हाईकोर्ट का फैसला : अंबिकापुर नगर निगम परिसीमन पर लगी याचिका खारिज

हाईकोर्ट ने अंबिकापुर नगर निगम के परिसीमन को रखा यथावत

बिलासपुर। अम्बिकापुर नगर निगम की परिसीमन की दी गई चुनौती की याचिका को सोमवार को हाईकोर्ट में खारिज कर दिया गया। उच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि राज्य शासन को संविधान के अनुच्छेद 243 जेडजी के तहत यह अधिकार है कि वह किसी नगर निगम को परिसीमन के अंतर्गत ला सकता है। ऐसे मामलों को चुनौती नहीं दी जा सकती। परिसीमन की याचिका पर सुनवाई चीफ जस्टिस पी.आर. रामचंद्र मेनन एव जस्टिस पार्थ प्रीतम साहू की डबल बेंच ने की। नगर निगम अम्बिकापुर के पार्षद मनोज कुमार व अन्य लोगों ने राकेश झा व अन्य के जरिये हाईकोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की थी। इनमें परिसीमन के बाद जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा प्रारंभिक प्रकाशन की सूची का हवाला देते हुए कहा गया था कि राजनीतिक विद्वेष के कारण सत्ताधारी दल के नेताओं के इशारों पर वार्डों में फेरबदल किया गया है।

प्रमोशन में आरक्षण, अफसरों ने भूल की
इधर प्रमोशन में आरक्षण देने के मामले में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में स्वीकार किया है कि इस नियम में सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट की गाइडलाइन का पालन करने में अधिकारियों ने भूल की है। राज्य सरकार को इस बारे में अब 9 दिसंबर को नया जवाब दाखिल करना है।
उल्लेखनीय है कि सरकारी कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण देने की अधिसूचना 22 अक्टूबर को राज्य शासन ने जारी की थी। इसके तहत अनुसूचित जाति का आरक्षण बढ़ाकर 13 प्रतिशत तथा अनुसूचित जन-जाति का आरक्षण 32 प्रतिशत कर दिया गया है। इसकी वैधानिकता को विष्णु तिवारी व गोकुल सोनी ने अधिवक्ता प्रफुल्ल भारत व विवेक शर्मा के माध्यम से हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

याचिका पर सुनवाई चीफ जस्टिस पी. आर. रामचंद्र मेनन और जस्टिस पी.पी. साहू की डबल बेंच में हुई। याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार ने पूर्व आदेशों तथा शीर्ष न्यायालयों के निर्देशों का पालन किये बिना यह अधिसूचना जारी की है। सुप्रीम कोर्ट में सात जजों की पीठ ने कहा है कि क्रिमीलेयर को प्रमोशन में आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी फरवरी 2019 में इस आशय का आदेश दिया है। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा उपस्थित थे। उन्होंने स्वीकार किया कि नियम बनाते समय अधिकारियों ने दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया है।

मीसाबंदी पेंशन जारी रहेगा
वहीं एक अन्य फैसले में हाईकोर्ट ने एक लोकतंत्र सेनानी (मीसा बंदी) की याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्देश दिया है कि राज्य सरकार भौतिक सत्यापन के बाद उनकी सम्मान निधि तुरंत जारी करे और भविष्य में कभी भी राशि नहीं रोकी जाये। मीसा बंदी असित भट्टाचार्य ने अधिवक्ता सुप्रिया उपासने के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि पूर्ववर्ती सरकार ने लोकतंत्र सेनानियों के लिए सम्मान निधि की व्यवस्था शुरू की थी, जिसे छत्तीसगढ़ में नई सरकार बनने के बाद बिना कारण बताये बंद कर दिया गया है। मामले की सुनवाई जस्टिस पी. सैम कोसी की कोर्ट में हुई। कोर्ट ने पाया कि सम्मान निधि बंद करने की कोई स्पष्ट वजह सामने नहीं आई है। अतएव, राज्य सरकार भट्टाचार्य का भौतिक सत्यापन कर सम्मान निधि जारी करे और भविष्य में इसे कभी न रोके।