बजट सत्र: विधानसभा में नौवें दिन धान मामले में घिरे खाद्य मंत्री

मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने किया वाकआउट

रायपुर | छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज बजट सत्र का नवम दिन है। आज सदन के शुरुआत में ही विपक्ष के तेवर काफी तीखे दिखाई दिए। प्रमुख विपक्षी दल ने सदन में प्रश्नकाल में सरकार को धान की मिलिंग और खरीदी पर घेरा।

कस्टम मिलिंग का उठा मुद्दा

भाजपा विधायक कृष्णमूर्ति बांधी ने मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र में धान की कस्टम मिलिंग का मुद्दा उठाया , उन्होंने पूछा कि मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र में कितने राइस मिल है । वर्ष 2019-20 और 2020-21 में कितने राइस मिलों को कस्टम मिलिंग के लिए पंजीयन दिया गया है ।

इस पर खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने जानकारी दी कि खरीफ वर्ष 2020-21 में मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र में कस्टम मिलिंग के लिए 18 राइस मिल पंजीकृत है । कस्टम मिलिंग के लिए खरीफ वर्ष 2019 में 17 राइस मिल और खरीफ वर्ष 2020 में 18 राइस मिलों ने पंजीयन कराया है । पंजीकृत राइस मिलों के द्वारा खरीफ वर्ष 2019 में 79495 टन और खरीफ वर्ष 2020 21 में 23458 टन चावल कस्टम मिलिंग का जमा कराया गया है । राइस मिलों के द्वारा फ्री सेल के रूप में खरीफ वर्ष 2019 में 14063 टन और 2020-21 में 12013 टन चावल विक्रय किया गया है ।

कांग्रेस विधायक के सवाल पर घिरे खाद्यमंत्री

कांग्रेस के विधायक संतराम नेताम ने पुछा कि कोंडागांव में खरीफ वर्ष 2019-20 और 2020-21 में समर्थन मूल्य में कितना धान खरीदा गया लेकिन पुराने धान का उठाव क्यों नहीं हुआ और मिलिंग क्यों नहीं करायी गयी…

खाद्यमंत्री अमरजीत भगत – 2019-20 में 1,44,677 टन धान की खरीदी की गयी और 2020-21 में 1,43,463 टन धान की खरीदी की गयी.। कस्टम मिलिंग के लिए 94,938 टन धान के विरूद्ध 63,808 टन राईस मिलरों द्वारा जमा कराया गया। 2020-21 में 18 जनवरी में 20,256 टन धान के विरूद्ध अनुपातिक चावल 13,574 टन चावल में से 10,595 टन जमा कराया गया। खाद्य मंत्री के जवाब से नाखुश संतराम नेताम ने शेष धान की मिलिंग अब तक नहीं कराये जाने कारण पूछा। इस पर मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि केन्द्र से अनुमति देर से मिली और उसना चावल की मिलिंग क्षमता कम होना बताया।

इधर जवाब से असंतुष्ट नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने आरोप लगाया कि समय पर मिलिंग नहिभिने के कारण धान सड़ गये है। नुकसान की जांच की मांग नेता प्रतिपक्ष ने की। ताकि जांच के बाद वास्तविक स्थिति का पता चल सके।

प्रासंगिक व्यय पर विधायक शिवरतन शर्मा का सवाल

शिवरतन ने पूछा कि धान खरीदने के एवज में सरकारी समितियों को कितनी राशि दी जाती है। समितियों को कमीशन और प्रासंगिक व्यय का भुगतान क्यों नहीं किया गया। मंत्री ने बताया कि 2019-20 के प्रासंगिक व्यय तय की जा चुकी है। 2020-21 के प्रासंगिक व्यय की गणना नहीं हो पाई है। 2019-20 में कमीशन की राशि 262 करोड़ 80 लाख। प्रसंगिक व्यय 75 करोड़ 16 लाख, रख रखाव और सुरक्षा में 25 करोड़ 5 लाख का भुगतान किया गया है। वहीं 2020 -21 की गणना की जा रही है। मिलान पूरा होने के बाद शॉर्टेज का आकलन किया जा रहा है। इस पर शिवरतन शर्मा ने पूछा 44 हजार मीट्रिक टन चावल का लॉस समिति स्तर पर हुआ है । इसका भुगतान कैसे किया जाएगा।

भाजपा का वाकआउट

खाद्य मंत्री भगत ने शासन स्तर पर मंत्रिमंडल की एक सब कमेटी बनाये जाने की बात कही। इस तरह मंत्री द्वारा दिये गए सभी बयान से असंतुष्ट होकर सदन में शोर शराबा होने लगा। लेकिन मंत्री जवाब नही दे पाने के कारण आखिरकार बीजेपी विधायको ने किया बहिर्गमन कर दिया।