देश-विशेष रिपोर्ट : मोरनी के अंडे सेती है देशी मुर्गी, 8 साल में 7 का कुनबा बढ़कर 22 पहुंचा

आप यहां इस पंछी को गोद ले सकते हैं

अंबिकापुर। ऐसा कौन नहीं होगा जिसे रंगिबरंगे पंछी न लुभाएं, और उसे प्रेम करने लगे। पंछियों से लगाव रखने वालों के लिए खुशखबरी है कि वे पंछियों को गोद ले सकते हैं। जी हां, यह संभव है। आपको आना होगा सरगुजा के संजय पार्क अंबिकापुर में। सतरंगी पंख लिए मोर आपको जरूर लुभाएंगे। और सबसे बड़ी बात यहां मोरनी अपने अंडे नहीं सेती. देशी मुर्गी इन्हें सेती है।

देश में राष्ट्रीय पक्षी मोर के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए संजय पार्क में किया गया प्रयोग सफल होता दिख रहा है। 8 वर्ष पहले संजय पार्क में छोटी सी पहल कर मोर की प्रजाति में उत्तरोत्तर वृद्धि के साथ-साथ नैसर्गिक तरीके से मोर के अंडे को देशी मुर्गी से सेवा कराने की अनूठा सफल प्रयोग किया गया था तो काफी हद तक सफल रहा है। यहां मोरों की संख्या मे बडा इजाफा देखा जा रहा है, अब यहां 12 मोरनी और 10 मोर है।

बिना विशेष सरकारी सहायता के वन विभाग के चंद कर्मचारी, पशु विभाग में पदस्थ पशु चिकित्सक डॉ. संजय अग्रवाल बताते है कि मै यहां हमेशा निरीक्षण में आता हूं, मोरनी के अंडो को हम हेचरी ले जाते है जहां उन्हें देशी मुर्गी सेती है। इसके अच्छे परिणाम आते दिख रहे है। वहीं संजय पार्क प्रभारी महाजन लाल साहू का कहना है कि बीते 8 वर्ष पहले शुरू किया गया प्रयोग आज भी जारी है, मोर की जनसंख्या लगातार बढ़ रही है। इस वर्ष 4 अंडे 36 घंटे बिजली गुल होने के कारण खराब हो गए, ऐसा अब ना हो इसकी व्यवस्था की गई है।

वर्ष 2011 में कृत्रिम वातावरण में रहने के कारण संजय पार्क में वर्षो से रह रहे मोर और मोरनी द्वारा प्रजनन नहीं किया जाना चिंता का विषय बना हुआ था। तत्कालिन संजय पार्क के प्रभारी पशु चिकित्सक द्वारा इन पर सतत निगरानी और निरीक्षण किया। 22 अप्रैल 2011 को एक मोरनी द्वारा पहला अण्डा प्राप्त हुआ। इस प्रकार इन तीन मोरनियों से 21 सितंबर 2011 तक कुल 40 अण्डे प्राप्त हो चुके हैं, जिसके बाद उन अंडो को देशी मुर्गियों से सेवा कर मोर के बच्चे प्राकृतिक ढंग से पैदा किए जाना शुरू हो गया। जो अब तक जारी है।

जानकार बताते है कि मोरनी अपने एक प्रजनन काल में केवल 4-6 अण्डे देती है। वर्ष 2011 में पार्क में 4 मोर एवं 3 मोरनी एक ही बाड़े में रहते थे। जो अब बढकर 22 हो गए है। जिसमें 12 मोरनी और 10 मोर है। इनके अंडों को हेचरी ले जाया जाता है और उन मुर्गियों को सेने के लिए रखा जाता है जिसने अंडा दिया हो, उस मुर्गी को अलग कमरे में रखकर उसके सेने वाले अण्डों को हटाकर मोरनी द्वारा दिए जा रहे अण्डों को रख दिया जाता है। ऐसी मुगिर्यों द्वारा पिछले तीन महीनों से अण्डों को सेया जाता है और इससे 28-28 दिनों बाद मोर के बच्चे प्रजनन हो रहे हैं। निश्चित रूप से संजय पार्क में कृत्रिम वातावरण में रखे मोर मोरनी पर किया गया प्रजनन प्रयोग सफल हो गया है जिसका परिणाम है कि आज संजय पार्क में सफलतापूर्ण मोरनी के दिए अंडे को मुर्गी द्वारा से कर कई बच्चे पैदा हो रहे हैं। जो कि शहर एवं जिलेवासियों के लिए कौतूहल एवं आकर्षण का केन्द्र भी बन गया है।

बिजली गुल से हुआ नुकसान
इस वर्ष संजय पार्क में मोरनी के 4 अंडे खराब हो गए, दरअसल, जब इन अंडे हुए उस समय से 36 घंटें तक बिजली नहीं आई, उस समय उन्हें गर्मी देना जरूरी था, जिसके बाद चारों अंडें खराब हो गए, जिस कारण चालू वर्ष में मोर की जनसंख्या मे कोई बढोतरी नहीं हो सही है। पार्क प्रबंधन की माने तो अब ऐसी स्थिति से निपटने की व्यवस्था कर ली गई है, ताकि भविष्य में कोई ऐसी स्थिति ना निर्मित हो सके।

मोर का जीवन काल
मोर को राष्ट्रीय पक्षी का दर्जा प्राप्त है। मोर मोरनी में सेक्सुअल मैच्युरिटी लगभग 2 साल में प्राप्त करते हैं। जिनका प्रजनन काल अप्रैल से सितंबर होता है। मोरनी एक प्रजनन काल में 4 से 6 अंण्डे देती हैं जो मुर्गी के अण्डों से डेढ़ गुना साईज में बड़ा होता है।