15 लोगों की जान ले चुका हाथी गणेश अब कुनबे से बाहर

एक दूरी तय कर कुनबे के पीछे-पीछे चलता है, शांत हो चुका-वन विभाग

बैकुंठपुर। छत्तीसगढ़ के रायगढ़, कोरिया और सरगुजा में 15 लोगों की जान लेने वाला हाथी गणेश इन दिनों बिलासपुर के मरवाही सीमा पर है। उसकी आमद से सीमा से लगे कोरिया की इलाके में दहशत है। वहीं वन विभाग की मानें तो उसे कुनबे से बेदखल कर दिया गया है। वह कुनबे से एक दूरी तय पीछे पीछे चलता है। ज्ञात हो कि इस जानलेवा हाथी गणेश पर निगाह रखने वन विभाग ने कालर आईडी लगा रखा है। वन अधिकारियों की मानें तो आईडी लगाने के बाद उसके द्वारा कोई जनहानि नहीं की गई है।


इन दिनों कोरिया वनमंडल के खडगवां परिक्षेत्र में 35 हाथियों का दल कटघोरा वनमंडल में प्रवेश कर गए। कल दल खडगवां कटघोरा मुख्य मार्ग से होकर गुजरा, दूसरी ओर मौत का पर्याय बन चुका गणेश हाथी कोरिया मरवाही की सीमा पर मौजूद है, जिसके कोरिया आने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता, यही कारण है कि जिले की सरहदी क्षेत्रो में गणेश को लेकर दहशत का माहौल व्याप्त है। वहीं मप्र भी अब हाथियों से प्रभावित होने लगा है।
इस संबंध में कोरिया वनमंडल की एसडीओ जैनी कुजूर का कहना है कि कोरिया पहुंचा दल बीते दिनों मप्र के बांधवगढ में देखा गया था, यहां इनकी पहचान के बाद ये बात सामने आई है। गणेश के आने की संभावना को लेकर ग्रामीणों को समझाईश दी जा रही है।
जानकारी के अनुसार कोरिया वनमंडल के खडगवां परिक्षेत्र के कोट्या बीट में बीते 3 दिनों से 35 हाथियों का दल विचरण कर रहा था, कल शाम इस दल ने कटघोरा वनमंडल में प्रवेश किया, वन विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों ने राहत की सांस ली। इससे पहले इन दल में शामिल हाथियों ने किसानें की फसल चौपट कर दी, उनकी फसल के मुआवजा प्रकरण बनाने में विभाग जुटा रहा है। अब मरवाही सीमा पर स्थित गणेश हाथी को लेकर विभाग परेशान है, कही गणेश कोरिया की ओर ना आ जाए।

                                    मरवाही वन मंडल के पेंड्रा वन परिक्षेत्र में 14 हाथियों का दल है जो कोरिया की सीमा से लेग कोतमी तक आ पहुचा है। जिससे ग्रामीण पूरी रात दहशतजदा थे, उससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि इसमें मौत का पर्याय बन चुका गणेश हाथी भी साथ ही था। गणेश वही हाथी है जिसने कोरबा और धर्मजयगढ़ इलाके में 15 लोगों को मारा है वन विभाग ने इसके गले में कॉलर आईडी लगा रखा है, गणेश अपने मुख्य दल से अलग चल रहा है। लगातार दिन में भी रिहायशी इलाकों में घुसकर घरों और खलिहानो में रखे धान की पकी फसल खा रहा है। वन विभाग हाथियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और ग्रामीणों को सतर्क कर रहे हैं।

सितंबर में ही लगाया है कॉलर आईडी
वन विभाग के अधिकारियो ने मानें तो गणेश हाथी को उसके दल से अलग कर दिया है, वो दल से लगभग 40 फीट की दूरी पर अकेला चलता है, बेहद तेज और आतंकी होने के कारण धरमजयगढ वनमंडल में इसके बेहोश करके कॉलर आईडी लगाया गया है। गणेश सिर्फ धरमजयगढ वनमंडल में 6 से ज्यादा लोगों की जान ले चुका है। अधिकारियों की माने तो आईडी लगाने के बाद उसके द्वारा एक भी जनहानि नहीं की गई है।

बांधवगढ़ से लौटा है यह दल
मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के टाइगर रिजर्व बांधवगढ़ में डेरा जमाए हाथियों ने पर्यटन जोन को प्रभावित किया है 35 छोटे बड़े हाथियों का झुंड पार्क के मगधी, खितौली और धमोखर रेंज के जंगलों में विचरण के बाद कोरिया पहुंचा है। मगधी और खितौली वहीं जगह है जहां सबसे ज्यादा टाइगर है, पर्यटक सबसे ज्यादा इन्ही क्षेत्रों में टाइगर देखने आते है। बताया जाता है इस वजह से पार्क प्रबंधन ने एहतियातन मगधी और खितौली गेट बंद कर दिए थे। जबकि पर्यटकों को घूमने के लिए दूसरे इलाके में भेजा गया. यही नहीं, वहीं हाथियों की वजह से यातायात पर भी असर पड़ चुका है।