गुरू घासीदास नेशनल पार्क : बारहमासी नालें और भरपूर भोजन से बना टाइगर रिजर्व

गुरू घासीदास नेशनल पार्क में बाघों के आलावा तेन्दुआ, गौर, चिंकारा, कोडरी भी मौजूद

बैकुुंठपुर। गुरू घासीदास राष्ट्रीय उद्यान पर बाघों की बढती संख्या पर गौर करते हुए आखिरकार राज्य सरकार ने गुरू घासीदास राष्ट्रीय पार्क को टाइगर रिजर्व घोषित कर दिया है। अब यह सीसीएफ वाइल्ड लाइफ से अलग अब इस टाइगर रिजर्व में फील्ड डायरेक्टर सीसीएफ की तैनाती होगी। प्रदेश में अब तक अचानकमार, उदंती सीतानदी और इंद्रावती में टाइगर रिजर्व थे। जानकारी के अनुसार गुरू घासीदास नेशनल पार्क को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने से क्षेत्र मे खुशी का माहौल है, सोशल मीडिया में भी इसका श्रेय लेने की होंड मची हुई है। वहीं पार्क में बाघों की संख्या अब आधा दर्जन का आंकडा छू गया। बताया जाता है कि भरपूर वन्य जीवों और बाघों के रहने के लिए अनुकूल वातावरण के कारण बाघ यहां आ रहे है। कुछ माह पूर्व क्षेत्र मे पडी भीषण गर्मी के बाद भी बाघों ने अपना आशियाना नहीं बदला, उसका मुख्य कारण सघन वन और पानी की उपलब्धता बताई जा रही है।
इस पार्क के हर रेंज में कम से 30 से 35 जिंदा नाले है जो बाहरमासी बहते है। वहीं दर्जनों पानी के उबके मौजूद है। इस राष्ट्रीय उद्यान में हसदेव, गोपद, नेऊर, बीजागुर, बनास, रेहंठ, नदीयों का जलग्रहण क्षेत्र है। यह राष्ट्रीय उद्यान उन्नत पहाडों एवं नदियों से घिरा हुआ है। यहां साल, साजा, धावड़ा, कुसुम, तेन्दु, आंवला, आम, हल्दु, जामुन, कर्रा एवं बांस के वृक्षों के अतिरिक्त जडी बुटियां पायी जाती है।

साल 2001 में अस्तित्व में आया था
गौरतलब है कि कोरिया जिला स्थित गुरू घासीदास राष्ट्रीय उद्यान बैकुंठपुर, की स्थापना वर्ष 2001 में की गई थी, इसके पूर्व यह संजय राष्ट्रीय उद्यान, सिधी मध्य प्रदेश का भाग था। इस राष्ट्रीय उद्यान का कुल क्षेत्रफल 1440.705 वर्ग कि.मी. है। वर्ष 2014 में एशिया का सबसे बडा टाइगर कॉरिडोर बताया गया है। जिसमें तमोर पिंगला का 608 वर्ग किमी और गुरू घासीदास राष्ट्रीय उद्यान का 1440.705 वर्ग किमी जोडकर कुल 2301 वर्ग किमी, संजय गांघी टाईगर रिजर्व का 1774 वर्ग किमी और बगदरा का 468 वर्ग किमी को जोडकर कुल 4543 वर्ग किमी का वृहद टाइगर कॉरिडोर का निर्माण किया गया।

कई तरह के है वन्य जीव
इस अभयारण्य में बाघों की बढती जनसंख्या के अलावा तेन्दुआ, गौर, चिंकारा, कोडरी, सांभर, भेडिया, उदबिलाव, चीतल, नीलगाय, जंगली सुअर, भालू, लंगूर, सेही, माउस डिवर, छिंद, भालू, चिरक माल खरगोश, बंदर, सिवेट, हायना, जंगली कुत्ता, सियार, लोमडी, आदि जानवर एवं मुर्गे, मोर, धनेश, महोख, ट्रीपाई, बाज, चील, डीयर, हुदहुद, किंगफिसर, बसंतगौरी, नाइटजार, उल्लू, तोता, बीइटर, बगुला, मैना, आदि पक्षी पाये जाते है। दूसरी ओर पार्क के सभी परिक्षेत्रों में नील गायों की बढती जनसंख्या बाघों को यहां रहने के लिए काफी आर्किषत करती है। पूरे पार्क क्षेत्र में लगभग 500 से ज्यादा नील गाय बताई जा रही है।