देश-विशेष : कोरिया में खड़ी फसलों पर लाई का कहर, रंगत बदली

दवा भी बेअसर, किसानों को भी बीमार कर रहा

बैकुंठपुर। दीपावली से पहले हुई बेमौसम बारिश ने किसानों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है। दरअसल, बदलते मौसम के कारण न केवल फसल खराब हो रही है, बल्कि किसान फसल की कटाई भी नहीं कर पा रहे हैं। खेतों में ही धान की खड़ी फसल पर रोग लगने लगा है। धान का रंग काला पड़ने लगा है।

                         लगातार आसमान पर बदली छाई रहने की वजह से किसानों के खेतों में खड़ी फसल पर लाई नामक फफूंदी बीमारी लग रही है। किसी भी प्रकार की रासायनिक दवाओं का छिड़काव बेअसर हो रहा है, इतना ही नहीं यह फंगस किसानों को बीमार कर दे रहा है। जिसकी वजह से किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार कोरिया जिला मुख्यालय से लगे ग्राम कचंनपुर, जामपारा, भाडी, केनापारा, बडगांव के किसान इस बीमारी से बेहद चिंतित है, जामपारा के किसान आज सुबह से अपने अपने खेतो में पहुंचें और फैल रही बीमारी पर चिंता जताई।

                           किसान परमेश्वर राजवाडे ने बताया कि शासन के द्वारा किसी भी प्रकार की आपदा, अतिवृष्टि, किट व्याधि से किसानों की फसल को नुकसान होता है तो उसका फसल बीमा के रूप में मुआवजा दिया जाता है। इस बार भी शासन को इस बीमारी से बर्बाद फसल के लिए किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ देना चाहिए। कम से कम प्रशासन इस मामले में तो आगे आए। ग्राम जामापारा के किसान जगदीश प्रसाद राजवाडे का कहना है कि इस काली फूफंद से ना सिर्फ धान की फसल को नुकसान हो रहा है बल्कि इससे निकलने वाला हरा पावडर से सर्दी खासी और बुखार भी आ रहा है। सरकार को इस बीमारी से खराब फसल के लिए फसल बीमा योजना का लाभ किसानों को देना चाहिए, ताकि उनकी क्षतिपूर्ति हो सकें।

                       उल्लेखनीय है कि दिवाली के पहले जिले भर में बेमौसम बारिश हुई, जिसके कारण खेतों में खडी धान की फसल खराब होने लगी है। दरअसल, मौजूदा समय में किसानों ने हल्की प्रजाति की धान को मिसाई के लिए काटना शुरू कर दिया है। जिन किसानों ने धान की कटाई कर ली है, वे उसे खेतों में ही रख दिए हैं, लेकिन अचानक बारिश होने से अब ये धान पानी में भीग गई है। इतना ही नहीं बारिश अधिक होने से खेतों में पानी भी भर गया है, जिसकी वजह से धान और भी ज्यादा खराब होने की कगार पर है।

ये है कृषि वैज्ञानिकों की राय
कोरिया के कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक विजय कुमार अनंत ने खड़ी फसल पर लगे रोग को कूट कलिका का नाम दिया है। वैज्ञानिक विजय कुमार ने किसानों को फसल के निजात के लिए सुझाव दिए है। जिसमें वैज्ञानिक ने बताया कि बाली निकलने के प्रारंभिक अवस्था में 50% पुष्टिकरण होने पर ही कीटनाशक घोल का छिड़काव किया जाना चाहिए। यह कीटनाशक हैं प्रोपिकोनजोल को 1 मिलीलीटर को प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर 15 दिनों के अंतराल पर कम से कम 2 बार छिड़काव किया जाना चाहिए। साथ ही हाइथेन एम 45 या मेंकोज़ेब कवकनाशी को 2 से 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर 15-15 दिनों के अंतराल पर दो बार छिड़काव करने से धान में लगे इस प्रकार की बीमारी को फैलने से रोका जा सकता है।