शहीद जवानों को मुख्यमंत्री भूपेश सहित मंत्रियों,अधिकारीयों ने दी श्रद्धांजलि

नम हुई परिजनों की आँखें

धर्मेंद्र महापात्र,सुकमा | छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले के जंगल में शनिवार को हुईं सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में 17 जवान शहीद हो गए। वहीँ 14 जवान हमले में घायल हुये है जिनका इलाज रायपुर में जारी है। रविवार देर शाम 17 शहीद जवानों के शव जिला मुख्यालय सुकमा लाया गया। शव के पोस्टमार्टम के बाद आज सुबह सुकमा मुख्यालय में शहीद जवानों को श्रधांजलि दी गई। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल,आबकारी मंत्री कवासी लखमा सहित अन्य नेता श्रधांजलि देने सुकमा पहुँचे थे। हमले में 13 डीआरजी जवान थे जबकि 4 एसटीएस के जवान शहीद हो गए थे। 12 जवान डीआरजी सुकमा,1 बीजापुर के रहने वाले है,1 एसटीएस का जवान कांकेर,1रायगढ़,1जशपुर और 1 जवान बालोद का रहने वाला था।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, उद्योग मंत्री कवासी लखमा, केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ सुरक्षा सलाहकार विजय कुमार और पुलिस महानिदेशक डी. एम. अवस्थी ने आज सुकमा पुलिस लाईन में सुकमा नक्सली हमले में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सुकमा पुलिस लाईन में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देने के बाद उनके परिजनों से भी मुलाक़ात की और उन्हें इस दुःख को सहने ढांढस बंधाया। मुख्यमंत्री ने भूपेश बघेल ने नक्सलियों की इस हरकत को कायराना बताया। उन्होंने कहा कि नक्सली वारदात को अंजाम देना छोड़कर मुख्य धरा में लौटे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हमारे जवान कायर नहीं हैं वे इस हमले का मुहतोड़ जवाब भी देंगे।

बता दें कि सुकमा में शनिवार को मुठभेड़ में 17 जवान लापता हुए थे जबकि 14 जवान घायल हुये थे। घटना के दूसरे दिन 20 घंटे बाद रविवार को मीनपा के जंगल मे लापता 17 जवानों के शव मिले। वहीँ 3 जवानों के शहीद होने की देर रात ही पुष्टि हो गई थी। मुठभेड़ में नक्सली 12 एके-47 समेत 15 हथियार भी लूटकर ले गए। पुलिस को कसालपाड़ इलाके में बड़ी संख्या में नक्सलियों के जमा होने की खबर मिली थी। इसके बाद डीआरजी, एसटीएफ ओर कोबरा के 600 जवान शुक्रवार को दोरनापाल से रवाना किए गए। बताया जा रहा है कि जवान नक्सलियों को सरप्राइज एनकाउंटर में फंसाना चाह रहे थे,लेकिन नक्सलियों तक यह खबर पहले ही पहुंच गई। नक्सलियों ने रणनीति के तहत जवानों को जंगलों के अंदर तक आने दिया और उन पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है जिस नक्सली संघटन से जवानों की मुठभेड़ हुई वह कंपनी नम्बर 1 हिड़मा की थी आईजी बस्तर के अनुसार लगभग ढाई सौ नक्सली मौके पर थे। जिन्होंने घटना को अंजाम दिया। पहली बार डीआरजी को इतना बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है।

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