कांग्रेस पार्षद कामरान ने की दलित वार्डवासी के साथ जूतमपैजार

भाजपा के दबाव के बाद एफआईआर दर्ज होगी जांच

रायपुर | राजधानी के लाल बहादुर शास्त्री वार्ड के पार्षद कामरान अंसारी की दबंगाई का वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। अब विपक्ष को बैठे-बिठाए एक और मुद्दा मिल गया। वायरल हुए वीडियो में पार्षद कामरान अंसारी एक आदिवासी युवक के साथ जूतमपैजार करते दिखाई दे रहे हैं।

बताया जा रहा है कि यह युवक कई दिनों से पार्षद के पास जाकर अपने राशन कार्ड बनवाने गुहार लगा रहा था। लेकिन पार्षद के बार-बार अनसुना करने के बाद जब इस युवक से रहा न गया तब उसने पार्षद को भला बुरा कह दिया। लेकिन पार्षद तो सत्ता की घमंड में चूर था, उसने आव देखा ना ताव अपने कुछ दबंग साथियों के साथ मिलकर युवक को सरेराह डंडे से पीटने लगा और अपने जूतों के नीचे भी रौंद डाला। ये सारा नजारा राह चलते सभी ने देखा जरूर, लेकिन सभी मूक दर्शक बने रहे और युवक गुंडे नेताओं से मार खाता रहा। इस दौरान युवक को इतनी छोटी लगी कि उसके चेहरे और हाथ पांव पूरी तरह से सूज गए।

इस बीच जब युवक की मां अपने बेटे को दबंगाईओं से बचाने आई तो उसे भी चोट लगी। यही नही पार्षद के साथ आये गुंडे युवक को जान से मारने की धमकी भी दे रहे थे,ये पीड़ित की माँ ने बताया। घटना के बाद पीड़ित परिवार पार्षद कामरान अंसारी के खिलाफ मामला दर्ज कराने थाने पहुंचा तो घटना के संबंध में FIR नहीं लिखी गई। पुलिस के सामने पीड़ित की माँ ने हाथ भी जोड़े और मार डालने की धमकी मिलने की भी बात कही लेकिन पुलिस केवल शिकायत कर दो का रट लगाती रही।

इसके बाद इस घटना ने राजनीतिक रूप ले लिया। पीड़ित परिवार को साथ देने भाजपा के रायपुर जिला अध्यक्ष श्रीचंद सुंदरानी अपने कार्यकर्ताओं के साथ थाने पहुंचे। श्रीचंद सुंदरानी ने थाने में दबाव बनाया और पार्षद को गिरफ्तार करने की मांग की। वहीं पुलिस ने FIR दर्ज ना करवा कर केवल शिकायत लेने की बात कही तो भाजपा नेता अड़ गए और FIR दर्ज न होने तक थाने में ही प्रदर्शन करते हुए दबाव बनाने लगे। आखिरकार पार्षद कामरान अंसारी के खिलाफ FIR दर्ज हुई और मामले की जांच करने की बात कही गई।

अब सत्ताधारी दल के पार्षद पर सवालिया निशान उठने लगा है। पार्षद कामरान अंसारी की माने तो युवक नशे में धुत था और गालियां देते हुए मारने की धमकी दे रहा था। जब उसे रोका गया तब वह आक्रोशित होकर वार करने लगा तो बचाओ में यह घटना घटित हो गई है।

सबसे बड़ी बात एक जनप्रतिनिधि द्वारा अपने ही वार्ड के स्थानीय निवासी को इस तरह से जूतमपैजार करना समझ से परे है। यदि आदिवासी युवक नशे में ही था तो उसे पुलिस थाने ले जाया जा सकता था। लेकिन इसमें साफ नजर आ रहा है की पार्षद सत्ता के नशे में चूर है और अपने दबंग साथियों के साथ इस घटना को अंजाम देने में कहीं भी पीछे नहीं रहा। अब देखना होगा की घटना के जांच के बाद किस तरह की कार्यवाही होती है।