विश्व पर्यावरण दिवस पर मुख्यमंत्री भूपेश ने CM हाउस में किया वृक्षारोपण

प्रदेशवासियों से की अपने घरों में पौधा लगाने अपील

रायपुर | आज विश्व पर्यावरण दिवस है। लेकिन आज के समय में लगभग वैश्विक स्तर पर पर्यावरण दूषित होता नजर आ रहा है। यही कारण है कि अब लोगों को निरोगी रखने की पहल के तौर पर शासन और सामाजिक संस्थाओं द्वारा जागरूकता अभियान लगातार चलाया जा रहा है ताकि पर्यावरण को बचाया जा सके और स्वच्छ हवा आम लोगों को मिल सके। आज पर्यावरण दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का किसानी स्वरूप दिखाई दिया। सीएम भूपेश ने राजधानी स्थित सीएम हाउस परिसर में अमरूद, आम और बोहार केे पौधे लगाए। इस मौके पर भूपेश एके किसान कि भाँति स्वयम ही पौधा रोपने के लिए गड्ढे खोदे,मिट्टी को हटाया और अपने हाथों से पौधे को लगाया। इसके बाद पौधे को सिंचित करने फव्वारे के द्वारा पानी भी डाला। यही नही मुख्यमंत्री ने निवास के गार्डन में घुम-घुमकर सभी पेड़ पौधों में पानी डाला।आज की उनकी ये तस्वीर एक मूल किसान के स्वरूप को दर्शाता नजर आया।

पर्यावरण बचाने सन्देश
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पर्यावरण को बचाने का संदेश दिया। सीएम बघेल ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ काफी भाग्यशाली है कि यहां 44 प्रतिशत क्षेत्र में जंगल हैं। हमारे पुरखों ने इन जंगलों को सहेज कर रखा। इसके महत्व को हमारे पूर्वज बेहतर समझते थे। हमारी पहचान, हमारी संस्कृति और हमारा जनजीवन इनसे जुड़ा हुआ है, यदि पेड़-पौधे नहीं होते, तो तापमान कितना बढ़ जाता। प्रकृति का संतुलन बिगड़ जाता है और इससे बड़े भारी नुकसान का सामना हमको करना पड़ता। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि पेड़ वाईफाई देते, तो पता नहीं कितने पेड़ लग जाते, लेकिन यह केवल ऑक्सीजन देते हैं। ऑक्सीजन हमारे जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आज पूरे देश में कोरोना संक्रमण फैला हुआ है और केवल देश में ही नहीं पूरे विश्व में, ऐसे समय में शुद्ध वातावरण का कितना महत्व है यह हर व्यक्ति समझ रहा है। छत्तीसगढ़ इस मामले में भाग्यशाली है कि यहां 44 जंगल है, जिसे हम सबने बचा के रखा है और इसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी हम सब की है। पर्यावरण दिवस के अवसर पर मैं सभी से आग्रह करना चाहता हूं कि एक पेड़ अवश्य लगाएं और उसे जीवित रखने की जिम्मेदारी स्वयं लें ताकि पेड़-पौधे बढ़े, हरियाली हो चाहे वह पौधा फलदार हो, चाहे इमारती लकड़ी का हो, चाहे फूल के पौधे हो, जिससे हमारे आसपास में वातावरण अच्छा हो, शुद्ध ऑक्सीजन हमको मिल सके और ज्यादा से ज्यादा हरियाली हो।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में 44 प्रतिशत क्षेत्र जंगल हैं। पुरखों के द्वारा सहेजे गए इन जंगलों से आज हमारी पहचान बरकरार है। ऑक्सीजन हमारे जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि पेड़ पौधे को लगाकर उसकी रक्षा करने से प्रकृति का भी संतुलन बना रहता है।