महासमुंद के पिथौरा इलाके से मजदूरों का पलायन शुरू

श्रम मंत्री के बयान के बाद दलालों ने बदला तरीका

पिथौरा। छत्तीसगढ़ केरायपुर संभाग के महासमुंद जिले के पिथौरा क्षेत्र से प्रतिदिन लगातार हजारों मजदूरों का अन्यंत्र पलायन अब क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बन गया है। मजदूरों के पलायन से जहां मजदूर दलाल रातों रात करोड़पति बन रहे हैं। वहीं मजदूरों के साथ शोषण लगातार पूर्व की तरह ही जारी है। ज्ञात हो कि प्रदेश सरकार के श्रम मंत्री के मजदूरों के अन्यंत्र जाने पर कोई रोक नही जैसे बयान आये है।उसके बाद से पलायन की गति और भी तेज हो गई है।
प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी मजदूरों के पलायन का सिलसिला काफी तेज गति से चल रहा है। क्षेत्र के ग्राम सुने हो रहे है।वही किसानों को धान कटाई के लिए मुहमांगी मजदूरी देने पर भी मजदूर नहीं मिल रहे हैं। मजदूरों के पलायन पर प्रदेश के मंत्री को कोई एतराज नहीं है बल्कि क्षेत्र के कांग्रेस नेता इस पर संज्ञान लेते हुए प्रतिदिन प्रशासन को जानकारी दे रहे है। इसके बावजूद कोई कार्यवाही नहीं हो रही।

युवा कांग्रेस ने किया विरोध
क्षेत्र से पलायन के मुद्दे को गभीरता से लेते हुए जिला युवा कांग्रेस उपाध्यक्ष विकाश शर्मा ने जारी विज्ञप्ति में कहा है कि पिथौरा विकास खण्ड अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में मजदूर पलायन हो रहे हैं। मजदूर दलालों के द्वारा गांव गांव जैसे कुछ चिन्हाकित ग्रामों से एवम जगह देख कर जैसे लहरौद, जामपाली, पलायन के लिए व्यवस्था करते है और बसों से ले जाया जाता है मजदूरों को एडवांस की राशि ऐसे कई स्थान है जहाँ ऑफिस खोल कर खुले में पर्ची काट कर पैसा दिया जा रहा है। पिथौरा थाने के चारों दिशा में ऑफिस संचालित कर पर्ची एवम डायरी बना कर दिया जा रहा है, और पैसा देकर अन्य राज्यों मे पलायन कराने मे प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। मजदूरों को ईट भट्ठा दलालों के द्वारा काफी मात्रा मे पैसा देने का लालच देकर पलायन कराते हैं और ईट भट्ठा मालिकों के सुपुर्द कर दिया जाता है।

                             ईट भट्ठा मालिकों के द्वारा मजदूरों से जानवरों के जैसे काम लिया जाता है और यातनायें दी जाती है। आखिर इसका जिम्मेदार कौन है? उन्होंने बताया कि काम नहीं कर पाने से मजदूरों को बंधक बनाया जाता है। मजदूर दलाल मजदूर भेजकर गाढ़ी कमाई तो करते हैं परन्तु मजदूर पैसा तो दूर अपने शरीर को कमजोर बना कर वापस घरआता है। क्षेत्र मे अनेक दलालों का गिरोह सक्रिय है। शासन प्रशासन को पलायन रोकने मे आवश्यक कदम उठाने चाहिए ताकि पलायन हो रहे मजदूरों को रोका जा सके और मजदूर दलालों के खिलाफ कठोर कार्यवाही की जाये।

उल्लेखनीय है कि विगत चार पांच साल पहले पिथौरा विकास खण्ड के गांव पिथौरा की महिला मजदूर दलाल के माध्यम से उत्तर प्रदेश ईट भट्ठा कमाने गयी थी जो आज तक वापस नहीं आई।शासन प्रशासन के द्वारा् महिला को खोजने का प्रयास तो किया लेकिन सफलता नहीं मिली।

सामने पंचायत चुनाव
आगामी दो माह के बाद पंचायत चुनाव है। लोकतंत्र में पंचायत चुनाव रीढ़ की हड्डी है। पंचायत से ही गांव ब्लाक जिला प्रदेश देश की दिशा तय होती है। पंचायत मजबूत होगा तो देश मजबूत होगा। सामने पंचायत चुनाव को देखते हुए पलायन को रोकने शासन प्रशासन को कड़े कदम उठाना चाहिए।

दलालों को मोटा कमीशन
अन्य प्रांतों के ईंट भट्ठों में काम करने के लिए मजदूर भेजने वाले दलाल 2 से 3 वर्षो में ही मजदूरों की मेहनत के कमीशन से करोड़पति बन रहे हैं।जबकि मजदूर कमरतोड़ मेहनत कर धीरे-धीरे कमजोर होकर असमय वृद्ध होते जा रहे है। एक मजदूर दलाल के सूत्र ने बताया कि मजदूरों को ईंट बनाने का प्रति हजार 600 रुपये मिलते है।इसमें से 150 रुपये प्रति हजार दलाल के काट कर मजदूरों का हिसाब 450 रुपये प्रति हजार की दर से किया जाता है। इसमें से मजदूर की खुराकी, दवा एवम अन्य खर्च भी मजदूरी से काट कर मजदूरों को चन्द रुपयो के साथ वापस घर भेज दिया जाता है। परन्तु शरीर से अक्षम हो चुके मजदूर घर आकर भी कोई काम नहीं कर पाते और पुनः इंट भट्ठा दलालों के चंगुल में फंस कर उनसे अत्यधिक ब्याज दर पर कर्ज लेते हैं।जो वे कभी पटा नहीं सकते और एक बार पुनः मजबूरी में उनका पलायन तय हो जाता है।

श्रम मंत्री ने कहा था- अपराध नहीं
ज्ञात हो कि विगत दिनों प्रदेश के श्रम मंत्री ने पत्रकारों से चर्चा में कहा था कि मजदूरों का पलायन अपराध नहीं है,बल्कि उनको जबरदस्ती पलायन कराना अपराध है। इसके बाद से दलालों ने तरीका बदल कर मजदूरों को उन्हीं के बीच से एक विश्वासपात्र व्यक्ति की देखरेख में भेजा जा रहा है।