सुपेबेड़ा के मरीजों को देखने जाएँगी राज्यपाल अनसुईया उइके

भूपेश सरकार भी सूपेबेडा भेजेगी विशेषज्ञों की टीम

रायपुर | छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के देवभोग तहसील के अंतर्गत सुपेबेड़ा गांव में किडनी रोग की समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है। मौत के आंकड़ों से सभी खौफजदा हैं। बीते 3 सालों में अब तक इस गांव के 71 लोगों की मौत किडनी की बीमारी के चलते हो चुकी है। अब तक लगभग गांव के 200 से ज्यादा मरीज इसी बीमारी से पीड़ित भी हैं और उनका सही इलाज अब तक नहीं हो पाया है। मरीजों के मौत का आंकड़ा बढ़ने से ग्रामीणों में आक्रोश भी है और वह खुद इस बीमारी से काफी परेशान भी है क्योंकि इसका पर्याप्त इलाज अब तक संभव नहीं हो पाया है।
पिछली सरकार यानी डॉ रमन सिंह की सरकार ने भी सुपेबेड़ा गांव के मरीजों के इलाज के लिए काफी दमखम लगाया था।लेकिन स्वास्थ्य विभाग का अमला वास्तविक बीमारी को पकड़ नहीं पाया। वही कमोबेश स्थिति प्रदेश में नई सरकार आने के बाद भी दिखाई दे रही है। सुपेबेड़ा गांव में स्वास्थ्य मंत्री टी.एस.सिंहदेव स्वास्थ्य अमले के साथ स्वयं जाकर मुआयना कर चुके हैं। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया था कि आने वाले समय में जल्द ही इस बीमारी का पता लगाकर सही इलाज करवाया जाएगा, लेकिन जो अब तक पूरा नहीं हो पाया है।

राजयपाल जाएँगी सुपेबेडा
इधर 2 दिन पहले सुपेबेड़ा के एक ग्रामीण अकालु मसरा की मौत हो जाने के बाद प्रदेश के राज्यपाल अनुसुइया उइके को ग्रामीणों ने सांसद चुन्नीलाल के साथ राज्यपाल से शिकायत की थी। राज्यपाल को सांसद साहू ने सुपेबेड़ा के हालात की जानकारी दी। जिसके बाद राज्यपाल ने एम्स की टीम के साथ सुपेबेडा गांव जाकर ग्रामीणों से बात करने की मंशा जाहिर की। इधर राज्यपाल के सुपेबेडा जाने की मंशा पर प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल ने कहा कि राज्यपाल के साथ-साथ सरकार भी चिंतित है। सीएम ने कहा की सरकार हर संभव प्रयास कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने राज्यपाल से उम्मीद जताई कि वे भारत सरकार से इसमें बीमारी की जानकारी हासिल करने पहल करें। ताकि केंद्र द्वारा स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजकर बीमारी का वास्तविक पता लगाकर सही इलाज ग्रामीणों का कराया जा सके।

ग्रामीणों का खून जाँच कराएगी सरकार
सुपेबेड़ा में किडनी की बीमारी से लगातार मौत जारी है। राजयपाल के संज्ञान के बाद अब राज्य सरकार सुपेबेड़ा के सभी ग्रामीणों का खून जाँच करने की बात कही है। सरकार की माने तो ग्रामीण मौत के बाद पोस्टमार्टम करना नहीं चाहती। इससे भी वास्तविक कारण अब तक पता नहीं चल पाया है। लेकिन अब मामले की गंभीरता को देखते हुए के खून और पेशाब की जांच कराई जाएगी। उल्लेखनीय है की सुपेबेडा गांव में वर्ष 2005 से लगातार किडनी के बीमारों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है। अब तक जाँच में गांव का पानी साफ़ नहीं होइने की बात सामने आई है। साथ ही सरकार ने गांव में लगे ट्यूबवेल के पानी की भी जाँच करवाई है,लेकिन बीमारी के करने का अब तक पता नहीं चल पाया है। सरकार को आशा है की खून और पेशाब की जाँच के बाद वास्तविक बीमारी का पता चल सके और इलाज संभव हो।

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