हाईकोर्ट व निचली अदालतों में बिना गाउन, कोट के पैरवी करने पहुंचेंगे वकील

ग्रीष्मावकाश रद्द, सोमवार से लगेंगी प्रदेश की सभी अधीनस्थ अदालतें

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सोमवार से चहल-पहल शुरू होगी। न सिर्फ हाई कोर्ट बल्कि प्रदेश के तमाम कोर्ट में कामकाज शुरू हो जाएंगे। इस संबंध में हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक प्रदेश के तमाम न्यायालयों को दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं।

जारी दिशानिर्देश के मुताबिक अदालत के कामकाज में हुए व्यवधान को देखते हुए चीफ जस्टिस ने हाईकोर्ट सहित सभी अधीनस्थ न्यायालयों के ग्रीष्मकालीन अवकाश को निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही यह फैसला किया है कि वीडियों कांफ्रेंसिंग से हुई वर्चुअल सुनवाई के अलावा अब स-शरीर उपस्थिति के साथ भी सुनवाई की जाएगी।

अदालती कार्रवाई में कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए भी सुप्रीम कोर्ट की ओर से कई ऐतिहासिक दिशा निर्देश जारी किए गए है। जिसमें सबसे अहम बात यह है कि कोर्ट परिसर के भीतर अधिवक्ता बगैर गाउन और कोट के ही आएंगे। वकीलों के लिए ये नया ड्रेस कोड जारी करते हुए सफेद शर्ट, काली पैंट के साथ केवल बैंड और टाई पहनकर सुनवाई के लिए उपस्थिति की इजाजत दी गई है।

इस ड्रेस कोड का ट्रायल भी कुछ दिनों पूर्व CJI और सुप्रीम कोर्ट के अन्य न्यायाधीशों ने मामले की सुनवाई के दौरान किया था। जिसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सचिव श्रीमंत राव ने देश के सभी अधिवक्ताओं के लिए इस संबंध में 14 मई को आदेश जारी किया था।

इधर छत्तीसगढ़ विधिक परिषद के कोषाध्यक्ष अब्दुल वहाब ने कहा कि कोट व गाउन पहनने से दी गई छूट से कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने में मदद मिलेगी और गर्मी के मौसम में कार्य कर सकने में सहूलियत होगी।

लंबित मामलों की सुनवाई
हाईकोर्ट में सामाजिक दूरी का पालन करने के लिए सीमित संख्या में नये मामले और पांच साल से अधिक समय से लम्बित मामलों की सुनवाई पहले की जायेगी। वकील इस दौरान यदि कोर्ट नहीं आना चाहते तो वे ई फाइलिंग भी कर सकते हैं। कोर्ट पहुंचने वाले प्रत्येक व्यक्ति की थर्मल स्क्रीनिंग अनिवार्य होगी। मास्क नहीं लगाने या सामाजिक दूरी का पालन नहीं करने पर अगली बार कोर्ट में प्रवेश नहीं दिया जायेगा। हाईकोर्ट परिसर में गंदगी फैलाने तथा थूकने पर प्रतिबंध लगाया गया है। आवश्यक संख्या में डस्टबिन रखे जायेंगे।

जिनके केस उन्ही को प्रवेश
जिन वकीलों का केस लगा है या केस फाइल करनी है केवल वे ही कोर्ट परिसर में प्रवेश कर सकेंगे। एक पक्ष से केवल दो वकीलों को भाग लेने की अनुमति होगी। पक्षकारों को बिना बुलाये कोर्ट पहुंचना प्रतिबंधित किया गया है। फूड स्टाल बंद रखा जायेगा। वकीलों को अपने भोजन की व्यवस्था खुद करनी होगी। एक अप्रैल के बाद प्रदेश में आने वाले व्यक्ति रजिस्ट्रार जनरल या सम्बद्ध अधिकारी की अनुमति से ही कोर्ट परिसर में प्रवेश कर सकेंगे।

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