सत्ता परिवर्तन के साल भर बाद भी कोरिया जहां का तहां

बदलाव की बाट जोहती जनता की उम्मीदों पर फिरा पानी

बैकुंठपुर। आज से ठीक एक साल पहल 11 दिसंबर 2018 को कांग्रेस ने कोरिया जिले की तीनों सीटें जीत कर भाजपा को करारी शिकस्त दी थी, आज एक वर्ष पूरे हो गए है, परन्तु जिले के हालात जस के तस हैं। बदलाव की बयार ने सत्ता परिवर्तन तो किया, परन्तु व्यवस्था और बदहाल होती चली गयी। जीत के बाद ऐसा लगा था कि भाजपा सरकार की नीति से कुछ नया देखने को मिलेगा। पर कांग्रेस का कार्यकाल जमीन पर कम सोशल मीडिया पर ही तैरता नजर आया। 15 साल बाद मिली सत्ता ने काम करने वाले कार्यकर्ताओं को दूर कर दिया है। जिस बदलाव की जनता बाट जोह रही थी वो कही भी नजर नहीं आ रहा।

बता दें कि अभी ठीक चार महीने बाद हुए लोकसभा चुनाव में कोरिया जिले से कांग्रेस को जोरदार झटका लगा। विधानसभा चुनाव कांग्रेस ने ब़डे अंतर से जीता था जबकि दोगुने अंतर से लोकसभा चुनाव में उसे हार मिली। पूरे वर्ष विपक्ष एकदम चुप बैठा रहा। इधर, भरतपुर में अवैध रेत का कारोबार शुरू हो गया, विधानसभा अध्यक्ष डॉ चरणदास महंत ने सार्वजनिक रूप से इसका विरोध किया ओर कहा कि यदि रेत के खिलाफ नेता खडे नहीं होगे तो जनता उनका हुक्का पानी बंद कर देगी। कुछ दिन बाद बैकुंठपुर विधायक अंबिका सिंहदेव ने अवैध रेत परिवहन के खिलाफ आगे आई और पर्यावरण बचाने का संदेश दे डाला। इधरसत्ता और संगठन में आपसी मनमुटाव और गुटबाजी हर कही देखने को मिली।

तबादला या बदला
कांग्रेस की सरकार बनते ही अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों का दौर शुरू हो गया, ऐसे अधिकारी जिन्हें समझा गया कि उन्होंने उनके लिए काम नहीं किया, उनमे से कईयों को दंतेवाडा और बस्तर भेजा भी गया, परन्तु कोर्ट से उन्हें राहत मिल गयी। कांग्रेसी कई अधिकारियों का भाजपा शासन में विरोध करते थे वो अब कांग्रेस के प्यारे हो गए। नेताओं ने पूरी ऊर्जा तबादले में लगा दी। कोरिया जिले भर में भाजपा के कार्यकाल के समय से पदस्थ जिला पंचायत सीईओ को छोडकर सबका स्थानांतरण हो गया, कुछ स्टे लेकर आ गए।

मुद्दे बदल गए
कांग्रेस के जीत के पहले जो मुद्दे थे जीत के बाद एकदम से बदल गए। आम जनता ये देख हैरान है, 4 महीने में कलेक्टर बदल गए, जिस मुद्दे पर विरोध करके सत्ता पाई थी, उसी मुद्दे पर भरतपुर में जमकर अवैघ रेत उत्खनन शुरू हो गया। मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे इस जिले में अचानक नया जिला बनाने की मांग का मुद्दा उभर आया। जीत के बाद से ही नेता इस मुद्दे को उठाकर मुख्य मुद्दों से लोगों को गुमराह करते नजर आए, जबकि मनरेगा में लंबित मजदूरी भुगतान, पीएम आवास, घटिया शौचालय निर्माण, पंचायतों और कृषि विभाग में भ्रष्टाचार, सिचाई विभाग में 58 करोड का घोटाला, पीने के पानी की समस्या, हर तरह की पेंशन का नहीं मिलना, शिक्षा, स्वास्थ्य, बढता प्रदूषण, बेरोजगारी, किसानों की समस्यओं पर नेता बात करने को तैयार नहीं दिखे।

अब लगे कार्यकर्ताओं को पुचकारने
अब एक साल बीत जाने के बाद नेताओ को अपने वो कार्यकर्ता याद आने लगे है जो उनके बुरे समय में साथ थे। उनके व्यवहार और कार्यशैली से साथ काम चुके कार्यकर्ता दूर होते चले गए। लोकसभा चुनाव में शर्मनाक हार के बाद अब नगरीय चुनाव, उसके बाद पंचायत चुनाव सिर पर है। यदि इस चुनाव में भी हार का सामना करना पड़ा तो काफी किरकिरी होना तय है, उपर से आलाकमान का जीत दिलाने का दबाव अब पुराने कार्यकर्ताओं के करीब लाने को विवश कर दिया है। अब नेता ऐसे कार्यकर्ताओ को पुचकारने लगे है, अब उनकी पूछ परख कर रहे है ताकि नगरीय और त्रिस्तरीय चुनाव में कांग्रेस को अच्छी जीत मिल सके।

संबंधित पोस्ट

कोरियाः मनेन्द्रगढ़ के पूर्व नपा अध्यक्ष राजकुमार केशरवानी के खिलाफ एफआईआर दर्ज

Video-कोरियाः गाज से एक किसान के एक दर्जन मवेशियों की मौत

कोरियाः भरतपुर जनपद के कई पेंशनधारियों को 8 माह से पेंशन नहीं

कोरियाः डीएमएफ से बने मनेन्द्रगढ के एनीकट ने साल भर में ही दम तोड़ा

EXCLUSIVE कोरियाः डीएमएफ से ढाई गुणा काम स्वीकृत पर रायल्टी बीते तीन साल से कम

EXCLUSIVE कोरियाः अतिवृष्टि से किसान हलाकान, बीज वितरण भी अब तक नहीं

कोरियाः बेहोश प्रसूता का 3 किमी सफर खाट पर एंबुलेंस तक पहुंचने

कोरियाः झुमका बांध एक्वेरियम निर्माण की गति धीमी, समय पर पूरा होने में संशय

कोरिया : नाले पर बना दिया गोठान

लॉकडाउन से पस्त पान विक्रेता संघ कलेक्टर से मिला, मांगी इजाजत

कोरियाः एडवेंचर पार्क से पहले स्वास्थ्य

छत्तीसगढ़ : हजारों बरस पहले कोरिया के इस पहाड़ पर गिरे थे दो तारे