कोरिया कांग्रेस की गुटबाजी फिर सतह पर, मंत्री के बैनर-पोस्टर फेंके गए  

फजीहत की शिकायत आला तक पहुंची तो माफी मांगी, दुबारा लगवाया

चंद्रकांत पारगीर, कोरिया। कांग्रेस की सरकार बनने के बाद अब तक कोरिया कांग्रेस मे सब ठीक नहीं हो पाया है, आपसी गुटबाजी की लडाई का ताजा मामला भी चिरमिरी से है, यहां एक गुट ने मंत्री अमरजीत भगत को जन्मदिन की बधाई देते हुए बैनर लगा दिया, जिसके बाद एक पावरफूल गुट ने बैनर निकलवा फेंकवा दिया।

बात ना सिर्फ मंत्री श्री भगत तक पहुंची बल्कि राज्य के आला नेताओं के साथ केन्द्र में बैठे नेताओं तक पहुंच गई, जिसके बाद निकलवाने वाले ने बैनर में दिख रहे लोगों से माफी मांगी और दुबारा बैनर उसी जगह लगवाया भी, जहां से उसे हटवा दिया था।

इस संबंध में कांग्रेस के जिला प्रवक्ता प्रमोद सिंह का कहना है कि 22 जून को जन्मदिन के दिन बारिश होती रही, इस कारण बैनर चिपक नहीं पाया, दूसरे दिन 4 स्थानों पर बैनर लगा, 24 जून को उतार दिया गया, फिर बाद में माफी मागकर रात में लगा दिया गया। मामला देखा जाए तो बड़ा है, हमारी सरकार है हमारे मंत्री है, उनके जन्मदिन का बैनर निकला जाने दुर्भाग्यजनक है।

कोरिया जिले की कांग्रेस में बहुत गांठें

कोरिया जिले में भाजपा विपक्ष की भूमिका में एकदम शांत बैठी है, सोशल मीडिया में कुछ पदाधिकारी सरकार को कोसते नजर आते है, मैदान पर एकदम शून्य है। इधर, कांग्रेस की मुख्य लडाई कांग्रेस के लोगों से ही है, जिसे सुलझा पाना कांग्रेस के किसी भी नेता के बस में नहीं दिख रहा है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ चरणदास महंत ने मंत्र से यह स्वीकारा था कि कोरिया जिले की कांग्रेस में बहुत गांठे है।

ताजा मामला चिरमिरी नगत निगम का है, जहां एक गुट ने कांगेस के कद्दावर मंत्री अमरजीत भगत के जम्नदिन पर 4 बैनर लगवाए, ये चिरमिरी के अलग अलग क्षेत्रों में लगाए गए, 23 जून को दिनभर बैनर देखे गए, वहीं 24 जून को बैनर नगर निगम के अमले ने हटा दिया, जिसके बाद कांग्रेस में बवाल मच गया।

ऐसा नहीं था कि बैनर में किसी का फोटो नहीं था, चिरमिरी के तमाम दिग्गजों की फोटो भी थी, बावजूद बैनर उतारे जाने की बात किसी के गले नहीं उतरी। जिसके बाद बैनर लगाने वालों से माफी मांग 24 जून की रात में सभी पोस्टर जैसे लगे थे वैसे ही लगा दिए गए।

 

हालांकि कांग्रेस के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं पर इस मामले का काफी गंभीर असर देखा जा रहा है, इधर, बैनर उतारे जाने को लेकर बात मंत्री से लेकर संगठन के शीर्ष पदों पर बैठे लोगों तक पहुंच चुकी है।

गुटबाजी चरम पर

राज्य में कांग्रेस की सरकार है और बिना सरकार के पूर्व से ही गुटबाजी हावी रही, सरकार बनने के बाद ये ज्यादा हावी हो गयी है, विधानसभा चुनाव में काम करने वाले जिले भर के कई नेता इन दिनों हासिये पर है। ऐसे नेताओं को ना तो काम मिल रहा है और ना सम्मान, पहले जो दिनरात संघर्ष में साथ दिया करते थे अब वो सत्ता आने के बाद किनारे कर दिए गए है।

एक नेता का कहना है कि उनके पास वो हुनर नहीं है जैसा आजतक देखा जा रहा है, भाजपा सरकार थी तो वो सरकार के करीब थे कांग्रेस की सरकार है तो वो करीब है, चापलूसी उनसे होती नहीं है, इसलिए हम लोग हासिए पर है।

हर कार्यालय में नेताओं का जमावड़ा

बीते 15 साल के भाजपा के कार्यकाल के दौरान उनके नेताओं की तैनाती भाजपा कार्यालयों मे नहीं जाती थी, काम नेता करते थे परन्तु उनका जमावडा कार्यालयों में नहीं दिखता था, परन्तु आज कांग्रेस की सरकार में हर कार्यालय में एक ना एक कांग्रेस का नेता आसानी से देखा जा सकता है। बेहद छोटा जिला होने के कारण यह आम चर्चा का विषय बना हुआ है। सबसे ज्यादा परेशान ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि है। यहां भी सत्ता के चहेते कांग्रेसी ही सक्रिय है जबकि 15 साल संघर्ष करने वाले किनारे है।

नेता जी से पूछे हो

चर्चा है कि अधिकारी भी बिना नेताओं से पूछे कोई काम नहीं कर रहे है, कोई भी फाइल आने पर अधिकारी पहले यह पूछते हैं कि नेता जी से पूछे हो यदि नहीं तो जाओ और नेता जी से पूछकर आओ, फिर अधिकारी नेताजी के पास तक जाता है, उनकी अनुमति के बाद ही फाइल आगे बढ पाती है, नहीं तो हर फाइल में चर्चा करें लिखकर विकास की गति को बाधित की जा रही है।