देश-विशेष : बार जंगल काटो तो बस जुर्माना, बाहर वालों को जेल

नतीजा एक इलाके का 10 हेक्टेयर जंगल खेत में तब्दील, हौसले बढ़ रहे

पिथौरा। रायपुर संभाग के बलौदाबाजार जिले में स्थित और महासमुंद जिले की सरहद से लगे बारनयापारा अभ्यारण्य के जंगल धीरे-धीरे खेतों में तब्दील होते जा रहे हैं। वन अधिकार पत्र पाने के लिए ग्रामीण हरे भरे पेड़ काट रहे हैं। इसका सीधा सा कारण जो सामने आ रहा है वह यह कि यहां लोगों को सजा का डर नहीं रह गया है। बात दरअसल यह है कि अभ्यारण्य क्षेत्र के जंगल काटने वालों को सिर्फ जुर्माना देकर छोड़ दिया जाता है जबकि अभ्यारण्य से बाहर के इलाकों के संरक्षित जंगल की कटाई करने वाले सीधे जेल भेज दिए जाते हैं। इधर जुर्माने की राशि देकर आरोपी जुर्माने के आधार पर उस जमीन पर अपना हक जता वन अधिकार पत्र के लिए दावा कर रहे हैं कि वे इतने बरसों से काबिज हैं। बताया जाता है कि इस हेतु लगभग 10 हेक्टयर जमीन पर लगे हजारों पेड़ों को जड़ से काट कर वहां कब्जा कर उसी जमीन पर अधिकार पत्र देने हेतु आवेदन भी कर दिया गया है। बता दें कि इसी ग्राम ढेबी में कोई तीन वर्ष पूर्व भी ग्रामीणों ने सैकड़ों पेड़ों को काटकर कब्जा कर डाला था। इसकी खबरें मीडिया में आने के बाद वन अमला सक्रिय हुआ, जांच हुई पर कार्रवाई कुछ नहीं।


अभ्यारण्य क्षेत्र में जमीन और वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए शासन-प्रशासन द्वारा अनेक कठोर नियम बनाये है।करोड़ें रूपये प्रतिवर्ष खर्च कर सरकार ये प्रयास मात्र जंगल को बचाने के लिए कर रही है।परन्तु विभागीय लापरवाही का नतीजा ये है कि वनों की बेहिसाब कटाई से वनों का रकबा घटने लगा है और इसका सीधा असर पर्यावरण पर पड़ रहा है।
कुछ ऐसा ही बार अभ्यारण्य के ग्राम पंचायत ढेबी में हो रहा है। ग्रामीणों की मानें तो गांव के पटेल परिवार के चार भाइयों ने मिलकर ग्राम ढेबी से लगे जंगल में बेशकीमती इमारती पेड़ों की अवैध कटाई कर करीबन 20 से 30 एकड़ जंगल जमीन पर कब्जा कर उसे जे सी बी मशीन की मदद से खेती लायक बना लिया है। ग्रामीणों के अनुसार परिवार प्रभावशाली होने के कारण इसकी शिकायत वे गोपनीय रूप से लगातार अधिकारियों से करते रहे है,परन्तु कभी भी उनकी शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं की गई।

अभ्यारण्य में कटाई पूर्णतः निषेध
अभ्यारण्य के अलावा वन विभाग की किसी भी भूमि पर बिना इजाजत के किसी भी पेड़ की कटाई नहीं की जा सकती।परन्तु ग्राम के पटेल परिवार के लोग खुले आम दबंगई करते हुए जंगल काटकर उस पर अपना कब्जा भी जमा लिये। इस ग्राम में इन भाइयों का इतना ख़ौफ़ है कि इनके विरुद्ध शिकायत करने से भी ग्रामीण भय खाते हैं।लिहाजा ग्रामीणों ने खुलकर पत्रकारों का सहयोग करने से भी इंकार कर दिया।परन्तु यही ग्रामीण दबी जबान से उनकी हरकतों को बेनकाब कर रहे हैं।

40 हजार का जुर्माना या कब्जा
घटना की अज्ञात व्यक्ति द्वारा दी गयी सूचना के बाद बारनयापारा के डिप्टी रेंजर सुरेंद्र सिदार एवम वनरक्षक डहरिया ने जाकर देखा तो कई पेड़ों को काटा जा चुका था।घटना को अवैध कटाई का मामला बता कर अपने अफसरों के निर्देश के बाद विभाग द्वारा मामला दर्ज कर कटे पेड़ो की लकड़ी को जब्ती बनाकर पिथौरा के वन काष्ठगार भेज दिया एवम आरोपियों से बतौर जुर्माना 40 हजार रुपया वसूल किया गया।

विभागीय सूत्रों के अनुसार अब जंगल में हरे भरे पेड़ों को काटकर जमीन पर कब्जा करने वालों पर जुर्माना नहीं बल्कि उन पर कठोर कार्यवाही कर जेल भेजने का प्रावधान है।परंतु उक्त मामले में अफसरों द्वारा अतिक्रमण करियों पर ऐसा नहीं किया गया। बस उन पर जुर्माना लगाकर छोड़ दिया गया। ग्रामीणों के मुजाबिक इस कार्रवाई से अफसरों एवम अतिक्रमणकारियों में मिली भगत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

उक्त अवैध कटाई एवम उस पर एक परिवार के कब्जा करने एवं वन विभाग से ही उसके लिए पट्टा की मांग की गई है। ग्रामीण मानते हैं कि जिस जमीन पर वे कब्जा कर रहे है।उस पर विभागीय कार्यवाही में यदि जुर्माना किया जाता है तब उस जुर्माने को जमा कर आरोपी पट्टे की मांग कर सकते हैं।क्योंकि अवैध कटाई प्रकरण जुर्माने का साथ ही समाप्त ही जाता है।लिहाजा इस मामले में भी वन विभाग की सहभागिता सम्भव प्रतीत हो रही है।क्योंकि वह विभाग द्वारा आरोपी को मात्र अवैध कटाई का आरोप मान कर उस पर जुर्माना किया और मामला समाप्त कर दिया।लिहाजा जुर्माना जमा करने के बाद ग्रामीण निश्चिंत हो कर अतिक्रमित भूमि पर कब्जा कर लेते हैं।

नियमानुसार कार्यवाही अफसरों के मार्गदर्शन में-डिप्टी रेंजर
डिप्टी रेंजर सुरेंद्र सिदार ने बताया कि सेंचुरी क्षेत्र में वनसंपदा से छेड़खानी या पेड़ों की कटाई, यहां तक कि पत्ता तोड़ने का अधिकार भी किसी को नहीं होता।परन्तु ग्राम ढेबी के बनमाली पटेल एवम इनके तीन अन्य भाइयों ने मिलकर ढेबी से लगे जंगल को काटकर खेती करने के लायक बना दिया है और अभी वर्तमान में वनविभाग के जमीन में जहाँ पेड़ लगे थे वहां अब किसानी लायक भूमि बन चुकी है।मेरे पूर्व इस क्षेत्र में पदस्थ डिप्टी रेंजर के समय का मामला है, इस वजह से मैं ज्यादा नही बता सकता। पुराने अफसरों का तबादला होने के कारण नए अफसरों को जानकारी दी गयी जिनके मार्गदर्शन में कार्यवाही की गई है।

अब इसी भूमि पर पट्टे की मांग
ढेबा के,इस घने जंगलों को काटकर खेती लायक बनाया गया है।एक आरोपी बनमाली पटेल ने डिप्टी रेंजर को बताया कि उसने इसी जमीन पर वन अधिकार पत्र(पट्टा) की मांग भी की है। बनमाली पटेल ने बताया कि हमने पट्टा की मांग की है।पटेल का दावा भी है कि उन्हें इसका पट्टा मिलना तय है।

अभ्यारण के बाहर वालों को जेल
अभ्यारण्य के अंदर चल रहे इस खेल में अफसरों की संलिप्तता से इनकार नही किया जा सकता।क्योंकि अभ्यारण्य के बाहर संरक्षित वन क्षेत्रों मे कटाई कर अतिक्रमण करने वालों को जेल भेजा जाता है जबकि अति संवेदनशील अभ्यारण्य वन क्षेत्र में अवैध कटाई के बाद भी मात्र जुर्माना कर आरोपियों को छोड़ने के अलावा उन्हें अतिक्रमित भूमि पर पट्टा दिलाने की दिशा में कदम भी बढ़ाया जाता है।

वन परिक्षेत्र अर्जुनी में इसी तरह के दो मामलों में अतिक्रमण कर रहे चार ग्रामीणों पर कठोर कार्यवाही कर उन्हें जेल भेज कर वन जमीन मुक्त करा ली गई है।ये मामले अर्जुनी वन परिक्षेत्र के कौहा जुनवानी में कक्ष क्र 323 में अवैध कटाई कर वन भूमि पर कब्जा करने का प्रयास करने वाले दो ग्रामीण मदनलाल एवम भगत राम को वन अधनियम की धारा 33 एवम वन अधिनियम 1984 की धारा 2 एवम 3 के तहत कार्यवाही कर जेल भेज दिया गया था।इसी तरह इसी परिक्षेत्र में ग्राम नागेड़ी के कक्ष क्र 320 में अवैध कटाई कर अतिक्रमण करने के प्रयास करते ग्रामीण बाबूलाल एवम संतलाल को भी उक्त अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।