पुन्नी मेला में CM भूपेश, खारुन में लगाई डुबकी

दीपदान और गंगा आरती कर मांगी प्रदेश की सुख-समृद्धि

रायपुर। सैकड़ों साल पुराने पुन्नी मेला में आज पहली दफ़ा प्रदेश का कोई मुखिया पहुंचा है। न सिर्फ मुख्यमंत्री वहां पहुंचे बल्कि बक़ायदा उन्होंने खारुन में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर ब्रम्ह मुहूर्त में स्नान कर दीपदान भी किया। मुख्यमंत्री ने खारून नदी में कार्तिक स्नान करने के बाद नदीतट पर स्थित ऐतिहासिक हटकेश्वर महादेव मंदिर में भगवान भोलेनाथ का विधिविधान से जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की और प्रदेश के विकास, शांति और समृद्धि के लिए की।

               मुख्यमंत्री परंपरागत गंगा आरती कार्यक्रम में सम्मिलित हुए व दीपदान किया। उन्होंने कार्तिक पूर्णिमा की सभी को बधाई व शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर आयोजित मंचीय कार्यक्रम में लोक कलाकार दिलीप षडंगी द्वारा राज्यगीत ‘अरपा पैरी के धार’ के आलावा कई जसगीत से समाबांधा। कार्यक्रम में विधायक रायपुर पश्चिम विकास उपाध्याय, विधायक रायपुर ग्रामीण सत्यनारायण शर्मा, महापौर प्रमोद दुबे, महंत राजेश्री रामसुंदर दास, सहित अन्य गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित थे।

ये पुन्नी मेले का इतिहास
हटकेश्वर नाथ महादेव मंदिर के पुजारी बताते हैं कि ऐसी मान्यता है कि 600 साल पहले राजा ब्रह्मदेव ने हटकेश्वर महादेव से संतान प्राप्ति की मन्नत मांगी थी। मन्नत पूरी होने पर 1428 में खारुन नदी के किनारे कार्तिक पूर्णिमा के दिन अपनी प्रजा को भोज के लिए आमंत्रित किया। हवन, पूजन, यज्ञ के बाद ग्रामीणों ने खेल तमाशे का आनंद लेते हुए भोजन ग्रहण किया था। इसके पश्चात हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन राजा ग्रामीणों को आमंत्रित करते। कालांतर में यह परंपरा मेले के रूप में परिवर्तित हो गई।

                यह भी मान्यता है कि छत्तीसगढ़ से सैकड़ों किमी दूर राजस्थान स्थित पुष्कर तीर्थ में कार्तिक मेला लगता था। पूर्णिमा पर स्नान और पूजा में शामिल होने के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचते थे। वहां तक जाने में छत्तीसगढ़ के लोगों को कई दिन लग जाते थे। इसे देखते हुए राजा ब्रह्मदेव ने खारुन नदी के किनारे हटकेश्वर महादेव मंदिर में पूजा करने का निर्णय लिया था।