रिजर्व फारेस्ट एरिया और माइनिंग की ज़मीन पर एडवेंचर पार्क

डीएमएफ फंड से निर्माण को लेकर पहले ही सुर्ख़ियों में है प्रोजेक्ट

चंद्रकांत पारगीर, कोरिया। डीएमएफ की राशि से बनने वाला एडवेंचर पार्क के लिए चयनित स्थल को लेकर अब कई बातें सामने आ रही है। पार्क को लेकर चिरमिरी के जिस स्थान का चयन करने की तैयारी है वो ना सिर्फ रिजर्व फारेस्ट में आता है बल्कि चिरमिरी के माईनिंग ज़ोन में भी आता है।

चहीं डीएफओ को कहना है कि वो वहां कंस्ट्रक्शन वर्क नहीं कराएंगें तो निर्माण से संबंधित एक साथ 4 कार्यपालन यंत्रियों को जिला प्रशासन के द्वारा बनाई गई समिति में रखे जाने को लेकर सवाल खडे हो गए है।

कोरिया जिले में डीएमएफ की 40 से 50 करोड की राशि से चिरमिरी में एडवेंचर पार्क बनाए जाने की बडी तैयारी की जा रही है। नौकरशाह और जनप्रतिनिधियों की जुगलबंदी से एक बार फिर बडे स्तर पर राशि के दुरूपयोग की संभावना जताई जा रही है।

इधर, हर कोई जानता है कि चिरमिरी माईनिंग झोन है, इसके चारों ओर जमीन के अंदर आग लगी हुई है, कई इलाके को फायर झोन के रूप में घोषित किया जा चुका है, वहीं एसईसीएल से मिली जानकारी की माने तो भुकभुकी, भंडारदेही ग्राम की लगभग 667 एकड भूमि भारत सरकार के कोयला मंत्रालय के सीवी एक्ट में पारित हो चुकी.

रिजर्व फारेस्ट एरिया

यहां चिरमिरी ओपन कास्ट खोला जाना प्रस्तावित है, इस ओपन कास्ट की अवधि कम से कम 15 साल से ज्यादा अनुमानित है। इस ओपन कास्ट चिरमिरी की धूरी बताई जा रही है। यहां देश का उच्च कोटी का कोयला निकाला जाता है।

इसे राजपत्र में भी प्रकाशित किया जा चुका है। जिस स्थल के लिए वन विभाग के अधिकारी एडवेंचर पार्क बनवाना चाहते है वो यहां से बमुश्किल 1 से डेढ किमी दूर है। माइनिंग झोन होने के कारण आसपास का 5 से 6 किमी का क्षेत्र पूरी तरह ब्लास्टिंग से अछूता नहीं रहता है।

ऐसे में चयनित भूमि पर कई विशेषज्ञ सवाल खडे कर रहे है। यही कारण है कि यदि पार्क का काम शुरू होता है कि मामला एनजीटी के साथ कोर्ट में जाने से इंकार नहीं किया जा सकता है।

रिजर्व फारेस्ट में आता क्षेत्र
वन विभाग जिस क्षेत्र में एडवेंचर पार्क बनाने की तैयारी कर रहा है उसका कम्पाटर्मेट रिजर्व फारेस्ट एरिया में आता है। ऐसे में यह क्षेत्र सैर सपाटे के लिए किसी भी नियम के अनुसार दिया नही ंजा सकता है। गौरतलब है कि रिजर्व फारेस्ट में वनो की कटाई, चराई के साथ यदि बफर झोन में है तो आने जाने पर भी रोक लगी रहती है, रिजर्व फारेस्ट क्षेत्र में वनांे को बचाने के साथ साथ बिगडे वनों का सुधार कार्य किया जा सकता है, वनवर्धिनी कार्य किया जा सकता हैं। वहीं रिजर्व फारेस्ट क्षेत्र में पार्क के निर्माण का कार्य नियम विस्द्ध है।

प्रशासन की नियत पर है शक
जिस तरह से 10 जून 2019 के बाद जिला प्रशासन के कार्यकाल में डीएमएफ की राशि हो या अन्य कोई भी राशि में बंदरबांट सामने आया है उससे एक बार फिर काफी बडी राशि के दुरूपयोग की बात सामने आ रही है। दूसरा कारण यह है कि इस कार्य से जुडी जानकारियों को प्रशासन ने सार्वजनिक नहीं कर रहा है, आरटीआई से एडवेंचर पार्क के स्थल के खसरा नंबर की मांग की गई परन्तु प्रशासन जानकारी देने मे भी आनाकानी कर रहा है।

DFO आर.के. चंदेले से सवाल जवाब

सवाल – जिस क्षेत्र का आपने चयन किया है वो रिजर्व फारेस्ट है ?

जवाब – डीएफओ आरके चंदेले का कहना है कि हां वो रिजर्व फारेस्ट का क्षेत्र है, हम वहां इकोलॉजिकल कार्य कर सकते है।

सवाल – इतनी बडी राशि के खर्च पर सवाल खडे हो रहे है, 40-50 करोड में ऐसा क्या बनाएगे ?

जवाब – हमे जितना लगेगा उतनी ही राशि हम लेगें।

सवाल – पूरा चिरमिरी माईनिग ज़ोन है, वहां कोई निर्माण के लिए एसईसीएल के सुरक्षा से जुडी समिति की अनुमति के बिला नहीं हो सकता है। कई निर्माण कार्याे की अनुमति वहां आज तक नहीं मिल पाई है ?

जवाब – हम कोई निर्माण कार्य नहीं करेगें। बंबू सेंटम जैसे कई इकोफेंडली गतिविधियां की जाएगी।

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