दशक भर से सांताक्लॉज बन बच्चों के बीच किशन गंगवानी

71 साल के गंगवानी ने कहा, सभी धर्मों से जु़ड़ने से दिली सुकून मिलता है

राजनांदगांव। राजनांदगांव के 71 साल के किशन मंगवानी सामाजिक सौहद्रता की मिसाल बनकर सामने आए हैं। क्रिसमस हो या रमजान या फिर कई अन्य त्यौहार हर वर्ग से मिलकर खुशियों को साझा करते हैं। इतना ही नहीं वे अस्पताल में देर रात पहुंचकर जरूरतमंद मरीजों की सेवा करते हैं।
सांताक्लॉज की वेशभूषा में दिख रहे 71 वर्षीय किशन मंगवानी क्रिसमय की खुशियां बच्चों संग बांटते नजर आए। वे पिछले एक दशक से मंगवानी स्थानीय गिरजाघरों में विशेष परिधान पहनकर सांताक्लाज बनकर बच्चों का मनोरंजन करते हैं। सांताक्लाज की कहानियां सुनने वाले बच्चे भी उनसे अपना जुड़ाव महसूस करते हैं। राजनांदगांव के वेसलियन चर्च में क्रिसमस के दौरान मंगवानी बच्चों के बीच सांताक्लाज के रूप में घंटों चर्च में रहे। मंगवानी का कहना है कि सभी धर्मों के तीज-त्यौहारों में जु़ड़ने से उन्हें काफी दिली सुकून मिलता है।

वे बताते हैं कि उनकी नियिमत दिनचर्या है। रोज रात ढाई बजे नींद खुल जाती है। उसके बाद वे बिस्किट, दातून आदि सुबह की दैनिक दिनचर्या में शामिल चीजों को लेकर वे निकलते हैं और जरूरतमंदों को देते हैं। अस्पताल पहुंचकर जरूरतमंदों को कंबल, गर्म पानी आदि जरूरत की चीजें मुहैय्या कराते हैं।रमजान में शहर के चारों मसिजदों में जाते हैं। रोजा की मिठाइयां बांटते हैं। हर त्यौहार में शामिल होते हैं।