नक्सल समर्पण में महाराष्ट्र गढ़चिरौली के मुकाबले कमतर रही नांदगांव पुलिस

गढ़चिरौली में तीन दर्जन तो नांदगांव में एकमात्र नक्सल समर्पण

राजनांदगांव। इस साल नक्सल मोर्चे पर राजनांदगांव सीमा से सटे महाराष्ट्र गढ़चिरौली और राजनांदगांव पुलिस का समर्पण को लेकर प्रदर्शन में अंतर जमीन-आसमान का रहा। नक्सल समस्या से जूझ रहे दोनों जिलों की स्थिति लगभग बराबर है, लेकिन समर्पण नीति से नक्सलियों को प्रभावित करते गढ़चिरौली पुलिस ने तीन दर्जन नक्सलियों को मुख्यधारा में वापस लाया। जबकि राजनांदगांव पुलिस सालभर में महज एकमात्र नक्सल समर्पण करने में कामयाब रही। गढ़चिरौली में इस साल समर्पण के लिए पुलिस का व्यापक जोर रहा।

पुलिस ने अपनी प्रभावी रणनीति से एक ऐसा ठोस माहौल बनाया कि राजनांदगांव सीमा से सटे चातगांव दलम की पूरी टीम समर्पण करने बाध्य हुई। गढ़चिरौली में पुलिस ने मौजूदा साल में 34 नक्सलियों को हथियार छुड़वाने में कामयाब रही। गढ़चिरौली में पुलिस ने तीन डीवीसी, दो दलम कमांडर समेत दो डिप्टी कमांडर को भी हथियार छोडऩे के लिए विवश कर दिया।

पुलिस नक्सल मोर्चे में समर्पण योजना को बहुप्रचारित करने की दिशा में भी रणनीति पूर्वक आगे बढ़ती गई। जिसके अपेक्षित नतीजे सामने आए। इधर राजनांदगांव में एकमात्र नक्सली ने ही समर्पण का रूख किया। राजनांदगांव पुलिस के लिए समर्पण नीति को लागू करने के बावजूद सफलता नहीं मिलने पर सवाल उठ रहे हैं। नक्सलियों की समूचे जिले में जोरदार मौजूदगी है। जबकि सरकार ने नक्सल उन्मूलन नीति को प्राथमिकता के साथ लागू किया है। नक्सली संगठन छोड़कर आने वाले नक्सलियों को खास रियायत भी दी जा रही है। मसलन नौकरी और स्वरोजगार योजना में भी समर्पण नक्सलियों को अतिरिक्त छूट दी जा रही है। इसके बावजूद नांदगांव में मौजूदा साल समर्पण कराने में पुलिस का काफी पीछे रही। गढ़चिरौली के आंकड़े देखकर कहा जा सकता है कि वहां पुलिस की नीति काफी असरकारक रही है। जबकि राजनांदगांव में पुनर्वास नीति से नक्सली प्रभावित होते नहीं दिख रहे हैं।

मुठभेड़ में दोनों जिलों का आंकड़ा लगभग बराबर
नक्सल लड़ाई में पुलिस के हाथों मारे गए नक्सलियों का आंकड़ा नांदगांव और गढ़चिरौली में लगभग बराबर रहा है। गढ़चिरौली पुलिस ने जहां 09 नक्सलियों को मार गिराया है। वहीं राजनांदगांव पुलिस ने भी 08 नक्सलियों को ढ़ेर किया है। राजनांदगांव पुलिस ने इस साल शहीद सप्ताह के आखिरी दिन 3 अगस्त को गोंदिया सीमा पर दर्रेकसा दलम का लगभग सफाया करते एकमुश्त 7 नक्सलियों को हथियार समेत मार गिराया था। नांदगांव पुलिस के लिए यह सफलता नक्सल मोर्चे की सबसे बड़ी कामयाबी थी। वहीं नांदगांव पुलिस ने गातापार के भीतरी इलाके के भावे क्षेत्र में हार्डकोर महिला नक्सली जमुना को भी ढ़ेर किया था। जमुना मूल रूप से बालाघाट के पालगोंदी की रहने वाली है। उसकी लंबे समय से पुलिस को तलाश थी। दर्रेकसा दलम के सुखदेव उर्फ लक्ष्मण को मारकर भी पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की थी, क्योंकि सुखदेव एमएमसी जोन के सेक्रेटरी के रूप में काम कर रहा था।

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