दुर्दांत नक्सली रमन्ना की हृदयाघात से मौत एक करोड़ 37 का था इनाम

नक्सलियों को बड़ा झटका लगने का पुलिस कर रही है दावा

जगदलपुर। पूरे बस्तर संभाग में नक्सलवाद को मजबूत करने वाला दुर्दांत नक्सली रमन्ना की हृदयाघात से मौत हो गई है.उक्त सूचना बस्तर पुलिस को सूत्रों से मिल रही है.हालांकि नक्सली संगठन के द्वारा अब तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है.लेकिन विश्वस्त सूत्र बता रहे हैं कि राउलू श्रीनिवास उर्फ़ श्रीनू नरेंद्र उर्फ़ संतोष,श्रीनिवास उर्फ़ कुंठा रमन्ना पिता रामलिंगम की हृदयाघात से मौत हो गई है और उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया है.रमन्ना पर बस्तर में कई बड़ी वारदातों को अंजाम देने का आरोप है जिसमे सबसे बड़ी घटना 2010 में हुई ताड़मेटला कांड भी शामिल है.इस हमले में सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हुये थे.इतना ही नहीं उस पर छत्तीसगढ़ सरकार ने 40 लाख का इनाम घोषित कर रखा है.इसके अलावा महाराष्ट्र,तेलंगाना,झारखंड सरकार ने भी इनाम घोषित किया हैं.रमन्ना तेलंगाना प्रदेश का रहने वाला था और बस्तर में नक्सलवाद को मजबूत करने में रमन्ना की भूमिका अहम मानी जाती है.55 वर्षीय रामन्ना बेकाल पोस्ट चेरियन तहसील माहुर जिला वारंगल तेलंगाना का रहने वाला था.सातवीं कक्षा तक पढ़े रमन्ना सन 1982 में नक्सली संगठन में शामिल हुआ. 1988 में दंडकारण्य आया 1994 में दलम सदस्या कोंटा निवासी सावित्री से विवाह किया,इन दोनों का रंजीत नाम का एक बेटा भी है.जो संगठन में शामिल होकर किस्टाराम क्षेत्र में सक्रिय है.रमन्ना को बस्तर इलाके में संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.जिसे उसने बखूबी निभाया,1982 में रमन्ना भद्राचलम दलम में सदस्य के रूप में काम कर रहा था.1985-87 में भद्राचलम का डिप्टी कमांडर बना.1998 में दक्षिण बस्तर डिवीजनल कमेटी गठन हुआ जिसका सचिव रमन्ना को बनाया गया.2003 में एसजेडसीएम,2006 में दक्षिण ब्यूरो का सचिव,अक्टूबर 2011 में डीकेएसजेडसी सचिव और 2013 में रमन्ना को केंद्रीय कमेटी का सदस्य नियुक्त किया गया.रमन्ना ने छत्तीसगढ़ के बस्तर में कई बड़ी वारदातों को अंजाम दिया,जिसमें फोर्स के जवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा रमन्ना के खिलाफ बस्तर के विभिन्न थानों में 32 से ज्यादा अपराध पंजीबद्ध हैं.ऐके 47चलाने में माहिर रमन्ना पर छत्तीसगढ़ सरकार ने 40 लाख,महाराष्ट्र सरकार ने 60 लाख,तेलंगाना सरकार ने 25 लाख और झारखंड सरकार ने 12 लाख का इनाम घोषित कर रखा है,रामन्ना की मौत के बाद संगठन को मजबूती देने के लिए और कोई बड़ा नक्सली नेता नजर नहीं आ रहा. बस्तर आईजी सुंदरराज पी का कहना है कि अब तक बस्तर के किसी भी बड़े आदिवासी नक्सली को संगठन में जगह नहीं मिली है.रमन्ना की मौत के बाद हो सकता है संगठन को आदिवासी नेतृत्व संघटन में मिले मगर पुलिस का भारी दबाव नक्सल प्रभावित क्षेत्र में है.चाहे किसी को भी की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है.मगर कोई भी पुलिस के हाथों बच नहीं सकता ,श्री सुंदरराज पी ने कहा कि रमन्ना ने बस्तर में नक्सलवाद को बढ़ावा देने के लिए काफी काम किया 30 साल से अधिक वक्त तक रमन्ना बस्तर के इलाके में तैनात है उसके मारे जाने से संगठन कमजोर होगा और उसके टूटने की काफी संभावना है.

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