शिमला का एहसास दिलाने लगी हैं मैनपाट की वादियां

बर्फ की बिछी परत, 1 डिग्री पर पहुंचा तापमान

बैकुंठपुर|छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में स्थित मैनपाट की वादियां शिमला का एहसास दिलाने लगी हैं। विंध्य पर्वतमाला पर समुद्रतल से करीब साढ़े तीन हजार फीट की ऊंचाई पर बसे मैनपाट में उत्तर से आ रही सर्द हवाओं से ठंड के तेवर तीखे ही होते जा रहे हैं। चौबीस घंटे में तापमान में आधा डिग्री और नीचे लुढ़क गया। इसके प्रभाव से शुक्रवार को अंबिकापुर का न्यूनतम तापमान 5 डिग्री तो मैनपाट का रिकॉर्ड 1 डिग्री दर्ज किया गया।

वही कोरिया जिले के सोनहत में रात में 1.5 डिग्री तो जशपुर पंडरापाठ में भी यही हाल रहा है। सामान्य से नीचे तापमान पहुंचने से मैनपाट के साथ मैदानी व शहर से लगे इलाके में रोज पाले की मोटी परत जम रही है। मैनपाट व सामरी जैसे इलाकों में सुबह धूप निकलने तक मैदान में पाले की सफेद परत बिछी रहती है। इससे इन इलाकों का नजारा आजकल पूरी तरह से अलग दिखने लगा है। कड़ाके की ठंड से जनजीवन पर खासा असर पड़ा है। लोगों को धूप के बाद भी दिन में राहत नहीं मिल रही है।

बादल छंटने के शुक्रवार को धूप में उतनी तेज नही रही लेकिन दोपहर बाद जैसे ही हवा की रफ्तार तेज हुई, हड्‌डी को कंपकंपा देने वाली ठंड पड़नी शुरू हो गई। हवा नहीं चलने पर ही कुछ राहत मिल रही है लेकिन ऐसा कुछ समय के लिए ही हो रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा खराब है। यहां दिन का अधिकतम पारा भी 17 डिग्री के आस-पास रह रहा है। लोग शाम ढलने के बाद जरूरी काम से ही घरों से बाहर निकल रहे हैं।

बता दें कि मैनपाट छतीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में से एक है। सावन और सर्दी के में. प्रकृति की अनुपम छटाओं से परिपूर्ण मैनपाट को सावन में बादल घेरे रहते हैं, तब इस की खूबसूरती और भी बढ़ जाती है। बारिश के बाद अक्सर यहां घना कोहरा छा जाता है. ऐसे में पहाड़ की ऊंचाई से इसे देखना और भी आकर्षक होता है।

सर्दियों में यह इलाका बर्फ की सफेद चादर से ढक जाता है. मैनपाट में का़फी ठंडक रहती है, इसीलिए इसे ‘छत्तीसगढ़ का शिमला’ कहा जाता है। मैनपाट अंबिकापुर नगर, जो पूर्व सरगुजा, विश्रामपुर के नाम से भी जाना जाता है, 75 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. मैनपाट विंध्य पर्वतमाला पर स्थित है. समुद्र की सतह से इस की ऊंचाई 3,780 फुट है. मैनपाट की लंबाई 28 किलोमीटर और चौड़ाई 12 किलोमीटर है. यह बहुत ही आकर्षक स्थल है।

अम्बिकापुर से मैनपाट जाने के लिए दो रास्ते हैं पहला रास्ता अम्बिकापुर-सीतापुर रोड से होकर जाता और दुसरा ग्राम दरिमा होते हुए मैंनपाट तक जाता है। प्राकृतिक सम्पदा से भरपुर मैनपाट में सरभंजा जल प्रपात, टाईगर प्वांइट तथा मछली प्वांइट प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं। मैनपाट से ही रिहन्द एवं मांड नदी का उदगम हुआ है। मैनपाट में मेहता प्वांइट भी एक दर्शनीय स्थल है |

जशपुरनगर का पंडरापाठ का हाल
शुक्रवार शाम से ही जशपुर वासियों को कड़कड़ाती ठंड ने झकझोर कर रख दिया था। शुक्रवार रात को पंड्रापाठ क्षेत्र में तापमान एक डिग्री तक सुबह के समय देखने को मिला। पूरी रात हाड़ कंपकंपाने वाली ठंड के बाद जब लोग सुबह उठे तो जशपुर की वादियों में बर्फ की चादर बिछी हुई देखने को मिली। जिला मुख्यालय में हाउसिंग बोर्ड सहित कई स्थानों पर वाहनों के ऊपर बर्फ जमा हुआ था वहीं जिले के सबसे ठंड प्रभावित क्षेत्र पंडरा पाठ, मनोरा विकास खंड व बगीचा विकासखंड के विभिन्न क्षेत्रों पर बर्फ की चादरें बिछी हुई दिखी। जिला मुख्यालय में भी कई स्थानों पर बर्फ की चादर सुबह लोगों ने देखी। सभी स्थलों की तस्वीर सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रही है। जशपुरांचल में ठंड अपने उफान पर है और पाठ क्षेत्रों में बर्फीली चादर अब बिछने लगी है। शनिवार सुबह पाठ क्षेत्रों के खेतों सहित जंगलों में बर्फ की पतली चादर देखने को मिली। इसके साथ ही पहाड़ी क्षेत्रों में अब ठिठुरन भरी ठंड से लोगों का हाल बेहाल हो गया और विभिन्न बीमारियों का आमंत्रण भी इस ठंड के साथ होने लगा।

बलरामपुर और कोरिया में कडाके की ठंड
बदलते मौसम में बढ़ते ठंड के साथ ही अब कोरिया के पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फ की चादरें बिछने लगी हैं। तहसील सोनहत में जिससे यहां का मौसम और भी अधिक ठंडा हो गया है। पिछले दो दिनों से हो रही बारिश के बाद बादल तो छट गए, लेकिन कड़कड़ाती ठंड बादल छटते ही महसूस होने लगी है। बलरामपुर में भी ऐसा ही हाल देखा गया, शुक्रवार को ठंडक और भी अधिक बढ़ गई। जिले में दिसंबर व जनवरी माह अत्यधिक ठंड वाला समय होता है। इस बार देर से ठंड का एहसास हुआ। लेकिन हाड़ कंपकंपाने वाले इस ठंड से लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। इस बढ़ी ठंड से आम जनजीवन जहां प्रभावित हो रहा है।

फसलों को होगा नुकसान
बेतहाशा ठंड के कारण फसलों को भी खासा नुकसान हो रहा है। क्षेत्र में सब्जी के उत्पादन पर सबसे अधिक प्रभाव देखने को मिल रहा है। खासकर गोभी की फसल प्रभावित हो रही है। आने वाले सप्ताह में तापमान के और अधिक गिरने की संभावना से ही लोग डरे हुए हैं। पाठ क्षेत्रों में दमा के मरीजों की अधिकता है। जिला मुख्यालय में भी शाम और सुबह का समय लोगों के लिए काफी कठिन हो गया। शाम होते ही सड़कों पर वीरानी देखने को मिल रही है। वहीं शाम आठ बजे तक प्रमुख बाजार को बंद देखा जा रहा है।