आईपीएस मयंक के खिलाफ जांच के लिए और वक्त नहीं-हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ सरकार की याचिका खारिज

रायपुर। निर्धारित समय सीमा के भीतर आईपीएस अधिकारी मयंक श्रीवास्तव के विरुद्ध विभागीय जांच पूरा नहीं कर पाने के कारण छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा और समय मांगे जाने की याचिका  छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने निरस्त कर दी।  चिरमिरी निवासी आरटीआई कार्यकर्ता राजकुमार मिश्रा ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में  यह जनहित याचिका दायर की थी। आईपीएस अधिकारी मयंक श्रीवास्तव  पर विभागीय जांच इसी बात की चल रही है कि बस्तर में पुलिस अधीक्षक रहते हुए कांग्रेस के परिवर्तन यात्रा में सुरक्षा व्यवस्था में चूक की थी और छत्तीसगढ़ के दिग्गज कांग्रेसी नेता इस नक्सली हमले में मारे गए थे। बता दें कि वर्ष 2015 में छ0ग0 विधानसभा में एक प्रश्न के जबाव में छग के तात्कालिक मुख्यमंत्री रमन सिंह के द्वारा दिए लिखित  में बताया गया कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के कितने अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच चल रही है।

                            आरटीआई कार्यकर्ता राजकुमार मिश्रा ने इस तथ्यों के आधार पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका क्रमांक 85/2016 प्रस्तुत कर मांग किया था कि इन अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के विरुद्ध कई कई वर्षों से लंबित विभागीय जांच एक निश्चित समय सीमा के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया जाए। इस याचिका में तात्कालिक मुख्य सचिव श्री विवेक ढांढ के द्वारा शपथ पत्र प्रस्तुत करने के पश्चात दिनांक 17.01.2017 को इन सभी अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के विरुद्ध अधिकतम 31.12.2017 तक सभी विभागीय जांच पूर्ण करने का निर्देश दिया गया। इसी आदेश में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने आईपीएस अधिकारी मयंक श्रीवास्तव के विरुद्ध 31.07.2017 तक विभागीय जांच पूर्ण कर लेने का निर्देश दिया गया।

                                आईपीएस अधिकारी मयंक श्रीवास्तव के विरुद्ध विभागीय जांच पूरा नहीं हो सकने की स्थिति में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में एक एमसीसी याचिका क्रमांक-432/2017 प्रस्तुत कर मांग किया कि मयंक श्रीवास्तव के विरुद्ध विभागीय जांच पूर्ण करने के लिए अतिरिक्त 6 माह का समय दिया जाए। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय  ने यह याचिका स्वीकार करते हुए 6 माह का समय दे दिया। इस 6 माह के भीतर भी विभागीय जांच पूरा नहीं हो पाने के कारण राज्य सरकार फिर से एक एमसीसी याचिका क्रमांक 820/2019 प्रस्तुत की जिसे छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने निरस्त कर दिया। अब आईपीएस अधिकारी मयंक श्रीवास्तव के विरुद्ध विभागीय जांच राज्य सरकार को पूर्ण करना ही पड़ेगा।