Lockdown4 : बदहाल मजदूरों की आईटीबीपी बुझा रहा भूख-प्यास

सामाजिक सरोकार के जरिए दिखाया सेवाभाव

प्रदीप मेश्राम, राजनांदगांव। बाघनदी बार्डर में मजदूरों के बड़े पैमाने पर वापसी के दौरान भूखे-प्यासे दिहाड़ी मजदूरों की मदद के लिए नक्सल मोर्चे में तैनात आईटीबीपी की 38वीं वाहिनी ने हाथ बढ़ाया है। आईटीबीपी के उदार चेहरे ने मजदूरों की जहां थकान को दूर किया है। वहीं आईटीबीपी भी इस कठिन दौर में मजदूरों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपनी सामाजिक जवाबदारी निभा रहा है।

मजदूरों की सुध लेते हुए मजदूरों को आईटीबीपी की ओर से भोजन-पानी के साथ-साथ दवाई भी दी जा रही है। मजदूरों के सामने सफर में सबसे अधिक भोजन और पानी एक बड़ी समस्या के रूप में आई है। लिहाजा आईटीबीपी की 38वीं वाहिनी ने मजदूरों के कष्ट को हरने का इरादा लेकर मदद करने में रूचि ली है।

सिविक एक्शन प्लान के तहत 38वीं वाहिनी की ओर से भोजन के पैकेट के साथ-साथ मठा भी मजदूरों को दिया जा रहा है। आईटीबीपी की ओर से मजदूरों को बार्डर में प्रवेश करते ही भोजन भी उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा शारीरिक परेशानी से त्रस्त मजदूरों को चिकित्सकों की सलाह के पश्चात दवाई भी दी जा रही है।

इस संबंध में डिप्टी कमांडेंट रंजन कुमार ने कहा कि कमांडेंट नरेन्द्र सिंह के दिशा-निर्देश पर सिविक एक्शन प्लान के तहत मजदूरों को मदद की जा रही है। आईटीबीपी सामाजिक सारोकार से जुड़ते हुए यह प्रयास कर रहा है। इधर बाघनदी बार्डर में आईटीबीपी की ओर से सूखे खाद्य पदार्थ भी दिए जा रहे हैं।

मजदूरों की तकलीफ को दूर करने की कोशिश में जुटे आईटीबीपी के आलाधिकारी और अन्य जवान हरसंभव मजदूरों की दशा को सुधारने में मदद कर रहे हैं। आईटीबीपी के इस प्रयास की जमकर सराहना हो रही है। आईटीबीपी 24 घंटे बार्डर में मजदूरों की देखभाल के लिए डटा हुआ है।