबसे गहरा और विपरीत असर पड़ेगा,बस्तर के मूल निवासी आज भी इतने शिक्षित नहीं हो पाए हैं कि अपने बाप दादाओं की जन्म तारीख बता सके। आज भी अधिकांश के पास आधार कार्ड नहीं है। नारायणपुर के अबुझमाड का राजस्व सर्वे नहीं हुआ है, जिससे वहां के लोगों के पास जमीन का पट्टा तक नहीं है।

आयुक्त को सौपा ज्ञापन
नागरिकता संशोधन कानून को लेकर शहर मे शनिवार को संयुक्त मोर्चा ने रैली निकाली और राष्ट्रपति के नाम आयुक्त को ज्ञापन सौपा। बड़ी संख्या में लोगों ने हाथों में कानून के विरोध में बैनर पोस्टर लेकर जमकर नारेबाजी करते रैली निकाली। सैकड़ो की संख्या में निकाली गई जंगी रैली शहर के विभन्न मार्गो से निकली इस दौरान आंदोलकारियों ने एनआरसी, एनपीआर और सीएए के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते रहे.रैली में शामिल मुश्लिम और आदिवासी नेताओ ने देश में लागू हो रहे कानून को काला कानून बताया तथा बस्तर में इसका खासा असर पड़ने की बात कही.वक्ताओं ने कहा की इस कानून को लेकर अल्पसंख्यक , एससी , एसटीआर ओबीसी वर्ग के लोगों में दहशत व्याप्त है ।
देश के बुद्धिजीवी और सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीशों ने भी इस कानून को संविधान विरोधी बताया है.।राष्ट्रपति से ज्ञापन के माध्यम से देश में बन रही अराजकता और भय की स्थिति को सामान्य बनाने के लिए इस कानून पर रोक लगाने और केंद्र सरकार के मंत्रियों विशेष कर गृहमंत्री द्वारा समवैधानिक मर्यादाओं को लांघ कर संसद एवम जनता के बीच लोकतंत्र के प्रति कायम भरोसे को खत्म करने के प्रयासों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है। रैली के माद्यम से दावा किया गया की बस्तर के आदिवासियों के जल जंगल और जमीन पर कब्जा करने की बड़ी कोशिश कानून को लाकर की जा रही है।