राजनांदगांवः वन समिति में साढ़े 22 लाख की हेराफेरी, मामला दर्ज

प्रबंधक, अध्यक्ष और चौकीदार की मिलीभगत सामने आई

प्रदीप मेश्राम, राजनांदगांव। दुर्ग संभाग के राजनांदगांव जिले के वनांचल के बाशिंदों के  जीवनस्तर को सुधारने तथा उनसे जुड़ी योजनाओं के लिए मिली लाखों रुपए की रकम के घोटाले के आरोप में पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ अपराधिक मामला दर्ज किया है। घोटाले के पीछे वन समिति के प्रबंधक, अध्यक्ष और चौकीदार की मिलीभगत सामने आई है।

मोहला पुलिस ने वन क्षेत्र के रेंजर की शिकायत पर प्रबंधक रम्हूराम, अध्यक्ष सोनउराम तथा चौकीदार मिलिंद गजभिये के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। पूरा मामला साढ़े 22 लाख रुपए के गबन से जुड़ा हुआ है।

मिली जानकारी के मुताबिक गोटाटोला समिति में राज्य सरकार द्वारा तेन्दूपत्ता संग्राहकों सहित अलग-अलग योजनाओं के लिए लाखों रुपए की स्वीकृति मिली थी। जिसमें प्रबंधक रम्हूराम, अध्यक्ष सोनउराम तथा चौकीदार मिलिन्द्र गजभिये ने सुनियोजित तरीके से राशि का वारा-न्यारा कर दिया। बताया जा रहा है कि मोहला रेंज के रेंजर भोंडेकर ने  सरकारी रकम में बंदरबांट किए जाने की पड़ताल करने के बाद तीनों के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराया है।

बताया जाता है कि प्रबंधक और समिति अध्यक्ष मिलकर चौकीदार के खाते में अलग-अलग मदों के रकम को जमा करते थे। यह उनकी साजिश का हिस्सा था। चौकीदार को भी अपने पाले में रखकर प्रबंधक और अध्यक्ष ने 22 लाख 50 हजार रुपए कई बार खाते से आहरित किया। बताया जा रहा है कि लाखों रुपए की राशि का हिसाब नहीं मिलने के बाद रेंजर द्वारा विभागीय स्तर पर जांच की गई। इसके बाद घोटाले का खुलासा हुआ।

इस संबंध में मोहला थाना प्रभारी विरेन्द्र सिंह ने बताया कि रेंजर द्वारा लिखित शिकायत के आधार पर अपराधिक मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल तीनों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। कुछ तथ्यों की जांच करने के बाद पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार करेगी।

उधर गोटाटोला समिति में शासकीय रकम को हजम करने वाले प्रबंधक, अध्यक्ष और चौकीदार भूमिगत हो गए। बताया जा रहा है कि पुलिस अब आरोपियों की सरगर्मी से तलाश कर रही है।

वनांचल में ऐसी कई समितियां हैं, जहां सरकार द्वारा तेन्दूपत्ता, बांस कटाई तथा अन्य लघु वनोपज के लाभांश समितियों के खाते में जमा किए जाते हैं। इन राशियों को गांव के अधोसंरचना और मूलभूत सुविधाओं के विकास में खर्च किए जाने का प्रावधान है। जिसके लिए समितियां गठित की गई है। फिलहाल 22 लाख की धोखाधड़ी के मामले का खुलासा होने के बाद आलाधिकारियों ने आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई करने के लिए पुलिस से मदद ली है।